NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
उत्पीड़न
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका
इतवार की कविता : "फिर से क़ातिल ने मेरे घर का पता ढूंढ लिया..."
इतवार की कविता में आज पेश है अफ़ग़ानिस्तान के मौजूदा हालात पर लिखी गौहर रज़ा की नज़्म...
न्यूज़क्लिक डेस्क
29 Aug 2021
इतवार की कविता

इतवार की कविता में आज पेश है अफ़ग़ानिस्तान के मौजूदा हालात पर लिखी गौहर रज़ा की नज़्म...

अफ़ग़ानिस्तान

फिर से क़ातिल ने मेरे घर का पता ढून्ढ लिया
फिर हवाओं में ज़हर घुलने लगा
फिर से बच्चों के बिलखने की सदा आने लगी
बेड़ियाँ पांव में  पड़ने लगीं हर बेटी के
और ज़ंजीरों की झंकार में डूबे नौहे
नंगे सर, नंगे बदन, नंगे पांव
क़ैदख़ानों की फ़सीलों के परे
गर्दिशें करने लगे

घर जो आज़ादी-ए-जमहूर का पैमाना थे
यक-बा-यक ढलने लगे मज़हबी मैख़ानों में
नग़मे ख़ामोश हुए, साज़ों के दम घुटने लगे
ऐसे तालिब थे के लौटे तो अजब मंज़र है
दर्सगाहों में किताबों की चिताओं  के हुजूम
बैन करते रहे, करते रहे, करते ही रहे

फिर से एक जश्न है गलियों में तेरी मेरे वतन
जश्न ऐसा के हर एक चीज़ लहू रंग हुई

फिर से गलियारे लहू रंग हुए
फिर से दीवारें लहू रंग हुईं
फिर से हर रंग लहू रंग हुआ

फिर से दहके हुए मातूब सनम खानों में
फ़ैसले होने लगे,
सबके नाकर्दा गुनाहों का हिसाब होने लगा

पर ये गलियों के ख़ुदा भूल गए
इसी मिटटी में है आदम-ओ-हव्वा का ख़मीर
इसी मिटटी से तो तूफ़ान उठा करते हैं
चीर कर ख़ौफ़ के हर परदे को
बेटियां उट्ठेगीं , ऐ मेरे वतन
तेरे चेहरे, लब-ओ-रुखसार का बोसा ले कर
सरबलन्द उट्ठेगा हर क़ैस इसी मिटटी से
और ज़मीनों के खुदाओं पे क़हर टूटेगा

गौहर रज़ा 
दिल्ली
29. 08. 2021

Afghanistan
TALIBAN
taliban in afghanistan
USA
Poetry
gauhar raza poet

Related Stories

भोजन की भारी क़िल्लत का सामना कर रहे दो करोड़ अफ़ग़ानी : आईपीसी

छात्रों के ऋण को रद्द करना नस्लीय न्याय की दरकार है

तालिबान: महिला खिलाड़ियों के लिए जेल जैसे हालात, एथलीटों को मिल रहीं धमकियाँ

अफ़ग़ानिस्तान में सिविल सोसाइटी और अधिकार समूहों ने प्रोफ़ेसर फ़ैज़ुल्ला जलाल की रिहाई की मांग की

अफ़ग़ानिस्तान: गढ़े गये फ़सानों के पीछे की हक़ीक़त

फ्लॉयड हत्या मामला: सात जूरी सदस्यों से फिर से होंगे सवाल-जवाब


बाकी खबरें

  • मुकुल सरल
    मदर्स डे: प्यार का इज़हार भी ज़रूरी है
    08 May 2022
    कभी-कभी प्यार और सद्भावना को जताना भी चाहिए। अच्छा लगता है। जैसे मां-बाप हमें जीने की दुआ हर दिन हर पल देते हैं, लेकिन हमारे जन्मदिन पर अतिरिक्त प्यार और दुआएं मिलती हैं। तो यह प्रदर्शन भी बुरा नहीं।
  • Aap
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: केजरीवाल के ‘गुजरात प्लान’ से लेकर रिजर्व बैंक तक
    08 May 2022
    हर हफ़्ते की ज़रूरी ख़बरों को लेकर एक बार फिर हाज़िर हैं लेखक अनिल जैन
  • डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: हम सहनशील तो हैं, पर इतने भी नहीं
    08 May 2022
    हम ग़रीबी, बेरोज़गारी को लेकर भी सहनशील हैं। महंगाई को लेकर सहनशील हो गए हैं...लेकिन दलित-बहुजन को लेकर....अज़ान को लेकर...न भई न...
  • बोअवेंटुरा डे सौसा सैंटोस
    यूक्रेन-रूस युद्ध के ख़ात्मे के लिए, क्यों आह्वान नहीं करता यूरोप?
    08 May 2022
    रूस जो कि यूरोप का हिस्सा है, यूरोप के लिए तब तक खतरा नहीं बन सकता है जब तक कि यूरोप खुद को विशाल अमेरिकी सैन्य अड्डे के तौर पर तब्दील न कर ले। इसलिए, नाटो का विस्तार असल में यूरोप के सामने एक…
  • जितेन्द्र कुमार
    सवर्णों के साथ मिलकर मलाई खाने की चाहत बहुजनों की राजनीति को खत्म कर देगी
    08 May 2022
    सामाजिक न्याय चाहने वाली ताक़तों की समस्या यह भी है कि वे अपना सारा काम उन्हीं यथास्थितिवादियों के सहारे करना चाहती हैं जो उन्हें नेस्तनाबूद कर देना चाहते हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License