देश के डेमोक्रेसी के सत्तर वर्ष के इतिहास में इतना अधिक लोकतंत्र कभी नहीं रहा जितना इस समय है। इससे पहले देश ने इतना अधिक लोकतंत्र इमरजेंसी के समय में ही सहा था।
जयदयाल जी विचार से मार्क्सवादी थे लेकिन आपने महाभारत विषय में पीएचडी की और गीता और रामायण का भी गहन अध्ययन किया। आपने भारत की पौराणिक कथाओं का भी वैज्ञानिक विश्लेषण किया।
’80 – 90 दशक में जुझारू क्रांतिकारी जनमोर्चा इंडियन पीपुल्स फ्रंट के नेतृत्वकारी साथियों में त्रिदिव घोष जी की एक विशिष्ट पहचान रही है। कोरोना संक्रमण से ठीक होने के उपरांत भी 15 दिसंबर को वे हमसे…
'हफ़्ते की बात' के इस एपिसोड में तीन खास खबरों की पड़ताल और विश्लेषण: 1.भारत में कोरोना संक्रमित लोगो की संख्या 1 करोड़ पार कर गयी, 2. किसानों के शांतिपूर्ण आंदोलन का 24 वां दिन और 3. हाथरस गैंगरेप-…