अपनी सभी कोशिशें महामारी से निपटने में लगाने के वायदे के बावजूद, तमाम देशों में सरकारों ने जनआंदोलनों और असहमति की आवाज पर लॉकडाउन के बहाने अपना दमन तेज़ किया है।
मज़दूर और कलाकारों की एकता कायम कर, सफ़दर नाटक और गीतों के माध्यम से समाज के शोषित और वंचितों की आवाज़ बने। सफ़दर के साथ और उनके बाद भी जिन्होंने नुक्कड़ नाटक को जारी रखा हमने उनसे बात की और समझने की…
जब हम पुराने कोरोना वायरस से नहीं डरे, तो नए से क्या डरेंगे। हमें तो बस इंतज़ार है कि साहेब ताली-थाली बजाने जैसा कोई नया टास्क दें तो नए साल में मज़ा आ जाए।
शुरू में उस नूंह ज़िले के मुसलमान समर्थन में आने से हिचकिचा रहे थे,जहां पहलू ख़ान की लिंचिंग की गयी थी। एक किसान नेता ने बताया,‘एक बार जैसे ही उनका विश्वास बहाल हो गया, उन्होंने वादा किया कि वे बड़ी…