NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
जामिया अध्यापक नियुक्तियाँ: संविदात्मक सीटों को अतिथि अध्यापक में बदला
विडंबना यह है कि चयन समीति के अधिकांश शिक्षक सदस्य विश्वविद्यालय द्वारा इस मनमाने ढंग से लिए निर्णय से अनजान हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
08 Aug 2018
jamia milia islamia faculty recruitment

जामिया मिलिया इस्लामिया में शिक्षकों की नियुक्ति में कुछ गड़बड़ी लग रही है। जुलाई, 2018 में, संविदात्मक (कॉन्ट्रैक्ट) और अतिथि आधार पर सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति के लिए तीन विज्ञापन थे। विज्ञापनों के अनुसार, रिक्तियों की कुल संख्या 127 संविदात्मक पदों के लिए थी और अतिथि शिक्षकों के लिए 175 थी।

जब उम्मीदवार साक्षात्कार के लिए आने लगे तब उन्हें कुछ ऐसा बताया गया जो अब तक कभी नहीं हुआ थाI उन्हें बताया गया कि शायद संविदात्मक पदों को भी अतिथि शिक्षक पदों में बदल दिया जायेगाI हालांकि, इस सन्दर्भ में विज्ञापन निकलने के बाद तक कोई भी शुद्धिपत्र (भूल सुधार) नहीं निकाला गयाI मतलब बिना जानकारी दिए सभी पदों को अतिथि पदों में बदल दिया गयाI

जामिया मीलिया इस्लामिया में एक संविदात्मक और अतिथि संकाय के बीच का अंतर यह है कि एक संविदात्मक संकाय को रुपये का समेकित वेतन 60,000 रू. मिलते हैं और इसे शिक्षण के अनुभव के रूप में भी गिना जाता है। हालांकि, अतिथि शिक्षकों को मात्र मानदंड दिया जाता है। अनुभव के रूप में न गिने जाने के, 25 व्याख्यान के लिए अधिकतम 1,000 रु. प्रति व्याख्यान मिलते हैं। जहाँ तक वर्कलोड का सवाल है, दोनों पदों में शिक्षकों को दो पेपर पढ़ाने पड़ते है। कभी-कभी, अतिथि शिक्षक 25 से अधिक व्याख्यान लेता है, लेकिन आधिकारिक तौर पर, संख्या केवल 25 दिखायी जाती है। यह भी दुखद है कि पिछले दो दशकों में अतिथि शिक्षकों के लिए मानदंड बढ़ाया नहीं गया है और न ही इसे सातवें वेतन आयोग में माना गया है।

हालांकि संविदात्मक पदों के लिए साक्षात्कार अभी भी चल रहे हैं, लेकिन उम्मीदवारों के चिंतित प्रश्नों के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन अभी तक किसी भी आधिकारिक स्पष्टीकरण के साथ नहीं आया है।

विडंबना यह है कि चयन समीति के अधिकांश शिक्षक सदस्य विश्वविद्यालय के इस मनमाने निर्णय से अनजान थेI कईयों ने साक्षात्कार के दौरान इस कदम पर अपनी अस्वीकृति और अचम्भा भी व्यक्त किया।  यह निर्णय सार्वजनिक विश्वविद्यालय में कार्य करने के सभी मानदंडों का उल्लंघन करता हैI

अजीब यह है कि विश्वविद्यालय का विज्ञान विभाग विज्ञापन के अनुसार संविदात्मक पदों पर नियुक्ति कर रहा है, जबकि सामाजिक विज्ञान विभाग को ही इस मनमाने आदेश को मानते हुए बिना किसी सार्वजानिक सूचना के अतिथि शिक्षक पदों पर भर्तियाँ करने को मजबूर किया जा रहा हैI

भर्ती सेल में भाई-भतीजावाद के छिपे एजेंडे के आरोप सामने आ रहे हैं। 127 संविदात्मक साक्षात्कारों के लिए आये सैकड़ों उम्मीदवारों को कथित रूप से निराश किया गया है और भाई-भतीज़वाद फैलाने के लिए प्रार्थियो को उत्पीड़ित किया गया। संविदात्मक संकाय से अतिथि पदों के रूपांतरण के लिए उद्धृत कारण, एक अज्ञात अदालत का मामला है जिसके बारे में जनता में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है, और जामिया प्रशासन द्वारा कोई जानकारी नहीं दी गयी है। इसके अलावा, इस संबंध में विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित कोई भी सन्देश नहीं है। इस 'मामले' के ब्योरे के बारे में जानकारी के बिना, अब विज्ञापन में तदर्थ, संविदात्मक और अतिथि पदों का ओवरलैपिंग है।

दिल्ली विश्वविद्यालय में विज्ञापन की स्थिति जामिया में संविदात्मक मामले से पूरी तरह अलग है। यदि संविदात्मक स्थिति स्थायी और गैर-स्थायी के बीच के अंतर के माध्यम से परिभाषित की जाती है, तो अतिथि स्थिति भी एक संविदात्मक है। इसलिए, इन स्पष्टीकरणों के बिना, एक केंद्रीय विश्वविद्यालय साक्षात्कार के लिए आने वाले हजारों उम्मीदवारों के भविष्य के साथ खिलावाड़ कर रहा है। यह समाचार साक्षात्कार के समय उम्मीदवारों पर एक बम की तरह गिरा दिया गया है, जिन्हें अचानक अतिथि संकाय के रूप में शामिल होने के लिए कहा गया था। उनके सामने इसे स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा गया था।

जामिया के शिक्षण कर्मचारियों के बीच बढ़ता असंतोष भी है जो मानते हैं कि यूजीसी और एमएचआरडी को इस मामले में जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना चाहिए और विज्ञापनों के अनुसार भर्ती बहाल करनी चाहिए।

Jamia Milia Islamia
shikshak
faculty appointments
contract teachers

Related Stories

दिल्ली: जामिया हिंसा का एक साल, छात्रों का कैंडल मार्च

टीवी चैनल को दिल्ली दंगों के अभियुक्त के इक़बालिया बयान के स्रोत का खुलासा करने के निर्देश, पुलिस का लीक से इंकार

जामिया हिंसा मामला: मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट से छात्र निराश, एकतरफ़ा और पक्षपाती बताया

लंबे संघर्ष के बाद सफ़ूरा ज़रगर को मिली ज़मानत

लॉकडाउन के दौरान शिक्षकों, छात्रों और एक्टिविस्ट की गिरफ्तारी को लेकर छात्रों का ट्विटर पर विरोध

सफ़ूरा के लिए उठे हजारों हाथ....यौनिक हिंसा के ख़िलाफ़ ‘हल्ला बोल’

कार्टून क्लिक :  हमें ऐसी ‘सुरक्षा’ से ख़तरा है!

आज़ादी आंदोलन से गद्दारी करने वाले आज आज़ादी शब्द से भी भड़क रहे हैं : दीपंकर

जामिया हिंसा : 10 छात्रों ने दिल्ली पुलिस के समक्ष बयान दर्ज कराया

इंडियन हैं हम, 'बेवकूफ़' नहीं!


बाकी खबरें

  • तिरछी नज़र: गाय जी से एक साक्षात्कार
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: गाय जी से एक साक्षात्कार
    05 Sep 2021
    गाय बोली, "क्या बेवकूफ लोग हैं, अगर मैं ऑक्सीजन ही लेती हूं और ऑक्सीजन ही छोड़ती हूं तो मुझे सांस लेने की जरूरत ही क्या है...।”
  • hunger
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    भारत में भूख की अंतहीन छाया
    05 Sep 2021
    जंगल में रहने वाले जनजातीय समूहों से लेकर बड़े शहरों में रोजाना कमाने खाने वाले मज़दूरों तक, भारत में पिछले साल भूख ने लाखों भारतीयों को बुरे तरीके से प्रभावित किया। यह हालात तब बने, जब केंद्र सरकार…
  • इतवार की कविता: अपने जगे एहसास को पत्थर नहीं बना सकतीं अफ़ग़ान औरतें
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता: अपने जगे एहसास को पत्थर नहीं बना सकतीं अफ़ग़ान औरतें
    05 Sep 2021
    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की दहशत के बीच महिलाएं अपने अधिकारों के लिए बेख़ौफ़ आवाज़ बुलंद कर रही हैं। इसी को कविता के माध्यम से दर्ज किया है वरिष्ठ कवि और संस्कृतिकर्मी शोभा सिंह ने। आइए इतवार की…
  • unemployment
    अजय कुमार
    महंगाई और बेरोज़गारी के बीच अर्थव्यवस्था में उछाल का दावा सरकार का एक और पाखंड है
    05 Sep 2021
    जून 2021 में बेरोजगारी दर 9.7 फ़ीसदी थी। जुलाई में इसमें थोड़ा सा सुधार हुआ और यह 6.96 फीसदी पर पहुंच गई। लेकिन फिर से इसमें गिरावट आई। अब अगस्त की बेरोजगारी दर 8.32 फ़ीसदी है। मतलब अब भी भारत की…
  • मुज़फ़्फ़रनगर महापंचायत सिर्फ़ खेती-किसानी की पंचायत नहीं, रोज़गार, स्वास्थ्य, शिक्षा की भी पंचायत है!
    मुकुंद झा
    मुज़फ़्फ़रनगर महापंचायत सिर्फ़ खेती-किसानी की पंचायत नहीं, रोज़गार, स्वास्थ्य, शिक्षा की भी पंचायत है!
    05 Sep 2021
    आज 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में हो रही किसान महापंचायत को किसानों के अलावा आम जनता का भी जोरदार समर्थन मिल रहा है। अलग-अलग राज्यों से हज़ारों किसान मुजफ्फरनगर पहुंच रहे हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License