NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखंड : भूख से मौत, सुखाड़ और हड़ताल के चार साल
स्थापित अखबारों के वरीय संपादकों से अपनी प्रशस्ति में विशेष कालम और फ्रंट पेज़ का विज्ञापन प्रकाशित करा लेना ही किसी सरकार की जनप्रिय विकास का पैमाना नहीं होता है। हर जगह विशाल होर्डिंग्स टाँगकर भी विकास नहीं दर्शाया जा सकता है...।
अनिल अंशुमन
29 Dec 2018
झारखंड

भाजपा नेतृत्ववाली झारखंड की एनडीए सरकार ने 28 दिसंबर को अपने ‘सुशासन’ की चौथी वर्षगांठ का विज्ञापनी समाचार प्रसारित ही किया था कि उसी दिन बीबीसी के समाचार ने रंग में भंग डाल दिया। जिसमें झारखंड सरकार के 323 करोड़ से भी अधिक रुपये सिर्फ विज्ञापन पर खर्च करने का ब्योरा था। बीबीसी ने इस समाचार में झारखंड के ही एक सामाजिक कार्यकर्त्ता द्वारा राज्य सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग से आरटीआई में ली गयी जानकारी को आधार बनाया था। उस सामाजिक कार्यकर्ता ने क्षोभ के साथ बीबीसी को बताया कि भूख से मर रहे लोगों के राज्य का मुख्यमंत्री जब सिर्फ अपनी ‘ब्रांडिंग’ में करोड़ों करोड़ रुपये पानी की तरह बहा रहा हो तो उसे बेनकाब करना पड़ा। उसी जानकारी से यह भी सामने आया कि फंड की कमी होने का रोना रोनेवाली सरकार ने कैसे विज्ञापन मद के प्रति वर्ष 40 करोड़ के बजट को चुपचाप दुगुना बढ़ा लिया है।

उस सामाजिक कार्यकर्ता का क्षोभ अपने राज्य की जनता की हो रही दुर्दशा है। जिस पर पर्दा डालने के लिए सरकार ने 28 दिसंबर के दिन ‘सेवा–सम्मान और विकास के चार साल’ में ‘नेक इरादे और बुलंद हौसले’ का ढिंढोरा पीटा। प्रदेश के सारे अखबारों के पहले पन्ने व चैनलों में विज्ञापन देकर और पूरे राज्य में मुख्यमंत्री के बड़े बड़े होर्डिंग्स लटकाकर राज्य के विकास दर में वृद्धि का फर्जी आंकड़ा पेश कर मोदी जी के सुशासन की प्रशस्ति गायी।

राज्य के 35 लाख नौजवानों को रोजगार देने के दावे का सच, आज राज्य के सभी पारा शिक्षकों, रसोइया/सहायिकाओं द्वारा नौकरी के स्थायीकरण के लिए जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल बता रही है। वहीं समान वेतनमान जैसी मांगों के लिए राज्य ने सारे मानरेगा कर्मी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, चौकीदार–दफ़ादार संघ समेत सारे मानदेय आधारित कर्मचारी भी लगातार आंदोलनरत हैं।

राज्य में भूख से हो रही मौतों की चर्चा और इसे रोकने के उपायों का कोई ज़िक्र सरकार ने अपनी विकास प्रशस्ति में नहीं किया है। जबकि अबतक हुई 56 मौतों में तो 2017–18 के दौरान ही 42 लोग मर गए। इन सभी मौतों की वजह रही, गरीबों को मिलने वाले अनाज व राशन व्यवस्था में आधार कार्ड का न होना तथा सरकारी संरक्षण में चल रही संस्थाबद्ध लूट। जिस पर पर्दा डालने के लिए हर मौत को बीमारी से हुई मौत कहकर दबा दिया गया।

4.5 % से 14.2% के कृषि विकास दर का सच ये है कि इस वर्ष के सुखाड़ से आर्थिक संकटों में घिरे राज्य के अनेकों किसानों को अभीतक कोई सूखा राहत नसीब नहीं हो सकी है। नाबालिग बच्चियों पर बढ़ते हमले और सामूहिक दुष्कर्म कर गला काट देने जैसी घटनाएँ, महिला सशक्तिकरण कि भयावहता दर्शा रहीं हैं। जिसे प्राथमिकता का एजेंडा बनाने कि बजाय सरकार ने महिलाओं को महज गैस कनेकशन देने को अपनी उपलब्धि गिनाया है। राज्य के दसियों हज़ार स्कूलों की बंदी/मर्जर से बचे स्कूलों में बेंच–डेस्क इत्यादि देकर शान बघारी गयी है कि इन चार वर्षों में सिर्फ यही राज्य है जहां कोई ‘ड्रापआउट’ नहीं हुआ है। राज्य के मुसालमानों को सत्ता संरक्षित मॉब लिंचिंग और सांप्रदायिक हिंसा का शिकार बनाकर उनके लिए हज भवन निर्माण व हजयात्रा भेजने को बड़ी उपलब्धि बताया गया है। ईसाई समुदाय को आतंकित- प्रताड़ित करने हेतु लाये गए ‘धर्मांतरण बिल’ को सरकार का अल्पसंख्यक हित कहा गया है।   

आदिवासियों के विकास को वर्तमान शासन के केंद्र में रखने की ज़मीनी हक़ीक़त, गोड्डा में अडानी कंपनी के लिए रैयत स्ंताली बस्तियों को उजाड़े जाने की घटना ने तो दिखलाया ही, पत्थलगड़ी अभियान से अपने संवैधानिक अधिकारों के हनन के खिलाफ आवाज़ उठा रहे आदिवासियों को देशद्रोही घोषित कर पूरे इलाके में भीषण राज्य दमन ने भी सरकार का तथाकथित आदिवासी हित उजागर कर गया। सबसे बड़ी विडम्बना तो ये है कि ‘माननीय’ मुख्यमंत्री जी राज्य की विधानसभा और उच्च न्यायालय के जिस नए व भव्य भवन के निर्माण का श्रेय ले रहें हैं, उसकी सारी ज़मीनें आदिवासियों से ही छीनी गयी हैं। जो आज भी अपनी बेदखली के खिलाफ आंदोलन कर रहें हैं।

देश के संसद के इस बार के शीतकालीन सत्र से पूर्व मीडिया सम्बोधन में प्रधानमंत्री ने देश की जनता के हित और संसदीय मर्यादा की दुहाई देते हुए विपक्ष को नसीहत दी कि वे सदन में बहस तो करें लेकिन झारखंड में उन्हीं की पार्टी की सरकार ने मात्र तीन दिनों का शीतकालीन सत्र कराया। सिर्फ अनुपूरक बजट और सरकारी अध्यादेशों को पारित कराने मात्र के लिए ही ये सत्र था। प्रधानमंत्री जी द्वारा सदन में जनहित के लिए बहस चलाने का सुझावों का अनुपालन इस अतिसंक्षिप्त शीतकालीन सत्र में विपक्ष के जनहित के सभी कार्यस्थगन प्रस्ताओं को स्पीकर महोदय ने खारिज करके किया। फलतः सारा सत्र हंगामेदार रहा और हमेशा की भांति मुख्यमंत्री व सत्ता पक्ष के माननीय प्रतिनिधियों ने विपक्ष को राज्य के विकास का विरोधी बताकर कोसा।

बहरहाल, स्थापित अखबारों के वरीय संपादकों से अपनी प्रशस्ति में विशेष कालम और फ्रंट पेज़ का विज्ञापन प्रकाशित करा लेना ही किसी सरकार की जनप्रिय विकास का पैमाना नहीं होता है। हर जगह विशाल होर्डिंग्स टाँगकर भी विकास नहीं दर्शाया जा सकता है। किसी भी सरकार के सुशासन और जनहित में किए गए बेहतर कार्यों का एकमात्र सबूत होता है, ज़मीन पर दिखने वाला वास्तविक विकास। वही तय करता है उस सरकार का चुनावी भविष्य! रहा झारखंड प्रदेश की वर्तमान सरकार के काम काज के वास्तविक नतीजे का सवाल,  तो ......... ????

 

झारखंड
BJP
raghuvar govt
RAGHUVAR DAS
BJP Govt
development
Jharkhand
Jharkhand government

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!
    27 Mar 2022
    पुनर्प्रकाशन : यही तो दिन थे, जब दो बरस पहले 2020 में पूरे देश पर अनियोजित लॉकडाउन थोप दिया गया था। ‘इतवार की कविता’ में पढ़ते हैं लॉकडाउन की कहानी कहती कवि-पत्रकार मुकुल सरल की कविता- ‘लॉकडाउन—2020’।
  • डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    लीजिए विकास फिर से शुरू हो गया है, अब ख़ुश!
    27 Mar 2022
    ये एक सौ तीस-चालीस दिन बहुत ही बेचैनी में गुजरे। पहले तो अच्छा लगा कि पेट्रोल डीज़ल की कीमत बढ़ नहीं रही हैं। पर फिर हुई बेचैनी शुरू। लगा जैसे कि हम अनाथ ही हो गये हैं। जैसे कि देश में सरकार ही नहीं…
  • सुबोध वर्मा
    28-29 मार्च को आम हड़ताल क्यों करने जा रहा है पूरा भारत ?
    27 Mar 2022
    मज़दूर और किसान आर्थिक संकट से राहत के साथ-साथ मोदी सरकार की आर्थिक नीति में संपूर्ण बदलाव की भी मांग कर रहे हैं।
  • अजय कुमार
    महंगाई मार गई...: चावल, आटा, दाल, सरसों के तेल से लेकर सर्फ़ साबुन सब महंगा
    27 Mar 2022
    सरकारी महंगाई के आंकड़ों के साथ किराना दुकान के महंगाई आकड़ें देखिये तो पता चलेगा कि महंगाई की मार से आम जनता कितनी बेहाल होगी ?
  • जॉन पी. रुएहल
    क्या यूक्रेन मामले में CSTO की एंट्री कराएगा रूस? क्या हैं संभावनाएँ?
    27 Mar 2022
    अपने सैन्य गठबंधन, सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (सीएसटीओ) के जरिये संभावित हस्तक्षेप से रूस को एक राजनयिक जीत प्राप्त हो सकती है और अपने अभियान को आगे बढ़ाने के लिए उसके पास एक स्वीकार्य मार्ग प्रशस्त…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License