NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
पर्यावरण
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
क्या अमेजॉन का जंगल अब कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने लायक़ नहीं रहा?
वनों की कटाई के साथ-साथ वनों में आयी गिरावट, शुष्क होती जलवायु और बड़े पैमाने पर आग लगने की घटनाओं के चलते कार्बन को अवशोषित करने के लिए मशहूर रहे अमेज़ॉन के इस जंगल के सामने ख़तरा पैदा हो गया है।
संदीपन तालुकदार
19 Jul 2021
क्या अमेजॉन का जंगल अब कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने लायक़ नहीं रहा?
फ़ोटो साभार: शटरस्टॉक

पौधे पर्यावरण से कार्बन डाइऑक्साइड की सफ़ाई करते हैं। इसे प्रकाश संश्लेषण के लिए अवशोषित कर लेते हैं। पौधों को 'धरती पर कार्बन का एक अवशोषक' माना जाता है और ऐसा अनुमान है कि इन पेड़ों ने 1960 के दशक से जीवाश्म ईंधन के उत्सर्जन का तक़रीबन 25% अवशोषित कर लिया है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग को काफ़ी हद तक संतुलित करने में मदद मिली है।

उष्णकटिबंधीय वन धरती पर कार्बन के अवशोषक के सबसे बड़े घटक रहे हैं। चूंकी अमेजॉन का जंगल इस समय का सबसे बड़ा उष्णकटिबंधीय जंगल है,इसलिए बतौर कार्बन अवशोषक इसका योगदान बहुत बड़ा है।

एक ताज़े शोध में पाया गया है कि अमेज़ॉन के जंगलों के हालात चिंता पैदा करने वाली होती जा रही है। पर्यावरण से जुड़ी मशहूर पत्रिका, ‘नेचर’ में 14 जुलाई को प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि पश्चिमी अमेज़ॉन पहले के मुक़ाबले कार्बन की कम मात्रा को अवशोषित कर पा रहा है। हालांकि, ज़्यादा चिंता पैदा करने वाली हक़ीक़त तो यह है कि पूर्वी अमेज़ोन में वनों की कटाई और वार्मिंग ने इसकी कार्बन को अवशोषित करने की क्षमता को कम कर दिया है, या फिर यहां तक कि इस जंगल द्वारा कार्बन को ग्रहण करने की स्थिति को उलट दिया है। इस अध्ययन की अगुवाई ब्राजिल स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ स्पेश रिसर्च के जेनरल कॉर्डिनेशन ऑफ़ अर्थ साइंस की सलूसियाना वी. गट्टी ने की है।

दशकों से अमेज़ॉन के जंगलों में कार्बन जमा हो रहा है। हालांकि,वनों की कटाई के साथ-साथ वनों में आयी गिरावट, शुष्क होती जलवायु और बड़े पैमाने पर लगते आग की घटनाओं के चलते कार्बन को अवशोषित करने वाले अमेज़ॉन के इस जंगल के सामने ख़तरा पैदा हो गया है। हालांकि, ये अध्ययन बताते हैं कि अमेजॉन के इन जंगलों की कार्बन को अवशोषित करने की क्षमता को कम करने में मानवीय योगदान रहा है। लेकिन सीधे-सीधे आकलन कर पाना एक मुश्किल काम है कि अमेज़ॉन पारिस्थितिक तंत्र के स्थानीय कार्बन संतुलन (कार्बन संतुलन पारिस्थितिक तंत्र द्वारा वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण और वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन के बीच का अंतर को कहते हैं) किस स्थिति में है। ये जंगल अभी भी दुनिया का सबसे बड़ा दुर्गम क्षेत्र है, जहां पहुंच पाना मुश्किल होता है। एक अन्य पहलू यह है कि अमेज़ॉन के जंगलों में पारिस्थितिक तंत्र की एक व्यापक विविधता है और ऐसे में स्थानीय रूप से उपलब्ध डेटा को इस पूरे क्षेत्र के लिए इस्तेमाल कर पाना मुश्किल है।

पहले के शोध में उपग्रहों से लिये गये चित्र से पता चला है कि अमेज़ॉन के जंगलों का कार्बन संतुलन सुखाड़ और आग के प्रति बहुत संवेदनशील है। इसके अलावे यह क्षेत्र लगातार बादलों से ढका रहता है, जो इस तरह के डेटा के संग्रह के काम को और जटिल बना देता है।

गट्टी और उनके सहयोगियों ने नौ साल की अवधि के लिए अमेज़न के चार क्षेत्रों के वातावरण को मापा है। उन्होंने सतह के नज़दीक और उन सभी क्षेत्रों में तक़रीबन  4.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक की हवा के नमूने को एकत्र करने के लिए विमानों का इस्तेमाल किया,जिनकी उन्होंने जांच-पड़ताल की थी। इन नमूनों का विश्लेषण करते हुए शोधकर्ताओं ने विभिन्न गैसों की सांद्रता का एक ऊर्ध्वाधर प्रोफ़ाइल(Vertical Profile) तैयार किया, जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड शामिल थे। उन्होंने हर एक क्षेत्र में महीने में दो बार 590 ऐसे उर्ध्वाधर प्रोफ़ाइल तैयार किये।

गट्टी की टीम ने गैसों की इस सांद्रता की पृष्ठभूमि को स्थिर करने के लिए दक्षिण अटलांटिक महासागर के आसपास के कई दूर स्थित द्वीपों के डेटा का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने ऐसा इसलिए किया,ताकि इन पृष्ठभूमि क्षेत्रों और अमेज़ॉन के चार क्षेत्रों के बीच कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड के स्थानिक सांद्रता के अंतर की गणना की जा सके। उन्होंने इन क्षेत्रों में कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड की सांद्रता के भिन्नताओं के स्थानिक स्वरूप को निर्धारित करने के लिए विभिन्न मौसमों और से जुटाये गये डेटा का विश्लेषण किया। और अंत में इस टीम ने आकलन किया कि क्षेत्रीय कार्बन प्रवाह जंगलों के विकास और क्षरण के साथ-साथ आग से होने वाले कार्बन उत्सर्जन से जुड़ा हुआ है।

अध्ययन की इस अवधि में उत्तर-पश्चिमी अमेज़ॉन क्षेत्र में कार्बन संतुलन पाया गया, यानी कि पौधों द्वारा कार्बन के ग्रहण और कार्बन का उत्सर्जन बराबर था। इस इलाक़े में नमीं हमेंशा बनी रहती है।

हालांकि, शोधकर्ताओं को पूर्वी और दक्षिणी अमेज़ॉन को जोड़ने वाला एक कारक मिला। इस क्षेत्र में अमेज़ॉन के उत्तर-पश्चिमी भाग के उलट हर समय नमी नहीं रहती है, इनमें समय-समय पर शुष्क मौसम भी होते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि शुष्क मौसम (जब वर्षा एक महीने में 100 मिलीमीटर से कम होती है) लगातार लम्बा होता जाता है, कुछ मामलों में तो पांच महीने से ज़्यादा समय तक चलता है, क्योंकि यह जंगल सवाना में बदल जाता है। नमी के मौसम के दौरान अमेज़ॉन के उत्तरपूर्वी और दक्षिणपूर्वी हिस्से कार्बन संतुलन के आस-पास रहते हैं, लेकिन सूखे के दौरान कार्बन संतुलन की स्थिति कार्बन के अवशोषण के बनिस्पत कार्बन उत्सर्जन की ओर ज़्यादा स्थानांतरित हो जाती है। इस अध्ययन की अवधि के दौरान वार्षिक आंकड़ों में यही प्रवृत्ति पायी गयी।

शुष्क मौसम के दौरान पूर्वी अमेज़ॅन के जंगलों का कार्बन के अवशोषक से कार्बन के उत्सर्जक में बदल जाने की घटना सही मायने में ज़बरदस्त क्षेत्रीय वार्मिंग से जुड़ी हुई है। पिछले 40 सालों में पूर्वी अमेज़ॉन क्षेत्र प्रति दशक लगभग 0.6 डिग्री सेल्सियस गर्म हुआ है। चिंता की बात यह है कि यह दर ग्लोबल वार्मिंग की दर से तीन गुना ज़्यादा है। गट्टी और उनकी टीम का निष्कर्ष था कि संभव है मानव गतिविधियों के कारण हुए वनों के क्षरण के साथ-साथ वनों में आयी गिरावट के बढ़ने से पूर्वी अमेज़ॅन में शुष्क अवधि की वार्मिंग दर में तेज़ी आयी हो।

शोधकर्ताओं ने वायुमंडलीय गैसों के बड़े पैमाने पर सांद्रता के ढलान को सीधे-सीधे मापने के आधार पर कार्बन अवशोषक से कार्बन उत्सर्जक में बदल जाने की इस तेज़ी को दर्ज किया था। वनों की कटाई, लंबी और गर्म शुष्क अवधि, शुष्कता का दबाव और लगातार लगती आग की घटनाओं ने इसके कार्बन अवशोषण की विशेषता को गंभीर रूप से खतरे में डाल दिया है, जिसका नतीजा उष्णकटिबंधीय वनों द्वारा आने वाले दिनों में कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषित नहीं किये जाने के रूप में सामने आ सकता है।

यह नयी खोज जलवायु परिवर्तन और वनों की कटाई पर हो रहे अनुसंधान के लिए बेहद उपयोगी है। भले ही उत्सर्जन में वृद्धि हुई हो, लेकिन दशकों से भूमि के पारिस्थितिक तंत्र द्वारा जीवाश्म-ईंधन उत्सर्जन का अवशोषण तक़रीबन स्थिर रहा है। पौधों के बढ़ाने वाले मौसम के लंबा होते जाने के चलते उच्च अक्षांश वाले वन कार्बन जमा कर रहे हैं, जिसका नतीजा जलवायु परिवर्तन के रूप में सामने आ रहा है। पोषक तत्वों (जैसे कि प्रकाश संश्लेषण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड) में बढ़ोत्तरी होने के चलते मध्य अक्षांश के जंगलों में भी इसी तरह की प्रवृत्ति देखी जा रही है।

इसके उलट, जैसा कि गट्टी की टीम के काम में उदाहरण दिया गया है कि उष्णकटिबंधीय जंगलों की क्षेत्रीय रूपरेखा यह दर्शाती है कि वनों की कटाई, वनों के क्षरण और बढ़ती गर्मी से कार्बन के अवशोषण के सामने बहुत बड़ा ख़तरा पैदा हो गया है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Is the Amazonian Forest No More a Sink for Carbon Dioxide?

Amazon Forest
climate change
Tropical Rainforest
Amazonian Carbon Sink
Land Carbon Sink
Carbon Sink Threatened
Deforestation

Related Stories

गर्म लहर से भारत में जच्चा-बच्चा की सेहत पर खतरा

मज़दूर वर्ग को सनस्ट्रोक से बचाएं

लू का कहर: विशेषज्ञों ने कहा झुलसाती गर्मी से निबटने की योजनाओं पर अमल करे सरकार

जलवायु परिवर्तन : हम मुनाफ़े के लिए ज़िंदगी कुर्बान कर रहे हैं

लगातार गर्म होते ग्रह में, हथियारों पर पैसा ख़र्च किया जा रहा है: 18वाँ न्यूज़लेटर  (2022)

‘जलवायु परिवर्तन’ के चलते दुनियाभर में बढ़ रही प्रचंड गर्मी, भारत में भी बढ़ेगा तापमान

दुनिया भर की: गर्मी व सूखे से मचेगा हाहाकार

जलविद्युत बांध जलवायु संकट का हल नहीं होने के 10 कारण 

संयुक्त राष्ट्र के IPCC ने जलवायु परिवर्तन आपदा को टालने के लिए, अब तक के सबसे कड़े कदमों को उठाने का किया आह्वान 

आईपीसीसी: 2030 तक दुनिया को उत्सर्जन को कम करना होगा


बाकी खबरें

  • sever
    रवि शंकर दुबे
    यूपी: सफ़ाईकर्मियों की मौत का ज़िम्मेदार कौन? पिछले तीन साल में 54 मौतें
    06 Apr 2022
    आधुनिकता के इस दौर में, सख़्त क़ानून के बावजूद आज भी सीवर सफ़ाई के लिए एक मज़दूर ही सीवर में उतरता है। कई बार इसका ख़ामियाज़ा उसे अपनी मौत से चुकाना पड़ता है।
  • सोनिया यादव
    इतनी औरतों की जान लेने वाला दहेज, नर्सिंग की किताब में फायदेमंद कैसे हो सकता है?
    06 Apr 2022
    हमारे देश में दहेज लेना या देना कानूनन अपराध है, बावजूद इसके दहेज के लिए हिंसा के मामले हमारे देश में कम नहीं हैं। लालच में अंधे लोग कई बार शोषण-उत्पीड़न से आगे बढ़कर लड़की की जान तक ले लेते हैं।
  • पटनाः डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ ऑटो चालकों की हड़ताल
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पटनाः डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ ऑटो चालकों की हड़ताल
    06 Apr 2022
    डीजल और पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के बाद ऑटो चालकों ने दो दिनों की हड़ताल शुरु कर दी है। वे बिहार सरकार से फिलहाल प्रतिबंध हटाने की मांग कर रहे हैं।
  • medicine
    ऋचा चिंतन
    दवा के दामों में वृद्धि लोगों को बुरी तरह आहत करेगी – दवा मूल्य निर्धारण एवं उत्पादन नीति को पुनर्निर्देशित करने की आवश्यता है
    06 Apr 2022
    आवश्यक दवाओं के अधिकतम मूल्य में 10.8% की वृद्धि आम लोगों पर प्रतिकूल असर डालेगी। कार्यकर्ताओं ने इन बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने और सार्वजनिक क्षेत्र के दवा उद्योग को सुदृढ़ बनाने और एक तर्कसंगत मूल्य…
  • wildfire
    स्टुअर्ट ब्राउन
    आईपीसीसी: 2030 तक दुनिया को उत्सर्जन को कम करना होगा
    06 Apr 2022
    संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम जलवायु रिपोर्ट कहती है कि यदि​ ​हम​​ विनाशकारी ग्लोबल वार्मिंग को टालना चाहते हैं, तो हमें स्थायी रूप से कम कार्बन का उत्सर्जन करने वाले ऊर्जा-विकल्पों की तरफ तेजी से बढ़ना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License