NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
जनसा: साहित्य के सामाजिक सरोकारों का पर्व
जयपुर में 24 और 25 जनवरी 2018 को पहला जान साहित्य पर्व (जनसा) मनाया गया। साहित्य की सामाजिकता का यह एक प्रकार का उत्सव था, जहाँ भाँति-भाँति के लोगों ने शिरक़त की।
न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
27 Jan 2018

जयपुर में 24 और 25 जनवरी 2018 को पहला जान साहित्य पर्व (जनसा) मनाया गया। साहित्य की सामाजिकता का यह एक प्रकार का उत्सव था, जहाँ भाँति-भाँति के लोगों ने शिरक़त की। इस पर्व का आयोजन 24 साहित्यिक और सामाजिक संगठनों ने मिलकर किया।

जन सहित्य पर्व
जनवादी लेखक संघ
जनवाद
समाजवाद
साम्प्रदायिकता
पूँजीवाद

Related Stories

तीन लेखक संगठनों का साझा कार्यक्रम : “सर जोड़ के बैठो कोई तदबीर निकालो”

मीडिया पर खरी खरी भाषा सिंह के साथ: दक्षिणपंथी साम्राज्य में लोकतंत्र की दुर्गति

बढ़ती आर्थिक असमानता: भारत में 2027 तक अरबपतियों की तादाद तीन गुना बढ़ जाएगी

दिल्ली में अखंड भारत मोर्चा द्वारा सांप्रदायिक दंगे भड़काने की कोशिश

अदानी समूह का झारखंड पावर प्लांट बांग्लादेश को मदद नहीं पहुंचाएगा, बल्कि ऑस्ट्रेलियाई कोयला परियोजना के दावे को मज़बूत करेगा, सिडनी एनजीओ का दावा

नीतीश कुमार BJP-RSS के राजनीतिक बंधक हैं : उर्मिलेश

ये दंगे सुनियोजित थे

तमिलनाडु के विपक्षी दलों ने 'राम राज्य रथ यात्रा’ को अनुमति देने का विरोध किया

केदारनाथ सिंह का निधन प्रगतिशील-जनवादी धारा के लिए एक अपूरणीय क्षति है:जनवादी लेखक संघ

लेनिन की सिर्फ मूर्ति टूटी है, उनके विचार नहीं


बाकी खबरें

  • अन्ना आंदोलन
    लाल बहादुर सिंह
    आज़ादी@75: जेपी से लेकर अन्ना तक... भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों की पड़ताल
    14 Aug 2021
    राष्ट्रीय गौरव के ऐतिहासिक क्षण में हमारा गणतंत्र अपने जीवन की सबसे कठिन चुनौती का सामना कर रहा है। भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों से सरकारें तो बदलीं, लेकिन व्यवस्था परिवर्तन का नारा छलावा ही रहा।
  • उत्तरी छत्तीसगढ़ के जंगल सदियों से हाथियों का घर रहे हैं। हालांकि, बढ़ती खनन गतिविधियों और अन्य विकास परियोजनाओं ने उन्हें मानव आवास में आने के लिए मजबूर कर दिया है।
    विष्णुकांत तिवारी
    छत्तीसगढ़ : हाथी रिज़र्व प्रोजेक्ट में सरकार कर रही देरी, 3 साल में 45 हाथियों और 204 नागरिकों की गई जान
    14 Aug 2021
    सरकार लेमरू हाथी परियोजना को लगातार टाल रही है और उत्तरी छत्तीसगढ़ में वन्यजीव और मानव के बीच होते संघर्षों की वजह से मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
  • बिड़ला घराने की तिजोरी में हीरे पहुंचाने के लिए, बक्सवाहा के जंगलों को किया जा रहा तबाह- माकपा 
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिड़ला घराने की तिजोरी में हीरे पहुंचाने के लिए, बक्सवाहा के जंगलों को किया जा रहा तबाह- माकपा 
    14 Aug 2021
    ‘सरकार इन जंगलों के समानांतर जंगल लगाकर दस साल बाद भी हीरे निकाल सकती है, मगर उनका मकसद पर्यावरण बचाना नहीं, बल्कि बिड़ला की तिजोरी भरना और इसमें से मुनाफे की हड्डियां चूसना है।'
  • देहरादून में अपनी मांगों को लेकर रैली निकालती आशाएं, फोटो- सत्यम कुमार 
    सत्यम कुमार
    उत्तराखंड में धरने पर क्यों बैठी हुई हैं आशा कार्यकर्ता? सरकार से कहां तक पहुंची बातचीत!
    14 Aug 2021
    2 अगस्त से ही सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर आशा कार्यकर्ता धरने पर बैठी हुई हैं। मुख्यमंत्री से लेकर स्वास्थ्य सचिव तथा स्वास्थ्य महानिदेशक के साथ कई दौर की वार्ता हो चुकी है, परंतु इन सभी वार्ताओं का…
  • तालिबान ने अफ़गान जंगी सरदारों को रास्ते से हटाया
    एम. के. भद्रकुमार
    तालिबान ने अफ़गान जंगी सरदारों को रास्ते से हटाया
    14 Aug 2021
    क्या अशरफ़ गनी द्वारा देरी से पेश किए गए तालिबान विरोधी 'संयुक्त मोर्चे' का प्रस्ताव काम करेगा? आखिर सभी जंगी सरदार कभी न कभी तो विदेशी ताकतों का प्रश्रय ले ही चुके हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License