NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
भारत
राजनीति
जलती ट्रेन के फैसले से उठते सुलगते मुद्दे!
मोदी के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बयान दिया है कि असीमानंद समेत सभी अपराधी निर्दोष थे, इसलिए बरी हो गए। जबकि एनआइए अदालत के जज जगदीप सिंह के फैसले के अनुसार एनआइए ने जानबूझ कर इस केस को खराब किया और इसलिए मजबूरी में उन्हें आरोपियों को बरी करना पड़ा।
विकास नारायण राय
30 Mar 2019
samjhauta express blast case
Image Courtesy: indianexpress.com

समझौता ट्रेन तो जल गई लेकिन अपने पीछे सुलगते मुद्दे छोड़ गयी। बारह साल बाद केस में फैसला तो आया लेकिन मोदी सरकार की जाँच में धांधली के चलते असीमानंद समेत सभी आरोपी बरी हो गये। जांच को मुख्यतः निम्न चार चरणों में देखा जा सकता है।

पहले चरण में हरियाणा पुलिस एसआईटी की शुरुआती एक वर्ष की जांच रही, जिसमें स्थापित हुआ कि इस जघन्य अपराध का केंद्र बिंदु इंदौर था और इसके तार पाकिस्तानी संगठनों से नहीं बल्कि उग्र हिन्दुत्ववादी समूहों से जुड़े हुए थे।

दूसरा चरण वह था जब सीबीआई ने करीब दो वर्ष जांच की मॉनिटरिंग की। इस दौरान जांच उपरोक्त लाइन पर ही आगे बढ़ी लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं की जा सकी|

2010 में आतंकी अपराधों की जांच के लिए केन्द्रीय एजेंसी एनआइए के गठन के बाद जांच उसके पास आ गयी और गिरफ्तारियां शुरू हुयीं। जांच की दिशा वही रही जो हरियाणा एसआईटी ने निर्धारित की थी। तीन अपराधी गिरफ्तार नहीं किये जा सके लेकिन नवम्बर 2011 में अदालत में चालान दे दिया गया।

चौथा चरण मई 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के साथ शुरू हुआ। एनआइए चीफ शरद कुमार ने आरएसएस और मोदी सरकार के दबाव में पलटी मारी और एजेंसी की सारी शक्ति केस में आरोपियों को बरी कराने में लग गयी। महत्वपूर्ण गवाह या तो बिठा दिए गए या उनकी गवाहियाँ ही नहीं कराई गयीं। तीन भगोड़े अपराधियों को पकड़ने के कोई प्रयास ही नहीं हुए। इस सब का लाभ आरोपियों को मिला।

मोदी के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बयान दिया है कि असीमानंद समेत सभी अपराधी निर्दोष थे, इसलिए बरी हो गए। जबकि एनआइए अदालत के जज जगदीप सिंह के फैसले के अनुसार एनआइए ने जानबूझ कर इस केस को खराब किया और इसलिए मजबूरी में उन्हें आरोपियों को बरी करना पड़ा।

प्रमुख सवाल यह बनता है कि अगर वाक़ई असीमानंद गिरोह निर्दोष था तो मोदी-जेटली की एनआइए ने उन पर मोदी शासन के पाँच वर्षों में भी मुक़दमा क्यों बनाये रखा? अगर कोई नये सबूत आ गये थे जो जाँच को नई दिशा दे रहे थे तो उनके आधार पर, क़ानून अनुसार, आरोपियों को अदालत से दोष मुक्त क्यों नहीं कराया गया?

क्या मोदी और जेटली राष्ट्र को बताएँगे कि एनआइए प्रमुख को रिटायर होने के बाद दो वर्ष तक सेवा विस्तार और फिर भारत सरकार के विजिलेंस कमिश्नर के पद से क्यों नवाजा गया? यह समझौता व अन्य कई आतंकी मामलों में असीमानंद और उसके साथियों के विरुद्ध केस कमजोर करने के पुरस्कार स्वरूप नहीं तो और क्या है?

इस तरह परोक्ष रूप से मोदी सरकार ने हाफ़िज़ सईद और मसूद अजहर जैसे आतंकियों को बचाने के पाकिस्तानी दाँव-पेंच का ही समर्थन कर दिया है। अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर किस मुँह से भारत सरकार आतंक विरोधी ललकार उठाएगी?

(लेखक पूर्व आईपीएस हैं। समझौता एक्सप्रेस विस्फोट की जांच की शुरुआत हरियाणा पुलिस की एसआईटी ने की थी जिसका नेतृत्व विकास नारायण राय ने ही किया था और आरोपियों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की थी। उनकी ये टिप्पणी उनके फेसबुक पेज से साभार ली गई है।)

samjhauta express blast case
samjhauta express blast case verdict
NIA
Aseemanand
Hindutva Agenda
hindutva terorr

Related Stories

मनासा में "जागे हिन्दू" ने एक जैन हमेशा के लिए सुलाया

‘’तेरा नाम मोहम्मद है’’?... फिर पीट-पीटकर मार डाला!

ख़बरों के आगे पीछे: हिंदुत्व की प्रयोगशाला से लेकर देशभक्ति सिलेबस तक

मथुरा: शाही ईदगाह पर कार्यक्रम का ऐलान करने वाले संगठन पीछे हटे, पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा

अख़लाक़ मॉब लिंचिंग को चार साल: इंसाफ़ तो छोड़िए, अभी आरोप भी तय नहीं

रुक नहीं रही राम के नाम पर हिंसा, इमाम से मारपीट के विरोध में प्रदर्शन  

उन्नाव में ‘जय श्री राम’ न बोलने पर मदरसे के छात्रों की पिटाई

अब लिंचिंग के लिए गाय के बहाने की भी ज़रूरत नहीं रही


बाकी खबरें

  • डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: मुझे गर्व करने से अधिक नफ़रत करना आता है
    01 May 2022
    जब गर्व खोखला हो तो नफ़रत ही परिणाम होता है। पर नफ़रत किस से? नफ़रत उन सब से जो हिन्दू नहीं हैं। ….मैं हिंदू से भी नफ़रत करता हूं, अपने से नीची जाति के हिन्दू से। और नफ़रत पाता भी हूं, अपने से ऊंची…
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    मई दिवस ज़िंदाबाद : कविताएं मेहनतकशों के नाम
    01 May 2022
    मई दिवस की इंक़लाबी तारीख़ पर इतवार की कविता में पढ़िए मेहनतकशों के नाम लिखी कविताएं।
  • इंद्रजीत सिंह
    मई दिवस: मज़दूर—किसान एकता का संदेश
    01 May 2022
    इस बार इस दिन की दो विशेष बातें उल्लेखनीय हैं। पहली यह कि  इस बार मई दिवस किसान आंदोलन की उस बेमिसाल जीत की पृष्ठभूमि में आया है जो किसान संगठनों की व्यापक एकता और देश के मज़दूर वर्ग की एकजुटता की…
  • भाषा
    अपने कर्तव्य का निर्वहन करते समय हमें लक्ष्मण रेखा का ध्यान रखना चाहिए: प्रधान न्यायाधीश
    30 Apr 2022
    प्रधान न्यायाधीश ने मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के संयुक्त सम्मेलन में कहा न्यायिक निर्देशों के बावजूद सरकारों द्वारा जानबूझकर निष्क्रियता दिखाना लोकतंत्र के स्वास्थ्य के…
  • भाषा
    जनरल मनोज पांडे ने थलसेना प्रमुख के तौर पर पदभार संभाला
    30 Apr 2022
    उप थलसेना प्रमुख के तौर पर सेवाएं दे चुके जनरल पांडे बल की इंजीनियर कोर से सेना प्रमुख बनने वाले पहले अधिकारी बन गए हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License