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झारखंड: भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुस्लिम युवक से की मारपीट, थूक चटवाकर जय श्रीराम के नारे लगवाए
मुख्यमंत्री ने पुलिस को जांच के आदेश देते हुए अपने ट्वीट में कहा है, कि अमन चैन से रहने वाले झारखंडवासियों के इस राज्य में वैमनस्य की कोई जगह नहीं है।
अनिल अंशुमन
09 Jan 2022
lynching

बीते पांच दिन पहले ही प्रदेश के सिमडेगा में स्थानीय ग्रामीणों की भीड़ द्वारा एक युवक को जिंदा जलाने की घटना पर मीडिया ने ‘मॉबलिंचिंग’ रिपोर्टिंग में काफी तत्परता दिखाई थी। इस घटना के तीन दिन बाद ही घटनास्थल पर जाकर प्रदेश भाजपा विरोधी दल नेता ने पीड़ित परिवार के इंसाफ का सवाल उठाकर राज्य की सरकार को आड़े हाथों लिया था। विडंबना है कि 7 जनवरी को धनबाद में भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा दिनदहाड़े और सरेआम एक मानसिक रूप से अस्थिर मुस्लिम युवा को पीटने, थूक चटवाने और जय श्रीराम का नारा लगवाने वाले मामले में उसी मीडिया का सुर पूरी तरह से बदला हुआ नज़र आया। वहीं भाजपा नेताओं की भूमिका कांड के दोषियों पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर मजबूरन कार्रवाई कर रही पुलिस को ही धमकाने वाली दिख रही है।

7 जनवरी के दिन दोपहर बाद ही सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हुए वीडियो ने उस समय सबको चौंका डाला जिसमें भाजपा के कार्यकर्ताओं की भीड़ सरेआम एक मुस्लिम युवक को लात घूंसों से पीटते, थूक चटवाते और जय श्रीराम का नारा लगवाते हुए साफ़ दिख रही है। 

कुछ लोगों ने उस वीडियो को राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी टैग कर ट्वीट कर दिया, जिसपर त्वरित संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री का ट्वीट भी खूब वायरल हो गया। इस ट्वीट में उन्होंने घटना पर तुरत संज्ञान लेते हुए धनबाद पुलिस प्रशासन के आला-अधिकारियों को तुरंत मामले पर यथोचित क़दम उठाने का निर्देश दिया था।

बताया जा रहा है कि उस दिन धनबाद शहर के गाँधी चौक पर भाजपा के धनबाद सांसद और स्थानीय विधायक के नेतृत्व में ‘मोदी जी की सुरक्षा चूक’ मामले के विरोध में धरना दिया जा रहा था (प्रशासन के अनुसार इसके लिए कोई इज़ाज़त नहीं ली गयी थी)। दोपहर 12:30 बजे के आसपास नगर के ही वासेपुर निवासी एक अस्थिर मानसिक स्थिति वाले मुस्लिम युवक ने धरने के समीप जाकर मोदी जी समेत भाजपा नेताओं के खिलाफ कुछ अनर्गल बातें कहीं। 

जिसे सुनकर धरना पर बैठे भाजपा कार्यकर्ता आपा खो बैठे और उसे वहीं सड़क पर गालियाँ देते हुए पीटने लगे। कान पकड़कर उठक-बैठक कराई और थूक चटवाकर जय श्रीराम के नारे लगवाए। उस दौरान वहां मास्क और हेलमेट की जांच कर रहे सभी पुलिस वाले सभी मूक तमाशाई बने रहे।

मीडिया की खबरों के अनुसार स्थानीय सांसद ने उक्त घटना पर कोई अफ़सोस जताने की बजाय उलटे यह सवाल उठाया है कि वह शख्स कार्यक्रम में आया ही क्यों। पुलिस को निष्पक्ष जांच करनी चहिये। मॉबलिंचिंग के प्रयास जैसा कोई मामला नहीं था।

जबकि धनबाद के स्थानीय भजापा विधायक ने उक्त कांड होने की बात को सिर्रे से खारिज करते हुए कहा है कि कुछ लोग बेवजह इसे सांप्रदायिक रंग दे रहें हैं। मुस्लिम युवक द्वारा पूरे हिन्दू धर्म के साथ-साथ प्रधानमंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को गाली दिए जाने से उनके कार्यकर्त्ता प्रतिक्रिया में आ गए।

धरना का नेतृत्व कर रहे धनबाद नगर अध्यक्ष ने भी लगभग यही बातें दुहराते हुए दावा किया है कि मॉबलिंचिंग जैसी कोई घटना नहीं हुई है। बल्कि कार्यक्रम स्थल के पास जुटी भीड़ में से ही कुछ लोगों ने यह सब किया है, इसमें भाजपा का कोई कार्यकर्ता शामिल नहीं है।

मुख्यमंत्री ने अपने ट्वीट निर्देश में यह भी कहा है, कि अमन चैन से रहने वाले झारखंड वासियों के इस राज्य में वैमनस्य की कोई जगह नहीं है। वहीं मासस, सीपीएम और भाकपा माले समेत कांग्रेस व कई सामाजिक संगठनों ने इस कांड की तीखी भर्त्सना की है। सभी ने कांड के समय वहां स्थानीय भाजपा सांसद और विधायक की मौजूदगी में हुई इस घिनौनी वारदात के लिए दोनों नेताओं से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की मांग की है।

जानकारी के अनुसार धनबाद के ही वासेपुर निवासी उक्त मुस्लिम युवक के भाई ने बताया है कि उनका भाई मानसिक रूप से बीमार चल रहा है। रांची स्थित सीआईपी में उसका मानसिक इलाज़ चल रहा है। यदि भीड़-भाड़ वाला इलाका नहीं होता तो उसके भाई के साथ कोई भी अनहोनी हो सकती थी।

फिलहाल, मुख्यमंत्री के ट्वीट निर्देश के बाद धनबाद पुलिस ने इस कांड के वायरल हुए वीडियो के साथ-साथ पास की कई दुकानों में लगे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कांड में शामिल 5 भाजपा नेताओं समेत 8-10 लोगों के खिलाफ ‘मॉबलिंचिंग विरोधी कानून’ के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इनमें से दो की गिरफ्तारी हुई है और बाकियों के फरार हो जाने के कारण छापेमारी चल रही है।  

अजीब विडंबना है कि दो दिन पहले ही सिमडेगा जिले में संजू प्रधान हत्या कांड के पीड़ितों का हाल जानने पहुंचे भाजपा विधायक दल के नेता जो वहाँ हुए कांड को जघन्य मॉबलिंचिंग बताकर राज्य की सरकार को कोसते हुए नज़र आये, धनबाद वाले मामले पर पूरी तरह खामोश दिखे। स्थानीय भाजपा विधायक तो इनसे भी एक क़दम आगे बढ़कर मुख्यमंत्री के ट्वीट निर्देश पर मजबूरन सक्रिय हुई धनबाद पुलिस को धमकाते हुए कह रहें हैं- सरकारें तो आती-जाती हैं, पुलिस को किसी पार्टी कार्यकर्ता की तरह से काम नहीं करना चाहिए।

भाजपा के धनबाद सांसद महोदय ने ताज़ा बयान में मॉबलिंचिंग की घटना होने से साफ़ इंकार करते हुए आरोप लगया है कि वहां मौजूद पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की? सीएम के ट्वीट के बाद पुलिस का एक्शन बदला है। भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी नेता ने पुलिस पर राजनितिक विद्वेष से काम करने का आरोप लगाया है।

फिलहाल स्थिति है कि हाल के समयों में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी ‘भीड़ हिंसा’ कांड के बाद उसमें शामिल भाजपा नेता-कार्यकर्त्ता अपने-अपने घरों से फरार नज़र आ रहें हैं।इन्हें बचाने के लिए पार्टी के सांसद-विधायक से लेकर सभी नेतागण ‘मजबूरन’ हो रही पुलिस कारवाई को कोस रहें हैं। एक खबर यह भी है कि भाजपा आला नेताओं की पहल पर मामले को रफा दफा करने के लिए पीड़ित और उसके परिजनों के साथ ‘समझौता-सुलह’ की कोशिश की जा रही है।

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