उदारीकरण के बाद मीडिया व मध्यम वर्ग की सोच व विचार पर गौर करें तो हम पाते हैं कि मीडिया व मध्यमवर्ग, खासकर शहरी मध्यमवर्ग पूरी तरह श्रम व श्रमिक विरोधी हो गया है।
धारणाओं के खेल में बाजी उसके हाथ लगती है जिसके पास प्रचारतंत्र होता है। कहानी गढ़ने वाले होते हैं और उन गढ़ी हुई कहानियों को आधार बनाकर क़ानूनी कार्यवाहियों के अधिकार होते हैं।
न्यूज़क्लिक से ख़ास बातचीत में कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने बताया की देश के किसान की हालत दशकों से ख़राब है, उन्होंने बताया की आज पंजाब के किसान 1 लाख करोड़ के कर्ज़ में हैं | देविंदर शर्मा का…
शाहजहांपुर बॉर्डर पर किसान आंदोलन में शरीक़ महाराष्ट्र की साथी सीताबा़ई तडवी की मौत पर मोर्चे पर मौजूद किसानों की ओर से दो मिनट का मौन रख कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई।