NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
समाज
भारत
राजनीति
झारखंड : पुलिस की हिंसा के ख़िलाफ़ प्रदर्शन
26 अगस्त को राजधानी रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर रघुवर राज में बढ़ते पुलिसिया कारनामे, बकोरिया में बच्ची की हत्या तथा हाजत में नेसर की मौत के ख़िलाफ़ आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने की मांग को लेकर नागरिक-प्रतिवाद किया गया।
अनिल अंशुमन
28 Aug 2019
पुलिस की हिंसा के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

पिछले दिनों ‘फ़र्ज़ी मुठभेड़ कांड‘ से सुर्खियों में रहने वाला झारखंड में लातेहार ज़िले का बकोरिया फिर से चर्चा में है। उस कांड में सीआरपीएफ़ व स्थानीय मनिका पुलिस पर फ़र्ज़ी मुठभेड़ के नाम पर नाबालिग लड़कों की ह्त्या का आरोप सीबीआई जांच में सही पाया गया था। अबकी बार इसी क्षेत्र के बंसी टोला निवासी बबीता देवी ने सीआरपीएफ़ व पुलिस के जवानों पर अपनी तीन वर्षीय बेटी की हत्या का केस दर्ज किया है। जिसमें 23 अगस्त की आधी रात को उसके पति को पकड़ने आई सीआरपीएफ़ व मनिका पुलिस के घर में जबरन घुसने का विरोध करने पर उनकी तीन वर्षीय बेटी को उठाकर पटक देने से घटनास्थल पर ही उसकी मौत होने का आरोप है। साथ ही उस एफ़आईआर में पुलिस द्वारा उनके पति विनोद सिंह खरवार को उग्रवादी संगठन जेजेएमपी से जुड़े होने के दावे को भी फ़र्ज़ी बताया गया है। सतबारवा थाना में दर्ज एफ़आईआर के ज़रिये बबीता देवी ने कोर्ट से अपनी बेटी की हत्यारोपी पुलिस वालों को कड़ी सज़ा देने की गुहार लगायी है।

हमेशा की भांति इस घटना की भी विभागीय और आईबी जांच का नाटक शुरू हो गया है। बच्ची की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों की मेडिकल टीम द्वारा उसके शरीर और माथे पर गहरी चोट के निशान होने की दी गयी रिपोर्ट ने पुलिस का झूठ सामने ला दिया है। उग्रवादी संगठन जेजेएमपी ने भी प्रेस बयान जारी कर साफ़ कह दिया है कि विनोद सिंह खरवार का उनके संगठन से कोई लेना देना नहीं है और पुलिस उसे बेवजह फँसा रही है। पुलिस रिकार्ड में विनोद सिंह के ख़िलाफ़ कहीं कोई मामला नहीं मिल सका है। चर्चा है कि पुलिस को जिस विनोद सिंह की तलाश थी उससे ख़ुद एसपी ने 25 अगस्त को घटना के संबंध में पूछताछ की है। 

बकोरिया - मृत बच्ची की माँ.PNG

बबीता देवी के अनुसार उनका पति अपने गाँव में ही छोटी सी दुकान चलाकर परिवार का भरण–पोषण करता है और किसी भी उग्रवादी संगठन से कोई संबंध नहीं है। 23 अगस्त की रात सीआरपीएफ़ और पुलिसवाले घर में जबरन घुसकर उनके पति को तलाशते हुए पूछताछ करने लगे। अपने पति के वहाँ नहीं होने की बात कहने पर वहीं बिछावन पर सो रही तो उसकी तीन वर्षीय बेटी को उठाकर उसके सामने ही ज़मीन पर पटक दिया गया। बच्ची को मरा हुआ देख उसने रोते हुए वह शोर मचाना शुरू किया, जिसे सुनकर आसपास के ग्रामीण इकट्ठा होने लगे तो जवानों ने उन्हें धमकाकर भागा दिया। सुबह होने पर लोग इकट्ठा होकर सीआरपीएफ़–पुलिस के ख़िलाफ़ आक्रोश व्यक्त करने लगे। रोते–कलपाते बबीता व उसके पति ने पास के सातबारवा थाने में जाकर अपनी बेटी के कथित हत्यारे पुलिसवालों के ख़िलाफ़ केस दर्ज कराया।

पुलिस से ही जुड़ी दूसरी घटना है राजधानी रांची से सटे रातू थाना की। जहां 23 अगस्त को पुलिस हाजत में बंद मुस्लिम युवा नेसार अंसारी की संदिग्ध अवस्था में मौत होने की ख़बर अख़बारों में आई। पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया है। लेकिन मृतक की पत्नी व सास ने पुलिस द्वारा हाजत में पीटकर हत्या करने का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए इंसाफ़ की गुहार लगाई है। नेसार अंसारी की मौत के मामले में पुलिस और मृतक के परिजनों के बयानों में काफ़ी विरोधाभास है। रांची के ग्रामीण एसपी के अनुसार पुलिस रिकार्ड में नेसार अंसारी कि गिरफ़्तारी 22 अगस्त को दिखाई गयी है। लेकिन नेसार की पत्नी ने कहा है कि 20 अगस्त के दोपहर चोरी के आरोप में रातू पुलिस उसके पति को पकड़कर ले गयी। 25 अगस्त को भाकपा माले, एआईपीएफ़ व अन्य मानवाधिकार कार्यकर्त्ताओं की गयी जांच टीम को भी नेसार अंसारी की पत्नी व परिजनों ने बताया कि मेहनत मज़दूरी करके घर चलानेवाले नेसार को बिना किसी छानबीन के पुलिस ने 20 अगस्त से ही हाजत में रखा और जब भी उससे घर के लोग मिलने गए तो उससे मिलने नहीं दिया। अपराध क़ुबूल करवाने के लिए ही उसे कथित तौर पर पीट कर मार डाला गया और आत्महत्या का रंग दिया गया है। पुलिस के अनुसार फटे हुए कंबल से हाजत के वेंटिलेटर में लटककर नेसार ने आत्महत्या की है। सनद हो कि इसके पहले भी पुलिस हाजत में फटा कंबल बांधकर आत्महत्या करने की दो घटनाओं का पुलिस पुख्ता सबूत नहीं दे सकी है।

नेसार अंसारी के घर गयी जांच टीम.jpg

26 अगस्त को राजधानी रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर रघुवर राज में बढ़ते पुलिसिया कारनामे, बकोरिया में बच्ची की हत्या तथा हाजत में नेसर की मौत के ख़िलाफ़ आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने की मांग को लेकर नागरिक-प्रतिवाद किया गया।

आसन्न विधान सभा चुनाव की विजय–वैतरणी पार करने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री- "बेटी के चेहरे पर मुस्कान, बहनों को मिला सम्मान!" के करोड़ी-प्रचार और उज्ज्वला गैस का दूसरा सिलिन्डर देने समेत महिला सशक्तिकरण के नाम पर कई योजनाओं की ताबड़तोड़ घोषणाएँ कर रहें हैं। लेकिन उनके सुशासनी राज को पुलिस दरिंदगी की शिकार बकोरिया की बच्ची की माँ बबीता और नेसर अंसारी की विधवा पत्नी समेत अन्य सभी बेटी–बहनों के आंसुओं से कोई मतलब नहीं है। बल्कि इसके उलट पुलिसिया ज़ुल्म के कारनामों के दोषियों पर कारवाई करने की बजाय मामले को दूसरा रंग देकर रफ़ा-दफ़ा करा रहे हैं। इतना ही नहीं दिल्ली में गृहमंत्री द्वारा नक्सलवाद से निपटने के सवाल पर बुलाई गयी मुख्यमंत्रियों की बैठक में रघुवर दास झारखंड में अर्धसैन्य बलों की तैनाती को तीन साल बढ़ाने का प्रस्ताव भी दे आए हैं। 

ज़ाहिर है कि यह किसी जनहित के लिए तो नहीं ही किया जा रहा है। आसन्न विधान सभा चुनाव में जीत की गारंटी के लिए ही यह सरंज़ाम किया गया हो, इसकी आशंका ग़लत नहीं कही जा सकती। हालांकि ज़मीनी स्तर पर रघुवर-राज में बढ़ते पुलिस ज़ुल्म के कारनामों का विरोध निरंतर जारी है, देखने की बात होगी कि आसन्न विधान सभा चुनाव में राज्य की जनता रघुवर दास सरकार से कितना हिसाब मांग पाती है!

JHARKHAND POLICE
jharkhand police violence
violence against tribals
naxalism
naxal attack
CRPF
security forces

Related Stories

छत्तीसगढ़ : सिलगेर में प्रदर्शन कर रहे आदिवसियों से मिलने जा रहे एक प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने रोका

झारखंड: 50 वर्षीय महिला के साथ बलात्कार, गुप्तांग में चोट के बाद महिला अस्पताल में भर्ती

झारखंडः लॉकडाउन के दौरान घर लौट रही छात्रा के साथ दस लड़कों ने किया गैंगरेप

मंडी हाउस से हटाए गए विकलांगों का सवाल- हम तो मजबूर हैं, पुलिस को किसने बर्बरता के लिए मजबूर किया?

झारखंड: मॉब लिंचिंग के आरोपियों को हिरासत से छुड़ाने के लिए भीड़ ने किया थाने का घेराव

काम आया जनता का दबाव : तबरेज़ लिंचिंग मामले में फिर लगाई गई हत्या की धारा

छत्तीसगढ़ : सिर्फ़ सरकार का नाम ही बदला है काम नहीं!

पूर्व-नियोजित था सोनभद्र क़त्लेआम!

झारखंड: अब जादू टोना के संदेह में तीन लोगों को मल खाने के लिए किया गया मजबूर

गढ़चिरौली नक्सली हमला : एसपीओ का पालन नहीं करने पर पुलिस अधिकारी निलंबित


बाकी खबरें

  •  Farmers
    सुबोध वर्मा
    मुश्किलों से जूझ रहे किसानों का भारत बंद आज
    27 Sep 2021
    किसान पिछले साल से ही, मोदी सरकार द्वारा पारित किए गए तीन कृषि क़ानूनों को वापस कराने का संघर्ष लड़ रहे हैं।
  • Aftermath of 9/11 in Indian Subcontinent
    न्यूज़क्लिक टीम
    9 /11 के बाद भारतीय उपमहाद्वीप में आतंकवाद का असर
    26 Sep 2021
    9/11 के 20 साल बाद देश और दुनिया में आतंकवाद को लेकर लोगो का नज़रिया बदला है। इस पर चर्चा करने के लिए इस ख़ास शृंखला की तीसरी कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार नीलांजन मुखोपाध्याय ने आनंद सहाय से बातचीत की।
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: बंद रास्तों को खोलने के लिए एक बार फिर ‘भारत बंद’
    26 Sep 2021
    सोमवार, 27 सितंबर को एक बार फिर भारत बंद होने जा रहा है, क्योंकि भारत सरकार बंद रास्ते खोलना नहीं चाहती। प्रधानमंत्री रेडियो पर ‘मन की बात’ करते हैं लेकिन उनके मन में न किसान हैं, न मज़दूर। वे उनका…
  • BJP
    अनिल जैन
    बुरी तरह पिट चुका है मोदी का 'डबल इंजन वाली सरकार’ का फार्मूला!
    26 Sep 2021
    पिछले छह महीनों के दौरान एक के बाद एक चार भाजपा शासित राज्यों में जिस तेजी से मुख्यमंत्री बदले गए हैं, उससे यही ज़ाहिर होता है कि इन राज्यों में डबल इंजन की सरकारें पूरी तरह नाकारा साबित हुई हैं।
  • Modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: ‘सरकार जी’ गये परदेस…वाह...आह...लेकिन
    26 Sep 2021
    पिछले लगभग सौ हफ्तों के बाद ऐसा शुभ अवसर आया है कि सरकार जी विदेश की यात्रा पर गए हैं। ट्रंप जी रहे होते तो वहां, अमरीका में ही 'अबकी बार, योगी सरकार' कर लेते, 'हाउडी मोदी' जैसा कुछ कर लेते। पर अबकी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License