NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखण्ड : सीएनटी-एसपीटी में संशोधन के खिलाफ सिमडेगा में विशाल जनसभा
सरकार की नीयत पर शक
संघर्ष संवाद
25 Mar 2017
झारखण्ड : सीएनटी-एसपीटी में संशोधन के खिलाफ सिमडेगा में विशाल जनसभा

सीएनटी- एसपीटी एक्ट में संशोधन को रद्द करने व राज्य के सभी 28 आदिवासी विधायकों से इस विषय पर 'करो या मरो' की मांग को लेकर आदिवासी सेंगेल अभियान ने 9 मार्च 2017 को झारखण्ड के  सिमडेगा में बड़ी जनसभा की। इसे अभियान के अध्यक्ष, पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने संबोधित किया। कहा कि सीएनटी-एसपीटी एक्ट आदिवासियों का सुरक्षा कवच है, जिसमें भाजपा सरकार ने छेद कर दिया है। साथ ही सरकार स्थानीय नीति बना कर बाहरियों और दिकुओं को स्थानीय बना रही है। इससे आदिवासी विस्थापित हो जायेंगे। आदिवासियों को यहां से खदेड़ने का षड्यंत्र किया गया है।

जनसभा में कैथोलिक बिशप्स कांफ्रेंस आॅफ इंडिया, आदिवासी मामलों के विभाग के अध्यक्ष सह सिमडेगा के बिशप विेसेंट बरवा, पूर्व मंत्री थियोडोर किड़ो, नियेल तिर्की व अन्य मौजूद थे।

झारखंड की आदिवासी आबादी तक यह संदेश पहुंचा दिया गया है कि मुख्यमंत्री रघुवर दास की भाजपा सरकार उनकी जमीन हड़पकर कॉरपोरेट घरानों को सौंपना चाह रही है। यह संदेश भाजपा विरोधी राजनीतिक ताकतों ने पहुंचाया है।

उन्हें ऐसा करने का मौका स्वयं राज्य सरकार ने 03 मई 2016 को दे दिया था जब सौ साल से ज्यादा पुराने कानून छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट-1908 (सीएनटी) और संथाल परगना टिनेसी (सप्लिमेंटरी) एक्ट-1949 (एसपीटी) में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट से मंजूर किया गया।

सरकार की नीयत पर शक

ये कानून राज्य की अनुसूचित जाति और जनजाति और पिछड़े वर्ग के लोगों को बाहरी लोगों के लालच से बचाने के लिए बनाए गए थे।

इसके तहत जमीन खरीद-फरोख्त पर पाबंदी है।

यह कानून संविधान की नौंवी सूची में शामिल है, यानी इसकी समीक्षा नहीं हो सकती। बिना व्यापक विचार-विमर्श के ऐसे कानून में संशोधन के लिए अध्यादेश जारी करने का प्रयास सरकार की नीयत पर शक पैदा करता है।

राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने भी बिना किसी संकोच के 28 जून 2016 को अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर दिया। हालांकि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इसे सलाह के लिए केंद्र को लौटा दिया। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) ने 06 सितंबर को राष्ट्रपति से इसे मंजूर न करने की सिफारिश की।

बावजूद इसके, 23 नवंबर-16 को विपक्ष के विरोध को दरकिनार कर सरकार ने प्रस्तावित संशोधनों को मात्र तीन मिनट में विधानसभा से पारित करा कर अपनी मंशा और साफ कर दी।

जबरदस्त नाराजगी

इसके बाद आदिवासी गांवों में फिर से विद्रोह के नगाड़े बजने लगे हैं। गोष्ठियां हो रही हैं. पूर्वजों के बलिदान को याद किया जा रहा है। आदी विद्रोही तिलका मांझी (1750-85) और वीर बिरसा मुंडा (1875-1900) से लेकर अलग राज्य के आंदोलन का नेतृत्व करनेवाले शिबू सोरेन तक की गाथाएं सुनाई जा रही है।

असंतोष की एक झलक 25 नवंबर को संशोधनों के खिलाफ 'झारखंड बंद' के दौरान दिखा जब 10 से ज्यादा वाहन जला दिए गए और करीब 10 हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया।

आदिवासी बहुल संताल में तो पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी और उनपर तीर से हमले किए गए। दुमका में कॉलेज हॉस्टल से करीब 25 हजार तीर, धनुष व परंपरागत हथियार जब्त किए गए।

कैसे बना था यह कानून

सीएनटी उस समय अस्तित्व में आया था जब तमाम तरह के दमनात्मक हथकंडों के बाद अंग्रेजों ने मान लिया था कि इस इलाके को अपने अधीन बनाए रखना मुश्किल है।

इसलिए 'एक हाथ दो एक हाथ लो' की नीति पर अंग्रेज हुकूमत ने बिरसा के शहीद होने के महज आठ साल के भीतर इस विशेष कानून के तहत स्थानीय लोगों को विशेष अधिकार प्रदान किए। बदले में यह आशा की गई कि आदिवासी अंग्रेजों की हुकूमत स्वीकार करेंगे।

क्यों हो रहा है विरोध ?

एक्ट में संशोधन आदिवासियों के हित में होने के सरकारी दावे के बावजूद विरोध की वजह को कानून के विशेषज्ञ एडवोकेट रश्मि कात्यायन ने विस्तार से समझाया।

क्षेत्र विशेष के लिए बनाए गए इस खास सीएनटी एक्ट के सेक्शन 21, सेक्शन-49(1)(2) व सेक्शन 71(ए) में और इसी के अनुरूप एसपीटी के सेक्शन-13 संशोधन किए गए हैं. वर्तमान कानून आदिवासियों की कृषियोग्य भूमि पर ही लागू है।

सेक्शन-21 में संशोधन के द्वारा उसके गैरकृषि इस्तेमाल को नियमित करने की शक्ति राज्य सरकार को दी गई है। कहा गया है कि सीएनटी के लागू रहने के बावजूद सरकार जमीन के गैरकृषि उपयोग के लिए नियम बनाएगी।

समय-समय पर राज्य सरकार इसके लिए नोटिफिकेशन जारी करेगी। यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार गैरकृषि लगान थोप सकती है।

संशोधन विरोधी आशंका जता रहे हैं कि ऐसा होने पर सरकारों को जमीन का उपयोग बदलने की असीमित ताकत मिल जाएगी। एकबार ऐसा हो गया तो उक्त जमीन सीएनटी-एसपीटी एक्ट से बाहर हो जाएगी। ऐसा होते ही आदिवासियों को बेदखल करना आसान हो जाएगा।

पूर्व में हाइकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट से ऐसे कई फैसले आए हैं जिनमें उपयोग बदल जाने के बाद उसे सीएनटी-एसपीटी के तहत प्राप्त विशेष सुरक्षा से बाहर माना गया है।

गले नहीं उतर रहा सरकारी दावा

इन आशंकाओं को निर्मूल साबित करने के लिए सरकार ने बाद में यह प्रोविजन जोड़ दिया है कि उपयोग बदलने के बावजूद मालिकाना जमीन मालिक का ही रहेगा। पर, यह कैसे संभव होगा इसे बताया नहीं गया है।

राज्य के पहले मुख्यमंत्री व झारखंड विकास मोर्चा (जेवीएम) के सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी तो इसे सीधा-सीधा सरकार का झूठ मानते हैं। कहते हैं ' यह भाजपा का वैसा ही झूठ है जैसा कश्मीर में धारा-370 हटाने और बांग्लादेशियों को देश से बाहर निकालने के लिए वह बोलती रही है। मैं इसे अच्छी तरह जानता हूं क्योंकि मैं भी वहीं से निकला हूं'।

Courtesy: संघर्ष संवाद
झारखण्ड
सीएनटी- एसपीटी एक्ट
आदिवासी

Related Stories

मध्य प्रदेश: 22% आबादी वाले आदिवासी बार-बार विस्थापित होने को क्यों हैं मजबूर

झारखंड : साल का पहला दिन आदिवासियों को आज भी शोक से भर देता है

आपकी चुप्पी बता रहा है कि आपके लिए राष्ट्र का मतलब जमीन का टुकड़ा है

शोभापुर लिंचिंग: बच्चे पिता के इंतज़ार में हैं जो अब नहीं लौट सकते

नागाड़ी लिंचिंगः एक परिवार के 3 सदस्य मार दिए गए, मुख्य संदिग्ध फरार

अबकी बार, मॉबलिंचिग की सरकार; कितनी जाँच की दरकार!

झारखंड बंद: भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन के खिलाफ विपक्ष का संयुक्त विरोध

फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट: खूँटी बलात्कार में पत्थलगड़ी के नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है

पत्थलगड़ी सरकार के सर पर चढ़ी!

झारखण्ड भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल, 2017: आदिवासी विरोधी भाजपा सरकार


बाकी खबरें

  • bhasha singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाब में मामला सिर्फ आप-कांग्रेस के बीच ही नहीं, सुलगते हैं सवाल
    15 Feb 2022
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह पहुंची डेरा बस्सी, जहां कड़ी टक्कर है मुद्दों और दावों के बीच। यहां उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के नौजवान प्रत्याशी सरबजीत सिंह रॉकी वाल्मीकि से…
  • प्रतीकात्मक फोटो
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हिजाब विवाद: हिंदू लड़की को स्कूल में नथुनी पहनने के अधिकार वाले अफ्रीकी अदालत के फैसले को अदालत में संदर्भित किया गया
    15 Feb 2022
    वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने अपनी दलीलें रखते हुए अदालत से अपने अंतरिम आदेश को खत्म करने का आग्रह किया।
  • Hardik
    भाषा
    विसनगर दंगा मामले में अदालत पहुँचे हार्दिक पटेल, दोषसिद्धि पर रोक की माँग
    15 Feb 2022
    अदालत ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 28 फरवरी की तारीख तय की है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    गुजरात : एबीजी शिपयार्ड ने 28 बैंकों को लगाया 22,842 करोड़ का चूना, एसबीआई बोला - शिकायत में नहीं की देरी
    15 Feb 2022
    नई दिल्ली: पिछले 75 सालों में देश का सबसे बड़ा बैंक घोटाला हुआ है। 22,842 करोड़ रुपए के इस घोटाले में गुजरात स्थित कंपनी एबीजी शिपयार्ड के खिलाफ़ सीबीआई में शिकायत दर्ज करने में एसबीआई ने किसी भी त
  • संदीपन तालुकदार
    फ्रांस की गुफा से मिले प्राचीन अवशेषों ने आदिमानव और निएंडरथल के बारे में किए नए खुलासे
    15 Feb 2022
    एक फ्रांसीसी गुफा में नए पुरातात्विक निष्कर्षों ने आधुनिक मनुष्यों और निएंडरथल की नई समझ को जन्म दिया है। नए निष्कर्ष 9 फरवरी को साइंस एडवांस में प्रकाशित हुए थे
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License