NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखंड में आधार कार्ड न होने की वजह भूख से मौतें जारी
इसमें हालिया मौत है धमूका ज़िले के महुआदनर गाँव के 45 वर्षीय कलेश्वर सोरेन की मौत. जिनकी भूख गरीबी की वजह से 11 नवम्बर को मौत हुई।
सुमेधा पॉल
21 Nov 2018
Translated by ऋतांश आज़ाद
starvation death

पिछले एक महीने में सूखे के चलते झारखंड में भुखमरी से दो लोगों की मौत हो गयी है। राइट टू फूड अभियान की एक रिपोर्ट के मुताबिक भुखमरी में झारखंड की हालत बहुत खराब है, सितंबर 2017 से अब तक 17 लोग भूख से मर गए हैं ।

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए आरटीएफ के अशरफी नंद प्रसाद ने कहा “राज्य में भूख की वजह से हो रही मौतों को बायो मैट्रिक्स से लिंक न किये जाने के संदर्भ में देखा जाना चाहिए । आधार परियोजना की वजह से मज़दूर, दिहाड़ी मज़दूर और हाशिये पर पड़े लोगों को बहुत नुकसान हुआ है।"

खाद्य सुरक्षा पर हो रही राजनीति के हालिया पीड़ित हैं कालेश्वर सोरेन।  जिनकी मौत 11 नवंबर को भूख की वजह से हुई थी । उनकी मौत धामुका ज़िले के  महौदनर गाँव में हुई थी । नन्दा प्रसाद ने कहा “कालेश्वर के परिवार और 27 दूसरे परिवारों का 2016 में राशन कार्ड कैन्सल हो गया था क्योंकि वह राशन कार्ड से लिंक नहीं हुआ था ।’’

26 परिवारों को राशन की सूची में फिर से डाल दिया गया जब एक साल बाद उनका कार्ड कैन्सल हो गया और जब उन्होंने अपने आधार और बंधक खाते के डीटेल जमा किए। इसी गाँव के जिआन किसकू जिनका 2016 में राशन कार्ड कैन्सल हो गया था। उन्हें राशन सूची में इसलिए नहीं डाला गया है क्योंकि न तो उनके न ही उनकी पत्नी के पास आधार कार्ड है ।

इसी तरह कार्ड के कैन्सल हो जाने के बाद से कालेश्वर अपने पड़ोसियों के दिये  हुए खाने पर ज़िंदा थे क्योंकि उनके परिवार को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत कुछ नहीं मिलता था । इसकी वजह थी कि उनका राशन कार्ड आधार से जुड़ा नहीं था। राशन डीलर के हिसाब से जब उनका राशन कार्ड कैन्सल हो गया तो कलेश्वर को राशन सूची पर वापस आने के लिए आधार देने हो कहा गया । वह जमा नहीं कर पाये क्योंकि उन्होने वह खो दिया था ।

आरटीएफ अभियान में कहा गया है कि कालेश्वर की तरह और भी कई गरीब परिवार ऐसे हैं जो सामाजिक सुरक्षा और खाने कि कमी में जी रहे हैं ।प्रसाद ने कहा “2017 में हुई कई मौतों की वजह से सरकार खाद्यन कोष योजना उपाय के तौर पर लाई । इसके तहत ग्राम पंचायत का मुखिया गरीब परिवारों को खाद्य प्रदान कर सकता है। कालेश्वर के मामले में यह हुआ या नहीं इसे साबित नहीं किया जा सकता ।’’

कालेश्वर की मौत की तरह ही कुछ ही दिन पहले देओघर के मर्गोमुंडा के मोती यादव की भी मौत इसी तरह हुई । यादव एक दृष्टिबाधित व्यक्ति थे फिर भी उन्हे विकलांग पेंशन नहीं मिल रही थी । इसी तरह 75 साल की सीता देवी की भी मौत आधार परियोजना की विफलता की एक और कहानी सुनती है । राशन कार्ड होने के बावजूद उनकी उम्र और खराब तबीयत की वजह से वह अपनी पहचान प्रमाणित नहीं करा पायी और इसी वजह से उन्हे राशन नहीं मिला । इसी तरह वह गुरबत में भी रह रही थीं क्योंकि उनका आधार कार्ड बैंक खाते से नहीं जुड़ा हुआ था, जिस वजह से उन्हे पेंशन नहीं मिल रही थी ।

 सितंबर 2017 से हुई 17 मौतों में 8 आदिवासी हैं , 4 दलित और 5 पिछड़ी हुई जातियों के थे। सरकार के दावों के बावजूद यह मौतें राशन कार्ड के न होने पर राशन न मिलने, आधार कार्ड के लिंक न करने पर राशन कार्ड के कैन्सल होने , आधार के बायोमैट्रिक्स से प्रमाणित न होने  की वजह से होती हैं । पेंशन न मिलने और नरेगा के अंतर्गत काम न मिलने के कारण गरीबी की स्थिति और भी खराब हो जाती है। मरने वालों में कम से कम सात ऐसे लोग थे जिन्हें सामाजिक सुरक्षा पेंशन मिलनी चाहिए थी , लेकिन या तो उन्हे पेंशन नहीं दी गयी या उन्हे आधार संबन्धित मामलों या दूसरी वजहों से पेंशन नहीं मिली ।

यह मौतें अंत्योदय अन्न योजना की खराब स्थिति के बारे में भी बताती हैं । इसमें से ज़्यादातर परिवार बेहद गरीबी में रहते हैं और इनके पास  राशन कार्ड नहीं था । प्रसाद ने कहा “मौतें ऐसे ही होती रहेंगी अगर हमारी मांगों को नहीं माना गया । हम मांग कर रहे हैं कि पीडीएस सबके लिए होना चाहिए ,  नरेगा की दिहाड़ी बढ़ते रहनी चाहिए और राशन भी लगातार मिलना चाहिए ।’’इसके साथ खाद्य अधिकार आंदोलन पीडीएस में दालों और तेल को जोड़ने और आधार की अनिवार्यता को खत्म करने की भी मांग कर रहा है । यह पाँच मौतें सरकार के खाद्य कोश की घोषणा के बाद हुई है , इस घोषण को एक और हवाई वादे की तरह देखा जा रहा है । यह मौतें झारखंड सरकार के द्वारा सामाजिक सुरक्षा और खाद्य अधिकार को प्रदान करने के वादों की असलियत दिखा रही हैं ।

 

Jharkhand government
Death by malnutrition
Starvation Deaths

Related Stories

झारखंड: भाजपा काल में हुए भवन निर्माण घोटालों की ‘न्यायिक जांच’ कराएगी हेमंत सोरेन सरकार

झारखंड : हेमंत सरकार को गिराने की कोशिशों के ख़िलाफ़ वाम दलों ने BJP को दी चेतावनी

झारखंड : हेमंत सोरेन शासन में भी पुलिस अत्याचार बदस्तूर जारी, डोमचांच में ढिबरा व्यवसायी की पीट-पीटकर हत्या 

कम मतदान बीजेपी को नुक़सान : छत्तीसगढ़, झारखण्ड या राजस्थान- कैसे होंगे यूपी के नतीजे?

झारखंड: राज्य के युवा मांग रहे स्थानीय नीति और रोज़गार, सियासी दलों को वोट बैंक की दरकार

झारखंड : ‘भाषाई अतिक्रमण’ के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब, मगही-भोजपुरी-अंगिका को स्थानीय भाषा का दर्जा देने का किया विरोध

झारखंड: भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुस्लिम युवक से की मारपीट, थूक चटवाकर जय श्रीराम के नारे लगवाए

झारखंड: केंद्रीय उद्योग मंत्री ने एचईसी को बचाने की जवाबदेही से किया इंकार, मज़दूरों ने किया आरपार लड़ाई का ऐलान

झारखंड विधान सभा में लगी ‘छात्र संसद’; प्रदेश के छात्र-युवा अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर

बाघमारा कोल साइडिंग में छंटनी का विरोध कर रहे मज़दूरों पर प्रबंधन ने कराया लाठीचार्ज


बाकी खबरें

  • up elections
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव: सपा द्वारा पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने का वादा मतदाताओं के बीच में असर कर रहा है
    02 Mar 2022
    2004 में, केंद्र की भाजपा सरकार ने सुनिश्चित पेंशन स्कीम को बंद कर दिया था और इसकी जगह पर अंशदायी पेंशन प्रणाली को लागू कर दिया था। यूपी ने 2005 में इस नई प्रणाली को अपनाया। इस नई पेंशन स्कीम (एनपीएस…
  • फिल्म लेखक और समीक्षक जयप्रकाश चौकसे का निधन
    भाषा
    फिल्म लेखक और समीक्षक जयप्रकाश चौकसे का निधन
    02 Mar 2022
    जयप्रकाश चौकसे ने ‘‘शायद’’ (1979), ‘‘कत्ल’’ (1986) और ‘‘बॉडीगार्ड’’ (2011) सरीखी हिन्दी फिल्मों की पटकथा तथा संवाद लिखे थे। चौकसे ने हिन्दी अखबार ‘‘दैनिक भास्कर’’ में लगातार 26 साल ‘‘परदे के पीछे’’ …
  • MAIN
    रवि शंकर दुबे
    यूपी की सियासत: मतदान से ठीक पहले पोस्टरों से गायब हुए योगी!, अकेले मुस्कुरा रहे हैं मोदी!!
    02 Mar 2022
    छठे चरण के मतदान से पहले भाजपा ने कई नये सवालों को जन्म दे दिया है, योगी का गढ़ माने जाने वाले गोरखपुर में लगे पोस्टरों से ही उनकी तस्वीर गायब कर दी गई, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी अकेले उन पोस्टरों में…
  • JSW protest
    दित्सा भट्टाचार्य
    ओडिशा: पुलिस की ‘बर्बरता’ के बावजूद जिंदल स्टील प्लांट के ख़िलाफ़ ग्रामीणों का प्रदर्शन जारी
    02 Mar 2022
    कार्यकर्ताओं के अनुसार यह संयंत्र वन अधिकार अधिनियम का उल्लंघन करता है और जगतसिंहपुर के ढिंकिया गांव के आदिवासियों को विस्थापित कर देगा।
  • CONGRESS
    अनिल जैन
    चुनाव नतीजों के बाद भाजपा के 'मास्टर स्ट्रोक’ से बचने की तैयारी में जुटी कांग्रेस
    02 Mar 2022
    पांच साल पहले मणिपुर और गोवा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बहुमत के नजदीक पहुंच कर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, दोनों राज्यों में भाजपा को कांग्रेस के मुकाबले कम सीटें मिली थीं, लेकिन उसने अपने…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License