NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
जेलों में भी रहता है भेदभाव कायम
“जेल में माल्या के लिए विशेष इंतजामात किए गए हैं। लेकिन सभी जेलों की व्यवस्थाएं बदलनी चाहिए, सिर्फ विशेष लोगों के लिए जेलों में विशेष इंतजाम क्यों?”
अजय पांडेय, आईएएनएस
19 Dec 2018
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy: google

भारतीय बैंकों से हजारों करोड़ रुपये लेकर फरार शराब कारोबारी विजय माल्या के लिए मुंबई के आर्थर रोड जेल को पूरी तरह से तैयार किया गया है। आर्थर रोड जेल में उच्च सुरक्षा वाली बैरक तैयार की गई है। 

लेकिन जब भारतीय जेलों की वास्तविकता की बात आती है तो सच्चाई किसी से छिपी नहीं है। विजय माल्या के लिए तो जेल में खास इंतजाम कर दिए गए। इन इंतजामों में आर्थर रोड के जेल परिसर के अंदर दो-मंजिला इमारत में स्थित एक उच्च सुरक्षा वाली बैरक तैयार की गई है, जिसमें प्रत्यर्पण के बाद माल्या को रखा जाएगा।

जेलों की स्थिति को लेकर सर्वोच्च न्यायालय केंद्र व राज्यों की सरकारों को भी फटकार लगा चुका है। हाल ही में, न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कारागारों और बाल सुधार गृहों में जाकर वहां की दशा देखने का निर्देश दिया था। 

अपनी टिप्पणी में न्यायाधीशों ने कहा था कि अधिकारियों को अपने दफ्तरों से निकलकर जेलों की दशा देखने को कहिए। पानी के नल की टोंटियां काम नहीं करती हैं। शौचालय उपयोग में नहीं हैं। सब बंद हो चुके हैं और बदहाल हैं। उनको देखने को कहिए, जिससे वे समझेंगे कि कैदी किस तरह की दयनीय दशा में रहते हैं।

जेलों की दशा व वहां उपलब्ध इंतजामों व दूसरे कानूनी पहलुओं पर बिहार की 30 से भी ज्यादा जेलों का दौरा कर चुकीं व जेलों की कुव्यवस्था को अपनी किताब 'न्यायपालिका कसौटी पर' में उजागर करने वाली सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता कमलेश जैन से आईएएनएस ने जेलों के हालात पर विशेष बातचीत की।

यह पूछे जाने पर क्या जेलों में मानवाधिकार जिंदा रहता है, या अधिकारों का हनन हो जाता है? इस संदर्भ में भारतीय जेलों को कैसे देखती हैं? सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता कमलेश जैन कहती हैं कि जेलों में मानवाधिकार रहने चाहिए, लेकिन इनका नितांत अभाव है। मैं इसे जमीदारी प्रथा की तरह मनमाना आदेश देने की श्रेणी में रखती हूं। जिस तरह समाज में ऊंच-नीच, अमीर-गरीब, शिक्षित-अशिक्षित का भेद-भाव चलता है, उसी तरह से जेलों में अनपढ़ व कमजोर वर्ग का व्यक्ति चक्की में घुन की तरह पिसता है, वह वर्षो तक जेल में रहता है। खाने से लेकर, शौच जाने, नहाने-कपड़े धोने से लेकर हर काम में उसे भेदभाव का शिकार होना पड़ता है। न्याय उसे मिलता नहीं या काफी देर से मिलता है। ऐसे में हमारी जेलें भेदभाव रहित नहीं हैं।

विजय माल्या के लिए विशेष जेल की व्यवस्था की गई है। वह मुंबई आर्थर रोड जेल में रहेंगे? इसे किस लिहाज से देखती है? कमलेश जैन कहती हैं कि आर्थर रोड जेल एक सुरक्षित जेल समझी जाती है। वहां बड़े खूंखार अपराधियों को रखा जाता है। सुरक्षा के लिहाज से विजय माल्या को वहां रखा जा रहा है। उस जेल में माल्या के लिए विशेष इंतजामात किए गए हैं। लेकिन सभी जेलों की व्यवस्थाएं बदलनी चाहिए, सिर्फ विशेष लोगों के लिए जेलों में विशेष इंतजाम क्यों?

यह पूछे जाने पर जेलों में भेदभाव खूब होता है, असमानता के इस स्तर को कैसे देखती हैं? न्यायपालिका कसौटी पर की लेखिका कमलेश जैन कहती हैं, "जेलों में असमानता अत्यंत बर्बर है। गरीब, अनपढ़ मनुष्य एक दास की तरह रहता है। सबकी गुलामी करता है, जेल स्टाफ की भी। ऐसे में व्यवस्थाओं को पारदर्शी बनाने की जरूरत है। मैंने बिहार की जेलों का बाकायदा दौरा किया है, जहां स्थितियां बद से बदतर रही हैं। जेलों में भी व्यापक भेदभाव कायम है।"

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने कारागृहों और बाल सुधार गृहों की दशा सुधारने के प्रति सरकारी मशीनरी की बेरुखी और संवदेनहीन व्यवहार पर नाराजगी जाहिर की है। इस पर आप क्या कहेंगी? इस सवाल पर कमलेश जैन कहती हैं कि सर्वोच्च न्यायालय की कारागारों व बाल सुधार गृहों पर की गई टिप्पणी एकदम उचित है। व्यवस्थाएं बदल नहीं रही हैं। बस चंद नाम हैं, जिसे हम गिनाने के लिए रखते हैं, आदर्श जेल की सूची में नाम बहुत कम हैं। 

कारागारों की दशा सुधारने के मुद्दे को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों दोनों को फटकार लगाए जाने को आप किस नजरिए से देखती हैं? जवाब में अधिवक्ता कहती हैं कि कारागारों की दशा सुधारने के लिए 1983 से ही सर्वोच्च न्यायालय फटकार लगा रहा है, पर भारत की जेलों में सुधार नहीं हो रहा है। आपराधिक प्रक्रिया संहिता में प्रावधान है कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, सेशन जज, जिले के न्यायाधीश समय-समय पर जेलों का निरीक्षण करे और वहां कि व्यवस्था सुधारने को लेकर कार्यवाही करे। लेकिन ऐसा नहीं किया जाता।

यह पूछे जाने पर कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि दुनियाभर में जेलों में कर्मचारियों की कमी का औसत 16 फीसदी है, लेकिन भारत में 62 फीसदी है। आप इसे किस तरह से देखती हैं? कमलेश जैन कहती हैं, "हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली भी लचर है, 35 वर्षो से जेल में रूदल साहा व 37 बोका ठाकुर अडंर 1982-183 में मैंने पीआईएल फाइल किया। आज भी हालत जस की तस है। छोटे अपराधी जेल में सालों रहते हैं, अपनी सजा पूरी करने पर भी निकल नहीं पाते और बड़े अपराधियों को आसानी जमानत मिल जाती है।" 

कर्मचारियों की कमी तो है ही, दो हजार कैदियों की जगह में चार हजार लोग रहते हैं, जेलों के आकार व नंबर दोनों को बढ़ाने की जरूरत है। सुविधाएं भी नहीं है, उन्हें भी बढ़ाना जरूरी है। गरीबों के लिए जेल नरक है। 


 


बाकी खबरें

  • manual scevenging
    सक्षम मलिक
    हाथ से मैला ढोने की प्रथा का ख़ात्मा: मुआवज़े से आगे जाने की ज़रूरत 
    19 Oct 2021
    सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक बेजवाड़ा विल्सन के मुताबिक़, देश भर में हाथ से मैला ढोने के चलते 2016 से 2020 के बीच कुल मिलाकर 472 और सिर्फ़ साल 2021 में 26 मौतें हुई हैं।
  • Bakhtawarpur
    न्यूज़क्लिक टीम
    बख्तावरपुर : शहर बसने की क़ीमत गाँव ने चुकाई !
    19 Oct 2021
    दिल्ली के नरेला के पास बसे बख्तावरपुर गाँव के निवासी शहर के बसने की क़ीमत चुका रहे है. उनका आरोप है कि दिल्ली सरकार ने उनको उनके हाल पर छोड़ दिया है. वे बरसों से अपने इलाक़े के लिए एक अदद नाले की…
  • Muzaffarpur rail
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार में भी दिखा रेल रोको आंदोलन का असर, वाम दलों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया
    19 Oct 2021
    संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर हुए धरना-प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा को बर्खास्त करने और कृषि कानून और श्रम कोड रद्द करने सहित अन्य कई मांगें उठाई।
  • MK Stalin
    विग्नेश कार्तिक के.आर., विशाल वसंतकुमार
    तमिलनाडु-शैली वाला गैर-अभिजातीय सामाजिक समूहों का गठबंधन, राजनीति के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है? 
    19 Oct 2021
    देश में तमिलनाडु के पास सबसे अधिक सामाजिक रुप से विविध विधायी प्रतिनिधित्व है, और साथ ही देश में सभी जातीय समूहों का समानुपातिक प्रतिनिधित्व मौजूद है।
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: ख़ाकी का 'भगवा लुक'
    19 Oct 2021
    कर्नाटक के उडूपी ज़िले में एक पुलिस थाने के कभी सिपाहियों ने वर्दी की जगह भगवा रंग के कपड़े पहने। फिर तर्क आया कि विजयदशमी का दिन था इसलिए वर्दी की जगह “भगवा लुक” का आनंद ले लिया। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License