NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
जी 7 देशों की बेअसर शिखर वार्ता को किनारे लगा सकते थे ईरान और ब्राज़ील 
इस वार्ता में शरणार्थी संकट या विश्व में बढ़ती भूख के बारे में कोई बात नहीं हुई, ओवर-लीवरेज्ड बैंकों (ख़राब लोन) के बारे में भी कोई चर्चा नहीं हुई। उस पर भी कोई यह सोचे कि G7 एक गंभीर मंच है तो ये समझा जाए कि उनकी दिमाग़ी स्थिति सही नहीं है।
विजय प्रसाद
30 Aug 2019
Translated by महेश कुमार
G7 counties

लगता है कि जी7 (ग्रुप ऑफ सेवन) की हर बैठक समय की बर्बादी है। जी7 के देशों की 45वीं बैठक फ़्रांस में हुई। इस बैठक में गंभीरता से किसी भी प्रमुख या महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा नहीं की गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्यापार युद्धों के बारे में बातचीत को यह कहकर टाल दिया कि अमेरिका और चीन के बीच कोई व्यापार युद्ध नहीं हैं। इनमें से कोई भी देश शरणार्थी संकट या दुनिया में बढ़ती भूखमरी की समस्याओं के बारे में बात नहीं करना चाहता था। ओवर-लीवरेज्ड बैंकों (ख़राब लोन) के बारे में भी कुछ चर्चा नहीं हुई जिसे कि बैंकरों ने नोट में गंभीर चिंता का विषय और आने वाले दिनों की प्रमुख क्रेडिट आपदा माना था। इस पर भी कोई चर्चा नहीं की गई है।

इसके बजाय, लग रहा था जैसे ट्रम्प और यूनाइटेड किंगडम के बोरिस जॉनसन बातचीत करने का स्वांग रच रहे थे, और लग रहा था जैसे बाक़ी के नेताओं की वहां मौजुदगी और उनकी वैधता किसी पारे की तरह तेज़ी से नीचे जा रही है। उस पर भी यह कोई यह सोचे कि जी7 एक गंभीर मंच है तो ये समझा जाए कि उनकी दिमाग़ी स्थिति सही नहीं है।

ईरान

फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने जी7 की बैठक के मेजबान के रूप में, ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ को काफ़ी सदभाव के साथ बियारिट्ज़ में आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया था। मैक्रोन ने ट्रम्प के अनिश्चित स्वभाव का जायज़ा लिया। कल्पना कीजिए अगर ट्रम्प को बताया जाता कि ज़रीफ़ भी यहाँ है, तब ट्रम्प कहते - ज़रीफ़ एक अच्छा आदमी है, मैं ज़रीफ़ से बात कर सकता हूँ - और फिर अगर वे (ज़रीफ़ के ख़िलाफ़ अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए) उनसे मिलते ... तो इन हालत में मैक्रॉन 2015 के ईरान परमाणु समझौते के मुर्दे पर चर्चा की शुरुआत कर सकते थे।

लेकिन ट्रम्प इस प्रलोभन में नहीं पड़े। वह बिआरित्ज़ में ट्रम्प के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, जॉन बोल्टन, के जूए पर सवार होकर आए हैं जो किसी भी तरह की संभावना से परे के इंसान हैं। बोल्टन हीरे के टुकड़े के समान कठोर व्यक्ति हैं, उनकी घृणा शुद्ध है। इसकी भी कभी कोई संभावना नहीं थी कि ट्रम्प को उत्तर कोरिया के किम जोंग-उन के साथ दो कोरिया के बीच संबंध मज़बूत करने के लिए ट्रम्प को इजाज़त दी होती। इसलिए मैक्रोन ट्रम्प-ज़रीफ़ शिखर सम्मेलन की व्यवस्था नहीं कर सके। यह एजेंडे पर नहीं रहा।

ज़रीफ़ को इस बैठक के लिए लाना एक जोखिम के समान था। क्योंकि ट्रम्प इस मामले में टस से मस नहीं होते दिख रहे थे।

ब्राज़ील

मैक्रोन, अपनी उदारवादी साख को मिटाने के लिए काफ़ी उत्सुक हैं, इसलिए उन्होंने ब्राज़ील के राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बारे में कठोर टिप्पणी की है। जैसे जलते हुए अमेज़न के जंगल एक दर्दनाक तस्वीर थी, ऐसे ही मैक्रोन की पत्नी के बारे में बोल्सनारो की भद्दी टिप्पणियां दुखदायी थीं। बोल्सनारो का महिला विरोधी नज़रिया और प्राकृतिक दुनिया के बारे में उनकी नफ़रत के बीच की खाई काफ़ी संकीर्ण है– उनकी समझ पुराने शैतान, पितृसत्ता के विचार से जुड़ी हुई है। महिलाओं के प्रति उनके रवैये पर हमला किए बिना प्रकृति के प्रति बोल्सोनारो जैसे व्यक्ति की संवेदना को बदलना असंभव है।

मैक्रोन का उदारवाद – वैसा ही है जैसा कि कनाडा के जस्टिन ट्रूडो का है – यानी एक कमज़ोर और फिसलन भरी सतह है। फ़्रांस और कनाडा दोनों ही खनन समूहों के बड़े केंद्र हैं, दोनों ही देशों में पर्यावरण विनाश के लिए ये ज़िम्मेदार है। कनाडा अकेले दुनिया की आधी से अधिक खनन फ़र्मों का केंद्र है (जैसा कि हम ट्रिकॉन्टिनेंटल: इंस्टीट्यूट फ़ॉर सोशल रिसर्च में दस्तावेज़ीकरण करते हैं)। फ़्रेंच फ़र्म यूरेनियम खनन पर हावी है, लेकिन फ़्रेंच गयाना से गैबॉन, और नाइजर से क़जाक़िस्तान तक भी उनका दबदबा है। वे धरती की सतह पर छोड़े गए दर्दनाक निशान की ओर इशारा करते हुए बिना उंगलियों के अमेज़न के विनाश की कितनी शिकायत कर सकते हैं? इतने सारे घोटाले केवल इसलिए अनसुने रह जाते हैं क्योंकि चर्चा के लिए पहले से ही बहुत सारे घोटाले मौजूद होते हैं।

अमेज़न की आग से निपटने के लिए ब्राज़ील काफ़ी दबाव में है। यह कुछ ऐसा है जिसके बारे में यूरोपीय लोगों ने कुछ हिम्मत दिखाई है। यूरोपीय किसानों के दबाव में, उन्होंने ब्राजील से बीफ़ आयात में कटौती करने और यूरोपीय संघ-मर्सोसुर व्यापार समझौते से हटने की धमकी दी है। ब्राज़ील के लिए जो सबसे अधिक अपमानजनक बात है वो यह कि यूरोपीय देशों ने कहा कि वे आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) में ब्राजील का स्वागत नहीं करेंगे – जोकि विकसित देशों का अंतिम क्लब है। बोल्सनारो इस दबाव में धँसा हुआ लग रहा था। इतना दबाव सहना यह बर्दाश्त से बाहर की बात थी। हालांकि आग से लड़ने के लिए 20 मिलियन डॉलर की सहायता का पैकेज काफ़ी दयनीय है।

लेकिन ट्रम्प ने परवाह नहीं की। जब जी7 ने जलवायु तबाही और अमेज़न की आग पर चर्चा की, तो ट्रम्प कमरे से बाहर चले गए। उनकी ख़ाली कुर्सी वास्तविक ग्रह संकटों के लिए अमेरिकी सरकार की उपेक्षा का प्रतीक है।

भारत

मैक्रॉन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जी7 बैठक के लिए आमंत्रित किया था। मोदी को इस बैठक की पृष्ठभूमि में रखा गया था। उनकी सरकार ने अनिवार्य रूप से 70 लाख कश्मीरियों स्याह अंधेरे में क़ैद कर दिया है। मैक्रोन ने उनसे इस बारे में पूछा। मोदी हिचकिचा गए। उन्हें भी सवालों को नज़रअंदाज़ करने का एक चतुर तरीक़ा आता है। उनके जवाब - हिंदी में - अक्सर डिब्बाबंद होते हैं, कुछ न कहने के तरीक़ा। जब मोदी ने जी7 में ट्रम्प के साथ एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस की, तो ट्रम्प मोदी के दोहराए गए जवाबों से थोड़ा नाराज़ लग रहे थे।

उनके होंठ रूखे हो गए और उन्होंने तीखी टिप्पणी की। मोदी यह कहते रहे कि वह और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान कश्मीर को लेकर अपने मतभेदों को सुलझा लेंगे (जिसकी संभावना कम लगती है)। ट्रम्प ने कहा, "दोनों सज्जनों के साथ मेरे बहुत अच्छे संबंध हैं।" उन्होंने कहा कि वह ज़रूरत पड़ने पर क़दम बढ़ाने के लिए तैयार थे, लेकिन मुझे लगता है कि वे ख़ुद इसे अच्छी तरह से सुलझा सकते हैं। जबकि वे लंबे समय से ऐसा नहीं कर पा रहे थे।"

मैक्रॉन ने मोदी के सामने वरिष्ठ राजनेता बनने की कोशिश की, लेकिन यहां भी मैक्रोन नेतृत्व में हैं। फ़्रांस के राफ़ेल ने अरबों यूरो के लिए एक बहुत ही भ्रष्ट सौदे में भारत को 36 जेट बेचे। भारत का व्यवसाय यूरोप की अशुद्ध-नैतिकता से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

यदि आप बीजिंग या मॉस्को में बैठे हैं, तो आपको जी7 के बारे में आश्चर्य होगा। यह ऐसा कालभ्रमित प्रतीत होता है, जैसे कि टेबल के चारों ओर बैठी पुरानी औपनिवेशिक शक्तियां अपनी ख़ुद की शक्ति के बारे में दंतकथाओं को बता रही हैं।

विजय प्रसाद एक भारतीय इतिहासकार, संपादक और पत्रकार हैं। वह स्वतंत्र मीडिया संस्थान की परियोजना,  Globetrotter में एक फेलो और मुख्य संवाददाता हैं। वह LeftWord Books के मुख्य संपादक और ट्राईकॉन्टिनेंटल: इंस्टीट्यूट फॉर सोशल रिसर्च के निदेशक हैं।

सौजन्य: इंडिपेंडेंट मीडिया इंस्टिट्यूट 

इस लेख को स्वतंत्र मीडिया संस्थान की एक परियोजना, Globetrotter द्वारा प्रकाशित किया गया था।

IRAN
India
Brazil
Macron
Bolsonaro
Narendra modi
G7 Countries

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़


बाकी खबरें

  • Satyapal Malik
    भाषा
    मेघालय में कर्फ़्यू के बाद भी हिंसा, राज्यपाल सत्यपाल मलिक के काफिले पर हमला
    18 Aug 2021
    राज्यपाल सत्यपाल मलिक को असम में हवाई अड्डे पर छोड़कर आ रहे उनके काफिले पर, अज्ञात उपद्रवियों ने मंगलवार को पत्थरों से हमला कर दिया। राजभवन के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है।
  • POLICE
    भाषा
    वाराणसी: सुप्रीम कोर्ट के सामने आत्मदाह के मामले में दो पुलिसकर्मी सस्पेंड
    18 Aug 2021
    पुलिस की ओर से जारी एक बयान में बताया गया है कि इस मामले में कैंट थाना प्रभारी राकेश सिंह और विवेचक गिरिजा शंकर को निलंबित कर दिया गया है।
  • पीपल्स डिस्पैच
    इज़रायल की क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में फ़िलिस्तीनी घरों और अन्य ढांचों पर अवैध कार्रवाई
    18 Aug 2021
    इजरायली नगरपालिका अधिकारियों ने मंगलवार 17 अगस्त को कब्जे वाले वेस्ट बैंक में पूर्वी येरुशेलम शहर के दक्षिण पश्चिम में स्थित
  • पीपल्स डिस्पैच
    उरुग्वे के विपक्ष और ट्रेड यूनियनों ने सरकार के 'अकाउंटेबिलिटी एंड बजट बिल' को ख़ारिज किया
    18 Aug 2021
    अकाउंटेबिलिटी एंड बजट बिल को राष्ट्रपति लुइस लैकले पोउ की दक्षिणपंथी सरकार द्वारा पेश किया गया जो सरकार की बचत के नाम पर विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्रों के बजट में और कटौती करना चाहता है।
  • Muharram
    भाषा
    मुहर्रम का जुलूस कवर कर रहे पत्रकारों की पिटाई करने वाले पुलिस अधिकारी के ख़िलाफ़ कार्रवाई का आदेश
    18 Aug 2021
    पुलिस ने यहां मुहर्रम जुलूस की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों के एक समूह पर मंगलवार को लाठियां चलाई और उन्हें मारा-पीटा था। विभिन्न वर्गों द्वारा उसकी आलोचना की जा रही है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License