NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखण्ड : ‘नए भारत’ के विकास के अँधेरे में जीने को अभिशप्त कुन्दरिया के मल्हार
यहाँ बसने वाले कुल 45 परिवार के लोगों के पास कहने को तो वोटर आईडी, आधार कार्ड तथा कुछ के पास राशन कार्ड ज़रूर हैं लेकिन रहने को एक इंच भी ज़मीन नहीं हैI इन्हें आज तक किसी भी सरकारी योजना का कोई लाभ नहीं मिल सका है।
अनिल अंशुमन
27 Nov 2018
jharkhand

22 नवंबर को दिल्ली के इंडिया टुडे स्टेट ऑफ स्टेट्स कॉन्क्लेव के भव्य आयोजन में उपराष्ट्रपति महोदय ने झारखण्ड को मोस्ट इम्प्रूव्ड राज्य का दर्जा दियाI राज्य को यह दर्जा कथित तौर पर आधारभूत संरचना के निर्माण क्षेत्र में किये जा रहे बेहतर कार्य करने वाले राज्यों में अव्वल होने के लिए मिलाI हमेशा की तरह मुख्यमंत्री जी ने फ़ौरन खुद की पीठ ठोकी और राज्य की जनता को बधाई देते हुए कह डाला कि यह उपलब्धि हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में “नए भारत” के निर्माण की देन हैI इसी विकास के लिए राज्य में हम सतत प्रयासरत रहे हैंI

ये थोथी दलील मीडिया के ज़रिये स्थापित हो भी जाती। लेकिन 22 नवम्बर को ही ‘नए भारत के निर्माण’ और ‘मोस्ट इम्प्रूव्ड राज्य झारखण्ड’के विकास की पोल सबके सामने तब खुल गयी, जब एक प्रमुख अखबार के मुख्य पन्ने पर झारखण्ड में रहने वाले भूमिहीन अनुसूचित जाति के गरीबों की अमानवीय जीवन परिस्थितियों पर एक विस्तृत ख़बर छपीI इस खबर ने मोदी जी के “नए भारत के निर्माण” में गाँव के भूमिहीन गरीबों की वास्तविक हैसियत और दिल्ली में राज्य के विकास का पीटे जा रहे ढोल का सच सभी को दिखला दिया। साथ ही यह भी बता दिया कि राजधानी के डिजिटल आयोजनों से सरकार में बैठे लोग जिस विकास की चकाचौंध फैला रहें हैं, वह हक़ीक़त में कितना अंधेरे से भरा है।

खबर थी राजधानी रांची से सटे रामगढ़ शहर के मात्र 15 किलोमीटर की दूरी पर कुजू प्रखण्ड के कुन्दरिया बस्ती में अमानवीय जीवन जी रहे अनुसूचित जाति के मल्हार समुदाय के भूमिहीन गरीबों कीI जो वहाँ पिछले 55 वर्षों से टाट-फूस और प्लास्टिक ढंके झोंपड़ों के अंधेरे में ही रहने को अभिशप्त हैंI यहाँ बसने वाले कुल 45 परिवार के लोगों के पास कहने को तो वोटर आईडी, आधार कार्ड तथा कुछ के पास राशन कार्ड ज़रूर हैं लेकिन रहने को एक इंच भी ज़मीन नहीं हैI सरकार की ओर से गरीबों को मिलने वाला आवास और अनाज का मिलना तो दूर, आज तक किसी भी सरकारी योजना का कोई लाभ नहीं मिल सका हैI इनके कथनानुसार ये लोग पूर्व में 30 वर्षों से कुन्दरिया के ही करमाली टोला के पास बसे हुए थे। लेकिन वहाँ से भगा दिए जाने के कारण गाँव के स्कूल के पीछे की गैरमजरुआ ज़मीन में जाकर बस गएI बाद में वहाँ से भी बेदखल किये जाने के कारण पिछले एक वर्ष से बस्ती के पास की वनभूमि के जंगल के बीच के एक टीले पर आकर बसे हुए हैं। जहाँ उनकी किसी तरह गुजर बसर की ज़िंदगी काट रहें हैं।

हाल ही में सरकार ने इस जिले को भी खुले में शौचमुक्त और पूर्ण विद्युतीकरण वाला विकसित जिला घोषित किया हैI लेकिन जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर की दूरी पर बसे कुन्दरिया के मल्हारों के पास शौचालय तो क्या रहने को एक अदद घर तक नहीं है। इनके टप्पर और झोंपड़ों में कैसी बिजली होगी ये भी सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। इस खबर के सामने आते ही मामला कोई राजनीतिक रंग ले इसके पहले ही पूरा प्रशासन हरकत में आ गयाI दूसरे ही दिन जिले के आला अधिकारियों का जत्था वहाँ पहुंच गया और वहाँ का सर्वे करके सबको ठीक ढंग से बसाने तथा अन्य सभी सरकारी सुविधाएं देने की भी घोषणा कर दीI नये भारत के विकास के इस सच का जवाब देने से बचने के लिए रामगढ़ मॉब लिंचिंग काण्ड के अभियुक्तों का स्वागत करके चर्चित हुए क्षेत्र के सांसद और केन्द्रीय मंत्री ने बेख़बर रहना ही ठीक समझा। पिछले 15 वर्षों से इस क्षेत्र के विधायक और राज्य के कद्दावर मंत्री जी ने खबर पढ़कर अपनी ओर से कोई संज्ञान लेने की भी जहमत नहीं उठाई, जबकि सरकार की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया भी नहीं दी गयी है।

कुंदरिया गाँव के मल्हारों का मानना है हमारे पूर्वज जैसे बिना घर के कंगाली की मौत मरे, हम भी वैसे ही मर जाएँगे। चंद महीने पहले इसी बस्ती के बुजुर्ग चिंतामन कि मौत भूख से हो गयी थी लेकिन प्रशासन ने मौत की वजह बीमारी बताकर मामला रफा दफा कर दिया। यहाँ रहने वाले मल्हार मिट्टी के बर्तन और रस्सी बनाने के काम के अलावे कुछ लोग जहाँ तहां मजदूरी करके तो कुछ भीख मांगकर और कचरा चुनकर जैसे तैसे अपना व परिवार का पेट पाल रहें हैं। इन्हें पीने का पानी भी एक किलोमीटर दूर से ढोकर लाना पड़ता है। चुनाव के समय प्रायः सभी दलों के नेता आकर इन्हें संकटों से निजात दिलाने का आश्वासन देकर वोट मांगते हैं लेकिन उसके बाद कोई भी झाँकने नहीं आता।   

मीडिया की खबरों के अनुसार 2017 में ही झारखंड सरकार की कैबिनेट के प्रस्ताव में कहा गया कि राज्य के सभी गरीब भूमिहीनों को गृहस्थल या वास भूमि उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए राजस्व व भूमि सुधार विभाग को अभियान चलाकर भूमिहीन परिवारों को चिह्नित कर भूमि उपलब्ध कराने का जिम्मा देने की बात भी कही गयी। लेकिन जमीनी अमल ये है कि राज्य के कई हिस्सों में कारपोरेट व निजी कंपनियों को कौड़ियों के मोल भूमि उपलब्ध कराने के लिए गरीबों को उजाड़ने में तनिक देर नहीं की गयी। कुंदरिया के भूमिहीन मल्हारों का मामला उजागर होने के बाद फिलहाल तो प्रशासन हरकत में आया है लेकिन क्या इतने भर से “नए भारत” के निर्माण में कुंदरिया के भूमिहीन मल्हार जैसों के लिए कोई स्थान सुनिश्चित होगा?  

Jharkhand government
jharkhand starvation
poverty
kundariya jharkhand
new india reality

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

UN में भारत: देश में 30 करोड़ लोग आजीविका के लिए जंगलों पर निर्भर, सरकार उनके अधिकारों की रक्षा को प्रतिबद्ध

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी

भारत में असमानता की स्थिति लोगों को अधिक संवेदनशील और ग़रीब बनाती है : रिपोर्ट

कार्टून क्लिक: पर उपदेस कुसल बहुतेरे...

ज्ञानवापी, ताज, क़ुतुब पर बहस? महंगाई-बेरोज़गारी से क्यों भटकाया जा रहा ?

झारखंड: भाजपा काल में हुए भवन निर्माण घोटालों की ‘न्यायिक जांच’ कराएगी हेमंत सोरेन सरकार

झारखंड : हेमंत सरकार को गिराने की कोशिशों के ख़िलाफ़ वाम दलों ने BJP को दी चेतावनी

‘जनता की भलाई’ के लिए पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के अंतर्गत क्यों नहीं लाते मोदीजी!


बाकी खबरें

  • मुकुल सरल
    विचार: क्या हम 2 पार्टी सिस्टम के पैरोकार होते जा रहे हैं?
    14 Mar 2022
    कला हो या संस्कृति या फिर राजनीति, मैं तो इसी बात का कायल हूं कि “सौ फूलों को खिलने दो—सौ विचारों में होड़ होने दो”, हां बस इसमें इतना और जोड़ना चाहूंगा कि...
  • परमजीत सिंह जज
    पंजाब में आप की जीत के बाद क्या होगा आगे का रास्ता?
    14 Mar 2022
    जब जीत का उत्साह कम हो जाएगा, तब सत्ता में पहुंचे नेताओं के सामने पंजाब में दिवालिया अर्थव्यवस्था, राजनीतिक पतन और लोगों की कम होती आय की क्रूर समस्याएं सामने खड़ी होंगी।
  • एम.ओबैद
    बिहारः भूमिहीनों को ज़मीन देने का मुद्दा सदन में उठा 
    14 Mar 2022
    "बिहार में 70 वर्षों से दबे-कुचले भूमिहीन परिवार ये उम्मीद लगाए बैठे हैं कि हमारा भी एक दिन आएगा कि जिस चटाई पर हम सोएंगे उसके नीचे की ज़मीन हमारी होगी।।" 
  • शशि शेखर
    यूपी चुनाव परिणाम: क्षेत्रीय OBC नेताओं पर भारी पड़ता केंद्रीय ओबीसी नेता? 
    14 Mar 2022
    यूपी चुनाव परिणाम ऐसे नेताओं के लिए दीर्घकालिक नुकसान का सबब बन सकता है, जिनका आधार वोट ही “माई(MY)” रहा है।
  • maths
    समीना खान
    इसलिए मैथ्स से बेदख़ल होती जा रही हैं लड़कियाँ
    14 Mar 2022
    आइडियाज़ फॉर इण्डिया द्वारा किये गए शोध में बताया गया है कि गणित पढ़ने में लैंगिक असमानताएं बढ़ती जा रही हैं। क्या हैं इसकी वजहें?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License