NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
इस समय ज़ीरो प्रतिशत ग्रोथ रेट है : प्रो. अरुण कुमार
“सरकार ने संगठित क्षेत्र के लिए पैकेज की घोषणा की है। कॉरपोरेट का संकट इससे हल नहीं होगा। कॉरपोरेट का संकट सप्लाई का नहीं डिमांड का है। अब कॉरपोरेट को धन देकर डिमांड को नहीं बढ़ाया जा सकता है। डिमांड बढ़ाने के लिए किसान, ग्रामीण और बेरोजगारों को पैकेज देना होगा। जिससे उनकी क्रय शक्ति बढ़े।”
प्रदीप सिंह
29 Sep 2019
 Pro. Arun Kumar

देश की गिरती अर्थव्यवस्था पर अर्थशास्त्री प्रो. अरुण कुमार से प्रदीप सिंह की बातचीत के संपादित अंश :-

सवाल : क्या भारत आर्थिक मंदी का शिकार है। यदि देश में आर्थिक मंदी है तो आप इसका क्या कारण मानते हैं ? क्या यह अंतरराष्ट्रीय सुस्ती की देन है?  

प्रो. अरुण : सरकार खुले शब्दों में भले ही आर्थिक मंदी को स्वीकार नहीं कर रही है। लेकिन अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में है। पिछले दो-तीन सालों में भारत की अर्थव्यवस्था को तीन बड़े झटके लगे हैं- नोटबंदी, जीएसटी और गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं का संकट। नोटबंदी ने सबसे अधिक असंगठित क्षेत्र को प्रभावित किया। कैश की कमी होने के कारण असंगठित क्षेत्र तबाह हो गया।

हमारे देश में असंगठित क्षेत्र 94 प्रतिशत है और 45 प्रतिशत उत्पादन करता है। इसी तरह तकरीबन 6  प्रतिशत संगठित क्षेत्र 55 प्रतिशत उत्पादन करता है। अब असंगठित क्षेत्र का संकट धीरे-धीरे संगठित क्षेत्र को भी अपनी गिरफ़्त में ले रहा है। इसकी वजह से बेरोजगारी बढ़ी है। बेरोजगारी बढ़ने से मांग कम हो गई है इसलिए आने वाले दिनों में संकट और गहरा सकता है।  

सवाल :  जीडीपी पांच फीसद पर आ गई है। पांच फीसद बहुत बुरा आंकड़ा नहीं होता है। फिर समस्या कहां है?

प्रो. अरुण : अर्थव्यवस्था के ये आंकड़े संगठित क्षेत्र पर आधारित हैं। असंगठित क्षेत्र के आंकड़े पांच साल में आते हैं इसलिए जीडीपी का सही आंकड़ा और भी नीचे हो सकता है। ऐसे में अगर कहा ये जा रहा है कि जीडीपी 5 प्रतिशत है तो वो गलत कह रहे हैं। दरअसल, इस समय जीरो प्रतिशत ग्रोथ रेट है इसे ही मंदी कहा जाता है। पांच तिमाही पहले अर्थव्यवस्था 8 प्रतिशत से बढ़ रही थी अब वो गिरते गिरते 5 प्रतिशत पर आ पहुंची है। ऐसा नहीं है कि ये गिरावट अभी आई है। जो सरकारी आंकड़े बताए जा रहे हैं वास्तविक स्थिति उससे भी बुरी है।

सवाल : केंद्र सरकार कॉरपोरेट को भारी–भरकम पैकेज दे रही है। क्या मंदी से निपटने के लिए ये घोषणाएं उचित हैं। औद्योगिक क्षेत्र को पैकेज देकर क्या अर्थव्यवस्था को सुधारा जा सकता है?

प्रो. अरुण : सरकार ने संगठित क्षेत्र के लिए पैकेज की घोषणा की है। कॉरपोरेट का संकट इससे हल नहीं होगा। कॉरपोरेट का संकट सप्लाई का नहीं डिमांड का है। अब कॉरपोरेट को धन देकर डिमांड को नहीं बढ़ाया जा सकता है। डिमांड बढ़ाने के लिए किसान, ग्रामीण और बेरोजगारों को पैकेज देना होगा। जिससे उनकी क्रय शक्ति बढ़े।

दूसरा, आज सबसे पहले असंगठित क्षेत्र को राहत देने की जरूरत है, क्योंकि संकट भी पहले वहीं शुरू हुआ था। सरकार पैकेज की घोषणा बड़े कार्पोरेट घरानों और विदेशी निवेशकों की मांग के हिसाब से कर रही है। लेकिन इससे बहुत फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि ये बड़े औद्योगिक घरानों को लाभ पहुंचाएगा। अभी अधिकारिक एजेंसियां जैसे वित्त मंत्रालय और आरबीआई अर्थव्यवस्था को कमजोर तो कह रहे हैं, लेकिन अभी यह नहीं मानते कि मंदी है। सरकार ने अपना रिकार्ड मेंटेन करने के लिए आरबीआई से पैसे लिए। असंगठित क्षेत्र के लिए कुछ नहीं हो रहा है, जहां से रोजगार बढ़ सकता है और डिमांड बढ़ सकता है।  

सवाल : पिछले दो-तीन सालों में बेरोजगारी बढ़ने की बात की जा रही है। किन क्षेत्रों में कितनी बेरोजगारी बढ़ी है?

प्रो. अरुण : सीएमआई के आंकड़े दिखाते हैं कि देश में कर्मचारियों की संख्या 45 करोड़ थी, जो घट कर 41 करोड़ हो गई है। यानी चार करोड़ रोज़गार में कमी आई है। असंगठित क्षेत्र, ऑटो सेक्टर, टेक्सटाइल और चमड़ा उद्योग तबाह हो गया है। वाहन बिक्री में लगातार भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। मारुति और ट्योटा समेत देश के छह अग्रणी कार निर्माता कंपनियों के पैसेंजर कार की बिक्री में 34 प्रतिशत की गिरावट आई। छोटी कारों के साथ दोपहिया वाहन, ट्रैक्टर और ट्रक की मांग कम हो गई है। ये सब आम आदमी खरीदता है। अब ट्रक से सामान ढोया जाता है।

असंगठित क्षेत्र के तबाह होने और लोगों के रोजगार जाने से मांग कम हो गई है। एक आंकड़े के मुताबिक टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा के ट्रकों की बिक्री में 40 प्रतिशत की गिरावट आई है। इन दोनों कंपनियों के कॉमर्शियल वाहनों की बाज़ार में दो तिहाई हिस्सेदारी है। बिक्री में गिरावट का असर वाहन निर्माता कंपनियों के उत्पादन पर पड़ा है और वहां छंटनी और शटडाउन की ख़बरें भी लगातार आ रही है। इसकी वजह से बेरोज़गारी बढ़ी है।

सवाल : सऊदी अरब में हुए हमले का असर हम पर कहां तक पड़ने वाला है।  इसका विश्व पर क्या असर पड़ेगा?

प्रो. अरुण : सऊदी अरब पर हमले के बाद भारत ही नहीं विश्व भर में पेट्रोलियम के दाम बढ़ सकते हैं। इससे अर्थव्यवस्था प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकती है। हुती कह रहे हैं  कि हम सउदी पर फिर हमला कर सकते हैं। अमेरिका ईरान पर हमले की बात करता है। ईराक, लीबिया और नाइजीरिया की हालत खराब है। ऐसे में इस समय विश्व अनिश्चितता और युद्ध जैसे माहौल का शिकार है।

इससे अर्थव्यवस्था प्रभावित होती  है और निवेशक अपना पैसा समेटने लगते हैं। जब भी दुनिया में अनिश्चितता आती है तो दूसरे देशों की करंसी कमजोर और अमेरिकी डॉलर को मजबूत होते देखा गया है। डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही विश्व में अनिश्चितता और युद्ध के खतरे बढ़े हैं।

सवाल : क्या बैंकों का आपस में विलय मंदी से लड़ने में कारगर हो सकता है? क्या बैंकों का विलय ही आखिरी रास्ता था?

प्रो. अरुण : बैंकों के विलय से मंदी से कोई राहत नहीं मिलने वाली है। इसका कुछ दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है। लेकिन अभी तो यह सुनिश्चित होना चाहिए कि बैंकों से लोगों की छंटनी न हो, नहीं तो समस्या और गंभीर हो जाएगी।

indian economy
economic crises
GDP growth-rate
Economic Growth in India
Pro. Arun Kumar
corporate news
UNEMPLOYMENT IN INDIA
Saudi Aramco
Merger of banks

Related Stories

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

जब 'ज्ञानवापी' पर हो चर्चा, तब महंगाई की किसको परवाह?

मज़बूत नेता के राज में डॉलर के मुक़ाबले रुपया अब तक के इतिहास में सबसे कमज़ोर

क्या भारत महामारी के बाद के रोज़गार संकट का सामना कर रहा है?

क्या एफटीए की मौजूदा होड़ दर्शाती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था परिपक्व हो चली है?

महंगाई के कुचक्र में पिसती आम जनता

श्रीलंका का संकट सभी दक्षिण एशियाई देशों के लिए चेतावनी

रूस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध का भारत के आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?


बाकी खबरें

  • bank strike
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बैंक हड़ताल: केंद्र द्वारा बैंकों के निजीकरण के ख़िलाफ़ यूनियनों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी
    16 Dec 2021
    कांग्रेस, एआईटीसी, डीएमके, सीपीआई, सीपीएम और वाईएसआरसी, टीआरसी, शिवसेना, आप के नेताओं सहित कई राजनीतिक दलों और संसद सदस्यों ने भी दो दिवसीय बैंक हड़ताल को अपना समर्थन दिया है।
  • UP
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी: महामारी में टूटे निस्वार्थ शिक्षक और उनके गांव के सपने
    16 Dec 2021
    एक ऐसे राज्य में जहां राजनेता चुनाव जीतने के लिए अपनी जाति का या फिर सांप्रदायिक कार्ड खेलते हैं, प्यारेलाल ने अपने गांव के बच्चों को पढ़ाकर एकजुट कर दिया था. पर महामारी ने उन्हें बेरोजगार कर दिया और…
  • SP PSP
    रवि शंकर दुबे
    दूर हुए चाचा-भतीजे के गिले-शिकवे, 'साथ चुनाव लड़ेगी सपा-प्रसपा'
    16 Dec 2021
    अखिलेश यादव ने मुलाकात की फोटो शेयर करते हुए लिखा, "प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी से मुलाकात हुई और गठबंधन की बात तय हुई। क्षेत्रीय दलों को साथ लेने की नीति सपा को लगातार मजबूत कर रही है।"
  • Modi
    अजय कुमार
    हिन्दू धर्म और हिन्दुत्व का फ़र्क़
    16 Dec 2021
    अगर कॉरपोरेट्स का साथ ना मिले तो हिंदुत्व की बगिया हिंदू धर्म के मर्म से उजड़ जाएगी।
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    अजय मिश्रा टेनी के इस्तीफ़े की मांग तेज़, शाहीन बाग़ आंदोलन के 2 साल और अन्य ख़बरें
    16 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी अजय मिश्रा टेनी के इस्तीफ़े की मांग तेज़, शाहीन बाग़ आंदोलन के 2 साल और अन्य ख़बरों पर।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License