‘‘माकपा की पोलित ब्यूरो यह मांग करती है कि भीमा कारेगांव के मामले में गिरफ़्तार सभी कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों को हटाया जाए। महाराष्ट्र सरकार को इस मामले की जांच के लिए एसटीआई का गठन करना…
इस मामले में 200 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। एआईडीडब्ल्यूए का कहना था कि पुलिस ने उनके धरना स्थल को चारों तरफ से घेर रखा था।उनके उपर लाठियां बरसाई गईं। उनकी गिरफ्तारी के लिए तैनात…
कैदी जेलों में नारकीय ज़िंदगी जीने को मज़बूर हैं। आजादी के बाद जेल सुधार के लिए कई समितियां बनीं, लेकिन इन सारी समितियों के सुझावों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।