20 जनवरी से 2 फरवरी के दौरान ट्रेड यूनियन कार्यकर्त्ता गाँव-गाँव में जाकर श्रम संहिताओं एवं नए कृषि कानूनों के भीतर की कमियों के बारे में बताते हुए प्रचार अभियान चलाएंगे।
सरकारी अधिकारी ने बताया कि आश्रय स्थल को बंद कर दिया गया है और यहां रहने वाली महिलाओं को उनके घरों में या अन्य सरकारी आश्रय स्थलों में भेज दिया गया है।
‘‘गोपनीय जानकारी लीक करना एक आपराधिक कृत्य है। सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी लीक करना राष्ट्र विरोधी कृत्य और राष्ट्रद्रोह है। इस तरह की राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की जांच ज़रूरी है।’’
90 वर्ष की आदिवासी महिला किसान झिला बाई महाराष्ट्र से शाहजहांपुर बॉर्डर आंदोलन में हिस्सा लेने 15 जनवरी को आयी थी. आखिर क्यों तय किया उन्होंने इस उम्र में इतना लम्बा सफ़र? आइये सुनते हैं