NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
झारखंड: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर पुलिसिया हमले का पूरे राज्य में विरोध
झारखंड में विगत मंगलवार को जिस तरह से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया गया उससे महिलाएं और जनसंगठन आक्रोश में हैं। प्रशासन की तरफ से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
अनिल अंशुमन
26 Sep 2019
aanganwadi workers

इसी 12 सितंबर को झारखंड का 12वां फेरा लगाते हुए देश के प्रधानमंत्री ने झारखंड के मुख्यमंत्री को यशस्वी कहकर अभिनंदित किया था। इसके ठीक 12वें दिन ही इन्हीं मुख्यमंत्री से मिलने जा रही प्रदेश आंगनबाड़ी सेविकाएं उनके ‘यशस्वी’ होने का असली मतलब नहीं समझ पायीं और पुलिस की बर्बर पिटाई का शिकार हो गईं।

निहत्थी महिलाओं को गालियां देते हुए लठियों और मुक्के–लातों से पीटनेवाले पुलिस के ‘जाबांज़’ अधिकारियों का कहना है कि इन लोगों ने ही ड्यूटी पर तैनात डीएसपी व पुलिस पर हमलाकर हमें लाठी चलाने को मजबूर  किया। इसी सुर में सुर मिलाते हुए राजधानी के एक प्रमुख भक्त अखबार ने तो पुरुष पुलिसवालों द्वारा निहत्थी महिलाओं पर लाठी चार्ज को ‘शांति–व्यवस्था ’ के लिए सही ठहरा दिया।

आपको बता दें कि स्थायीकरण और मानदेय में बढ़ोतरी समेत नौ सूत्री मांगों को लेकर सैकड़ों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं मंगलवार को जुलूस की शक्ल में मुख्यमंत्री से मिलने जा रहीं थीं। राजभवन से आगे मछलीघर के पास पुलिस ने बैरिकेड लगाकर जुलूस को रोक लिया तो आंदोलनकारी सेविकाओं का प्रतिनिधि मण्डल जाने देने की मांग करते हुए नारे लगाने लगा।
IMG-20190926-WA0031.jpg
सेविका महिलाओं के जुलूस आने की खबर रहने के बावजूद वहां महिला पुलिस के बजाय भारी संख्या में लट्ठधारी पुरुष पुलिस तैनात किए जाने से महिलाएं काफी नाराज थीं। थोड़ी ही देर में बकझक करने का आरोप लगाते हुए बिना किसी सूचना के पुरुष पुलिसकर्मियों–अधिकारियों ने डंडे चलाना शुरू कर दिया।

एक पुलिस अधिकारी का डंडा गिर गया तो उसने गालियां देते हुए निहत्थी सेविकाओं पर मुक्के – लात चलाना शुरू कर दिया। छतरी और हैंडबैग लेकर इन सेविकाओं को मुख्यमंत्री आवास की ओर शांतिपूर्ण ढंग से जाते हुए सभी ने देखा था फिर भी लाठीचार्ज हो गयी। दर्जनों आंदोलनकारी सेविकाओं के पैर–हाथ बुरी तरह से ज़ख्मी होने के बावजूद पुलिसवाले पीटते ही रहे। इसके विरोध में सारी सेविका महिलाएं वहीं सड़क पर धरने पर बैठ गईं। बाद में प्रशासनिक आला अधिकारियों के काफी मानमन्नवल पर वे उठकर राजभवन के धरनास्थल पर चलीं गईं।

विभिन्न आंदोलनकारी जन संगठनों समेत पूरे विपक्ष का पहले से ही आरोप रहा है कि जब से इस प्रदेश में अच्छे दिनी डबल इंजन की सरकार सत्ता में काबिज हुई है, जनता के हर सवाल का जवाब पुलिसिया लाठी से देने की स्थायी परिपाटी बना दी गयी है।

एक ओर मुख्यमंत्री–मंत्री भव्य मंचों से भावुक अंदाज में बोलवचन कहकर लोगों को गुमराह करते हैं और दूसरी ओर सरकार के खिलाफ आवाज़ उठानेवालों पर उतनी ही निर्ममता से राज्य दमन चलाया जाता है।
 
निहत्थी आंगनबाड़ी सेविकाओं पर हुए पुलिस ज़ुल्म का ऐपवा व एक्टू ने 25 सितंबर को पूरे प्रदेश में प्रतिवाद किया। वहीं, कई जन संगठनों समेत सभी विपक्षी दलों ने पुलिस की कायराना हरकत का तीखा विरोध किया है।
IMG-20190926-WA0020_0.jpg
नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि सरकार महिलाओं-बेटियों को पिटवाकर अपने सुशासन का ढोल पीट रही है। भाकपा माले के पूर्व विधायक ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सरकार तानाशाह हो गयी है और विरोध की न्यूनतम आवाज भी नहीं सहन कर पा रही है।

राज्य की रसोइयाकर्मी महिलाओं और पारा टीचरों की भांति आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आंदोलन प्रायः हर वर्ष ही होता है। सम्मानजनक वेतनमान व स्थायीकरण के साथ साथ अपनी 9 सूत्री मांगों को लेकर लगातार प्रखंडों–जिला मुख्यालयों से लेकर राजभवन के समक्ष तक लगातार अनेकों आंदोलनात्मक कार्यक्रमों किए जा चुके हैं। विभागीय मंत्रालय-आला अफसरों और सरकार के समक्ष दर्जनों बार वे अपनी फरियाद लेकर जा चुकी हैं।

झारखंड प्रदेश आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन तथा आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ के संयुक्त संघर्ष समिति के नेताओं के अनुसार 05 जून 2018 में ही झारखंड सरकार के सचिव, महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा लिखित समझौता किया गया था। जिसमें सभी मांगों को इसी कैलेंडर वर्ष में पूरा करने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन आज तक उक्त मांगों पर जब कोई अमल नहीं हुआ तो मजबूरन उन्हें 16 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाना पड़ा।
IMG-20190926-WA0030.jpg
पूरे प्रदेश में लगभग 80 हजार से भी अधिक आंगनबाड़ी सहायिका/सेविकाओं के बूते ही ग्रामीण क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्र द्वारा सभी महिलाओं, गर्भवतियों व शिशुओं के स्वास्थ्य तथा प्रारम्भिक शिक्षा इत्यादि की सरकारी योजनाओं का कार्य सम्पन्न होता है। लेकिन न तो इन्हें नियमित और सम्मानजनक वेतन नसीब है और न ही इन्हें सरकारी कर्मचारी का कोई दर्जा मिला हुआ है।

पूरे राज्य की ग्रामीण शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था आंगनबाड़ी सेविका/सहायिका, रसोइया और पारा टीचरों के बल पर ही टिकी हुई है। लेकिन न तो इन्हें स्थायी किया जा रहा है और न ही समुचित वेतन व अन्य जरूरी सुविधाएं मयस्सर हैं। जाने क्या कारण है कि जब भी ये मानदेयकर्मी अपनी जायज मांगों को सरकार के सामने उठाते हैं तो जवाब में केवल पुलिस कि लठियां ही मिलतीं हैं।

अनुभव बताते हैं कि आंगनबाड़ी सेविका/सहायिकाओं जैसी ग्रामीण कर्मियों का सरकार चुनाव में भरपूर उपयोग करतीं हैं। लोकसभा चुनाव 2019 में तो सत्ताधारी दल ने खुलकर इनका इस्तेमाल किया और भरपूर फायदा भी उठाया। इसीलिए झारखंड राज्य कर्मचारी संगठन के नेताओं ने सरकार को चेता दिया है कि आसन्न विधान सभा चुनाव से पूर्व ही इनपर लाठी चलाने का खामियाजा उठाना पड़ सकता है। 

aanganwadi workers
Jharkhand
lathicharge on worker's
RAGHUVAR DAS
Narendra modi
Aanganwadi Employees Union
raghuvar govt

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ख़बर भी-नज़र भी: …लीजिए छापेमारी के साथ यूपी चुनाव बाक़ायदा शुरू!
    18 Dec 2021
    आयकर विभाग की टीम ने आज सपा नेताओं के घर और कैंप कार्यालयों पर छापेमारी की है। इसपर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि “भाजपा का हार का डर जितना बढ़ता जायेगा, विपक्षियों पर छापों का दौर भी उतना…
  • sudan
    पवन कुलकर्णी
    सूडान के दारफुर क्षेत्र में हिंसा के चलते 83,000 से अधिक विस्थापित: ओसीएचए 
    18 Dec 2021
    सूडान की राजधानी खार्तूम, खार्तूम नार्थ, ओम्डुरमैन सहित देशभर के कई राज्यों के कई अन्य शहरों में गुरूवार 16 दिसंबर को विरोध प्रदर्शनों के दौरान “दारफुर का खून बहाना बंद करो” और “सभी शहर दारफुर हैं”…
  • air india
    भाषा
    पायलटों की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय खारिज किये जाने के खिलाफ एअर इंडिया की अर्जी अदालत ने ठुकराई
    18 Dec 2021
    अदालत ने कहा, ‘‘सरकार और उसकी इकाई एक आदर्श नियोक्ता के रूप में कार्य करने के लिए बाध्य हैं और इसलिए, उसे पायलटों को ऐसे समय संगठन (एअर इंडिया) की सेवा करने के अधिकार से वंचित करते नहीं देखा जा सकता…
  • Goa Legislative Assembly
    राज कुमार
    गोवा चुनाव 2022: राजनीतिक हलचल पर एक नज़र
    18 Dec 2021
    स्मरण रहे कि भाजपा ने जिन दो पार्टियों के बल पर सरकार बनाई थी वो दोनों ही पार्टियां भाजपा का साथ छोड़ चुकी है। गोवा फॉरवर्ड पार्टी कांग्रेस का समर्थन कर रही है तो महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी तृणमूल…
  • Nuh
    सबरंग इंडिया
    नूंह के रोहिंग्या कैंप में लगी भीषण आग का क्या कारण है?
    18 Dec 2021
    हरियाणा के नूंह में लगी आग में रोहिंग्याओं की 32 झुग्गियां जलकर खाक हो गईं। उत्तर भारत के रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में इस साल इस तरह की यह तीसरी आग है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License