NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अर्थव्यवस्था
जर्मनी की अथॉरिटी ने विस्तृत डेटा संग्रह रोकने का "फेसबुक" को दिया आदेश
बुंडेसकार्टेल्लम्ट ने कहा कि यूजर्स के लिए केवल दो विकल्प हैं पहला व्यापक या दखल देने वाले डेटा संग्रह के लिए सहमत होना और दूसरा इस सोशल मीडिया नेटवर्क पर खाता नहीं बनाना। उसने कहा कि इस तरह की स्वीकृति वास्तविक स्वीकृति नहीं है।

पीपल्स डिस्पैच
16 Feb 2019
facebook
image courtesy - the verge

जर्मनी की एंटीट्रस्ट अथॉरिटी (बुंडेसकार्टेल्लम्ट या एफसीओ) ने पिछले सप्ताह एक आदेश जारी कर फेसबुक को निर्देश दिया था कि वह अपने अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर यूजर्स के डेटा के व्यापक संग्रह को रोकने के लिए एक विस्तृत यूजर प्रोफाइल तैयार करे। यह आदेश बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पहली बार है जब किसी अथॉरिटी ने इशारा किया है कि फेसबुक की प्रभावी स्थिति और प्रतिस्पर्धा की कमी के कारण यूजर्स की गोपनीयता प्रभावित होती है।

फेसबुक या इसके (व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम) स्वामित्व वाले किसी अन्य प्लेटफॉर्म का उपयोग करने वालों की ये कंपनी इन सभी प्लेटफार्मों पर उनकी गतिविधियों का डेटा इकट्ठा करती है और यूजर्स की प्रवृत्तियों तथा प्राथमिकताओं के बारे में विस्तृत जानकारी के साथ एकल उपयोगकर्ता प्रोफ़ाइल का निर्माण करती है। यह प्रत्येक यूजर की पसंद और नापसंद के अनुकूल विज्ञापन दिखाने के उद्देश्य से करती है। वास्तव में डेटा संग्रह तीसरे पार्टी की वेबसाइटों तक भी पहुंचता है जो फेसबुक एनालिटिक्स या फेसबुक बिजनेस टूल जैसे कि लाइक और शेयर बटन का उपयोग करते हैं।

लेकिन जैसा कि बुंडेसकार्टेल्लम्ट के बयान में कहा गया है कि जब यूजर्स लाइक या शेयर बटन को दबाते हैं तो डेटा संग्रह का संकेत नहीं दिया जाता है। जैसे ही इन बटनों वाली वेबसाइट या फेसबुक एनालिटिक्स का उपयोग करने वाली वेबसाइट खोली जाती है यह अपने आप शुरू हो जाती है।

बुंडेसकार्टेल्लम्ट के अध्यक्ष एंड्रियास मुंड्ट ने कहा "अपनी खुद की वेबसाइट, कंपनी के स्वामित्व वाली सेवाओं और तीसरे पार्टी की वेबसाइटों के विश्लेषण के डेटा को मिलाकर फेसबुक अपने यूजर्स का विस्तृत प्रोफाइल प्राप्त कर लेता है और उनके ऑनलाइन की गतिविधि को जानता है।"

वर्तमान में जब कोई नया यूजर अपना प्रोफ़ाइल बनाता है तो डेटा संग्रह की अनुमति फेसबुक के उपयोग की शर्तों के अनुसार ली जाती है। हालांकि डेटा संग्रह के स्तर को चुनने का कोई विकल्प नहीं है जो एक उपयोगकर्ता के लिए सहज हो सकता है। केवल दो विकल्प हैं पहला व्यापक और दखल देने वाले डेटा संग्रह के लिए सहमत होना या दूसरा सोशल मीडिया पर कोई खाता नहीं खोलना। इसको लेकर बुंडेसकार्टेल्लम्ट ने कहा कि इस तरह की स्वीकृति वास्तविक स्वीकृति नहीं है।

मुंड्ट ने कहा, “एक प्रमुख कंपनी के रूप में प्रतिस्पर्धा कानून के तहत फेसबुक विशेष दायित्वों के अधीन है। अपने व्यवसाय मॉडल के संचालन में इस कंपनी को यह ध्यान रखना चाहिए कि फेसबुक यूजर्स व्यावहारिक रूप से अन्य सोशल नेटवर्क पर स्विच नहीं कर सकते हैं। यूजर्स के पास एकमात्र विकल्प या तो डेटा के व्यापक संयोजन को स्वीकार करना है या सोशल नेटवर्क का इस्तेमाल करने से बचना है। ऐसी मुश्किल स्थिति में यूजर्स की पसंद को स्वैच्छिक सहमति के रूप में निर्दिष्ट नहीं किया जा सकता है।”

अपने फैसले में जर्मनी की अथॉरिटी ने कहा कि फेसबुक और इसकी विभिन्न सेवाएं व्यक्तिगत रूप से और साथ ही अलग-अलग प्लेटफार्मों के भीतर डेटा एकत्र करना जारी रख सकती हैं लेकिन इन्हें केवल यूजर्स की अनुमति पर ही सिंगल यूजर प्रोफ़ाइल में समाहित किया जा सकता है। तीसरे पार्टी की वेबसाइटों से डेटा संग्रह के लिए भी इसी तरह की अनुमति की आवश्यकता होगी। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि बुंडेसकार्टेल्लम्ट ने आदेश दिया कि यूजर्स को फेसबुक का इस्तेमाल जारी रखना चाहिए भले ही वे इस अनुमति को अस्वीकार कर दें।

जवाब में फेसबुक ने कहा कि जर्मन अथॉरिटी यह विचार नहीं कर रहा है कि कंपनी सभी जीडीपीआर (जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन जो यूरोपीय संघ में लागू है) नियमों का अनुपालन कैसे करती है। इसने यह कहते हुए बुंडेसकार्टेल्लम्ट पर नाराजगी का इजहार किया कि इस रेगुलेटरी अथॉरिटी के पास गोपनीयता मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए आवश्यक दक्षता नहीं है।

फेसबुक ने लिखा, “जीडीपीआर यह निर्धारित करने के लिए कि क्या कंपनियां अपनी जिम्मेदारियों को पूरा कर रही है विशेष रूप से डेटा संरक्षण नियामकों को सशक्त बनाता है न कि प्रतिस्पर्धा अथॉरिटी को। और डेटा संरक्षण नियामकों को निश्चित रूप से उन निष्कर्षों को तैयार करने की विशेषज्ञता है।”

लेकिन बुंडेसकार्टेल्लम्ट ने यह स्पष्ट किया कि यह फेसबुक की दखल देने वाली डेटा संग्रह गतिविधियां हैं जो वास्तव में एंटीट्रस्ट क़ानूनों के उल्लंघन को साबित करती हैं। अथॉरिटी के वक्तव्य ने इस पर जोर दिया है कंपनी के गतिविधि शोषणकारी प्रकृति की थी और अपने प्रभुत्व की स्थिति का दुरुपयोग किया।

वक्तव्य के मुताबिक़, “प्रतिस्पर्धा क़ानून के आधार पर यह दृष्टिकोण नया नहीं है लेकिन फेडरल कोर्ट ऑफ जस्टिस के केस-लॉ से मेल खाता है जिसके तहत न केवल अत्यधिक कीमतें बल्कि अनुचित अनुबंध नियम और शर्तें भी शोषणकारी व्यवहार (तथाकथित शोषणकारी व्यावसायिक शर्तें) का निर्माण करती हैं।”

बाज़ार पर फेसबुक के वर्चस्व ने इसे एक ऐसी स्थिति में ला कर खड़ा किया है जहां इसका वर्तमान डेटा संग्रह गतिविधि से एकाधिकार का बड़ा खतरा है।

मुंड्ट के अनुसार, “आज, प्रतियोगिता में डेटा एक निर्णायक कारक है। फेसबुक के मामले में वे कंपनी के प्रभावी स्थान की स्थापना के लिए आवश्यक कारक हैं। एक तरफ यूजर्स को मुफ्त में प्रदान की जाने वाली सेवा है। वहीं दूसरी तरफ विज्ञापन के स्थान का आकर्षण और अहमियत यूजर्स डेटा की मात्रा और विस्तार के साथ बढ़ता है।”

कंपनी के पास बुंडेसकार्टेल्लम्ट के फैसले के ख़िलाफ़ अपील करने और अथॉरिटी के फैसले के ख़िलाफ़ अपनी दलीलें पेश करने या समस्या के संभावित समाधान पेश करने के लिए एक महीने का समय है। फेसबुक ने अपने बयान में कहा कि ऐसा करने की उसकी योजना है। हालांकि यदि ऐसा ही निर्णय होता है तो फेसबुक इस आदेश का अनुपालन करेगा और इसे लागू करने का तरीक़ा ढूंढेगा।


 

Facebook
WhatsApp
digital monopoly
germany
Mark Zuckerberg

Related Stories

यूक्रेन की स्थिति पर भारत, जर्मनी ने बनाया तालमेल

विज्ञापन में फ़ायदा पहुंचाने का एल्गोरिदम : फ़ेसबुक ने विपक्षियों की तुलना में "बीजेपी से लिए कम पैसे"  

बीजेपी के चुनावी अभियान में नियमों को अनदेखा कर जमकर हुआ फेसबुक का इस्तेमाल

फ़ेसबुक पर 23 अज्ञात विज्ञापनदाताओं ने बीजेपी को प्रोत्साहित करने के लिए जमा किये 5 करोड़ रुपये

कानून का उल्लंघन कर फेसबुक ने चुनावी प्रचार में भाजपा की मदद की?

यूक्रेन युद्ध की राजनीतिक अर्थव्यवस्था

मॉस्को कर रहा है 'गुड कॉप, बैड कॉप' का सामना

नॉर्ड स्ट्रीम 2: गैस पाइपलाइन को लेकर दूसरा शक्ति संघर्ष

अफ़्रीका : तानाशाह सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए कर रहे हैं

डेटा निजता विधेयक: हमारे डेटा के बाजारीकरण और निजता के अधिकार को कमज़ोर करने का खेल


बाकी खबरें

  • एपी
    क्रिस रॉक को थप्पड़ मारने को लेकर ऑस्कर ने विल स्मिथ पर 10 साल का प्रतिबंध लगाया
    09 Apr 2022
    स्मिथ की हरकत पर अकादमी के ‘बोर्ड ऑफ गवर्नर्स’ की बैठक के बाद यह फैसला किया गया है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें भविष्य में इन पुरस्कारों के लिए नामित किया जाएगा या नहीं।
  • kashmiri student
    नासीर ख़ुएहामी
    घोर ग़रीबी के चलते ज़मानत नहीं करा पाने के कारण कश्मीरी छात्र आगरा जेल में रहने के लिए मजबूर
    09 Apr 2022
    विश्वास की कमी और वित्तीय दबाव उन परिवारों के रास्ते में आड़े आ रहे हैं, जिनके बच्चों को क्रिकेट विश्व कप में पाकिस्तान के हाथों भारत की शिकस्त के बाद जेल में डाल दिया गया था, हालांकि उन्हें ज़मानत…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    फरीदाबाद : आवास के मामले में सैकड़ों मजदूर परिवारों को हाईकोर्ट से मिली राहत
    09 Apr 2022
    पिछले कुछ सालों में दिल्ली एनसीआर और उसके पास के क्षेत्रों में सरकारों ने बड़ी तेज़ी से मज़दूर बस्तियों को उजाड़ना शुरू किया। ख़ासकर कोरोना काल में सरकार ने बड़े ही चुपचाप तरीके से अपने इस अभियान को चलाया…
  • गुरसिमरन बख्शी
    मांस खाने का राजनीतिकरण करना क्या संवैधानिक रूप से सही है?
    09 Apr 2022
    मांस पर प्रतिबंध लगाना, किसी भी किस्म के व्यापार करने के मामले में मौलिक अधिकार का उल्लंघन कहलाता है और किसी वैधानिक क़ानून के समर्थन के अभाव में, यह संवैधानिक जनादेश के मामले में कम प्रभावी हो जाता…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,150 नए मामले, 83 मरीज़ों की मौत
    09 Apr 2022
    देश में अब तक कोरोना से पीड़ित 98.76 फ़ीसदी यानी 4 करोड़ 25 लाख 1 हजार 196 मरीज़ों को ठीक किया जा चुका है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License