NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
भारत
राजनीति
झारखंड : कहीं कमजोर न हो जाये, ‘भाजपा हराओ’ मुहिम!
क्या वजह है कि वर्तमान जन विरोधी सत्ता के विकल्प के तौर पर पेश किए जा रहा विपक्ष के सत्ताधारी दलों का “महागठबंधन”, बतकही और घोषणापत्र में तो जन मुद्दों की बात कर रहा है लेकिन सीट बँटवारे के समय उन्हीं जन मुद्दों को लेकर सबसे अधिक आंदोलनरत रहने वाले वामपंथी दलों को “सीटों के गणित” में सुनियोजित ढंग से बाहर कर दे रहा है।
अनिल अंशुमन
03 Apr 2019
jharkhand mahagathbandhan
Image Courtesy: jagran.com

ख़बरों की मानें तो इस चुनावी महापर्व में झारखंड प्रदेश की सत्ताभक्त मीडिया को तो मानो मुहमांगी मुराद मिल गयी है। क्योंकि राज्य में ‘भाजपा हराओ’ मुहिम का महागठबंधनी कुनबा अभी से ही कुछ बिखरने सा लगा है। कुछ दिनों पूर्व तक मीडिया के जो चुनावी विश्लेषक यह लिख रहे थे कि- यहाँ सीधा मुक़ाबला होगा- लेकिन जब से सीटों के बँटवारे के सवाल पर महागठबंधनी जमात ने वामपंथी दलों को सिरे से नकार कर यह कह दिया कि इन्हें विधानसभा चुनाव के समय सीटें दी जाएंगी। फलस्वरूप वामपंथी दलों को अपना ‘साझा मोर्चा’ बनाकर झारखंड में संसदीय चुनाव लड़ने का ऐलान करना पड़ा। तब से भाजपा विरोधी वोटों के बिखराव को गति देने के लिए तथाकथित चुनाव विश्लेषण पूरे ज़ोरों से फैलाया जा रहा है कि --- तय हो चुके चुनावी परिदृश्य को वामपंथी दलों ने अचानक बदल दिया है और राज्य के वामपंथी दल एकजुट होकर लड़ेंगे। तथाकथित मुख्य धारा की मीडिया ने वर्तमान चुनावी चर्चाओं से जिस वामपंथ की अपनी खबरों में हाशिये पर रखा था, अचानक उसे ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ का महत्व देते हुए लिखा जा रहा है- कांग्रेस ने सूबे में वामपंथी दलों के अस्तित्व को ही नकार दिया है। जबकि राज्य में भाजपा विरोधी मतों का बड़ा हिस्सा वामपंथियों का है।

वैसे मीडिया का उक्त विशलेषण भी कोई हवाई नहीं है। वर्तमान सत्ताधारी दल की देश व जनविरोधी नीतियों और ‘डबल इंजन’ की सरकारों के कुशासन के खिलाफ राज्य में हुए विविध जन आंदोलनों के जरिये ज़मीनी विपक्ष की भूमिका निभाने में वामपंथी दलों की जो प्रभावकारी भूमिका रही है, उसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है। विशेषकर इस प्रदेश में वर्तमान भाजपा शासन के खिलाफ उभरे व्यापक जन विक्षोभ के स्वर को मुखर बनाने में महागठबंधन के किसी भी “महारथी दलों” की अपेक्षा वाम दलों की सक्रियता अधिक रही है। उदाहरणार्थ- बड़कागाँव-गोला (हजारीबाग–रामगढ़) के विस्थापित किसानों पर गोलीकांड, बालूमाथ-रामगढ़ और जामताड़ा समेत कई स्थानों पर सरकार के राजनीतिक संरक्षण में मुस्लिमों की ‘मॉबलिंचिंग’ के अलावा राज्य में हुईं सांप्रदायिक–हिंसा उन्माद की सैकड़ों घटनाओं जैसे संवेदनशील मुद्दों पर मुखर प्रतिवाद करने में वामपंथी दलों की सक्रियता अन्य राजनीतिक दलों से अधिक दिखी। रघुवर दास सरकार द्वारा राज्य के किसान-आदिवासीयों की ज़मीन- लूट के लिए लाये गए ‘भूमि अधिग्रहण बिल’, ‘ लैंड बैंक योजना’ समेत सीएनटी-एसपीटी एक्ट संशोधन और अल्पसंख्यक विरोधी ‘धर्मांतरण बिल’ का मुखर राज्यव्यापी विरोध अभियान संगठित करने में भी इनकी प्रभाकरी भूमिका रही। विशेषकर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा तमाम नियम–क़ायदों को धता बताकर झारखंड में कॉर्पोरेट कंपनियों को लूट की खुली छूट की नीति लागू करने तथा विशेषकर राज्य के आदिवासियों व अन्य ग्रामीण गरीबों के विस्थापन–पलायन व इनपर होने वाला सुनियोजित राज्य–दमन, भूख से मौत और अकाल– सुखाड़ इत्यादि अनेकों ज्वलंत सवालों पर भी आदिवासी संगठनों व अन्य सामाजिक जन संगठनों के साथ संयुक्त और स्वतंत्र आंदोलन संगठित करने में वामपंथी दल व उनके संगठन सक्रियता की सबसे अगली पांत में रहे हैं। आलम तो यह भी रहा कि राज्य विधानसभा के अंदर और बाहर सड़कों के सभी ज़मीनी आंदोलन के अभियानों में इन्हीं वामपंथी दलों को ‘विपक्षी महागठबंधन’ ने अपनी हर कार्रवाई में प्रमुखता के साथ शामिल रखा।

विडम्बना है कि भाजपा–राज के खिलाफ मजबूत विपक्ष खड़ा करने के लिए वामपंथी दल जिस ‘महागठबंधन’ के साथ हर कदम पर पूरी मजबूती से खड़े रहे, ऐन चुनाव के मौके पर उसके ‘महारथी दलों’ के नकारात्मक और अपमानजनक रवैये ने प्रदेश के सभी वामपंथी दलों को बेहद निराश किया है। फलतः राज्य की 3 प्रमुख लोकसभा सीटों पर वामदलों की ओर से संयुक्त वाम उम्मीदवार खड़े किए गए हैं। जो इनके सघन कामकाज, संघर्ष और प्रभाव के प्रमुख इलाके माने जाते हैं। जिसमें सीपीएम– राजमहल (संथाल परगना ), सीपीआई– हजारीबाग तथा भाकपा माले– कोडरमा सीट शामिल है। इसके आलवे सीपीआई ने चतरा व दुमका तथा भाकपा माले ने पलामू सीट से भी अपने प्रत्याशी दिये हैं। वामदलों ने स्पष्ट कहा है कि भाजपा को हराने के लिए जहां पिछले चुनावों में उनका अच्छा प्रदर्शन और जनता के ज्वलंत सवालों पर प्रभावकारी सक्रियता रही है, सिर्फ उन्हीं सीटों पर वे चुनाव लड़ेंगे और बाकी सीटों पर महागठबंधन को अपना सक्रिय समर्थन देंगे। क्योंकि वे कतई नहीं चाहेंगे कि ‘भाजपा हराओ’ मुहिम कहीं से भी कमजोर हो और वोटों का बिखराव हो। बावजूद इसके कि सीट बंटवारे में महागठबंधन ने उन्हें समुचित सम्मान नहीं दिया है। यही रणनीति बिहार में भी अपनाई गई है।

हमारे लोकतन्त्र की सार्थकता जनता की जागरूक सक्रियता पर निर्भर होती है। जन मुद्दों पर जनता की सक्रियता ही उसकी लोकतान्त्रिक चेतना का व्यावहारिक रूप होता है। वामपंथी दलों व संगठनों को जन मुद्दों के संघर्षों का प्रणेता माना जाता है। सवाल उठता है कि क्या वर्तमान ‘लोकतन्त्र का महापर्व’ जन मुद्दों से परे रखकर और महज ‘वोट के लिये’ इस्तेमाल करके मनाया जाएगा? अन्यथा क्या वजह है कि वर्तमान जन विरोधी सत्ता के विकल्प के तौर पर पेश किए जा रहा विपक्ष के सत्ताधारी दलों का “महागठबंधन”, बतकही और घोषणापत्र में तो जन मुद्दों की बात कर रहा है लेकिन सीट बँटवारे के समय उन्हीं जन मुद्दों को लेकर सबसे अधिक आंदोलनरत रहनेवाले वामपंथी दलों  को “सीटों के गणित” में सुनियोजित ढंग से बाहर कर दे रहा है। इतना ही नहीं महागठबंधन के वर्तमान प्रतीक युवा नेता ने तो वामपंथ के गढ़ केरल राज्य की एक सीट से अपनी उम्मीदवारी की घोषणा कर भी दी है। ऐसे में चर्चित हिन्दी जनकवि धूमिल जी की आशंका सच न साबित हो जाए कि – लोकतन्त्र एक तमाशा है, जिसकी जान मदारियों की भाषा है!

(लेखक सांस्कृतिक कार्यकर्ता हैं।)

Jharkhand
jharkhand mahagathbandhan
left parties
Left Front
BJP
General elections2019
2019 Lok Sabha elections
2019 आम चुनाव

Related Stories

ख़बरों के आगे-पीछे: केजरीवाल के ‘गुजरात प्लान’ से लेकर रिजर्व बैंक तक

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

इस आग को किसी भी तरह बुझाना ही होगा - क्योंकि, यह सब की बात है दो चार दस की बात नहीं

ख़बरों के आगे-पीछे: भाजपा में नंबर दो की लड़ाई से लेकर दिल्ली के सरकारी बंगलों की राजनीति

बहस: क्यों यादवों को मुसलमानों के पक्ष में डटा रहना चाहिए!

ख़बरों के आगे-पीछे: गुजरात में मोदी के चुनावी प्रचार से लेकर यूपी में मायावती-भाजपा की दोस्ती पर..

कश्मीर फाइल्स: आपके आंसू सेलेक्टिव हैं संघी महाराज, कभी बहते हैं, और अक्सर नहीं बहते

उत्तर प्रदेशः हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं जनमत के अपहरण को!

जनादेश-2022: रोटी बनाम स्वाधीनता या रोटी और स्वाधीनता

त्वरित टिप्पणी: जनता के मुद्दों पर राजनीति करना और जीतना होता जा रहा है मुश्किल


बाकी खबरें

  • covid
    संदीपन तालुकदार
    जानिए ओमिक्रॉन BA.2 सब-वैरिएंट के बारे में
    24 Feb 2022
    IISER, पुणे के प्रख्यात प्रतिरक्षाविज्ञानी सत्यजित रथ से बातचीत में उन्होंने ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट BA.2 के ख़तरों पर प्रकाश डाला है।
  • Himachal Pradesh Anganwadi workers
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हिमाचल प्रदेश: नियमित करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरीं आंगनबाड़ी कर्मी
    24 Feb 2022
    प्रदर्शन के दौरान यूनियन का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिला व उन्हें बारह सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा। मुख्यमंत्री ने आगामी बजट में कर्मियों की मांगों को पूर्ण करने का आश्वासन दिया। यूनियन…
  • Sulaikha Beevi
    अभिवाद
    केरल : वीज़िंजम में 320 मछुआरे परिवारों का पुनर्वास किया गया
    24 Feb 2022
    एलडीएफ़ सरकार ने मठीपुरम में मछुआरा समुदाय के लोगों के लिए 1,032 घर बनाने की योजना तैयार की है।
  • Chandigarh
    सोनिया यादव
    चंडीगढ़ के अभूतपूर्व बिजली संकट का जिम्मेदार कौन है?
    24 Feb 2022
    बिजली बोर्ड के निजीकरण का विरोध कर रहे बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान लगभग 36 से 42 घंटों तक शहर की बत्ती गुल रही। लोग अलग-अलग माध्यम से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन प्रशासन पूरी तरह से लाचार…
  • Russia targets Ukraine
    एपी
    रूस ने यूक्रेन के वायुसेना अड्डे, वायु रक्षा परिसम्पत्तियों, सैन्य आधारभूत ढांचे को बनाया निशाना, अमेरिका-नाटो को चेताया
    24 Feb 2022
    रूस के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि सेना ने घातक हथियारों का इस्तेमाल यूक्रेन के वायुसेना अड्डे, वायु रक्षा परिसम्पत्तियों एवं अन्य सैन्य आधारभूत ढांचे को निशाना बनाने के लिये किया है। उसने आगे दावा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License