NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखण्ड राज्य के 18 साल का जश्न; क्यों भूख से मौत नहीं बनता मुद्दा?
राज्य में आज भूख से काल कलवित होते लोग वही हैं जिन्होंने सात दशकों से भी अधिक की लम्बी लड़ाई लड़ कर इस राज्य के गठन के लिए हर क़ीमत चुकाई हैI
अनिल अंशुमन
15 Nov 2018
starvation death
सांकेतिक चित्र

आज 15 नवम्बर को एक बार फिर झारखण्ड राज्य के स्थापना दिवस पर राज्य के खज़ाने से करोड़ों के सरकारी उत्सवों में मुख्यमंत्री जी अपनी पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार के रामराज का बखान कियाI लेकिन राज्य बनने के 18 वर्षों बाद भी भूख से मर रहे लोगों की बढ़ती संख्या को रोकने का कोई कार्य-संकल्प नहीं लियाI राज्य में आज भूख से काल कलवित होते लोग वही हैं जिन्होंने सात दशकों से भी अधिक की लम्बी लड़ाई लड़ कर इस राज्य के गठन के लिए हर क़ीमत चुकाई हैI मीडिया को जारी सूचना के अनुसार इस अवसर पर 1,000 करोड़ की निर्माण योजनाओं की घोषणा करते हुए बताएँगे कि उनकी पार्टी के शासन में किस तरह झारखण्ड राज्य निरंतर विकास की राह पर अग्रसर हैI तथाकथित इस विकास के शोर में लोगों के बदतर हो रहे हालात और गांवों में पसरी भुखमरी, बेकारी-कंगाली जैसे जलते हुए सवालों की चर्चा नहीं हुईI

जबकी दूसरी ओर, प्रदेश की उप-राजधानी कहे जाने वाले दुमका से सटे जामा प्रखंड स्थित महुआटांड गाँव में बीते 11 नवम्बर की रात, सरकार के विकास और राज्य के गरीबों के उत्थान के तमाम दावा-दलीलों को आईना दिखाते हुए, कालेश्वर सोरेन भूख से मर गयाI जिसे जानने समझने के लिए वहाँ आने की बजाय अगले ही दिन क्षेत्र की आदिवासी विधायक और राज्य की समाज कल्याण मंत्री महोदया मृतक के गाँव से चंद किलोमीटर की दूरी पर दुमका शहर के इनडोर स्टेडियम में विधायक निधि से अत्याधुनिक जिम के उद्घाटन में ही व्यस्त रहींI इधर उनके क्षेत्र के मतदाता गरीब आदिवासी किसान कालेश्वर सोरेन का अंतिम संस्कार किया जा रहा था और उधर आदिवासी वोटों से विधायक और मंत्री बनी आदिवासी नेत्री महोदया शहर के चौक के सौन्दर्यीकरण की घोषणा कर रहीं थींI

12 नवम्बर को मौत की खबर सुनकर पूरे लाव-लश्कर के साथ कालेश्वर सोरेन के घर पहुँचे सरकारी अमले ने खुद देखा कि उस समय घर में अनाज का एक दाना तक नहीं थाI प्रशासन के लोगों ने इस बात पर गहरा अफ़सोस भी व्यक्त किया कि उसके परिवार को अब तक किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलाI गरीबी और बेकारी के कारण उसके तीन बेटे पहले ही बाहर कमाने चले गए थे और छोटा बेटा तथा बेटी बगल के गाँव में रिश्तेदारों के यहाँ रहकर मज़दूरी कर रहे थेI

स्थानीय पंचायत समिति की सदस्या ने बताया कि अनाज के अभाव में कालेश्वर सोरेन कई बार उनके यहाँ खाना माँगने आ जाता था और समय से उसका राशन कार्ड बन जाता तो शायद उसकी जान बच जातीI प्रशासनिक अधिकारियों के सामने आक्रोशित कालेश्वर के परिजनों व ग्रामीणों ने बार-बार कहा कि उसकी मौत बीमारी से नहीं बल्कि खाना नहीं मिलने से हुई हैI अपनी जान बचाने के लिए प्रशासन ने लोगों से कहा कि यदि तुम लोग यह लिखकर दोगे कि कालेश्वर कि मौत बीमारी से हुई है तभी लाश को हम देंगेI ग़मज़दा परिजनों व ग्रामीणों ने वही लिखकर दे दिया और भूख से हुई इस मौत का कारण टी.बी. की बीमारी के रूप में दर्ज हो गयीI   

जाहिर है हमेशा की तरह इस मौत का कारण भी बीमारी से हुई मौत साबित कर विकास पुरुष मख्यमंत्री जी की सरकार अपना पल्ला झाड़ ही लेगीI प्रशासन भी परिजनों को अन्तिम संस्कार के लिए चंद रुपये और कुछ दिनों की खैरात देकर अपनी जिम्मेवारी निभा लेगाI वहीं सरकार की आज्ञापालक मीडिया को इंतज़ार रहेगा, अगली मौत की खबर छापने काI लेकिन ज़मीनी सच का सवाल तो चीख चीखकर पूछेगा ही कि प्रदेश को अत्याधुनिक विकास के 6 लेन में धकेलकर ले जाने के लिए सरकार जो विदेशों और बड़े महानगरों में जा-जाकर बड़ी-बड़ी कंपनियों को राज्य में बुला रही है, प्रदेश के भूख से मर रहे गरीब-गुरबों के बद्दतर हालात को ठीक करने के लिए कौन सा ‘हाईटेक उपाय’ कर रही है? भूख से हो रही मौत का बढ़ता सिलसिला सरकार और प्रशासन की किस प्राथमिकता में है? देश के प्रधान मंत्री महोदय जो इन दिनों अपनी पार्टी की झारखण्ड सरकार के विकास मॉडल का बखान करते नहीं थक रहे, क्या भूख से मर रहे झारखंडी जन उनकी विकासवादी नज़र में कोई महत्व रखते हैं?

Jharkhand
Jharkhand government
raghuvar govt
Starvation Deaths

Related Stories

झारखंड: भाजपा काल में हुए भवन निर्माण घोटालों की ‘न्यायिक जांच’ कराएगी हेमंत सोरेन सरकार

झारखंड: बोर्ड एग्जाम की 70 कॉपी प्रतिदिन चेक करने का आदेश, अध्यापकों ने किया विरोध

झारखंड : हेमंत सरकार को गिराने की कोशिशों के ख़िलाफ़ वाम दलों ने BJP को दी चेतावनी

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

झारखंड की खान सचिव पूजा सिंघल जेल भेजी गयीं

झारखंडः आईएएस पूजा सिंघल के ठिकानों पर छापेमारी दूसरे दिन भी जारी, क़रीबी सीए के घर से 19.31 करोड़ कैश बरामद

खबरों के आगे-पीछे: अंदरुनी कलह तो भाजपा में भी कम नहीं

आदिवासियों के विकास के लिए अलग धर्म संहिता की ज़रूरत- जनगणना के पहले जनजातीय नेता

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

झारखंड: पंचायत चुनावों को लेकर आदिवासी संगठनों का विरोध, जानिए क्या है पूरा मामला


बाकी खबरें

  • mayawati
    कृष्ण सिंह
    मुद्दा: सवाल बसपा की प्रासंगिकता का नहीं, दलित राजनीति की दशा-दिशा का है
    26 Feb 2022
    जहां तक बसपा की राजनीतिक प्रासंगिकता का प्रश्न है, तो दो या तीन चुनाव हारने से किसी भी पार्टी की प्रासंगिकता खत्म नहीं होती है। लेकिन असल प्रश्न यह है कि पार्टी की राजनीतिक दशा और दिशा क्या है? साथ…
  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    काश! अब तक सारे भारतीय छात्र सुरक्षित लौट आते
    26 Feb 2022
    बहुत सारे काश हैं, लेकिन क्या कीजिए...युद्धग्रस्त यूक्रेन में फिलहाल करीब 20,000 भारतीय फंसे हुए हैं जिनमें ज्यादातर छात्र हैं। भारत सरकार ने अब उनकी वापसी के प्रयास शुरू किए हैं। एयर इंडिया का विमान…
  • लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव, पांचवा चरण : ख़त्म हो सकती है भाजपा की चुनौती
    26 Feb 2022
    पांचवें चरण के मतदान के साथ यूपी चुनाव 2022 में भाजपा की चुनौती खत्म हो सकती है, क्योंकि इसके बाद पूर्वांचल के आखिरी दो चरणों में बदले सामाजिक समीकरणों के चलते भाजपा की संभावनाएं  क्षीण हो चुकी हैं।
  • Russia
    पीपल्स डिस्पैच
    हम यूक्रेन की निष्पक्षता पर बातचीत करने के लिए प्रतिनिधि मंडल भेजने को तैयार- रूस
    26 Feb 2022
    मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ कीव और यूक्रेन के अन्य शहरों के आसपास लड़ाई चल रही है। संयुक्त राष्ट्रसंघ की शरणार्थी संस्था के मुताबिक़, इस युद्ध की वज़ह से फिलहाल 1 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं।
  • tomb
    तारिक़ अनवर
    अयोध्या: राजनीति के कारण उपेक्षा का शिकार धर्मनिरपेक्ष ऐतिहासिक इमारतें
    26 Feb 2022
    यह शहर सिर्फ़ मंदिरों ही नहीं मकबरों और स्मारकों से भी भरा हुआ है जो देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब या हिंदू और मुस्लिम संस्कृतियों के आपसी मेल का प्रतीक है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License