NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
घटना-दुर्घटना
भारत
राजनीति
झारखंड: बिरसा मुंडा की मूर्ति तोड़े जाने से झारखंडी समाज में आक्रोश
9 जून को जिस बिरसा समाधि स्थल पर सबने बिरसा की मूर्ति पर फूल चढ़ाकर उनकी स्मृति को नमन किया, 13 जून को ही उसी परिसर में स्थापित बिरसा की मूर्ति तोड़े जाने की ख़बर ने सबको मर्माहत और आक्रोशित कर दिया।
अनिल अंशुमन
17 Jun 2019
Birsa Munda

9 जून को देश के नवनियुक्त गृहमंत्री अमित शाह ने अपने विशेष ट्वीट संदेश में कहा कि, "भगवान बिरसा मुंडा ने अंग्रेज़ों के दमन के विरुद्ध ‘उलगुलान' से ऐतिहासिक आंदोलन की शुरुआत की। उनकी पुण्यतिथि पर शत शत नमन।" इसी दिन प्रदेश की राजधानी रांची के कोकर स्थित बिरसा मुंडा समाधि स्थल पर माननीय राज्यपाल और उनके साथ मुख्यमंत्री ने उनकी समाधि पर फूल चढ़ाये। मुख्यमंत्री जी ने तो अपने ट्वीट संदेश में यह भी लिखा कि, "हमारी सरकार धरती आबा बिरसा मुंडा के सपनों का झारखंड बनाने में जुटी है।" लेकिन तीन दिनों बाद ही जब बिरसा समाधि स्थल परिसर में लगी बिरसा मुंडा की आदमक़द प्रतिमा तोड़ दी गयी तो जाने क्यों इनमें से किसी ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। बल्कि वहाँ जाकर स्थिति को ठीक करने की कोई कोशिश भी नहीं की। 

9 जून को जिस बिरसा समाधि स्थल पर सबने बिरसा की मूर्ति पर फूल चढ़ाकर उनकी स्मृति को नमन किया, 13 जून को ही उसी परिसर में स्थापित बिरसा की मूर्ति तोड़े जाने की ख़बर ने सबको मर्माहत और आक्रोशित कर दिया। सुबह से ही विभिन्न आदिवासी संगठनों, वामपंथी दलों और विपक्षी राजनीतिक दलों के साथ-साथ सामाजिक–नागरिक समाज के लोगों का हुजूम वहाँ जुटने लगा। सभी एक स्वर से दोषियों को अविलंब गिरफ़्तार करने और सज़ा देने की मांग कर रहे थे। मौक़े पर पहुँची पुलिस को लोगों के बढ़ते आक्रोश को नियंत्रित करने में काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी। वहाँ पहुँचे भाजपा के स्थानीय विधायक व प्रदेश के नगर विकास मंत्री को भी लोगों की खरी खोटी सुनकर वापस लौटना पड़ा। हालांकि घटना की जानकारी होते ही मुख्यमंत्री ने मामले की पूरी जांच और दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के निर्देश दे दिये। आनन फ़ानन में क्षतिग्रस्त मूर्ति को ठीक करवाया गया।

इस घृणित कांड के ख़िलाफ़ राजधानी रांची समेत पूरे प्रदेश के कई इलाक़ों में सड़कों पर प्रतिवाद जारी है। 15 जून को राजधानी रांची समेत कई आदिवासी बहुल्य इलाक़ों में ‘बंद‘ भी बुलाया गया। जिसे ख़ुद को राष्ट्रभक्त होने का चैंपियन कहने वाली भाजपा और एनडीए गठबंधन दलों को छोड़कर प्रदेश के वामपंथी दलों समेत विपक्ष के सभी दलों ने सक्रिय समर्थन दिया। हैरानी की बात यह भी रही कि बिरसा को भगवान कहने वाले तथाकथित हिंदुवादी राष्ट्रभक्तों की चौकड़ी भी बिरसा मुंडा के इस अपमान पर रहस्यमय ढंग से मौन व्रत साधे रही।  

स्थानीय प्रशासन का ‘दिव्य अनुमान‘ है कि बीती रात तेज़ हवा चलने से ही मूर्ति क्षतिग्रस्त हुई होगी। लेकिन विभिन्न आदिवासी संगठनों और लोकतंत्र पसंद नागरिक समाज और विपक्ष समेत सभी का मानना है कि यह कांड पूरी तरह से सुनियोजित है। जिसके तहत एक ख़ास विचारधारा के लोग अपनी सामाजिक दबंगता थोपने के लिए इन दिनों पूरे देश में स्थापित सर्वमान्य जननायकों – व्यक्तित्वों की मूर्तियों को तोड़ने का कुचक्र चला रहें हैं। वर्तमान भाजपा राज में इन्हें बेलगाम होने की इस क़दर छूट मिली हुई है गोया यह सरकार का अपना एजेंडा हो। दक्षिण में पेरियार, पश्चिम बंगाल में ईश्वरचंद विद्यासागर और त्रिपुरा में लेनिन से लेकर आए दिन गांधी और अंबेडकर की मूर्तियों को तोड़ने की कई घटनायेँ हो चुकी हैं। अब तक ऐसे किसी भी कांड के दोषियों को न तो पकड़ा जा सका है और न ही किसी को कोई सज़ा मिली है। बल्कि इन सभी शर्मनाक घटनाओं पर वर्तमान सरकार और उसके कतिपय राष्ट्रभक्त नेताओं की चुप्पी तमाशाई भूमिका लिए हुए है।

एक ख़ास विचारधारा के लोगों पर मूर्ति तोड़ने का संदेह किया जाना आधारहीन नहीं है। क्योंकि मूर्तियाँ तोड़ने की घटनाएँ पहले भी हुईं हैं लेकिन 2014 में केंद्र और प्रदेश के शासन में भाजपा के क़ाबिज़ होते ही ये एक स्थायी परिघटना बनती जा रही है। 2017 में संताल परगना के गमहरिया – कान्ड्रा में सिद्धो – कानू की मूर्ति तोड़ दी गयी। 2019 में बिहार के भागलपुर में तिलका मांझी की प्ररिमा तोड़ दी गयी। इसके अलावे भी छिटपुट तौर पर मूर्तियाँ तोड़ने की घटनाएँ आए दिन बदस्तूर जारी हैं। इन सभी घटनाओं पर स्थानीय प्रतिवाद भी हुए हैं लेकिन 13 जून को राजधानी में बिरसा मुंडा की मूर्ति तोड़ने की जघन्य घटना ने व्यापक झारखंडी जन भावना को काफ़ी उद्वेलित कर दिया है। विशेषकर राज्य के आदिवासी समाज में काफ़ी आक्रोश है जिसकी अभिव्यक्ति विभिन्न इलाक़ों के जनप्रतिवादों में हो रही है। वे इसे अपने ही राज्य में अपने प्रतीक जन नायकों की सामाजिक–सांस्कृतिक विरासत और परंपरा को अपमानित करने की सुनियोजित कुचेष्टा मान रहें हैं। इसीलिए इस मुद्दे को एक राज्यव्यापी स्वरूप देने की प्रक्रिया काफ़ी सरगर्म है जो फिलहाल थमती नहीं दिख रही है। 20 जून को इस संदर्भ में सारे आदिवासी व सामाजिक जन संगठन मिलकर बैठने वाले हैं। वैसे भी हाल के दिनों में वर्तमान सरकार के संरक्षण में संघ परिवार व उसकी अनुसंगी इकाइयों द्वारा आदिवासी समाज के अंदर घुसपैठ के प्रभाव का असर लोकसभा चुनाव में सामने आ चुका है। जिस पर इस समुदाय के बड़े हिस्से में गहरी चिंता और क्षोभ पहले से ही है। बिरसा मुंडा की मूर्ति तोड़ने की घटना ने इसे तीखा बना दिया है। 

कुछ एक आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ताओं की नज़र में यह घटना अगले नवंबर–दिसंबर माह में होने वाले विधान सभा चुनाव में हिन्दू वोटों के ध्रुवीकरण से जुड़ा मामला है। उनके अनुसार चुनाव झारखंडी और हिन्दू वोटरों के बीच विभाजन कराने के लिए ही ऐसी घटनाएँ कराई जा रहीं हैं ताकि झारखंडी उम्मीदवारों को मिलने वाले हिन्दू वोट भाजपा की ओर चले जाएँ। 

बिरसा मुंडा व उनकी विरासत परंपरा की व्यापक झारखंडी समाज में आज भी सर्वमान्य मान्यता हासिल है। उनकी मूर्ति तोड़े जाने के ख़िलाफ़ 15 जून को एक ओर, राजधानी के मुख्य चौराहे पर लोग ‘बंद‘ के समर्थन में गिरफ़्तारियाँ दे रहे थे तो बिरसा समाधि स्थल पर विभिन्न सामाजिक–आदिवासी जन संगठनों के समूहिक उपवास कार्यक्र्म कर रहे थे। जिसमें बिरसा मुंडा के वंशज सुखराम मुंडा भी शामिल हुए। अपने पुरखा की मूर्ति तोड़े जाने से मर्माहत होते हुए भी उन्होंने स्पष्ट कहा कि धरती आबा बिरसा मुंडा की मूर्ति तोड़ने से उनके विचारों को नहीं मारा जा सकता!

Jharkhand government
birsa munda
Amit Shah
Jharkhand
Ranchi

Related Stories

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

झारखंड: नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन सत्याग्रह जारी, संकल्प दिवस में शामिल हुए राकेश टिकैत

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा

झारखंड: हेमंत सरकार की वादाख़िलाफ़ी के विरोध में, भूख हड़ताल पर पोषण सखी

झारखंड: राज्य के युवा मांग रहे स्थानीय नीति और रोज़गार, सियासी दलों को वोट बैंक की दरकार

झारखंड : ‘भाषाई अतिक्रमण’ के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब, मगही-भोजपुरी-अंगिका को स्थानीय भाषा का दर्जा देने का किया विरोध

कोरोना काल में भी वेतन के लिए जूझते रहे डॉक्टरों ने चेन्नई में किया विरोध प्रदर्शन

झारखंड: केंद्रीय उद्योग मंत्री ने एचईसी को बचाने की जवाबदेही से किया इंकार, मज़दूरों ने किया आरपार लड़ाई का ऐलान


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    रोहतक : मारुति सुज़ुकी के केंद्र में लगी आग, दो कर्मियों की मौत
    12 Apr 2022
    मज़दूर संगठन ने दोषियों पर कार्रवाई और मृतकों के लिए 50 लाख मुआवज़े की रखी मांग
  • नीलांजन मुखोपाध्याय
    मुझे अगले नवरात्रों से ख़ौफ़ क्यों लगता है
    12 Apr 2022
    अब नवरात्रों में चलाने वाले नौ दिवसीय अनुष्ठान का मतलब भौतिक स्थान और/या क्षेत्र को चिह्नित करने के मामले में अधिक है, जैसा कि कई जानवर करते हैं, और इसलिए अधिकांश ईश्वर-भक्त हिंदू अनुयायी अपनी इच्छा…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 796 नए मामले, 19 मरीज़ों की मौत
    12 Apr 2022
    देश में अब तक कोरोना से पीड़ित 98.76 फ़ीसदी यानी 4 करोड़ 25 लाख 4 हजार 329 मरीज़ों को ठीक किया जा चुका है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: लेडी हार्डिंग अस्पताल के बाहर स्वास्थ्य कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी, छंटनी के ख़िलाफ़ निकाला कैंडल मार्च
    12 Apr 2022
    स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड महामारी के भीषण दौर में 100 दिन काम करने वाले कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को नियमितीकरण में प्राथमिकता देने की बात करते हुए सर्कुलर भी जारी किया था। पर अब केंद्र सरकार…
  • अजय कुमार
    दवाई की क़ीमतों में 5 से लेकर 5 हज़ार रुपये से ज़्यादा का इज़ाफ़ा
    12 Apr 2022
    भारत जैसे देश में दवाई की महंगाई बाजार की बनाई हुई है, लागत की नहीं। दवाई के महंगाई का हाल ऐसा है कि कई लोग महंगे दवाई के आभाव में दम तोड़ देते हैं। कई लोग दवा खरीद ही नहीं पाते और बीमारी से जूझते…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License