NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
विज्ञान
भारत
जम्मू-कश्मीर, महिलाएं और माननीय : शर्म हमको मगर नहीं आती...
बीजेपी के विधायक द्वारा कश्मीरी महिलाओं के लिए विवादास्पद  बयान दिए जाने के बाद, यह प्रश्न उठता है कि महिलाओं को लेकर राजनेता इतने असंवेदनशील क्यों हैं?
असद रिज़वी
09 Aug 2019
article 370
फोटो साभार : NDTV

केंद्र सरकर के जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के फैसले के बाद कश्मीरी महिलाओं के लिए सोशल मीडिया पर अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया जा रहा है। कश्मीरी महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने वालो में स्वयं को माननीय कहने वाले भी शामिल हो गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एक विधायक द्वारा कश्मीरी महिलाओं के लिए विवादास्पद बयान दिए जाने के बाद, यह प्रश्न उठता है कि महिलाओं को लेकर राजनेता इतने असंवेदनशील क्यों हैं? 

ऐसा पहली बार नहीं हुआ की किसी राजनीतिज्ञ ने महिलाओं के लिए विवादास्पद शब्दों का प्रयोग किया है। आम महिलाओं की बात तो क्या करें राजनीति में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर रहीं महिलाओं के प्रति भी पुरुष नेताओं का यही रवैया है।

अभी आम चुनाव 2019  के दौरान ही राजनीतिज्ञो द्वारा कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी, बहुजन समाज पार्टी (बसपा ) प्रमुख मायावती और बीजेपी नेता और अभिनेत्री जया प्रदा के लिए अभद्र टिप्पणियाँ की गई थीं। सिर्फ इतना ही नहीं है, राजनीतिज्ञ, बलात्कार के आरोपियों के पक्ष में रैलियाँ करते भी नज़र आते हैं। सत्तारूढ़ दल भी महिलाओं के विरूद्ध जघन्य अपराध  करनेवालों  के खिलाफ कार्रवाई करने से बचते हैं। शायद राजनीतिक संरक्षण की वजह से ही राजनीतिज्ञ, महिलाओं के लिए अपमानजनक टिप्पणियाँ करने से नहीं रुक रहे हैं। 

क्या कहा विधायक ने?

धारा 370 हटाने के फायदे गिनाते हुए उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से भाजपा विधायक ने एक सभा में कहा कि अब आप गोरी कश्मीरी लड़की से शादी कर सकते हैं।

जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा हटाए जाने के फैसले का जश्न मनाते हुए 6 अगस्त को विधायक विक्रम सैनी ने मुजफ्फरनगर में कहा कि सरकार के इस फैसले के बाद अब भाजपा कार्यकर्ता कश्मीर जा सकते हैं, वहाँ जमीन खरीद सकते हैं और शादी कर सकते हैं। अपने भाषण में विधायक ने यह भी कहा “भाजपा कार्यकर्ता बहुत उत्सुक हैं और जो कुंवारे हैं, उनकी शादी वहीं  (कश्मीर) करवा देंगे, अब वहां कोई दिक्कत नहीं है।”

ऐसे अनेको पोस्ट सोशल मीडिया पर देखे जा सकते हैं। फेसबुक और  ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर ऐसे आपत्तिजनक पोस्ट की बाढ़ आ गयी है। 

चुनाव के दौरान भी अभद्रता

देश में जब 2019 के चुनाव हो रहे थे उस समय भी महिलओं के विरुद्ध राजनीतिज्ञो द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया था। महिलाओं पर विवादित बयान देने में केंद्र सरकार के मंत्री भी पीछे नहीं है। केंद्रीय पयर्टन एवं संस्कृति राज्य मंत्री महेश शर्मा ने कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी को लेकर बुलंदशहर में एक विवादित बयान दिया था।

 मेरठ ज़िले में भी बीजेपी नेता ने 3 अप्रैल को इशारों ही इशारों में कांग्रेसी नेता प्रियंका गांधी को लेकर एक विवादित टिप्पणी की थी। विरोध होने के बाद जयकरण गुप्ता ने कहा कि मैंने किसी पर कोई टिप्पणी नहीं की है। लेकिन यह देखने की जरूरत है कि यह किसके लिए कही गई है।  
इससे पहले भाजपा के दयाशंकर सिंह ने बसपा प्रमुख मायावती के लिए अभद्र टिप्पणी की थी। उस वक़्त विरोध होने के बाद भाजपा ने दयाशंकर का पार्टी से निष्कासन कर दिया था। लेकिन उनकी पत्नी स्वाति को लखनऊ के सरोजिनी नगर सीट से टिकट दिया और उनके विधायक चुने जाने के बाद, पार्टी ने दयाशंकर का निष्कासन रद्द करके उन्हें दोबारा 12 मार्च 2017  पार्टी में वापस ले लिया।

भाजपा के विधायक सुरेंद्र नारायण सिंह ने भी बसपा प्रमुख पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म ख़ान ने एक चुनावी रैली के दौरान रामपुर से बीजेपी की उम्मीदवार जया प्रदा पर अभद्र टिप्पणी की, जिसपर काफी बवाल मचा और चुनाव आयोग ने उनके खिलाफ कार्रवाई की। हाल में ही आज़म ख़ान ने लोकसभा में सदन की अध्यक्षता कर रहीं महिला सांसद रमा देवी के लिए संसद में असंसदीय भाषा का प्रयोग किया। जिसके लिए उनको सभी पार्टियों की निंदा का सामना करना पड़ा था। आख़िर में उन्हें अपनी इस असंसदीय भाषा के लिए संसद में रमा देवी से माफ़ी मांगनी पड़ी। 

जम्मू एवं कश्मीर के कठुआ में 8 साल की बच्ची की गैंगरेप के बाद हत्या मामले में मालूम हुआ था कि आरोपियों के समर्थन में कठुआ में हुई रैली में उस समय के स्थानीय बीजेपी विधायक राजीव जसरोटिया भी शामिल हुए थे। रैली की कुछ तस्वीरें सामने आई थी जिसमें जसरोटिया साफ़ दिखाई पड़ रहे थे। 
इस रैली में जम्मू एवं कश्मीर सरकार में मंत्री रहे चौधरी लाल सिंह और चंद्र प्रकाश गंगा ने भी भाग लिया था। जिसके चलते दोनों को भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। राजनीतिक विरोध और सामाजिक दबाव को देखते हुए तत्कालीन बीजेपी-पीडीपी सरकार के दोनों मंत्रियों को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा था। 

यही नहीं राष्ट्रीय स्तर के नेताओ ने भी महिलाओं के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस तरह के विवादित बयान देने में पीछे नहीं हैं। मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने कांग्रेस नेता शशि थरूर के रिश्ते पर सवाल करते हुए स्वर्गीय  सुनंदा पुष्कर के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया और था और सुनंदा पुष्कर को 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड कहा था। यूपीए सरकार के भ्रष्टाचार पर सोनिया गांधी को निशाना बनाते हुए मोदी ने दिसंबर 2018 में  कहा था ये कांग्रेस की कौन सी विधवा थी जिसके खाते में रुपया जाता था?

उन्नाव रेप मामले में बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का नाम सामने आने के बाद भी योगी आदित्यनाथ सरकार ने उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की थी। अदालत के हुक्म पर सेंगर को गिरफ्तार किया गया था। उन्नाव पीड़िता सड़क दुर्घटना में गंभीर घायल हो गई और इसके पीछे भी सेंगर पर साज़िश करने का आरोप लगा था। गंभीर आरोप के बावजूद भी सेंगर का बीजेपी ने निष्कासन नहीं किया। जब राजनितिक और सामाजिक दबाव बढ़ा और अदालत सख्त हुई तब सेंगर को पार्टी से निष्कासित किया गया। 

महिला फेडरेशन उत्तर प्रदेश  की अध्यक्ष आशा मिश्रा कहती है महिलाएं राजनीति और समाज के विभिन क्षेत्रों में आगे आई हैं, उनको रोकने के लिए पुरुष राजनीतिज्ञ उनके विरुद्ध अपमानजनक भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। आशा मिश्रा कहती है की बड़े दुःख का विषय है कि कुछ लोग कश्मीरी महिलाओं के लिए सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की सचिव सीमा राणा ने कश्मीरी महिलाओ के लिए सोशल मीडिया पर आ रही अपमानजनक पोस्टों की निंदा करते हुए कहा कि महिलाओं पर अशोभनीय टिप्पणियां करने वालो को सत्तारूढ़ दल का समर्थन हासिल है।  

bjp mla vikram saini
controversial statement
BJP
crimes against women
Article 370
Jammu and Kashmir
Congress
BSP

Related Stories

आख़िर कोवैक्सीन को लेकर सवाल क्यों उठ रहे हैं?

रोमिला थापर: "ऐसी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को अमल में लाया जाना चाहिए,जिसके तहत सभी लोग आते हों"

देश भर में एनआरसी, कोलंबिया की हड़ताल और अन्य

झारखंड : 5 चरणों में चुनाव को लेकर उठ रहे सवाल?

ग़लत जानकारी देना भी एक अपराध है : देवेंद्र मेवाड़ी

डेली राउंड अप : INX मीडिया मामला, अयोध्या विवाद और अन्य ख़बरें

जटिल है जनसंख्या नियंत्रण का प्रश्न

मीडिया को मिले डर से आज़ादी 

सरकार की कश्मीर पर कार्रवाई देश में आर्थिक संकट से ध्यान भटकाती है ?

इलेक्शन हैकिंग : क़िस्से दूर और पास के


बाकी खबरें

  • अफ़ग़ानिस्तान: अपने हक़ के आवाज़ उठाती महिलाएं, तालिबान से मांग रही हैं बराबरी का अधिकार
    सोनिया यादव
    अफ़ग़ानिस्तान: अपने हक़ के आवाज़ उठाती महिलाएं, तालिबान से मांग रही हैं बराबरी का अधिकार
    04 Sep 2021
    महिलाएं अब सोशल मीडिया पर मदद की गुहार लगाने के बजाय तालिबान की आंखों में आंखें डालकर अपने शिक्षा और रोजगार का हक़ मांग रही हैं, अपनी आज़ादी के लिए संघर्ष कर रही हैं।
  •  आम आदमी पार्टी द्वारा निकाली जा रही तिरंगा यात्रा जो 14 अगस्त को लखनऊ से शुरू हुई। यह 14 सितंबर को अयोध्या में निकाली जाएगी।
    असद रिज़वी
    सियासत: हर दल में अयोध्या जाने की होड़
    04 Sep 2021
    बीएसपी ने अयोध्या में राम दर्शन से अपने चुनाव अभियान की शुरुआत की तो 14 सितंबर को ‘आप’ की तिरंगा यात्रा “श्रीराम जन्मभूमि” जाएगी। ओवैसी भी अपने तीन दिनों के यूपी दौरे की शुरुआत अयोध्या से कर रहे हैं।
  • सईद नक़वी
    विनीत तिवारी, हरनाम सिंह
    अफ़ग़ानिस्तान को पश्चिमी नजर से देखना बंद करे भारतीय मीडिया: सईद नक़वी
    04 Sep 2021
    ''अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने से पहले अमेरिका की जासूसी संस्था सीआईए प्रमुख ने तालिबान नेता बगदादी से मुलाकात की थी। उनके बीच में आपस में क्या तय हुआ वह हम नहीं जानते। वर्तमान में अफ़ग़ानिस्तान की कमजोर और…
  • मॉनीटाइजेशन का नाम बदनाम ना करो!
    राजेंद्र शर्मा
    मॉनीटाइजेशन का नाम बदनाम ना करो!
    04 Sep 2021
    कटाक्ष: मोदी जी कुछ भी करें, इन्हें विरोध ही करना है। पहली पारी में मोदी जी ने डीमोनिटाइजेशन किया, तो इन्होंने उसका विरोध। अब मोदी जी मॉनीटाइजेशन कर रहे हैं, सो उसका भी विरोध कर रहे हैं।
  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मुज़फ़्फ़रनगर महापंचायत : हम देश बचाने निकले हैं...
    04 Sep 2021
    किसानों के नज़दीक अब बात न सिर्फ़ खेत बचाने की है, न खलियान बचाने की, उनकी चिंता अब देश बचाने की भी है। और देश बचाने के लिए किसान रविवार 5 सितंबर को मुज़फ़्फ़नगर में जुट रहे हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License