NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
दहशत वाली रात के बाद जेएनयू एकजुट
15 दिसंबर 2019 को जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों पर पुलिस की बर्बरता के तीन सप्ताह बाद हथियारबंद भीड़ ने जवाहर लाल विश्वविद्यालय पर धावा बोल दिया।
न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
09 Jan 2020

15 दिसंबर 2019 को जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों पर पुलिस की बर्बरता के तीन सप्ताह बाद हथियारबंद भीड़ ने जवाहर लाल विश्वविद्यालय पर धावा बोल दिया। लाठी डंडों वाली इस भीड़ ने छात्र नेताओं को निशाना बनाया और परिसर में संपत्ति और वाहनों को नष्ट किया। जैसे ही जेएनयू के छात्रों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से इस हमले की खबर को लाइव किया तो सिविल सोसाइटी के लोग सक्रिय हो गए। इन्हें विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर जेएनयू के छात्रों के खिलाफ नारेबाजी करने वाले दूसरे भीड़ रोकने लगे।

प्रोफेसर आयशा किदवई के शब्दों में, "जेएनयू ... जेएनयू है! कई लोग घायल हैं, पिछले दस घंटों से कई लोग घायल हो गए हैं, पर सभी असहनीय हैं। हम तात्कालिक प्रेम और एकजुटता से पूरी तरह से अभिभूत हैं जो हमें पूरी दुनिया से मिल रहे हैं…

इस भीड़ से लड़ने वाले लोग दिल्ली के युवा और बूढ़े थे जो शहर के चारों कोनों से जेएनयू के गेट तक पहुंचे थे। नारेबाजी, लगातार दुर्व्यवहार और हिंसा का मुकाबला करते हुए हमारे साथी और दोस्त पुलिस घेरा के पीछे गेट पर खड़े हो गए, स्ट्रीट लाइट चालू करवा दी क्योंकि हम तय कर रहे थे कि गेट को तोड़ने न होने दें जैसा एएमयू में हुआ था।”

JNU
JNUSU
JNUTA
SFI
AISA
ABVP

Related Stories

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

लखनऊ विश्वविद्यालय: दलित प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ मुक़दमा, हमलावरों पर कोई कार्रवाई नहीं!

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए

JNU में खाने की नहीं सांस्कृतिक विविधता बचाने और जीने की आज़ादी की लड़ाई

यूपी: खुलेआम बलात्कार की धमकी देने वाला महंत, आख़िर अब तक गिरफ़्तार क्यों नहीं

नौजवान आत्मघात नहीं, रोज़गार और लोकतंत्र के लिए संयुक्त संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ें

दिल्ली में गूंजा छात्रों का नारा— हिजाब हो या न हो, शिक्षा हमारा अधिकार है!

SFI ने किया चक्का जाम, अब होगी "सड़क पर कक्षा": एसएफआई


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    राजस्थान : दलितों पर बढ़ते अत्याचार के ख़िलाफ़ DSMM का राज्यव्यापी विरोध-प्रदर्शन
    22 Mar 2022
    दलित शोषण मुक्ति मंच(DSMM) ने पूरे प्रदेश में विरोध-प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री का इस्तीफ़ा माँगा है और कहा राजस्थान सरकार कमजोर तबके की सुरक्षा में विफल रही है। 
  • एपी
    रूस-यूक्रेन अपडेट: सुरक्षा गांरटी मिलने पर नाटो की सदस्यता पर चर्चा को तैयार यूक्रेन
    22 Mar 2022
    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोमवार देर रात कहा कि वह संघर्ष-विराम, रूसी सैनिकों की वापसी और यूक्रेन की सुरक्षा की गारंटी के बदले में उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की सदस्यता नहीं…
  • उद्धव सेठ
    यहूदियों के नरसंहार को दर्शाता उपन्यास ‘माउस’ पर प्रतिबंध सिर्फ एक पाखंड है
    22 Mar 2022
    बच्चों के लिए चित्रकथा बनाने वाले भारतीय रचनाकारों और शिक्षाविदों के मुताबिक़, टेनेसी स्कूल की ओर से लगाया गया यह प्रतिबंध बच्चों को असली ज़िंदगी की नग्नता और नस्लवाद को देखने से नहीं रोक सकता।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,581 नए मामले, 33 मरीज़ों की मौत
    22 Mar 2022
    देश में कोरोना से पीड़ित 98.74 फ़ीसदी यानी 4 करोड़ 24 लाख 70 हज़ार 515 मरीज़ों को ठीक किया जा चुका है।
  • सबरंग इंडिया
    कश्मीरी पंडितों ने द कश्मीर फाइल्स में किए गए सांप्रदायिक दावों का खंडन किया
    22 Mar 2022
    उस वक्त की हिंसा से बचे हुए लोग इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि कैसे भारतीय मुसलमानों को पाकिस्तान प्रायोजित विद्रोही समूहों के कार्यों के लिए दोषी ठहराया जा रहा है और उन्हें बदनाम किया जा रहा है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License