NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
जेएनयू वीसी का “ज्ञान पर हमला”!, छात्रों और शिक्षकों ने इस्तीफ़ा मांगा
कक्षा में अनिवार्य उपस्थिति, शैक्षणिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक "अनियमितताओं" के मुद्दों पर तेज़ हुई लड़ाई।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
08 Jan 2019
Translated by महेश कुमार
JNU (FILE PHOTO)
Image Courtesy: Indian Cultural Forum

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के कुलपति एम जगदीश कुमार ने हाल ही में जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) पर जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) बिल जमा नहीं करने का आरोप लगाया था। जेएनयूएसयू ने इन आरोपों से इनकार किया है, और वीसी को अपने आरोपों को साबित करने के लिए दो दिन का समय दिया है। जेएनयूएसयू ने यह भी मांग की है कि कुलपति को लोकतांत्रिक रूप से चुने गए छात्र संघ के खिलाफ "झूठ बोलने और परेशान करने" के लिए इस्तीफा देना चाहिए।

यह केवल जेएनयू में तल्खी पैदा करने वाला मुद्दा नहीं है। हाल ही के दिनों में, कुलपति और जेएनयूएसयू के बीच टकराव के साथ-साथ विश्वविद्यालय में जेएनयू शिक्षक संघ (जनुटा) के साथ भी तनाव बढ़ गया है, जो हाल ही में हुई घटना के बाद उस वक्त ज्यादा भड़क गया था जब कविता सिंह, जो कि स्कूल ऑफ आर्ट्स और एस्थेटिक्स की डीन हैं और जिन्होंने इन्फोसिस पुरस्कार जीता था, उन्हें शनिवार, 5 जनवरी की शाम को इसे प्राप्त करने के लिए बेंगलुरु के एक कार्यक्रम में जाना था, जिसकी छुट्टी से इनकार कर दिया गया था। ‘इन्फोसिस साइंस फाउंडेशन’ वार्षिक पुरस्कार का आयोजन करता है जिसमें एक स्वर्ण पदक, एक प्रशस्ति पत्र और एक लाख डॉलर (या इसके समकक्ष भारतीय रुपये) का पुरस्कार शामिल है। अपने स्वीकृति भाषण में, प्रो. सिंह, जिन्हें मानविकी श्रेणी में मुगल, राजपूत और डेक्कन कला पर उनके काम के लिए सम्मानित किया गया था, ने जेएनयू के भीतर मौजूदा मुद्दों और अस्थिरता के माहौल को छुआ था। उन्होंने कहा कि, "मुझे जेएनयू, एक ऐसी संस्था है जिसका धन्यवाद देना चाहती हूं जो कुछ साल पहले तक शोधकर्ताओं के लिए अपने काम को बेरोक-टोक और मुक्त रूप से अंज़ाम देने के लिए एक महान जगह थी। लेकिन अभी हालात काफी खराब हैं। कितना बुरा लगा? जब मैंने आज सुबह अपना ईमेल चेक किया, तो मैंने पाया कि इस अवार्ड को प्राप्त करने के लिए मैंने जो छुट्टी ली थी, उसे कुलपति ने अस्वीकार कर दिया था। वी.सी. के मुताबिक यहाँ मेरी उपस्थिति नाजायज है।”

अनिवार्य उपस्थिति एक अन्य ऐसा मुद्दा है जो शिक्षकों और प्रशासन के बीच संघर्ष का विषय बन गया है। शनिवार को, जनुटा (JNUTA) ने 21 देशों के 75 विश्वविद्यालयों में दैनिक उपस्थिति की प्रथाओं पर किए गए एक सर्वेक्षण पर रिपोर्ट जारी की और इस पूरे के पूरे अभ्यास के बाद केवल एक विश्वविद्यालय कुआलालंपुर में पाया गया।

जनुटा ने कहा कि इसने इस तरह के अभ्यास को अच्छे शिक्षण और अनुसंधान को बढ़ावा देने वाले विश्वविद्यालय के विचार का विरोधाभासी पाया। कई लोगों ने तर्क दिया कि इस तरह की नीति केवल एक ऐसे विश्वविद्यालय में निगरानी के शासन को स्थापित करने के लिए है जिसे अपनी अकादमिक उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है।

कई संसद सदस्यों (सांसदों) ने भी विश्वविद्यालय में जारी अशांति पर चिंता व्यक्त की है। जेएनयू प्रशासन की "अनियमितताओं और कुशासन" को उजागर करने के लिए, शुक्रवार को पांच राज्यसभा सांसद एक साथ आए और "ज्ञान पर हमले" के खिलाफ चिंता व्यक्त की। जेएनयू के कुलपति के खिलाफ जांच की मांग करते हुए, राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने कहा- “हम तत्काल जांच की मांग करते हैं, और जब तक यह जांच होती है तब तक [जेएनयू वी-सी] हटा दिया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि हम इस बाबत  मानव संसाधन विकास मंत्री को भी लिखेंगे। यह जेएनयू के साथ एकजुटता और इसके माध्यम से उच्च शिक्षा की रक्षा का कार्य है। आप [जेएनयू के शिक्षक और छात्र] अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि एक बेहतर विचार’ के लिए संघर्ष कर रहे हैं और हम आपके साथ हैं।”

वरिष्ठ पत्रकार कुमार केतकर, जो पांच राज्यसभा सांसदों में से एक थे, ने यहां की शोध करने की संस्कृति पर हमला करके जेएनयू को नष्ट करने की बड़ी साजिश की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा: "फासीवादी और सत्तावादी लोग अनुसंधान, विद्वता और प्रगतिशील सोच से घृणा करते हैं। वे स्वतंत्र मन वाले किसी भी संस्थान को दफनाने, नियंत्रित करने और नष्ट करने की कोशिश करते हैं। वर्तमान सरकार विश्वविद्यालयों को नष्ट करना चाहती है और जेएनयू को उसका प्रतीक बनाया जा रहा है।”

JNU
JNU VC
JNUSU
JNU TA
JNU student
Education crises

Related Stories

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

भारत में छात्र और युवा गंभीर राजकीय दमन का सामना कर रहे हैं 

बैठक में नहीं पहुंचे अधिकारी, छात्र बोले- जेएनयू प्रशासन का रवैया पक्षपात भरा है

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए

JNU: मांस परोसने को लेकर बवाल, ABVP कठघरे में !

जेएनयू छात्र झड़प : एबीवीपी के अज्ञात सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

जेएनयू में फिर हिंसा: एबीवीपी पर नॉनवेज के नाम पर छात्रों और मेस कर्मचारियों पर हमले का आरोप

JNU में खाने की नहीं सांस्कृतिक विविधता बचाने और जीने की आज़ादी की लड़ाई

नौजवान आत्मघात नहीं, रोज़गार और लोकतंत्र के लिए संयुक्त संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ें


बाकी खबरें

  • सोनिया यादव
    आंगनवाड़ी की महिलाएं बार-बार सड़कों पर उतरने को क्यों हैं मजबूर?
    23 Feb 2022
    प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं का कहना है कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारों द्वारा घोषणाओं और आश्वासनों के बावजूद उन्हें अभी तक उनका सही बकाया नहीं मिला है। एक ओर दिल्ली सरकार ने उनका मानदेय घटा दिया है तो…
  • nawab malik
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हम लड़ेंगे और जीतेंगे, हम झुकेंगे नहीं: नवाब मलिक ने ईडी द्वारा गिरफ़्तारी पर कहा
    23 Feb 2022
    लगभग आठ घंटे की पूछताछ के बाद दक्षिण मुंबई स्थित ईडी कार्यालय से बाहर निकले मलिक ने मीडिया से कहा, '' हम लड़ेंगे और जीतेंगे। हम झुकेंगे नहीं।'' इसके बाद ईडी अधिकारी मलिक को एक वाहन में बैठाकर मेडिकल…
  • SKM
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बंगाल: बीरभूम के किसानों की ज़मीन हड़पने के ख़िलाफ़ साथ आया SKM, कहा- आजीविका छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए
    23 Feb 2022
    एसकेएम ने पश्चिम बंगाल से आ रही रिपोर्टों को गम्भीरता से नोट किया है कि बीरभूम जिले के देवचा-पंचमी-हरिनसिंह-दीवानगंज क्षेत्र के किसानों को राज्य सरकार द्वारा घोषित "मुआवजे पैकेज" को ही स्वीकार करने…
  • राजस्थान विधानसभा
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    राजस्थान में अगले साल सरकारी विभागों में एक लाख पदों पर भर्तियां और पुरानी पेंशन लागू करने की घोषणा
    23 Feb 2022
    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को वित्तवर्ष 2022-23 का बजट पेश करते हुए 1 जनवरी 2004 और उसके बाद नियुक्त हुए समस्त कर्मचारियों के लिए आगामी वर्ष से पूर्व पेंशन योजना लागू करने की घोषणा की है। इसी…
  • चित्र साभार: द ट्रिब्यून इंडिया
    भाषा
    रामदेव विरोधी लिंक हटाने के आदेश के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया की याचिका पर सुनवाई से न्यायाधीश ने खुद को अलग किया
    23 Feb 2022
    फेसबुक, ट्विटर और गूगल ने एकल न्यायाधीश वाली पीठ के 23 अक्टूबर 2019 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें और गूगल की अनुषंगी कंपनी यूट्यूब को रामदेव के खिलाफ मानहानिकारक आरोपों वाले वीडियो के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License