NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
जेएनयू : विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की वजह से 48 शिक्षकों पर चार्जशीट 
प्रशासन के इन नए हमलों के ख़िलाफ़, जवाहर लाल विश्वविद्यालय शिक्षक संघ(जेएएनयूटीए) ने एक बयान में कहा कि "विश्वविद्यालय के ग़लत कार्यो और कुप्रबंधन के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ उठाने के लिए जेएनयू प्रशासन द्वारा उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।"
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
27 Jul 2019
JNUTA

जेएनयू में एक और नए विवाद ने जन्म ले लिया है। शुक्रवार की देर शाम को प्रशासन ने पिछले साल जुलाई के एक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण 48शिक्षकों को नोटिस जारी किया है। ये कार्यवाही केंद्रीय सिविल सेवा (सीसीएस) नियमों के तहत शुरू की गई थी, जो सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू हैं।


उप-कुलपति एम जगदीश कुमार द्वारा हस्ताक्षरित नोटिस के अनुसार केंद्रीय सिविल सेवा नियमों को लागू किया और शिक्षकों को निर्देश दिया कि वे इस पर15 दिनों के भीतर अपना जवाब दाख़िल करें या फिर वो व्यक्तिगत रूप से वीसी के सामने पेश हो कर अपना पक्ष रखें।

नोटिस के अनुसार शिक्षकों पर शैक्षणिक नियमों और विनियमों के नियम M-7 (6) का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है जो एडमिन ब्लॉक के 100 मीटर के दायरे में कोई भी विरोध प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाता है। वीसी ने केंद्रीय सिविल सेवा नियम, 1965(वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) के नियम 14 के तहत एक जांच शुरू कर दी है।

शिक्षकों ने "जेएनयू अधिनियम और मान्यताओं  के बार-बार उल्लंघन, काफ़ी समय से स्थापित अकादमिक विचार-विमर्श प्रक्रियाओं, आरक्षण नीति के उल्लंघन, मनमाने ढंग से हटाने और चेयरपर्सन और डीन की नियुक्ति, त्रिपक्षीय एमओयू UGC और MHRD के द्वारा, प्रस्तावित HEFA ऋण और रोज़ाना उपस्थिति को मनमाने तरीक़े से लागू करने के ख़िलाफ़ दो दिवसीय हड़ताल की थी।"


विरोध के बाद, शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए और कार्यकारी परिषद में चर्चा के लिए मामला रखा गया। जिसने बाद में कथित उल्लंघनों को देखने के लिए अफ़्रीकी अध्ययन के प्रोफ़ेसर अजय दुबे के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया। इस साल जून में, कार्यकारी परिषद ने दुबे द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के आधार पर प्रदर्शनकारियो के ख़िलाफ़ " भारी जुर्माने के तहत चार्चशीट" करने का फ़ैसला किया। हालांकि, शिक्षकों का तर्क है कि रिपोर्ट उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई थी। एक शिक्षक जिन्हें आरोप पत्र में नामज़द किया गया था, उन्होंने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए कहा कि रिपोर्ट को संदिग्ध रूप से शिक्षकों को नहीं दिखाया गया है।


प्रशासन के इन नए हमलों के ख़िलाफ़, जवाहर लाल विश्वविद्यालय शिक्षक संघ(जेएएनयूटीए) ने एक बयान में कहा कि "विश्वविद्यालय के ग़लत कार्यो और कुप्रबंधन के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ उठाने के लिए जेएनयू प्रशासन द्वारा उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।"


शिक्षक संघ के सचिव अविनाश कुमार ने कहा, "उत्पीड़न और धमकी के एकमात्र उद्देश्य से , 48 शिक्षकों की को टारगेट किया जा रहा है। यह व्यक्तिगत रूप से शिक्षकों के ख़िलाफ़ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही की श्रृंखला में एक नया क़दम है। जांचों की घोषणा बहुत तेज़ी और जल्दी से की जाती है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को भी नहीं अपनाती है। ये जाँच के नाम पर ढोंग किया जाता है।"


उन्होंने कहा, "हमें यह समझना चाहिए कि हम केवल सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, जिन्हें अपनी निर्धरित नौकरियों को पूरा करना है, बल्कि विश्वविद्यालय समाज का हिस्सा हैं - बोलना और न्याय, सुधार, लोकतंत्रीकरण के लिए कार्य करना और परिवर्तन वह भूमिका है जिसे शिक्षाविदों को निभाना होता है। हमें समाज को वापस देने के लिए जो सीखने, समालोचना और कल्पना के लिए जगह बनाती है।”


जेएनयूटीए के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर अतुल सूद ने कहा, "यह नया नोटिस केंद्रीय विश्वविद्यालयों में केंद्रीय सिविल सेवा नियमों को लागू करने का एक और क़दम है।"
एक ट्वीट में, तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था, "हमने जेएनयू, दिल्ली विश्वविद्यालय या किसी अन्य विश्वविद्यालय में फ्रीडम ऑफ़ स्पीच पर कोई प्रतिबंध लगाने के लिए न तो कोई प्रतिबंध लगाया है और न ही कोई इरादा है।"


इस पर अतुल सूद ने कहा, "जेएनयू के शिक्षकों को प्रशासन की धमकियों से न तो भयभीत किया जा सकता और न ही चुप कराया जा सकता है। विरोध प्रदर्शन को ग़ैरक़ानूनी कहने से समाप्त नहीं होंगे और हम अपने विरोध करने के लिए लोकतांत्रिक अधिकार की रक्षा के लिए लड़ते रहेंगे।

शिक्षक सीसीएस नियमों का विरोध क्यों कर रहे हैं?

केंद्र द्वारा शिक्षण समुदाय पर केंद्रीय सिविल सेवा नियमों को लागू करने की कोशिश के बाद देश में भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे। शिक्षकों ने कहा कि नियम न केवल असहमति के विरोधी हैं बल्कि शोध को भी प्रभावित करते हैं। आधार से लेकर नोटबंदी जैसी कई सरकारी नीतियों की गंभीर आलोचना अकादमिया से हुई है।


सूद ने यह भी कहा, "शिक्षण समुदाय पर केंद्रीय सिविल सेवा नियमों को लागू करने के दूरगामी परिणाम होंगे। उदाहरण के लिए नियम 8 (i), (ii) और नियम (9) कहते हैं कि प्रकृति में किसी भी तरह के हस्तक्षेप की प्रवृति नहीं होनी चाहिए यह "सरकार की प्रतिकूल आलोचना का प्रभाव है।"


ये नियम कक्षा में भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर, शोध पत्रों और लेखों में, और सार्वजनिक जीवन में प्रतिबंध लगाने का प्रभाव है। वास्तव में, ये सेवा की शर्त के रूप में सेंसरशिप का है। भारतीय शिक्षाविद सरकारी नीति के आलोचकों के साथ और साथ समाज जुड़ने में सक्षम नहीं होंगे, और स्वतंत्र रूप से अपने पेशेवर कर्तव्यों को पूरा करने में भी सक्षम नहीं होंगे। 
नियम 9, सार्वजनिक राय को सूचित करने और प्रभावित करने के नैतिक दायित्व से शिक्षकों को वंचित करता है शिक्षा की एक अनिवार्य भूमिका, और मुख्य तरीक़ा जिसमें यह समाज को वापस दे सकता है।"

Jawaharlal Nehru University
Jawaharlal Nehru University Teachers Association
Central Civil Services Rules
Chargesheet to JNU Teachers
JNU Teachers Protest
freedom of speech
Prakash Javadekar Atul Sood

Related Stories

जेएनयू में छात्रा से छेड़छाड़ के मामले में एक व्यक्ति गिरफ़्तार, GSCASH बहाली की मांग

नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ सड़कों पर उतरा छात्रों का हुज़ूम, कहीं प्रदर्शन तो कहीं निकाला मशाल जुलूस

वे JNU जैसे संस्थानों को क्यों बर्बाद कर रहे हैं?

हमसे शैक्षणिक और कार्य अनुभव मांगना नोबेल वापस लेने जैसा: जेएनयू के पूर्व कुलपति

दलित छात्रों को बी.टेक में पंजीकरण से वंचित करने का जेएनयूएसयू का आरोप


बाकी खबरें

  • nonaligned movement
    एन.डी.जयप्रकाश
    गुटनिरपेक्ष आंदोलन ने अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को कैसे बदला? : भाग 1
    20 Nov 2021
    उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद का संगठित विरोध 1920 के दशक के अंत में शुरू हुआ था। जवाहरलाल नेहरू ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन के ज़रिए महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
  • Farmers Protest
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसानों की जीत: “यह आज़ादी का दूसरा आंदोलन रहा है”
    20 Nov 2021
    शुक्रवार, 19 नवंबर को गुरु नानक जी की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन कृषि क़ानून वापस लेने की घोषणा की और कहा कि संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में इन तीनों कानूनों को निरस्त करने की…
  • Srinagar Encounter
    अजय सिंह
    मुद्दा: कश्मीर में लिंचिंग के दिन आने वाले हैं
    20 Nov 2021
    पिछले दिनों चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ (सेना, नौसेना व वायुसेना के मुखिया) जनरल बिपिन रावत ने जो सार्वजनिक बयान दिया, वह बहुत चिंताजनक है।
  • farmers
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    MSP और लखीमपुर खीरी के किसानों के न्याय तक जारी रहेगा आंदोलन, लखनऊ में महापंचायत की तैयारी तेज़
    20 Nov 2021
    विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त किये जाने की घोषणा के बावजूद, किसानों के द्वारा उत्तर प्रदेश में आगामी महापंचायतों के मद्देनजर लामबंदी और तैयारी जारी है।
  • farmers celebrating
    विक्रम सिंह
    किसान जानता है कि फसल पकना तो शुरुआत है, मंडी में दाम मिलने तक उसका काम पूरा नहीं होता
    20 Nov 2021
    मोदी जी ने तो अपने चिरपरिचित अंदाज़ में किसानों से घर वापस जाने के लिए कहा परन्तु किसान जानता है कि खेत में फसल पकना तो शुरुआत है लेकिन जब तक फसल का मंडी में उचित मूल्य नहीं मिल जाता तब तक काम पूरा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License