आप जानते हैं, एक जंग कितनी कीमत वसलूती है? ऐसे ही नाज़ुक समय में साहिर लुधियानवी को याद करने की ज़रूरत है, जिन्होंने कहा था, “जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी?”
पुलवामा हमले के बाद देश में “ बदला-बदला ” की आवाज़ें गूंज रही हैं। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और उससे जुड़े तमाम संगठन , कुछ अन्य दल और कुछ कथित मुख्यधारा के न्यूज़ चैनल-अख़बार गैरज़िम्मेदाराना बयान या ख़बरें देकर पूरे देश में एक युद्ध उन्माद जगा रहे हैं। वे नहीं जानते कि एक युद्ध या जंग कितनी कीमत वसलूती है। ऐसे ही नाज़ुक समय में साहिर लुधियानवी को याद करने की ज़रूरत है, जिन्होंने कहा था , “ जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है, जंग क्या मसअलों का हल देगी... ”
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