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भारत
राजनीति
जेएनयू प्रकरण : 3 साल बाद कन्हैया, उमर समेत 10 के खिलाफ चार्जशीट दायर

चार्जशीट में तत्कालीन छात्रसंघ उपाध्यक्ष शेहला रशीद और छात्र नेता अपराजिता राजा का भी नाम शामिल है, हालांकि उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया है बल्कि ज़रूरत पड़ने पर इनसे पूछताछ की जा सकती है।
मुकुंद झा
14 Jan 2019
jnu sedition

दिल्ली पुलिस ने आज करीब तीन साल बाद सोमवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में फरवरी 2016 के एक कार्यक्रम के दौरान कथित रूप से "राष्ट्रविरोधी” नारे लगाने के आरोप में छात्र नेता  कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य सहित दस लोगों के खिलाफ देशद्रोह के मामले में 12,000 पन्नों की चार्जशीट दायर की है। 

बताया जा रहा है कि इस चार्जशीट में तत्कालीन छात्रसंघ उपाध्यक्ष शेहला रशीद और सीपीआई नेता डी राजा की बेटी और छात्र नेता अपराजिता राजा का भी नाम शामिल है, हालांकि उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया है बल्कि ज़रूरत पड़ने पर इनसे पूछताछ की जा सकती है। पुलिस ने माना है कि इनके खिलाफ पर्याप्त सुबूत नहीं हैं। इससे पहले इस मामले में किसी भी महिला का नाम नहीं था। मजिस्ट्रेट सुमित आनंद मंगलवार को इस आरोप पत्र का परीक्षण करेंगे।

 आईपीसी 124 ए (राजद्रोह), 323, 465 (फर्जीवाड़ा), 471 (असली, जाली दस्तावेज का उपयोग करना), 143 (गैरकानूनी रूप से एकत्रित करने के लिए), 149 (सामान्य उद्देश्य के लिए  गैरकानूनी रूप से एत्रितत होने) , 147 (दंगाई) और 120 बी के धाराओं के तहत चार्जशीट दायर की गई है।

इस पूरी घटना के बाद समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए कन्हैया कुमार ने कहा है कि अगर ये चार्जशीट की खबर सही है तो मैं इसके लिए दिल्ली पुलिस और मोदी जी का धन्यवाद करना चाहूँगा कि आखिरकार 3 साल बाद चार्जशीट दाखिल की गई और चुनाव से कुछ दिन पहले इसका दाखिल होना दिखा रहा है कि ये राजनीति से प्रेरित है, परन्तु मुझे न्यायपालिका पर विश्वास है।

अधिकांश लोग 9 फरवरी  की घटनाओं को शायद भूल भी गए होंगे लेकिन ये एक ऐसी तारीख थी जो छात्र आंदोलनों के इतिहास में शिक्षक और छात्रों के बीच एक उल्लेखनीय समन्वय के साथ एकजुट लड़ाई की शुरुआत के लिए याद की जाती है। आइए एक बार फिर से 9 फरवरी कि घटना में अब तक के घटनाक्रम को देखते है।

sedition.jpg

जेएनयू प्रकरण पर एक नज़र

• 9 फरवरी, 2016 : उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य सहित कुछ छात्रों द्वारा अफ़ज़ल गुरु की फांसी के खिलाफ एक कार्यक्रम आयोजित कियागया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इस घटना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस बीच, कुछ मीडिया चैनल जो उस समय ग्राउंड रिपोर्ट का दावा कर रहे थे उन्होंने दिखाना शुरू किया कि वहाँ भारत विरोधी नारे लगे।  फिर कुछ विवादित वीडियो को लगातार प्रसारित किया गया।

 • 12 फरवरी : कन्हैया कुमार  जो  जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के अध्यक्ष थे उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। दिल्ली पुलिस ने उन पर राजद्रोह और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया। कई अन्य जेएनयू  छात्रों को इन्ही मामलो में गिरफ्तार किया गया;  उनमें से पांच लोग अंडरग्राउंड हो गए थे। इसके बाद  कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य के समर्थन में छात्रों और शिक्षको ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

 • 15 और 16 फरवरी : कन्हैया कुमार की सुनवाई के दौरान पटियाला हाउस कोर्ट के बाहर भाजपा और संघ से जुड़े वकीलों के एक समूह द्वारा पत्रकार, जेएनयू के शिक्षक, छात्र नेता कन्हैया कुमार और अन्य एक्टिविस्ट पर हमला किया जाता है।

 • 17 फरवरी :  जेएनयू के संकाय सदस्यों ने राष्ट्रवाद पर खुली व्याख्यान श्रृंखला शुरू की और फिर नोम चोमस्की सहित प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के 133 प्रख्यात प्रोफेसरों ने कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए एक पत्र लिखा , और जेएनयू के छात्रों और शिक्षकों के साथ एकजुटता ज़ाहिर की।

 • 18 फरवरी को, ABVP की JNU यूनिट के तीन पदाधिकारियों ने इस मामले में परिषद से असहमति जताते हुए इस्तीफा दे दिया।

• 21 फरवरी : सभी फरार छात्र परिसर में लौट आए और आत्मसमर्पण के लिए खुद को पेश किया।

• 24 फरवरी : दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य को गिरफ्तार किया।

• 3 मार्च : कन्हैया कुमार को 10 हज़ार रुपये के बॉन्ड पर ज़मानत मिली।

कन्हैया कुमार जेएनयू वापस आए जहाँ पहले से ही मीडिया का हुजूम उनका का इंतज़ार कर रहा था। फिर वहां कन्हैया ने ऐतिहासिक भाषण दिया, जिससे वे एक नये युवा नेता के तौर पर पहचाने गए।

• 17 मार्च : उमर और अनिर्बान को 6 महीने की अंतरिम ज़मानत मिली। इसके बाद जेएनयू के एडमिन  ब्लॉक में फिर एक विशाल सभा हुई।

• 26 अप्रैल :  कुलपति  की जांच समिति ने 21 छात्रों को अनुशासनात्मक मानदंडों को तोड़ने के लिए दोषी पाया, छात्र संघ और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) ने इस फैसले को नकार दिया|

• 10 और 12 मई को इस फैसले से नाराज़ छात्र ने दिल्ली के उच्च न्यायालय का रुख किया |

• 13 मई को उच्च न्यायालय ने छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को खारिज़ कर दिया

•  14 जनवरी 2019 :  स्पेशल सेल ने मामले में चार्जशीट दायर की। 

 

JNU
Umar khalid
Kanhaiya Kumar
Anirban
Delhi
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sedition CASE

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