NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
पाकिस्तान
अमेरिका
जम्मू-कश्मीर पर भारत का नज़रिया खेदपूर्ण है
सभी तरह से जम्मू और कश्मीर की ज़मीनी स्थिति काफी विस्फोटक है और इंसान का दु:ख एक चीख़ की हद तक बढ़ गया है।
एम.के. भद्रकुमार
14 Aug 2019
Translated by महेश कुमार
jammu kashmir
चीन के स्टेट काउंसलर और विदेश मंत्री वांग यी, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ, बीजिंग में, 12 अगस्त, 2019 को आपसी बातचीत में शामिल थे।

दिल्ली के दो प्रमुख अखबारों में इस पर संपादकीय में दिखाई दिए, जिसमें सरकार से जम्मू-कश्मीर के घटनाक्रम पर एक विश्वसनीय, आकर्षक राजनयिक कहानी पेश करने का आग्रह किया है।

भारतीय नज़रिया काफी हद तक घरेलू दर्शकों पर केंद्रित है। इन संपादकियों के ज़रिए अनुमान लगाया गया है कि जम्मू और कश्मीर में स्थिति वास्तव में काफी "सामान्य" है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की कश्मीरी मुसलमानों के साथ श्रीनगर के नुक्कड़ पर मटन बिरयानी खाने की तस्वीरें छप रही हैं। (वास्तव में, अब यह साबित हो गया है कि यह जनता को धोखे में रखने की एक चाल है।)

इस तरह का भोंडा प्रचार लोगों के दिलों और दिमाग को नहीं जीत पाएगा। किसी कहानी को तर्कसंगत रूप से गढ़ना होगा। यह सामान्य ज्ञान की बात है कि कश्मीरी मुसलमानों के बीच सरकार के कदम की बहुत ही कम स्वीकृति है।

जब भारत की कहानी को बाहरी दुनिया में पेश करने की बात आती है, तो भारत को इस तथ्य को ध्यान रखना चाहिए कि भारत का मामला अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सामने उड़ान भर रहा है, इसलिए सरकार को उपज़े हालात पर संवेदना और विशेषज्ञता को दिखाने में सक्षम होना चाहिए।

सरकार कूटनीतिक स्तर पर इस पहल का आगाज़ कर इस पल को अपने पक्ष में कर सकती थी अगर गृह मंत्री अमित शाह द्वारा संविधान के अनुच्छेद 370 को रद्द करने को जिस गति से संसद के दोनों सदनों मे पेश किया और पारित करवाया उसके तुरंत बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर को खड़ा होकर कह देना चाहिए था कि वे क्षेत्रीय सुरक्षा, शांति और स्थिरता के सर्वोत्तम हितों के लिए व्यापक बातचीत में पाकिस्तान के साथ सभी मतभेदों पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं।

बेशक, इस तरह की एक महत्वपूर्ण पहल के लिए एक कल्पना, दूरदृष्टि और ज्ञान की आवश्यकता होती है - और, सबसे महत्वपूर्ण होता है,नेतृत्व के स्तर पर राजनीतिक साहस का होना। राज्य के कामकाज और कूटनीति में कमी भयावह स्तर की है।

एक स्वधर्मी रवैया काम नहीं करेगा। सोमवार को बीजिंग में चीनी समकक्ष स्टेट काउंसलर और विदेश मंत्री वांग यी के सामने विदेश मंत्री ने मसले विभिन्नता पेश की। विदेश मंत्री ने भारतीय रुख को स्पष्ट करते हुए निम्नलिखित बयान पढ़ा:

एक, कश्मीर के मामले में संवैधानिक संशोधन "भारत का आंतरिक मामला" है और " एकमात्र देश का ही विशेषाधिकार" है।

दो, जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति (लद्दाख की स्टेटस में किए परिवर्तन सहित) का उन्मूलन "बेहतर प्रशासन और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा"।

तीन, सरकार के इस कदम का चीन के साथ "भारत की बाहरी सीमाओं या वास्तविक नियंत्रण रेखा पर इसका कोई असर नहीं" पड़ेगा।

और, चार, भारत "कोई अतिरिक्त क्षेत्रीय दावे नहीं कर रहा है।"

अविश्वसनीय रूप से पर्याप्त है, कि विदेश मंत्री ने किस तरह से चीन की "कश्मीर में उथल-पुथल की हालिया वृद्धि पर गंभीर चिंता" को संबोधित क़िया हैं; ऐसी कोई भी एकतरफा कार्रवाई जो कश्मीर में स्थिति को जटिल बना सकती है, उसे नहीं किया जाना चाहिए; कश्मीर मुद्दा क्षेत्र के औपनिवेशिक इतिहास से पैदा हुआ एक विवाद है और इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार शांतिपूर्ण तरीके से संभाला जाना चाहिए, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों और पाकिस्तान और भारत के बीच द्विपक्षीय समझौते के आधार पर ऐसा होना चाहिए "; और, इसकी अपेक्षा की जाती है कि "भारत क्षेत्रीय शांति और स्थिरता में एक रचनात्मक भूमिका निभाएगा।" (XINHUANET, XINHUANET,XINHUANET,GLOBAL TIMES)

जीवन वास्तविक है। विदेश मंत्री का बयान भारत के भीतर एक मर्दाना या आक्रमक रवैये के रूप में गूंज सकता है, लेकिन यह विदेश में उपहास का पात्र ही बनेगा - और यहां तक कि चाणक्यपुरी के राजनयिक एन्क्लेव में भी।

वास्तव में, किसी भी पी-5 सदस्य देश ने भारत को इस पर समर्थन नहीं दिया है। अब तक इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि रूसी विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर भारत को समर्थन दे दिया है - न तो इसे विदेश मंत्रालय की वेबसाइट; या तास और न ही नोवोस्ती रिपोर्ट में दर्शाया गया है;न ही दबाव में न आने वाले रूसी मीडिया में इसका कोई बयान है। कुछ गैर-विश्वसनीय लोग भारतीय तरीके से अच्छी तरह से वाकिफ थे, जाहिर तौर पर शुक्रवार की रात को फर्जी खबरें फैलीं और अगली सुबह तक यह भारत के भीतर "ब्रेकिंग न्यूज" बन गई थी। इससे ज्यादा दयनीय क्या हो सकता है।

सीधे शब्दों में कहा जाए तो विदेश मंत्री का बयान भारतीय रुख के बारे में मौलिक रूप से त्रुटिपूर्ण है और यह केवल नुकसान कर सकता है,क्योंकि यह चर्चा के द्वार को ही बंद कर देता है। मुद्दा यह है कि कश्मीर एक अंतरराष्ट्रीय विवाद है और भारत ने प्रासंगिक आर्थिक प्रस्तावों का उल्लंघन कर जम्मू और कश्मीर की "स्थिति" को एकतरफा रूप से बदल दिया है। कोई भी भारत के दावे को स्वीकार नहीं करेगा कि यह एक "आंतरिक मामला" है।

विश्व जनमत इस तथ्य को स्वीकार करता है कि पाकिस्तान कश्मीर विवाद में वार्ता का भागीदार है। यह वह स्थिति है जिसकी वजह से भारत अपनी सीमाओं को नहीं बदल सकता है। और यह एक खराब सोच है कि एल.ओ.सी. या एल.ओ.ए.सी. पर "कोई असर" पड़ेगा। अगर चीजें इतनी सरल थीं, तो मोदी सरकार गिलगित-बाल्टिस्तान से गुजरने वाले सीपीईसी पर रोक क्यों नहीं लगा पाई? हम "क्षेत्रीय संप्रभुता" के नाम पर चिल्लाए ऐसा है,वैसा है, पर हुआ कुछ नहीं।

विश्व जनमत केवल यह विश्वास करेगा कि दिल्ली का वास्तविक उद्देश्य जनसांख्यिकीय संतुलन को बदलना है, ताकि भारतीय संघ के भीतर कोई भी मुस्लिम-बहुल राज्य न हो।

अगर आधुनिक इतिहास में इस तरह की एकतरफा हरकतें "आंतरिक मामले" इतने ही सरल हैं, तो कोई भी रूस को क्रीमिया के संबंध में मान्यता क्यों नहीं दे रहा है? बीजिंग क्यों हांगकांग में हस्तक्षेप से कतरा रहा है? अमेरिका दक्षिण चीन सागर में "नेविगेशन की स्वतंत्रता" पर जोर क्यों दे रहा है? नॉर्थ सी रूट और आर्कटिक पर अमेरिका क्यों भौं चढ़ा रहा है? फ़ारस की खाड़ी के मामले में ईरान का संप्रभु क्षेत्र होने के दावे में क्या गलत है?तो फिर श्रीलंका की महिंद्रा राजपक्षे को तमिल समस्या को इसी तरह से हल करने से कौन रोक सकता है (जैसा कि उसने पहले ही संकेत दिया था)?

मोदी सरकार आने वाली पीढ़ियों के लिए इस तरह की संकीर्ण सोच से बड़ी और न समाधान होने वाली समस्या खड़ी कर रहे हैं। विश्लेषकों ने(AAऔर SCMP.COM) कहा है कि लद्दाख के स्टेटस में किए गए बदलाव से भारत-चीन सीमा विवाद अविश्वसनीय रूप से जटिल हो जाएगा और समाधान की परिधि से बाहर हो जाएगा। भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर स्थिति गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती है।

इस पहेली को सुलझाने और संबोधित करने का एकमात्र तरीका यह है कि हम पाकिस्तान को यह प्रस्ताव दें कि भारत इन मतभेदों पर चर्चा करने के लिए तैयार है। सौभाग्य से, पाकिस्तान भी ख़राब स्थिति का सामना कर रहा है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में से कोई भी खड़ा होकर भारत को इस कदम को वापस लने के लिए नही कह रहा है।

लब्बोलुआब यह है कि भारत को पाकिस्तान के साथ अपने मतभेदों को सुलझाने के लिए द्विपक्षीय वार्ता की अनिवार्यता के खुद के रुख के लिए व्यापक स्वीकृति प्राप्त है। भारत को अब इस विशेषाधिकार का चतुराई से इस्तेमाल करना चाहिए। हमेशा अनौपचारिक आश्वासन देना संभव है कि कश्मीर घाटी का कोई "उपनिवेशिकरण" नहीं होगा। आखिरकार, हमारे पास भारत के कई क्षेत्रों के लिए ऐसे अंतर्निहित सुरक्षा उपाय हैं।

Image removed.

Capture_8.PNG

प्रदर्शनकारी  कश्मीर को बंद करने के विरोध में एक अस्पताल की आपातकालीन इकाई के बाहर नारेबाजी कर रहे हैं, श्रीनगर 9 अगस्त, 2019। रायटर

इस अवसर की खिड़की लंबे समय तक खुली नहीं रहेगी। सभी तरह से जम्मू और कश्मीर की जमीनी स्थिति काफी विस्फोटक है और इंसान का दु:ख एक चीख़ की हद तक बढ़ गया है। पीएम इमरान खान का एक और पुलवामा होने की बात का पूर्वानुमान कोई गलत नहीं हो सकता है। दिल्ली के सामने जम्मू-कश्मीर में चारों ओर लगे मलबे के ढेर से एक नई वास्तुकला का निर्माण करने के लिए, पाकिस्तान के साथ बातचीत काफी महत्वपूर्ण है।

 

सौजन्य: इंडियन पंचलाइन

 

S Jaishankar
beijing
China
pakisatn
India
BJP
Ministry of External Affairs

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • महाराष्ट्र में भूस्खलन और बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 149 हुई
    भाषा
    महाराष्ट्र में भूस्खलन और बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 149 हुई
    26 Jul 2021
    इस हफ्ते की शुरुआत में हुई भारी बारिश के कारण महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में भूस्खलन हुआ है, जिसमें रायगढ़ जिले के तालिये गांव में हुआ सबसे घातक भूस्खलन भी शामिल है।
  • राजनीति: राज्यसभा की आठ सीटें खाली लेकिन उपचुनाव सिर्फ़ एक पर
    अनिल जैन
    राजनीति: राज्यसभा की आठ सीटें खाली लेकिन उपचुनाव सिर्फ़ एक पर
    26 Jul 2021
    हैरानी की बात यह है कि अपने कामकाज और फ़ैसलों पर लगातार उठते सवालों के बावजूद चुनाव आयोग ऐसा कुछ करता नहीं दिखता, जिससे लगे कि वह अपनी मटियामेट हो चुकी साख को लेकर जरा भी चिंतित है।
  • कोरोना
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 39,361 नए मामले, 416 मरीज़ों की मौत
    26 Jul 2021
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 39,361 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 1.30 फ़ीसदी यानी 4 लाख 11 हज़ार 189 हो गयी है।
  • किसान आज देश की संसद का एजेंडा तय कर रहे हैं, कल देश की राजनीति की तक़दीर तय करेंगे
    लाल बहादुर सिंह
    किसान आज देश की संसद का एजेंडा तय कर रहे हैं, कल देश की राजनीति की तक़दीर तय करेंगे
    26 Jul 2021
    इस अभूतपूर्व आंदोलन में महिलाओं ने अप्रतिम भूमिका निभाई है। यह कहना अतिशयोक्ति न होगी कि महिलाओं की इस अग्रगामी भूमिका के बिना किसान-आंदोलन का वह चेहरा देश-दुनिया के सामने न होता, जो आज है।
  • modi bhakt
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    "दूर हूँ प्रश्न से, भक्त हूँ स्वप्न से, मैं नहीं जागता, मैं नहीं जागता..."
    25 Jul 2021
    इतवार की कविता में आज पेश है इंदौर से ताल्लुक़ रखने वाले युवा कवि पुनीत शर्मा द्वारा लिखी हबीब जालिब की नज़्म "मैं नहीं जानता" की पैरोडी "मैं नहीं जागता"...
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License