NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
घटना-दुर्घटना
पुस्तकें
भारत
राजनीति
जज लोया को न्याय नहीं मिला : जस्टिस पाटिल
दस्तावेज़ी किताब ‘सत्ता की सूली’ का दिल्ली और अहमदाबाद में विमोचन। ये किताब जज लोया समेत अन्य संदिग्ध मौतों की पूरी कहानी क्रमबद्ध तरीके से हमारे सामने रखती है। और परत दर परत सच, ख़ौफ़नाक सच हमारे सामने खुलता जाता है, और हम देखते हैं कि ये सच ही है, ये न्याय ही है जो सूली पर चढ़ा दिया गया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
17 Apr 2019
दिल्ली में 'सत्ता की सूली' का लोकार्पण

“ न्यायपालिका को सिर्फ़ फ़ैसला नहीं देना चाहिए, बल्कि फ़ैसले में न्याय हुआ है ये भी दिखना चाहिए। हम तो हमेशा कहते हैं कि न्यायपालिका हमेशा न्याय करती है। ऐसा नहीं होता है। कभी-कभी सिर्फ़ जज़मेंट होता है। और इसमें न्याय नहीं होता है। लोया का मामला इसका उदाहरण है…। "

यह कहना है बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बीजी कोलसे पाटिल का। यह बात उन्होंने जज लोया सहित अन्य योग्य मौतों पर आधारित पुस्तक ' सत्ता की सूली ' की भूमिका में कही है। इस पुस्तक को लिखा गया है तीन पाठकों दोस्तों महेंद्र मिश्र, प्रदीप सिंह और उपेंद्र चौधरी ने, जिसका लोकार्पण सोमवार को दिल्ली में और मंगलवार को अहमदाबाद में हुआ।

56894486_10212262274625943_7697956303657762816_o.jpg

दिल्ली के प्रेस क्लब में हुए लोकार्पण समारोह में खुद जस्टिस बीजी कोलसे पाटिल मौजूद रहे और उन्होंने सत्ता से डरने की बजाय उससे संघर्ष की सलाह दी। इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह, पूर्व आईपीएस वीएन राय, वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश, भाकपा-माले पोलित ब्यूरो की सदस्या और महिला एक्टिविस्ट कविता कृष्णन और इस मामले को लेकर आज भी संघर्षरत वकील, गवाह और पीड़ित सतीश यूके भी उपस्थित थे। सबने बारी-बारी से इस किताब और जज लोया की संदिग्ध मौत समेत अन्य मौतों पर अपने विचार रखे और इस साहस पूर्ण काम के लिए तीनों लेखकों और प्रकाशक को बधाई दी।

जस्टिस बीजी कोलसे पाटिल ने कहा कि जज लोया को अभी न्याय नहीं मिला है। आज आपका मुंह यह कह कर बंद करने की कोशिश की जाती है कि न्यायपालिका के निर्णयों की आलोचना नहीं कर सकते हैं, लेकिन आप जज की नहीं फैसले की आलोचना कर सकते हैं। ये कोई नई बात नहीं है। सत्ता हमेशा से डराती रही है और डराती रहेगी। इसलिए सत्ता का डर छोड़ कर संघर्ष में उतरो।

जस्टिस पाटिल ने कहा कि सच की लड़ाई हमेशा जारी रहनी चाहिए। सरकार बहुत करेगी आपको कुछ दिन जेल में डाल देगी। लेकिन इससे डरना नहीं है। लोग अपने को अमेरिका और इग्लैंड रिटर्न कहते हैं लेकिन मैं अपने को जेल रिटर्न कहता हूं। जनता के हित में संघर्ष करते रहिए, कभी न कभी सफलता मिलेगी। 

इस पूरे प्रकरण में पीड़ित और गवाह नागपुर से आये अधिवक्ता सतीश यूके ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट में जज लोया की मौत से जुड़े रिकॉर्ड को एक-एक करके जमा कराया जा रहा था। तभी मुझे संदेह हुआ। और हमने जज लोया की मौत से जुड़े ढेर सारे दस्तावेजों को बचा लिया। क्योंकि मुझे पता था कि इस केस का क्या हश्र होने वाला है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि जज लोया मामले से जुड़े होने के कारण महाराष्ट्र सरकार ने उनको बहुत परेशान किया। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस के लोगों ने उन्हें धमकी दी, प्रशासन ने परेशान किया। उन पर जानलेवा हमले हुए।

सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि यह किताब उन तमाम कड़ियों को जोड़ती है जिसमें एक एक मौत के बाद दूसरी मौत होती चली जाती है। उन्होंने लोकतंत्र और उसके ख़तरों का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट के चार जजों का बाहर आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने को भी याद किया और कहा कि आज उनमें से एक जज हमारे चीफ जस्टिस हैं, जिन्होंने उस समय डेमोक्रेसी को डेंजर बताया था। और इस बात को पूरे देश ने महत्व दिया था। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वे चीफ जस्टिस से ये सवाल ज़रूर पूछें कि आज भी वही डेमोक्रेसी और वही डेंजर है जो जनवरी, 2018 में था लेकिन वे आज इसे बचाने के लिए क्या कर रहे हैं।

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने चिंता जताई कि आज मीडिया में फॉलोअप स्टोरी नहीं हो रही है। जज लोया से जुड़ी स्टोरी को जब कारवां पत्रिका ने प्रकाशित किया तो पूरे देश में हलचल मची। उसके बाद एक बड़े अखबार ने इस स्टोरी को दबाने के लिए स्टोरी की। ये एक बड़ा झटका था कि जो अख़बार साहसी पत्रकारिता का दावा करता है वही एक संदिग्ध मौत के मामले में नये सवाल उठाने की बजाय उस स्टोरी में क्या कमियां हैं इसे उजागर करता है। उन्होंने हिन्दी पत्रकारों से खोजी पत्रकारिता और फॉलोअप स्टोरी पर ध्यान देने की अपील की।

पूर्व आईपीएस विकास नारायण राय ने क्रिमिनल प्रोसीजर में कमियों और राज्य के नजरिये में कमी को फोकस करते हुए बताने की कोशिश की कि कैसे अपराधी छूट जाते हैं। इस मामले में उन्होंने पूरी प्रणाली पर फिर से विचार करने की जरूरत पर बल दिया।

भाकपा-माले नेता कविता कृष्णन ने लोया मामले की शुरुआत का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे जब आप किसी पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाते हैं तो सत्ता से जुड़े लोग आपकी आवाज को दबाने के लिए आपको बदनाम करने लगते हैं। 

विमोचन-लोकार्पण कार्यक्रम में कई वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, छात्र और अन्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन कवि-पत्रकार मुकुल सरल ने किया।   

इसी किताब का कल, मंगलवार को अहमदाबाद में भी विमोचन हुआ।

GUJRAT SATTA KI SULI.jpg

अहमदाबाद के सरदार पटेल स्मृति भवन में विमोचन के मौके पर मशहूर गुजराती लेखक एवं निरीक्षक पत्रिका के संपादक प्रकाश शाह, पूर्व आईपीएस और लेखक राजन प्रियदर्शी, शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सुखदेव पटेल, पाटीदार अनामत आंदोलन के अतुल पटेल और मजदूर पंचायत के नेता जयंती पंचाल मौजूद रहे।

आपको बता दें कि जज लोया की संदिग्ध मौत को लेकर सबसे पहले कारवां मैगज़ीन ने खुलासा किया था। किताब के लेखक और ‘जनचौक’ न्यूज़ पोर्टल के संस्थापक संपादक महेंद्र मिश्र ने बताया कि शुरू में हम लोग फॉलोअप स्टोरी कर रहे थे। लेकिन कुछ समय बाद कारवां में भी इस सिलसिले में खबरें छपना कम हो गईं। तब आगे बढ़कर जनचौक ने भी ज़िम्मेदारी संभाली।

लेखकों के मुताबिक इस पुस्तक में उनका अपना कोई विचार नहीं है, सब कुछ तथ्यों, दस्तावेजों तथा प्रकाशित खबरों पर आधारित है।

कुल मिलाकर इन किताबों में वास्तव में एक दस्तावेज़ है। एक केस हिस्ट्री। जो जज लोया सहित अन्य सहज मौतों की पूरी कहानी क्रमबद्ध तरीके से हमारे सामने रखती है। और परत दर परत सच , ख़ौफ़नाक सच हमारे सामने खुलता जाता है , और हम देखते हैं कि ये सच ही है , ये न्याय ही है जो सूली पर चढ़ा दिया गया है। 

इस पुस्तक को मज़दूरों के संघर्ष के अगुआ शंकर गुहा नियोगी और जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष चंद्रशेखर के बलिदान को समर्पित किया गया है।

Book
SATTA KI SULI
Judge Loya
Sohrabuddin encounter
Amit Shah
Bombay High Court
Indian justice system
cbi court
haren pandya
kausar bi
TULSIRAM PRJAPATI

Related Stories

तमिलनाडु: नेवेली पावर प्लांट हादसे में छह लोगों की मौत, इनका जिम्मेदार कौन?

दिल्ली : क्या सांप्रदायिक क़त्लेआम के शिकार पीड़ितों के साथ न्याय किया जा रहा है?

नागरिकों ने की शांति की अपील, हिंसा में अब तक 22 मौतें और अन्य ख़बरें

दिल्ली में हिंसा सोचा-समझा षड्यंत्र, इस्तीफा दें गृह मंत्री अमित शाह: सोनिया गांधी

ग्राउंड रिपोर्ट : दिल्ली में दंगाइयों ने कहा, 'हम पुलिस के जवानों की सुरक्षा करने आए हैं'

दिल्ली : कुछ इलाकों में फिर से हिंसा, मरने वालों की संख्या बढ़ कर सात हुई

सुरक्षा बलों में भी कम नहीं है महिलाओं का शोषण-उत्पीड़न : ITBP की पूर्व डिप्टी कमांडेंट की कहानी

चाँदनी चौक : अमनपसंद अवाम ने सांप्रदायिक तत्वों के मंसूबे नाकाम किए

झारखंड: बिरसा मुंडा की मूर्ति तोड़े जाने से झारखंडी समाज में आक्रोश

Daily Round-up: अमित शाह बने देश के नए गृहमंत्री


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 861 नए मामले, 6 मरीज़ों की मौत
    11 Apr 2022
    देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 11 हज़ार 58 हो गयी है।
  • nehru
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या हर प्रधानमंत्री एक संग्रहालय का हक़दार होता है?
    10 Apr 2022
    14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेहरू स्मृति संग्रहालय और पुस्तकालय की जगह बने प्रधानमंत्री संग्रहालय का उद्घाटन करेंगेI यह कोई चौकाने वाली घटना नहीं क्योंकि मौजूदा सत्ता पक्ष का जवाहरलाल…
  • NEP
    नई शिक्षा नीति का ख़ामियाज़ा पीढ़ियाँ भुगतेंगी - अंबर हबीब
    10 Apr 2022
    यूजीसी का चार साल का स्नातक कार्यक्रम का ड्राफ़्ट विवादों में है. विश्वविद्यालयों के अध्यापक आरोप लगा रहे है कि ड्राफ़्ट में कोई निरंतरता नहीं है और नीति की ज़्यादातर सामग्री विदेशी विश्वविद्यालयों…
  • imran khan
    भाषा
    पाकिस्तान में नए प्रधानमंत्री का चयन सोमवार को होगा
    10 Apr 2022
    पीएमएल-एन के शहबाज शरीफ, पीटीआई के कुरैशी ने प्रधानमंत्री पद के लिए नामांकन पत्र जमा किया। नए प्रधानमंत्री का चुनाव करने के लिए सोमवार दोपहर दो बजे सदन की कार्यवाही फिर से शुरू होगी।
  • Yogi
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: भाजपा में नंबर दो की लड़ाई से लेकर दिल्ली के सरकारी बंगलों की राजनीति
    10 Apr 2022
    हर हफ़्ते की प्रमुख ख़बरों को लेकर फिर हाज़िर हैं लेखक अनिल जैन
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License