NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
घटना-दुर्घटना
भारत
राजनीति
झारखंड हिंडाल्को हादसा: कौन है इसका ज़िम्मेदार?
9 अप्रैल की दोपहर हिंडाल्को कंपनी से निकलने वाले लगभग 80 फ़ीट ऊँचे कास्टिक रेड पौंड के मलबे का ढेर (कास्टिक तालाब) अचानक से भरभराकर ढह गया। देखते ही देखते ख़तरनाक रसायनिक ‘लाल मलबा' बाढ़ की शक्ल में आसपास के पूरे इलाक़े में चारों ओर फैल गया।
अनिल अंशुमन
18 Apr 2019
झारखंड हिंडाल्को हादसा: कौन है इसका ज़िम्मेदार?

देश में लोकतंत्र के महात्यौहार के दौरान झारखंड प्रदेश की राजधानी से 65 किलोमीटर की दूरी पर मूरी स्थित हिंडाल्को लिमिटेड ऑफ़ आदित्य बिड़ला ग्रुप कंपनी में 9 अप्रैल को हुए भयानक हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक विकास के खोखलेपन को उजागर कर दिया है। साथ ही जनता और मतदाताओं के सामने यह सवाल भी खड़ा कर गया है कि क्या ये चुनाव में कोई मुद्दा बन पाएगा? पिछले 70 वर्षों से इस अल्युमीनियम कंपनी से निकलने वाले बेहद ख़तरनाक अवयव ‘कास्टिक रेड पौंड' की समूचित निस्तारण व्यवस्था नहीं होने के बावजूद इस कंपनी को सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की पूरी स्वीकृति मिली हुई है। जबकि इससे पहले भी भोपाल गैस त्रासदी कांड से लेकर झारखंड के जादूगोड़ा स्थित यूरेनियम खनन में होने वाले भयावह विकिरण जैसे कई त्रासदी कांड हो चुके हैं। बावजूद इससे कोई सबक लेने और इसकी पुनरावृति नहीं होने देने के लिए कोई ठोस क़दम उठाने के, ‘विकास' का ढिंढोरा पीट कर शासन में क़ाबिज़ होने वालों को ‘निजी कंपनियों के विकास' के अलावा इससे पीड़ित हो रहे आम जन की कोई परवाह नहीं है। नतीजतन आए दिन होने वाले ऐसे हादसों को झेलना आम जन की नियति बन गयी है। वहीं हादसे के छोटे दोषियों पर दिखावे की चंद कार्यवाही की रस्म अदा कर होने वाले नए हादसे का इंतज़ार कराया जा रहा है।   

9 अप्रैल की दोपहर हिंडाल्को कंपनी से निकलने वाले लगभग 80 फ़ीट ऊँचे कास्टिक रेड पौंड के मलबे का ढेर (कास्टिक तालाब) अचानक से भरभराकर ढह गया। देखते ही देखते ख़तरनाक रसायनिक ‘लाल मलबा' बाढ़ की शक्ल में आसपास के पूरे इलाक़े में चारों ओर फैल गया। सूत्रों के अनुसार लगभग डेढ़ किलोमीटर के दायरे में फैल गए इस तरल मलबे की बहाव रफ़्तार इतनी तेज़ थी कि उसमें 3 हाइवा, 1 पोकलेन व 2 ट्रैक्टर खिलौने की तरह बह गए। कंपनी प्रवक्ताओं के अनुसार महज़ चार मज़दूरों के मामूली रूप से घायल होने की बात कही गयी। जबकि स्थानीय ग्रामीणों ने वहाँ काम कर रहे कई मज़दूरों के अलावा उस वक़्त खेतों में भी काम कर रहे कई किसानों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई है। आसपास के खेतों और इधर-उधर फैले कास्टिक मलबे की भयावह दुर्गंध से लोगों का सांस लेना भी मुश्किल होने लगा। हादसे की ख़बर सुनकर स्थानीय प्रशासन घटनास्थल पर पहुँचकर तात्कालिक बचाव कार्य में जुट गया। कुछ घंटों बाद एनडीआरएफ़ की भी एक टीम पहुँच गयी लेकिन अंधेरा होने के कारण बचाव कार्य रुक गया। जबकि कंपनी प्रशासन दो दिनों तक इतने संगीन मामले को नज़रअंदाज़ किए बैठा रहा। मीडिया और स्थानीय ग्रामीण जब हादसे में हताहत और प्रभावित लोगों की स्थिति जाननी चाही तो कंपनी के अधिकारी साफ़ कतरा गए। मजबूरन देर रात तक लोगों को हादसे के बाद से गुम हुए लोगों की तलाश में ख़ुद ही इधर-उधर भटकना पड़ा। घटनास्थल के पास से गुज़रनेवाली मूरी-जमशेदपुर रेलवे लाइन पर भी कास्टिक मलबा के फैल जाने से पाँच घंटे से भी अधिक समय तक रेल यातायात पूरी तरह से बाधित रही। ग़नीमत थी कि हादसे के समय कोई यात्री गाड़ी वहाँ से नहीं गुज़री थी। 

बचाव–राहत कार्य में जुटे प्रशासन को ग्रामीणों के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ा। जिनका खुला आरोप था कि यह हादसा सिर्फ़ कंपनी की लापरवाही से ही हुआ है। झारखंड राज्य के मुख्य सचिव ने हादसे की उच्च स्तरीय जांच के आदेश के अलावा राज्य प्रदूषण बोर्ड ने कंपनी के एमडी समेत 6 अधिकारियों पर शोकॉज़ व तत्काल कंपनी क्लोज़र का आदेश जारी कर दिया। साथ ही इसका डिज़ाइन तैयार करने वाले ‘बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CBRI) रुड़की के प्रोफ़ेसरों को भी नोटिश जारी किया गया। हालांकि कंपनी व प्रशासन से जारी सूचनाओं में अभी तक किसी के मरने की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन स्थानीय ग्रामीण इससे सहमत नहीं हैं। उनका स्पष्ट आरोप है कि मामले को रफ़ा-दफ़ा करने की साज़िश हो रही है। उधर आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण हादसे से प्रभावित लोगों को सरकार की ओर से कोई मुआवज़ा नहीं देने की बात कही जा रही है और कंपनी प्रबंधन ने तो इस सवाल पर पूरी तरह से चुप्पी ही साध रखी है। हालांकि चुनावी समय होने के कारण कई पार्टियों के नेतागण वहाँ पँहुचे और दोषी कंपनी पर कार्यवाही और पीड़ितों को उचित मुआवज़े की मांग उठाई लेकिन किसी ने इसे स्थानीय जनता का चुनावी मुद्दा बनाने की ज़हमत नहीं उठाई। 

1948 में राष्ट्र निर्माण के औद्योगिक विकास के तहत तत्कालीन भारतीय अल्युमीनियम कंपनी (आईएनडीएएल) द्वारा ‘भारत हिंडाल्को इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड वर्क्स, मूरी' नाम से देश की पहली अल्युमीनियम रिफ़ाइनरी की स्थापना की गयी थी। लेकिन देश के सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों को निजी घरानों को सौंपने की नीतियों के तहत 2005 में तत्कालीन केंद्र की सरकार ने इसे आदित्य बिड़ला प्रबंधन प्राइवेट लिमिटेड के नाम कर दिया। जिससे इस कंपनी का नाम बदलकर हिंडाल्को लिमिटेड ऑफ़ आदित्य बिड़ला ग्रुप हो गया। 

सवाल है कि जिस औद्योगिक विकास कि दुहाई पक्ष और विपक्ष के सभी सत्ताधारी दल और उनके माननीय नेतागण देते हैं, उससे किसका फ़ायदा और किसे नुकसान हो रहा है? आए दिन औद्योगिक हादसों से होने वाले जानोमाल के नुकसान का ज़िम्मेदार कौन है? क्या सिर्फ़ ‘मुनाफ़ा कंपनी के नाम और हादसे जनता के नाम' की स्थिति ही लागू रहेगी? विकास के नाम पर बनाई जा रही देश की वर्तमान औद्योगिक नीतियाँ क्या सिर्फ़ बड़े निजी व कॉर्पोरेट घरानों की तिज़ोरी भरने के लिए ही होंगी? अथवा इसमें देश की जनता के हितों को भी कोई जगह मिलेगी? इस चुनाव में देश के मतदाताओं को तो सोचना ही होगा!

hindalco
aditya birla group
Jharkhand
hindalco tragedy
Jharkhand government
Elections
General elections2019

Related Stories

भारत में हर दिन क्यों बढ़ रही हैं ‘मॉब लिंचिंग’ की घटनाएं, इसके पीछे क्या है कारण?

झारखंड:  रेलवे ठेकदार द्वारा खोदे गड्ढे में डूबकर गांव की 7 बच्चियों की मौत

मेघालय और झारखंड में खदान दुर्घटना में आठ लोगों की मौत, चार लापता

झारखंड: सत्ता से बेख़ौफ़ कार्टूनिस्ट बशीर अहमद का जाना...

झारखंड : विवादित विधानसभा भवन में लगी आग

झारखंड : छात्रा का विवादित कमेंट, कोर्ट की सज़ा और हिन्दू संगठनों की चेतावनी!  

झारखंड : लिंचिंग को ललकार

राम के नाम पर दुनिया में कर दिया बदनाम

झारखंड: बिरसा मुंडा की मूर्ति तोड़े जाने से झारखंडी समाज में आक्रोश

झारखंड विधान सभा चुनाव 2019 : भूख से मरनेवालों की बढ़ती कतार !


बाकी खबरें

  • अनिल अंशुमन
    झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!
    29 Mar 2022
    जगह-जगह हड़ताल के समर्थन में प्रतिवाद सभाएं कर आम जनता से हड़ताल के मुद्दों के पक्ष में खड़े होने की अपील की गयी। हर दिन हो रही मूल्यवृद्धि, बेलगाम महंगाई और बेरोज़गारी के खिलाफ भी काफी आक्रोश प्रदर्शित…
  • मुकुंद झा
    दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन
    29 Mar 2022
    केंद्रीय ट्रेड यूनियन ने इस दो दिवसीय हड़ताल को सफल बताया है। आज हड़ताल के दूसरे दिन 29 मार्च को देश भर में जहां औद्दोगिक क्षेत्रों में मज़दूरों की हड़ताल हुई, वहीं दिल्ली के सरकारी कर्मचारी और रेहड़ी-…
  • इंदिरा जयसिंह
    मैरिटल रेप को आपराधिक बनाना : एक अपवाद कब अपवाद नहीं रह जाता?
    29 Mar 2022
    न्यायिक राज-काज के एक अधिनियम में, कर्नाटक उच्च न्यायालय की व्याख्या है कि सेक्स में क्रूरता की स्थिति में छूट नहीं लागू होती है।
  • समीना खान
    सवाल: आख़िर लड़कियां ख़ुद को क्यों मानती हैं कमतर
    29 Mar 2022
    शोध पत्रिका 'साइंस एडवांस' के नवीनतम अंक में फ्रांसीसी विशेषज्ञों ने 72 देशों में औसतन 15 वर्ष की 500,000 से ज़्यादा लड़कियों के विस्तृत सर्वे के बाद ये नतीजे निकाले हैं। इस अध्ययन में पाया गया है कि…
  • प्रभात पटनायक
    पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों में फिर होती बढ़ोतरी से परेशान मेहनतकश वर्ग
    29 Mar 2022
    नवंबर से स्थिर रहे पेट्रोल-डीज़ल के दाम महज़ 5 दिनों में 4 बार बढ़ाये जा चुके हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License