NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
जेएनयू स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग : न क्लासरूम, न वाशरूम
जेएनयू देश के तमाम बड़े मुद्दों को लेकर तो चर्चा में रहा है परन्तु जेएनयू में एक ऐसा स्कूल भी जिसके छात्र मूलभूत सुविधाओं तक के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
मुकुंद झा
16 Oct 2018
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy : Indian Express

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग के छात्र भारी फीस का भुगतान करने के बावजूद बुरे हाल में रह और पढ़ रहे हैं। ये छात्र काफी समय से अपर्याप्त बुनियादी ढांचे की शिकायत कर रहे हैं। उनके क्लास कन्वेंशन सेंटर से चलने के साथ ही पुस्तकालय में इंजीनियरिंग किताबों की कमी को लेकर वे कई बार शिकायत कर चुके हैं। इसके अलावा छात्रावास का भी बुरा हाल है। लेकिन इस सबपर कुलपति से लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है।

इसी को लेकर पिछले दिनों जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन (जेएनयूएसयू) के महासचिव एजाज़ अहमद राठेर ने इंजीनियरिंग छात्रों के "बदहाल  छात्रावास और अव्यवस्था" को लेकर डीन को एक पत्र लिखा था।

स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग के छात्रों का दर्द :-

मूलभूत सुविधाओं का आभाव :-  स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग में पढ़ने वाले छात्रों को कई मूलभूत सुविधाएँ भी नहीं मिल रही हैं। छात्रावास में एक–एक कमरे में चार-चार छात्रों को रखा गया है जबकि उनमें दो से अधिक छात्रों के रहने की स्थति नहीं है। कई वाशरूम में दरवाजे तक नहीं है।

मेस का घटिया खाना :- स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग के छात्रों ने जो बताया वो बहुत ही भयावह था, एक छात्र ने बात करते हुए बताया कि उन्हें जो मेस में खाना दिया जाता है वो बहुत ही घटिया होता है। उसे खाने के बाद कई छात्र बीमार हो चुके हैं। छात्र ने दो दिन पूर्व की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि एक छात्रा ने जब मेस का खाना खाया उसके बाद उसे खून की उल्टियाँ हुईं। उसके बाद उसे अस्पताल में ले जाया गया तो पता चला कि उसे फूड प्वाइजनिंग हुई है।  वहाँ इस तरह के मामले अब आम हो चुके हैं।

उच्च शुल्क :- जेएनयू में जहाँ सामन्यत सभी स्कूलों की फीस 200 से 250 रुपये है, वहीं स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग के छात्रों की फीस 25 से 26 हज़ार है। इसमें इतने अंतर को लेकर भी वहाँ के छात्र सवाल कर रहे हैं।

लाइब्रेरी में पुस्तकों का न मिलना :- हम सब जानते हैं कि इंजीनियरिंग की किताबे कितनी महंगी होती हैं। सभी छात्रों के लिए उन्हें खरीद पाना संभव नहीं है। ऐसे में उनका केवल एक ही सहारा होता है लाइब्रेरी परन्तु उन्हें वहाँ भी खाली हाथ लौटना पड़ता है।

शिक्षकों की कमी :-  स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग के छात्र जो अभी 12वीं पास करने के बाद आये हैं, परन्तु उनके लिए कोई भी नई फैकल्टी नहीं है। अन्य स्कूल के जो शिक्षक है उन्हीं पर अतरिक्त भार दिया गया।

क्लासरूम की कमी :- स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए क्लास रूम नहीं है। उनकी क्लास कन्वेंशन सेंटर में क्लास होती है।

हर्ष, जेएनयू के छात्र हैं, उन्होंने बताया कि स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग के छात्रों को दामोदर छात्रावास में रखा गया है जो उनकी जहाँ क्लास होती है उससे काफी दूर है। आने जाने के लिए कोई परिवहन की सुविधा नहीं है और छात्रों को रोजाना 60 रुपये से अधिक खर्च करना पड़ रहा है।

एसएफआई की दिल्ली राज्य संयुक्त सचिव दीपाली ने कहा कि यहाँ महिला छात्रों की स्थिति तो और भी खरब है जिस हॉस्टल में रखा गया है उनके कई रूम्स में में खुली खिड़कियां हैं और उनके ऊपर पर्दे भी नहीं जो छात्राओं के लिए परेशानी का सबब है और उनकी निजता का भी उल्लंघन है।

आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मिलने वाला वजीफा भी नहीं मिल रहा है

देशभर इंजीनियरिंग के छात्रों को सरकार की तरफ से 50 हज़ार की आर्थिक मदद दी जाती है परन्तु इस वजीफा के लिए फार्म भरते समय साइट पर जेएनयू के स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग का विकल्प ही नहीं आ रहा है तो उन्हें ये मदद नहीं मिल रही है जिस कारण गरीब व पिछड़े तबके से आने वाले छात्रों को बेहद मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।

यह कोई अचानक हुई घटना नहीं है। जब इस नए कोर्स को शुरू करने की बात हुई थी तभी छात्रसंघ ने प्रशासन को चेताया था। इसके बावजूद जुलाई में स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग शुरू कर दिया गया है। हालांकि, विश्वविद्यालय के छात्रों ने निर्णय का विरोध किया है। छात्रों ने आरोप लगाया है कि पिछले तीन वर्षों से प्रशासन बुनियादी ढांचे के बिना विभिन्न पाठ्यक्रमों का प्रस्ताव दे रहा है, जिसके परिणामस्वरूप मौजूदा इमारतों का उपयोग नए प्रवेशकों को समायोजित करने के लिए किया जा रहा है।

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन के तत्कालीन  संयुक्त सचिव सुभांशु सिंह ने कहा, "इंजीनियरिंग ऐसा कोर्स है जिसके लिए प्रयोगशालाओं, कक्षाओं और उपकरणों की आवश्यकता होती है। परिसर में ऐसी कोई चीज नहीं है। मुझे आश्चर्य है कि ये छात्र हॉस्टल आवास कैसे प्राप्त करेंगे।"

छात्रों की मुख्य मांगें :-

जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन (जेएनयूएसयू) के महासचिव एजाज़ अहमद व अतंरिम छात्रवास कमेटी संयोजक के रूप में छात्रों से निरंतर अपील प्राप्त करने के बाद, मैंने इस पत्र को प्रमुख मुद्दों और कुछ बिंदुओं के तत्काल हल करने की मांग करते हुए एक पत्र लिखा उसमें उनकी मुख्य मांग यह थी कि -

1.     छात्रों को अन्य पाठ्यक्रमों के छात्रों के साथ मुख्य परिसर में अन्य छात्रावासों में समायोजित किया जाना चाहिए।

2.     तत्काल छात्रों को मुफ्त परिवहन सुविधा प्रदान की जानी चाहिए।

3.     मेस और छात्रावास में हाइजेनिक और स्वच्छता होनी चाहिए।

4.     मेस में उचित बैठने की व्यवस्था।

5.     छात्रावास में रहने के लिए पर्याप्त जगह दी जाए।

6.     महिला छात्रों के प्रत्येक कमरे में पर्दे व वाशरूम में में भी पर्दे हों।

एजाज़ ने इन सब समस्या को हल करने व विश्वविद्यालय के सभी छात्रों को एक समान व्यवाहर व सभी को उचित सुविधा मुहैया कराने की मांग की। इस पत्र को लिखे कई दिन बीत जाने के बाद भी अब तक प्रशासन ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

WhatsApp Image 2018-10-16 at 14.41.01.jpeg

lt2.jpg

छात्र हर्ष ने बताया कि प्रशासन इन समस्याओं को हल करने की बजाय छात्रों को डराने-धमकाने की कोशिश कर रहा है। स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग के डीन विरोध कर रहे छात्रों से कह रहे हैं कि किसी भी छात्र संगठन से संपर्क न करें, ये उनके हित में नहीं होगा।

JNU
JNU student
jnu school of engineering
Delhi
JNUSU

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

धनशोधन क़ानून के तहत ईडी ने दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन को गिरफ़्तार किया

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

मुंडका अग्निकांड के लिए क्या भाजपा और आप दोनों ज़िम्मेदार नहीं?

मुंडका अग्निकांड: लापता लोगों के परिजन अनिश्चतता से व्याकुल, अपनों की तलाश में भटक रहे हैं दर-बदर

मुंडका अग्निकांड : 27 लोगों की मौत, लेकिन सवाल यही इसका ज़िम्मेदार कौन?

दिल्ली : फ़िलिस्तीनी पत्रकार शिरीन की हत्या के ख़िलाफ़ ऑल इंडिया पीस एंड सॉलिडेरिटी ऑर्गेनाइज़ेशन का प्रदर्शन

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!


बाकी खबरें

  • प्रियंका शंकर
    रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच, नॉर्वे में नाटो का सैन्य अभ्यास कितना महत्वपूर्ण?
    19 Mar 2022
    हालांकि यूक्रेन में युद्ध जारी है, और नाटो ने नॉर्वे में बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है, जो अभ्यास ठंडे इलाके में नाटो सैनिकों के युद्ध कौशल और नॉर्वे के सैन्य सुदृढीकरण के प्रबंधन की जांच करने के…
  • हर्षवर्धन
    क्रांतिदूत अज़ीमुल्ला जिन्होंने 'मादरे वतन भारत की जय' का नारा बुलंद किया था
    19 Mar 2022
    अज़ीमुल्ला ख़ान की 1857 के विद्रोह में भूमिका मात्र सैन्य और राजनीतिक मामलों तक ही सिमित नहीं थी, वो उस विद्रोह के एक महत्वपूर्ण विचारक भी थे।
  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: महंगाई-बेरोजगारी पर भारी पड़ी ‘नमक पॉलिटिक्स’
    19 Mar 2022
    तारा को महंगाई परेशान कर रही है तो बेरोजगारी का दर्द भी सता रहा है। वह कहती हैं, "सिर्फ मुफ्त में मिलने वाले सरकारी नमक का हक अदा करने के लिए हमने भाजपा को वोट दिया है। सरकार हमें मुफ्त में चावल-दाल…
  • इंदिरा जयसिंह
    नारीवादी वकालत: स्वतंत्रता आंदोलन का दूसरा पहलू
    19 Mar 2022
    हो सकता है कि भारत में वकालत का पेशा एक ऐसी पितृसत्तात्मक संस्कृति में डूबा हुआ हो, जिसमें महिलाओं को बाहर रखा जाता है, लेकिन संवैधानिक अदालतें एक ऐसी जगह होने की गुंज़ाइश बनाती हैं, जहां क़ानून को…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मध्यप्रदेश विधानसभा निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित, उठे सवाल!
    19 Mar 2022
    मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट सत्र निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित कर दिया गया। माकपा ने इसके लिए शिवराज सरकार के साथ ही नेता प्रतिपक्ष को भी जिम्मेदार ठहराया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License