NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
इस साल के शांति दूत : डेनिस मुकवेज और नादिया मुराद
डेनिस मुकवेज को रिपब्लिक ऑफ़ कांगों में उनके सर्जिकल कौशल के लिए ‘जादुई डॉक्टर’ के नाम से पुकारा जाता है, जबकि 25 साल की नादिया यजीदी समुदाय के अधिकारों के लिए ‘आवर पीपल’ नामक संगठन बनाकर लड़ रही हैं।
अजय कुमार
06 Oct 2018
नादिया मुराद और डेनिस मुकवेज
फोटो साभार : गूगल

दो देशों के बीच युद्ध की असली दोषी सरकारें होती हैं लेकिन किसी देश में  गृह युद्ध  का दोषी पूरा  देश और विश्व समुदाय होता है। गृह युद्ध के हालात में सबसे अधिक बुरा बर्ताव समाज के सबसे दबे-कुचले वर्ग के साथ होता है। यानी गृह युद्ध का माहौल दुनिया के किसी भी हिस्से में हो, सबसे बुरा बर्ताव वहां की महिलाओं को झेलना पड़ता है। महिलाओं  के साथ दुर्व्यवहार से लेकर दुष्कर्म की घटनाएँ आम हो जाती हैं। पूरी दुनिया में गृह युद्ध के कारणों और निवारणों  पर चर्चा  होती है लेकिन उन हालात पर खुलकर कोई बात नहीं करता जो गृह युद्ध के माहौल में समाज के दबे-कुचले वर्ग को सहना पड़ता है।  यह सारी अमानवीय परेशानियाँ गृह युद्ध के नेपथ्य में रह जाती हैं।  

नेपथ्य या परदे के पीछे के इस दर्दनाक रवैये में कुछ लोग मरहम की तरह काम करते हैं और पूरी दुनिया को अपने जीवन और काम से अचम्भित कर देते हैं कि एक उजड़ते हुए समाज में अकेले वैसा काम किया जा सकता है, जिसपर मानवता फख्र करे। इस बार यानी साल 2018 का शांति का नोबेल पुरस्कार भी  इसी की नुमाइंदगी करता है।  इस बार का शांति का नोबेल पुरस्कार डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो में यौन हिंसा से जूझ रही महिलाओं के  इलाज में लगे डॉक्टर डेनिस मुकवेज और इराक में यजीदी समुदाय के अधिकारों के लिए लड़ रही कार्यकर्ता नादिया मुराद को देने की घोषणा की गई है।

साल 1990 से डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो में गृह युद्ध का माहौल जारी  है। अभी तक इस युद्ध में तकरीबन 60 लाख से अधिक लोग मर चुके हैं।  नोबेल कमेटी ने डेनिस मुकवेज  के परिचय में कहा कि मुकवेज  केवल कांगों के गृह युद्ध  में हो रही यौन हिंसा से जूझने के ही प्रतीक नहीं हैं, बल्कि पूरे विश्व समुदाय को यौन हिंसा के खिलाफ एकजुट करने के प्रतीक  हैं।  मुकवेज  कांगों शहर के पूर्वी हिस्से में पांजी अस्पताल चलाते हैं और इस अस्पताल के प्रमुख हैं। यह अस्पताल  कांगों के गृह युद्ध में यौन हिंसा का शिकार हुई हजारों महिलाओं के  इलाज से लेकर सर्जरी करने में सहयोग करती है।  मुकवेज  कांगों के पहले ऐसे नागरिक हैं, जिन्हें नोबेल का शांति पुरस्कार दिया जा रहा है।

साल 2014 में दिए गए एक इंटरव्यू में मुकवेज  कहते हैं ‘मैं अपने रोजाना के कामों में हमेशा उन महिलाओं से मिलता हूँ जिनका यौन हिंसा की वजह से  जीवन और शरीर बर्बाद हो चुका होता है, जिनके साथ बंदूक की नोक पर बलात्कार किया गया होता है, जिनके वैजिएना को गोलियों से घायल कर दिया गया होता है, यह बहुत ही भयानक दृश्य होता है, यह पूरी तरह से मर्दाना शक्ति का घिनौना रूप होता है, जो किसी भी तरह के माहौल में औरत को अपनी जागीर मानता है, मैंने उन औरतों को भी देखा है, जिनकी उम्र 30 साल की होती है लेकिन लगातार बलात्कार होते रहने की वजह से जिनका  वजन 25 से 30 किलो ही  होता है।  इन सभी को पहली बार देखकर ऐसा लगता है कि ये सभी अस्पताल में मरने के लिए आयी हैं लेकिन जैसे- जैसे इनके जीवन के हालात में सुधार होता है तो ऐसा लगता है जैसे इनका फिर से जन्म हो रहा है। यह देखकर मुझे मेरे काम में ख़ुशी और उम्मीद की किरण दिखती है।” 

इराक की तरफ से पहली बार नोबेल पुरस्कार पाने वाली  नदिया मुराद का जीवन संघर्ष जितना दर्दनाक है उतना ही प्रेरणादायी भी है।  एक ऐसी महिला जो इराक में अल्पसंख्यक समुदाय यजीदी से सम्बन्ध रखती है, जिसका शुरूआती जीवन उत्तरी इराक के पहाड़ी इलाकों के एक खुशहाल गाँव में बीता है, जो भविष्य में शिक्षिका बनने का सपना संजोती है, जिसके  गाँव पर एक दिन चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) का हमला होता है, उनके गाँव को तहस-नहस कर दिया जाता है और उन्हें आईएस यौन दासी बना लेता है। उनके साथ तीन महीने तक  कई बार बलात्कार होता है, लेकिन एक दिन मौका मिलने पर वह आईएस के चंगुल से भाग निकलती हैं।  इसके बाद बड़ी बहादुरी के साथ दुनिया का सामना करती है, बड़ी हिम्मत के साथ वे इस्लामिक स्टेट के द्वारा अपने ऊपर की गई क्रूरता से दुनिया को परिचित करवाती हैं। अपने साथ हुई बर्बरता पर ‘द लास्ट गर्ल’ नाम से  किताब लिखती हैं। अपनी बची जिन्दगी यजीदी समुदाय के अधिकारों और यौन हिंसा के खिलाफ लड़ी जा रही लड़ाई में लगा देती हैं और पूरे विश्व समुदाय में अपने किताब के नाम पर ‘द लास्ट गर्ल’ का नारा देती है जिसका मकसद होता है कि जो बदसलूकी नदिया मुराद के साथ हुई वह बदसलूकी दुनिया में फिर से किसी के साथ न हो। 

तो कुछ इस तरह की दास्तां है इन दोनों शांति दूतों की। 63 साल के  डेनिस मुकवेज  को रिपब्लिक ऑफ़ कांगों में  उनके सर्जिकल कौशल के लिए ‘जादुई डॉक्टर’ के नाम से पुकारा जाता है। इनके कामों पर ‘मैन हु मेंड्स वीमेन’ नाम से  फिल्म भी बन चुकी है। मौजूदा समय में  युद्धों में होने वाली यौन हिंसा के खिलाफ मुखर होकर बोलते हैं। उधर 25 साल की नादिया यजीदी समुदाय के अधिकारों के लिए ‘आवर पीपल’ नामक संगठन बनाकर लड़ रही हैं और अपनी भावी  जिन्दगी की बारें में कहती हैं ‘मैं अपनी समान्य जिन्दगी में वापस तभी लौट पाऊँगी, जब इस्लामिक स्टेट के पास कैद महिलायें आजाद हो जायेंगी, जब मेरे समुदाय को न्याय मिल जाएगा और दोषियों को सजा दे दी जाएगी।’

Denis mukwege
Nadia Murad
yazidi rights
Congo doctor
isis survivor lady
nobel Peace prize 2018
the last girl

Related Stories


बाकी खबरें

  • maha covid
    अमेय तिरोदकर
    कोविड-19 मामलों की संख्या में आये भारी उछाल से महाराष्ट्र के कमजोर तबकों को एक और लॉकडाउन का डर सताने लगा है!
    04 Jan 2022
    दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों को अपनी आजीविका के नुकसान का डर फिर से सताने लगा है। पिछले दो लॉकडाउन के दौरान वे ही इससे सबसे अधिक बुरी तरह से प्रभावित हुए थे। 
  • SAFDAR
    रवि शंकर दुबे
    सफ़दर: आज है 'हल्ला बोल' को पूरा करने का दिन
    04 Jan 2022
    सफ़दर की याद में मज़दूरों और कलाकारों का साझा कार्यक्रम- क्योंकि सफ़दर के विचार आज भी ज़िंदा हैं...
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट : देश में 24 घंटों में 37,379 नए मामले, ओमीक्रॉन के मामले बढ़कर 1,892 हुए 
    04 Jan 2022
    देश में आज फिर कोरोना के 37,379 नए मामले दर्ज किये गए हैं। वही ओमीक्रॉन के 192 नए मामलों के साथ कुल मामलो की संख्या बढ़कर 1,892 हो गयी है।
  • The Beatles
    ब्रेंडा हास
    "द बीटल्स" से नए साल की सीख
    04 Jan 2022
    जे के रोलिंग, ओप्रा विन्फ़्रे, स्टीवन स्पीलबर्ग और द बीटल्स में क्या चीज़ एक जैसी है? संकेत: यह न तो प्रसिद्धि है और न ही उनका पैसा।
  • punjab assembly
    डॉ. ज्ञान सिंह
    पंजाब विधानसभा चुनाव: आर्थिक मुद्दों की अनदेखी
    04 Jan 2022
    सर्दी में भोजन करने के बाद रेवड़ी खाने से भोजन पचाने में मदद मिलती है। पिछले कई विधानसभा चुनावों की तरह, लोगों को लंबे वादों को पचाने के लिए एक बार फिर से राजनीतिक रेवड़ियाँ बांटी जा रही हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License