NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
अर्थव्यवस्था
पिछले तीन सालों में दिहाड़ी 50 रुपये नहीं बढ़ी, जबकि महंगाई आसमान छू गयी    
देश में 30 करोड़ से भी ज्यादा ग्रामीण कामगार कृषि और गैर कृषि पेशों से जुड़े हुए हैं। जिनकी दिहाड़ी में पिछले तीन सालों में मामूली सी बढ़ोतरी हुई है, जबकि महंगाई आसमान छू रही है।  
पुलकित कुमार शर्मा
10 Apr 2022
worker

देश में महंगाई से हाहाकार मचा हुआ है। डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस, दवाइयां और दैनिक उपभोग से जुड़ी वस्तुओं पर महंगाई इतनी तेजी से बढ़ रही है कि उनको खरीद पाना आम आदमी के लिए मुश्किल होता जा रहा है। दरअसल महंगाई पिछले कुछ सालों से ज़्यादा तेज रफ़्तार से बढ़ रही है। जबकि इस दौरान आम आदमी की आमदनी रत्ती बराबर भी नहीं बढ़ी है।

महंगाई के कारणों की बात करें तो कारण साफ है कि सरकार ने उद्योगपतियों को मुनाफाखोरी की पूरी छूट दी है। खुद भी टैक्स के जरिय आम आदमी की जेब से अच्छी खासी वसूली कर रही है। जिसके चलते हर सामान के उत्पादन में इनपुट लागत बढ़ गयी है। जिसके कारण महंगाई जैसे हालात बने हुए हैं। जबकि सरकार को उद्योगपतियों के मुनाफे को नियंत्रत करके और अपनी टैक्स प्रणाली को समय के अनुसार सरल बनाकर जनता को राहत देने का काम करना चाहिए। जिससे इतने गंभीर हालात उत्पन्न न हो, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार ने महंगाई का पूरा बोझ आम जनता के ऊपर छोड़ दिया है।

इस लेख में महंगाई के कारणों पर ज़्यादा बात न करते हुए ग्रामीण इलाकों में आम आदमी पर बढ़ रहे महंगाई के बोझ के बारे में बात करेंगे। देश की कुल आबादी का बड़ा हिस्सा ग्रामीण इलाकों में रहता है। 30 करोड़ से भी ज्यादा लोग कृषि और गैर कृषि पेशो से जुड़े हुए हैं। जिनकी आमदनी में इतनी बढ़ोतरी नहीं हुई है, जितना कि पिछले कुछ सालों में महंगाई बढ़ गयी है।  

कृषि से जुड़े, जुताई, बुवाई, निराई, फसल काटने वाले, पिकिंग कामगार(चाय, कपास, तंबाकू और अन्य ), बागवानी, मछुआरे, लकड़हारा, पशुपालन, पैकेजिंग, कृषि सिंचाई और पौध संरक्षण से जुड़े कामगारों की दिहाड़ी में पिछले तीन सालों में औसतन 48 रुपए की बढ़ोतरी हुई है।  जनवरी 2019 में पुरुष कामगारो की औसतन मजदूरी 301 रुपये थी जो कि जनवरी 2022 में बढ़कर 349 रुपये हो गयी है यानी पिछले तीन सालों में कृषि क्षेत्र से जुड़े पुरुष कामगारो की मजदूरी में मात्र 48 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।  

वही महिला कामगारो की मजदूरी जनवरी 2019 में 216 रुपये थी जो कि जनवरी 2022 में बढ़कर 250 रुपये हो गयी है।  यानी पिछले तीन सालों में कृषि क्षेत्र से जुडी महिला कामगारो की मजदूरी में मात्र 34 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।  जैसा की निचे चित्र में दिखाया गया है.

वही गैर-कृषि पेशो से जुड़े, बढ़ई, लोहार, राजमिस्त्री, बुनकरों, बीड़ी बनाने वाले, बांस की टोकरी बुनकर, हस्तशिल्प, प्लंबर, बिजली मिस्त्री, निर्माण श्रमिक (सड़कों, बांधों, औद्योगिक और परियोजना निर्माण कार्य और कुएं की खुदाई), ट्रैक्टर चालक, गैर-कृषि मजदूर (कुली, लोडर सहित) और सफाई कर्मी कामगारों की मजदूरी की बात करें तो पुरुष कामगारों की औसत मजदूरी जनवरी 2019 में 347 रुपये थी जो कि जनवरी 2022 में बढ़कर 394 रुपये हो गयी है, यानी पिछले तीन सालों में गैर-कृषि पेशो से जुड़े पुरुष कामगारों की औसत मजदूरी में मात्र 47 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।  

जबकि महिलाओं कामगारों की औसत मजदूरी जनवरी 2019 में 228 रुपये थी जोकि जनवरी 2022 में बढ़कर 256 रुपये हो गयी है, यानी पिछले तीन सालों में महिलाओं कामगारों की मजदूरी में औसत वृद्धि मात्र 28 रुपये हुई है। जैसा की निचे चित्र में दिखाया गया है।

 

आंकड़ों से साफ हो जाता है कि ग्रामीण इलाकों में कृषि और गैर-कृषि पेशों से जुड़े लोगों की आमदनी में पिछले कुछ सालों में बहुत ही मामूली सी वृद्धि हुई है. जबकि इस दौरान महंगाई काफ़ी तेजी से बढ़ी है. जिसके चलते आम आदमी की हालत काफ़ी गंभीर होती जा रही है। आमदनी के हिसाब से इतना अतिरिक्त बोझ उठाना जनता के लिए काफी मुश्किल होता जा रहा है।

अगर हम पिछले तीन सालों में हुई महंगाई की बात करें तो पता चलता है कि इस दौरान महंगाई करीब-करीब दो गुना बढ़ चुकी है। जैसे जनवरी 2019 में पेट्रोल के दाम 74 रुपये थे जो कि आज की तारिख में 120 रुपये से भी ज्यादा हो गए है।  यानी मात्र चार सालो में पेट्रोल के दामों में 60 फ़ीसदी से भी ज़्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है।  वही रसोई गैस के दाम जनवरी 2019 में 630 रुपये थे जो कि मार्च 2022 में बढ़कर 950 से भी ऊपर पहुंच गए है।  

वही खाद्य सामग्रियों में भी अप्रैल के महीने में महंगाई बहुत तेजी से बढ़ी है। तकरीबन सभी सब्जियां और फ़ल बहुत महगें हो गए है। नीम्बू 400 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है, मिर्ची 100 रुपये प्रति किलो और धनिया 200 रुपये प्रति किलो से ऊपर बिक रहा है।  

बड़ा और मुख्य मुद्दा, पेट्रोल और डीजल के दाम, रसोई गैस के दाम, सेवाओं और मेनुफेक्चरिंग उत्पाद के दाम है।  ऐसा लगता है कि इन उत्पादों के दाम स्थाई हो चुके हैं जो सिर्फ ऊपर की और बढ़ रहे है।  इससे आम आदमी सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। ये जिस दर से बढ़ रहे हैं ,लोगों की आमदनी उसकी आधी दर से भी नहीं बढ़ी है। इसलिए सरकार को हालातों को नियंत्रित करने की तरफ ध्यान देना चाहिए, न की सारा बोझ जनता के ऊपर लाद देना चाहिए। 
 

rural worker
female worker
Inflation
male workers
inflation and wage
inflation and rural wage

Related Stories

ज़रूरी है दलित आदिवासी मज़दूरों के हालात पर भी ग़ौर करना

मई दिवस: मज़दूर—किसान एकता का संदेश

ग्राउंड रिपोर्टः डीज़ल-पेट्रोल की महंगी डोज से मुश्किल में पूर्वांचल के किसानों की ज़िंदगी

दिल्ली: बढ़ती महंगाई के ख़िलाफ़ मज़दूर, महिला, छात्र, नौजवान, शिक्षक, रंगकर्मी एंव प्रोफेशनल ने निकाली साईकिल रैली

कोरोना लॉकडाउन: लगातार दूसरे साल भी महामारी की मार झेल रहे किसान!

ग्रामीण भारत में कोरोना-11 : इरेंगबंद में भूमिहीन और श्रमिक सबसे ज़्यादा प्रभावित

बड़े ख़तरों से घिरे छोटे किसान  

पिछले 25 सालों में मोदी काल में हुई कामगारों की संख्या में भारी गिरावट


बाकी खबरें

  • बिहारः अब मेयर-डिप्टी मेयर को सीधे चुनेगी जनता, नीतीश कैबिनेट ने दी मंज़ूरी
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः अब मेयर-डिप्टी मेयर को सीधे चुनेगी जनता, नीतीश कैबिनेट ने दी मंज़ूरी
    16 Mar 2022
    अभी तक जनता वार्ड पार्षद को ही चुनती थी और चुने हुए वार्ड पार्षद अपने बीच से मुख्य पार्षद से लेकर मेयर तक चुनते थे लेकिन अब जनता सीधे मेयर-डिप्टी मेयर, मुख्य पार्षद व उप मुख्य पार्षद का चुनाव करेगी।
  • Aijaz ahmed
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    एजाज़ अहमद ने मार्क्सवाद के प्रति आस्था कभी नहीं छोड़ी
    16 Mar 2022
    विश्वप्रसिद्ध मार्क्सवादी चिंतक व साहित्यिक विचारक एजाज़ अहमद की श्रद्धाजंलि सभा का आयोजन पटना के अदालतगंज स्थित केदारभवन में किया गया। श्रद्धाजंलि सभा में शहर के बुद्धिजीवी, रँगकर्मी, साहित्यकार,…
  • G-23
    कृष्ण सिंह
    कांग्रेस बनाम कांग्रेस : जी-23 की पॉलिटिक्स क्या है!
    16 Mar 2022
    प्रश्न सिर्फ कांग्रेस नेतृत्व और उसकी कार्यशैली का नहीं है बल्कि उसके उन तमाम नेताओं की वैचारिक प्रतिबद्धता का भी है जिन्होंने लंबे समय तक सत्ता का सुख भोगा है।
  • HIJAB
    नाइश हसन
    हिजाब मामले पर कोर्ट का फ़ैसला, मुस्लिम महिलाओं के साथ ज़्यादतियों को देगा बढ़ावा
    16 Mar 2022
    इस फ़ैसले के असरात काफी गंभीर हो सकते हैं, हिंदू कट्टर पंथी ताकतों को और बढ़ावा मिलेगा, जिस काम के लिए नौजवान लड़कों का इस्तेमाल किया गया उन्हें भगवा गमछा पहनाया गया, यह काम वह देश में सभी जगह…
  • सत्यम् तिवारी
    वाद-विवाद; विनोद कुमार शुक्ल : "मुझे अब तक मालूम नहीं हुआ था, कि मैं ठगा जा रहा हूँ"
    16 Mar 2022
    लेखक-प्रकाशक की अनबन, किताबों में प्रूफ़ की ग़लतियाँ, प्रकाशकों की मनमानी; ये बातें हिंदी साहित्य के लिए नई नहीं हैं। मगर पिछले 10 दिनों में जो घटनाएं सामने आई हैं
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License