NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
जेएनयू छात्र संघ चुनाव : वाम गठबंधन की फिर से जीत!
हालांकि औपचारिक रूप से अभी तक परिणाम घोषित नहीं किये गए हैं लेकिन जितने भी रुझान बताए गए हैं, उनसे ये साबित हो गया है की एक बार फिर से जेएनयू लाल ही रहेगा।
मुकुंद झा
08 Sep 2019
JNU
जेएनयू छात्र संघ चुनाव

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक बार फिर लाल हो गया है। छात्र संघ चुनाव में मुख्य पैनल के सभी चार पदों वाम मोर्चे की जीत साफ़ दिख रही है। अध्यक्ष पद पर वाम मोर्चे के उम्मीदवार आइशे घोष, उपाध्यक्ष पद पर साकेत मून, महासचिव पद पर सतीश चंद्र यादव और संयुक्त सचिव पद पर मोहम्मद दानिश ने जीत हासिल की।

हालांकि औपचारिक रूप से अभी तक परिणाम घोषित नहीं किये गए हैं लेकिन जितने भी रुझान बताए गए हैं, उनसे ये साबित हो गया है की एक बार फिर से जेएनयू लाल ही रहेगा।

WhatsApp Image 2019-09-08 at 7.14.07 PM.jpeg

तमाम कोशिशों के बावजूद भी इस बार आरएसएस के छात्र संगठन एबीवीपी के हाथ कुछ नहीं आया है।

अभी तक क्या-क्या हुआ?

जेएनयू छात्र संघ के लिए 6 सितंबर को वोट डाले गए थे। इस दौरान क़रीब 67.9%  मतदान हुआ था।

इसके बाद मतगणना 6 सितबंर को ही रात 9 बजे से होनी थी लेकिन वो नहीं हुई। इस दौरन काफ़ी हंगामा और विवाद हुआ। इसके बाद अंततः 11 से 12 घंटे की देरी से मतगणना शुरू हो सकी। क्योंकि दिल्ली हाई कोर्ट ने जेएनयू को 17 तारीख़ तक अंतिम रिजल्ट जारी करने पर रोक लगा दी थी। लेकिन छात्रों का आरोप है कि एबीवीपी और प्रशासन जो कि इसबार एक ख़ास विचारधारा के समर्थन में खुलकर काम करता दिख रहा था उसने जानबूझ कर मतगणना के दौरान खलल डालने की कोशिश की।

शुक्रवार और शनिवार की दोपहर तक तो दिन भर इसी को लेकर उहापोह और हंगामा होता रहा। वाम मोर्चे के मुताबिक़ अपनी हार सामने देखकर एबीवीपी इस तरह की कोशिशें कर रही थी क्योंकि उन्हें पता था कि एबीवीपी सेंट्रल पैनल में हार ही चुकी है और मुशिकल ही है कि वो कोई काउंसलर पद भी जीते। अभी तक के नतीजे यह दिखा भी रहे हैं

WhatsApp Image 2019-09-08 at 7.14.08 PM.jpeg

हंगामे और विवाद के बाद  शुरू हुए मतगणना में 5762 वोटों में से 5050 बैलट के गिने जा चुके हैं। लेफ्ट गठबंधन ने सभी सेंट्रल पैनल पोस्ट पर बढ़त बना रखी है। अध्यक्ष पद के लिए लेफ्ट आइशे घोष 2069 वोटों के साथ आगे चल रही  हैं।  सभी चारों पदों पर वाम मोर्चा के उम्मीदवार चुने जाने की संभावना है क्योंकि जितने मतदान की गणना बाक़ी है उससे कहीं अधिक उनका अपने प्रतिद्वंदी से अंतर है।

आपको बता दें कि वाम समर्थित ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), डेमोक्रैटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (डीएसएफ) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) ने 'लेफ्ट यूनिटी' गठबंधन के तहत एक साथ चुनाव लड़ा था। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक के अनुषांगिक संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), कांग्रेस के छात्र संगठन भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) और बिरसा-आंबेडकर-फूले स्‍टूडेंट एसोसिएशन(बापसा) के उम्मीदवार सामने थे। निर्दलीयों ने भी इस चुनाव में अपनी क़िस्मत आज़माई।

लेफ़्ट कैंडिडेट आइशे घोष 2069 से ज़्यादा वोट हासिल कर चुकी हैं। उनके बाद बापसा के जितेंद्र सुना चल रहे हैं। उन्हें अब तक 985 वोट मिले हैं।

WhatsApp Image 2019-09-08 at 7.14.06 PM (1).jpeg

अध्यक्ष

1.    आइशे घोष (Left)- 2069

2.    जितेंद्र सुना (BAPSA)- 985

3.     मनीष जांगिड़ (ABVP)-981

4.     प्रशांत कुमार (NSUI)-665

5.     प्रियंका भारती (CRJD)-137

6.      राघवेंद्र मिश्रा (निर्दलीय)-47

7.       NOTA -75

उपाध्यक्ष

1.      साकेत मून (Left)-3028

2.      श्रुति अग्निहोत्री (ABVP)-1065

3.       रिषिराज यादव (CRJD)- 216

4.       NOTA- 484

महासचिव

1.       सबरीश पीए (ABVP)- 1182

2.       सतीश चंद्र यादव(LEFT)- 2228

3.        वशीम (BAPSA)- 1070

4.        NOTA -459

संयुक्त सचिव

1         मोहम्मद दानिश(Left)- 2938

2          सुमंत्र कुमार साहू(ABVP)-1310

3          NOTA- 634

WhatsApp Image 2019-09-08 at 7.14.06 PM.jpeg

इसके अलावा सभी स्कूल के काउंसलर की भी बात करें तो वहां भी 'लेफ़्ट यूनिटी' गठबंधन ने भारी बढ़त ले रखी है। अभी तक  के रुझानों मुताबिक़ सभी स्कूलों को मिलाकर कुल 43 काउंसलर में से केवल 1 पर ABVP को बढ़त है,2 पर NSUI और एक ही BAPSA को मिलती दिख रही है।

यानी 39 काउंसलर के पद भी 'लेफ़्ट यूनिटी' गठबंधन जीत रहा है।

JNU
JNUSU
JNU Election
Left coalition
ABVP
SFI
AISA
DSF
AISF
BAPSA
NSUI

Related Stories

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

लखनऊ विश्वविद्यालय: दलित प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ मुक़दमा, हमलावरों पर कोई कार्रवाई नहीं!

लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी का हंगामा: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत चंदन का घेराव, धमकी

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

नई शिक्षा नीति से सधेगा काॅरपोरेट हित

बैठक में नहीं पहुंचे अधिकारी, छात्र बोले- जेएनयू प्रशासन का रवैया पक्षपात भरा है

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

JNU: मांस परोसने को लेकर बवाल, ABVP कठघरे में !

बीएचयू : सेंट्रल हिंदू स्कूल के दाख़िले में लॉटरी सिस्टम के ख़िलाफ़ छात्र, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी

शिक्षाविदों का कहना है कि यूजीसी का मसौदा ढांचा अनुसंधान के लिए विनाशकारी साबित होगा


बाकी खबरें

  • Ukraine Russia
    पार्थ एस घोष
    यूक्रेन युद्ध: क्या हमारी सामूहिक चेतना लकवाग्रस्त हो चुकी है?
    14 Mar 2022
    राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न उस पवित्र गाय के समान हो गया है जिसमें हर सही-गलत को जायज ठहरा दिया जाता है। बड़ी शक्तियों के पास के छोटे राष्ट्रों को अवश्य ही इस बात को ध्यान में रखना होगा, क्योंकि बड़े…
  • Para Badminton International Competition
    भाषा
    मानसी और भगत चमके, भारत ने स्पेनिश पैरा बैडमिंटन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 21 पदक जीते
    14 Mar 2022
    भारत ने हाल में स्पेनिश पैरा बैडमिंटन अंतरराष्ट्रीय (लेवल दो) प्रतियोगिता में 11 स्वर्ण, सात रजत और 16 कांस्य से कुल 34 पदक जीते थे।
  • भाषा
    बाफ्टा 2022: ‘द पावर ऑफ द डॉग’ बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म
    14 Mar 2022
    मंच पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार देने आए ‘द बैटमैन’ के अभिनेता एंडी सर्किस ने विजेता की घोषणा करने से पहले अफगानिस्तान और यूक्रेन के शरणार्थियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार के लिए सरकार पर निशाना…
  • उपेंद्र स्वामी
    दुनिया भर की: दक्षिण अमेरिका में वाम के भविष्य की दिशा भी तय करेंगे बोरिक
    14 Mar 2022
    बोरिक का सत्ता संभालना सितंबर 1973 की सैन्य बगावत के बाद से—यानी पिछले तकरीबन 48-49 सालों में—चिली की राजनीतिक धारा में आया सबसे बड़ा बदलाव है।
  • indian railway
    बी. सिवरामन
    भारतीय रेल के निजीकरण का तमाशा
    14 Mar 2022
    यह लेख रेलवे के निजीकरण की दिवालिया नीति और उनकी हठधर्मिता के बारे में है, हालांकि यह अपने पहले प्रयास में ही फ्लॉप-शो बन गया था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License