NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखंड में मौतें : क्या आधार कार्ड की कोई भूमिका थी ?
"आधार के कारगर न होने कि वजह से कम से कम सात मौतें भुखमरी से हुई हैं। "
सागरिका किस्सू
31 Jul 2018
Translated by ऋतांश आज़ाद
aadhar card

 

24 जुलाई को एक 39 वर्षीय व्यक्ति की मौत, हाल के समय में झारखण्ड में भुखमरी से हुई मौतों के सिलसिले में एक और मौत है। पिछले 10 महीनों में इसी तरह 14 लोगों की मौत हो चुकी है । राजेंद्र बिरहोर का नाम भी अब भुखमरी से मरने वालों की लम्बी लिस्ट में जुड़ गया हैI वे रामगढ़ के मंडू ब्लॉक के चैनपुर के निवासी थे और विशेष रूप से कमज़ोर जनजातिय समुदायों (पीवीटीजी) वर्ग से थेIबताया जा रहा है कि आधार कार्ड न होने कि वजह से उन्हें सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) से बाहर कर दिया और उन्हें राशन कार्ड देने से माना कर दिया गया। बहुत ज़्यादा बीमार और कमज़ोर होने के कारण बिरहोर ने पिछले साल काम करना बंद कर दिया था । वह अपने घर में कमाने वाले इकलौते व्यक्ति थे । उनकी बीमारी के बाद उनकी पत्नी हफ्ते में 2 से 3 दिन काम ढूँढने में कामियाब रहीं , जिससे परिवार के 6 बच्चों को पाला जा सकेI

Campaign और Human Rights Law Network की फ़ैक्ट फ़ाइंडिंग टीम ने यह खुलासा किया कि बिरहोर के परिवार को National Food Security Act, 2013 के तहत राशन कार्ड नहीं मिला । Block Development Officer (BDO) की रिपोर्ट में भी यह बताया गया कि “परिवार को पीडीएस प्रणाली से इसीलिए बाहर किया गया क्योंकि उनके पास आधार कार्ड नहीं था” ।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार विशेष रूप से कमज़ोर जनजातिय समुदायों (पीवीटीजी) के लोगों को हर महीने अन्त्योदय अन्न योजना राशन कार्ड  (AAY) के अंतर्गत 35 किलो राशन पाने का हक़ है । AAY पीडीएस योजनाओं के अंतर्गत एक योजना है जिसे 2000 मे लागू किया गया था । AAY  योजना का काम देश भर में सबसे गरीब लोगों को बहुत की कम कीमत पर राशन पहुँचाना है । इसी तरह विशेष रूप से कमज़ोर जनजातिय समुदायों (पीवीटीजी) के लोगों के घरों तक मुफ्त में राशन पहुँचाने का भी प्रावधान है ।

फ़ैक्ट फ़ाइंडिंग रिपोर्ट में लिखा है कि, “इस परिवार ने नरेगा के अंतर्गत 2010-11 में काम किया था।इन्हें  पीवीतीजी परिवारों को हर महीने मिलने वाली 600 रुपये की पेंशन भी नहीं मिलती । BDO को भी इस स्कीम के बारे मे कोई जानकारी नहीं थी ।’’ BDO ने यह कहा था कि राशन पाने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है । फ़ैक्ट फाइंडिंग कमेटी की एक सामाजिक कार्यकर्ता अंकिता ने कहा कि “इस परिवार ने आधार कार्ड बनवाने के लिए दो बार नामांकन भारा था लेकिन उन्हें आईडी नंबर नहीं मिला , जिससे उन्हें राशन नहीं दिया गया ।“

रिपोर्ट में बताया गया है कि बिरहोर बहुत ज़्यादा बीमार थे और इस वजह से उन्हें मंडू के Community Health Centre (CHC) ले जाया गया था। अंकिता ने कहा कि, “लेकिन वहाँ डॉक्टर न होने के कारण उन्हे रांची स्थित Rajendra Institute of Medical Sciences (RIMS) भेज दिया गया । फ़ैक्ट फ़ाइंडिंग टीम से मिले डॉक्टर यह न बता सके कि ब्लड टेस्ट और यूरीन टेस्ट जैसी आसान जाँच भी क्यों नहीं करवाई गयीं । CHC में उन्हें कोई भी दवाई नहीं बताई गयी ।”

राजेंद्र का इलाज करवाने के लिए परिवार ने एक सूअर बेच दिया और उनका इलाज एक  स्थानीय डॉक्टर द्वारा कराया गयाI । इसी दौरान CHC के डॉक्टरों ने वहाँ की स्थानीय ASHA- Accredited Social Health Activist पर इस मौत की ज़िम्मेदारी डाल दी है , उनका कहना है कि ASHA ने उनकी सेहत का ध्यान नहीं रखा । इससे पहले 14 जून को इसी इलाके केई चिंतामन मलहार की भी इसी तरह भूख से मौत हो गयी थी। फ़ैक्ट फ़ाइंडिंग टीम की जाँच केअनुसार इस परिवार के पास भी राशन कार्ड नहीं था ।

रिपोर्ट के अनुसार आधार कार्ड प्रणाली से जुड़ा न होना इस मौतों का मुख्य कारण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि “आधार के कारगर न होने कि वजह से कम से कम सात मौतें भुखमरी से हुई हैं । सरकार ने इस बात पर बिलकुल ध्यान नहीं दिया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में दाल और तेल भी दिया जाए और उसे आधार कार्ड से अलग किया जाए ।”

Jharkhand
Aadhar card
Jharkhand starvation death
starvation
food security

Related Stories

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

झारखंड: बोर्ड एग्जाम की 70 कॉपी प्रतिदिन चेक करने का आदेश, अध्यापकों ने किया विरोध

आधार को मतदाता सूची से जोड़ने पर नियम जल्द जारी हो सकते हैं : मुख्य निर्वाचन आयुक्त

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

झारखंड की खान सचिव पूजा सिंघल जेल भेजी गयीं

युद्ध, खाद्यान्न और औपनिवेशीकरण

झारखंडः आईएएस पूजा सिंघल के ठिकानों पर छापेमारी दूसरे दिन भी जारी, क़रीबी सीए के घर से 19.31 करोड़ कैश बरामद

खबरों के आगे-पीछे: अंदरुनी कलह तो भाजपा में भी कम नहीं

आदिवासियों के विकास के लिए अलग धर्म संहिता की ज़रूरत- जनगणना के पहले जनजातीय नेता

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण


बाकी खबरें

  • बी. सिवरामन
    खाद्य मुद्रास्फीति संकट को और बढ़ाएगा रूस-यूक्रेन युद्ध
    04 Apr 2022
    सिर्फ़ भारत में ही नहीं, खाद्य मुद्रास्फीति अब वैश्विक मुद्दा है। यह बीजिंग रिव्यू के ताजा अंक की कवर स्टोरी है। संयोग से वह कुछ दिन पहले न्यूयॉर्क टाइम्स की भी एक प्रमुख कहानी बन गई।
  • राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: सांप्रदायिकता का विकास क्या विकास नहीं है!
    04 Apr 2022
    वो नेहरू-गांधियों वाला पुराना इंडिया था, जिसमें सांप्रदायिकता को तरक्की का और खासतौर पर आधुनिक उद्योग-धंधों की तरक्की का, दुश्मन माना जाता था। पर अब और नहीं। नये इंडिया में ऐसे अंधविश्वास नहीं चलते।
  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: किसानों के सामने ही ख़ाक हो गई उनकी मेहनत, उनकी फसलें, प्रशासन से नहीं मिल पाई पर्याप्त मदद
    04 Apr 2022
    "हमारी ज़िंदगी ही खेती है। जब खेती बर्बाद होती है तो हमारी समूची ज़िंदगी तबाह हो जाती है। सिर्फ़ एक ज़िंदगी नहीं, समूचा परिवार तबाह हो जाता है। पक चुकी गेहूं की फसल की मडाई की तैयारी चल रही थी। आग लगी…
  • भाषा
    इमरान खान के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव खारिज किए जाने पर सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय
    04 Apr 2022
    पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने देश के प्रधानमंत्री इमरान खान की सिफारिश पर नेशनल असेंबली (एनए) को भंग कर दिया है। इससे कुछ ही देर पहले नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष कासिम सूरी ने प्रधानमंत्री के…
  • शिरीष खरे
    कोविड-19 टीकाकरण : एक साल बाद भी भ्रांतियां और भय क्यों?
    04 Apr 2022
    महाराष्ट्र के पिलखाना जैसे गांवों में टीकाकरण के तहत 'हर-घर दस्तक' के बावजूद गिने-चुने लोगों ने ही कोविड का टीका लगवाया। सवाल है कि कोविड रोधी टीकाकरण अभियान के एक साल बाद भी यह स्थिति क्यों?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License