NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
“कोरोना की बजाय छात्रों से लड़ रही है सरकार” : नताशा, देवांगना, सफूरा, हैदर की गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ एकजुटता
मंगलवार को एक ऑनलाइन संयुक्त प्रेस वार्ता की गई। जिसको सीपीआई नेता और जेएनयूछात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, आइसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एन साई बालाजी, जेएनयू के पूर्व छात्र और राजनीतिक कार्यकर्ता उमर खालिद, दलित नेता और गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवानी के साथ कई अन्य सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओ ने संबोधित किया।
मुकुंद झा
26 May 2020
joint pc

कोरोना महामारी के कारण पूरे देश में  लॉकडाउन  हैं ,लेकिन इस दौरान दिल्ली पुलिस दिल्ली में हुई हिंसा के संबंध में छापे मार रही है और उन लोगों को गिरफ्तार कर रही है जो उत्तर-पूर्वी दिल्ली में विवादास्पद नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) और भारतीय नागरिकों के प्रस्तावित राष्ट्रीय रजिस्टर (NRIC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के अगुआ थे।

इसी कड़ी में पुलिस ने रविवार को जेएनयू की शोध छात्र और पिंजरा तोड़ संगठन की कार्यकर्ता नताशा नरवाल और देवांगना कलीता को गिरफ़्तार कर लिया। अदालत ने जब दोनों को ज़मानत दे दी, तो पुलिस ने तुंरत ही एक अन्य मामला लगाकर इनकी रिमांड हासिल कर ली। यह कोई एक अकेला मामला नहीं है, इस दौरान कई ऐसे मामले हुए जहाँ कार्यकर्ताओ को गिरफ़्तार किया जाता है और जैसे ही उन्हें अदालत से एक मामले में ज़मानत  मिलती है उनके ऊपर दूसरा मुकदमा थोप दिया जाता है, ताकि इन एक्टिविस्टों को ज़मानत न मिल पाए।

ऑनलाइन संयुक्त प्रेस वार्ता

इसको लेकर मंगलवार को एक ऑनलाइन संयुक्त प्रेस वार्ता की गई। जिसको सीपीआई के नेता और जेएनयूछात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, आइसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एन साई बालाजी, जेएनयू के पूर्व छात्र और राजनीतिक कार्यकर्ता उमर खालिद, दलित नेता और गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवानी के साथ कई अन्य सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओ ने संबोधित किया। इस प्रेस वार्ता को एसएफआई की नेता और जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष आइशी घोष को भी संबोधित करना था लेकिन वो नेटवर्क खराब होने के कारण जुड़ नहीं सकीं। मौजूद सभी वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार ने देश में असंतोष को कुचलने के लिए महामारी को एक अवसर में बदल दिया है।  

pc.PNG
 भीमा कोरेगांव मॉडल की पुनरावृत्ति : जिग्नेश

 जिग्नेश मेवानी ने कहा कि छात्रों नेताओ  की गिरफ्तारी की यह नई श्रृंखला प्रतिशोध की राजनीति है और वास्तव में सरकार द्वारा अपने आलोचकों को चुप कराने के लिए एक "साजिश" के तहत की जा रही है। उन्होंने कहा, “यह ख़ालिद सैफी, कफ़ील ख़ान, गौतम नवलखा, आनंद तेलतुम्बडे और अखिल गोगोई जैसे लोगों के लिए एक संयुक्त संघर्ष है। हम जो देख रहे हैं, वह भीमा कोरेगांव मॉडल की पुनरावृत्ति है।”  उन्होंने कहा, '' मैं पेशे से वकील हूं और स्पष्ट रूप से कहता हूं कि आरोप कानूनी रूप से देय नहीं हैं।”

विरोध की आवाज़ को ख़त्म करने की कोशिश : उमर

 उमर खालिद ने कहा कि सरकार ने जिस तरह अवसर की बात की थी, उसी तरह इसका इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, “सरकार ने न केवल कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने के लिए इसका इस्तेमाल किया बल्कि श्रम कानूनों को ध्वस्त कर दिया। सरकार निजीकरण कर रही है और हवाई अड्डों की नीलाम कर रही है।”  

आगे उन्होंने कहा, “कोरोनावायरस के चक्र को तोड़ने के लिए लॉकडाउन की घोषणा की गई थी लेकिन वास्तव में इसका प्रयोग विरोध की आवाज़ को ख़त्म करने के लिए किया जा रहा। यह दिल्ली पुलिस के लिए भी विश्वसनीयता का संकट है जिसने प्रदर्शनकारियों को चुप कराने के लिए सब कुछ किया। एक मामले में जमानत दिए जाने के बाद कार्यकर्ताओं को एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया गया। सबूत पेश करने के बाद भी कपिल मिश्रा जैसे दोषियों पर सवाल उठाने की हिम्मत नहीं है।"

कोरोना की बजाय छात्रों से लड़ रही है सरकार : कन्हैया

 कन्हैया कुमार ने कहा, 'जब हमें कोरोना से एक साथ लड़ना चाहिए था, यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार छात्रों और युवाओं के ख़िलाफ़ लड़ रही है। जब बहुत जघन्य अपराधों के आरोपी लोगों को जमानत दी जा रही है तो छात्रों पर आरोप लगाने और उन्हें सलाखों के पीछे फेंकने की क्या ज़रूरत है? गिरफ्तार किए गए ये छात्र सामान्य छात्र नहीं थे। पढ़ाई के साथ-साथ वे शिक्षा, रोजगार और आजीविका के बारे में भी बहुत महत्वपूर्ण सवाल उठा रहे थे, लेकिन यह सरकार इन सवालों पर लगातार विफल कर रही है और अब छात्रों पर ही हमला कर रही है क्योंकि यह अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए सत्ता में आई थी। सरकार एक पत्थर से दो पक्षियों को मार रही है। एक तरफ यह उन कार्यकर्ताओं को निशाना बनाकर प्रतिशोध की राजनीति करने की कोशिश कर रहा है, जो सीएए के संघर्ष में सबसे आगे थे। दूसरी ओर, अन्य लोगो के लिए एक संदेश भी भेज रही है।

दिल्ली पुलिस एक स्क्रिप्ट का पालन कर रही है : बालाजी

एन साई बालाजी ने कहा,  छात्र कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी में एक अजीबोगरीब प्रवृत्ति का पालन किया जिसमें कुछ संगठनों और मीडिया ने संदिग्ध भूमिका निभाई। उन्होंने आरोप लगाया कि "दिल्ली पुलिस एक स्क्रिप्ट का पालन कर रही है, जिसे आरएसएस से जुड़ी एक कार्यकर्ता जो एबीवीपी से डूसू चुनाव भी लड़ चुकी हैं, की पसंद के आधार पर तैयार किया गया था। वह एक रिपोर्ट के साथ MHA के प्रतिनिधिमंडल से मिलीं, जिसने इन गिरफ्तारियों से पहले भी आइसा, पिंजरा तोड़ और अन्य छात्र-युवा संगठनों को दोषी ठहराया था। दिल्ली पुलिस ने बाद में जिस तरह से काम किया है, उससे पता चलता है कि उन्होंने स्क्रिप्ट उनसे उधार लिया है।"

आपको बता दें कि 23 मई 2020 को शाम पिंजरा तोड़ की दो कार्यकर्ता देवांगना कलिता और नताशा नरवाल को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल द्वारा उनके घर से  गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोप  है कि गिरफ्तार करते समय पुलिस द्वारा घर वालों को कारण भी नहीं बताया गया। इसके पूर्व दायर किए गए FIR में पिंजरा तोड़ के कई कार्यकर्ताओं पर हिंसा भड़काने, दंगा भड़काने, लोगों को सड़क पर इकट्ठा करने आदि के इल्जाम को पुलिस द्वारा आरोपित किया गया था।

कलिता सेंटर ऑफ़ वीमेन स्टडियज़ में एमफिल की छात्रा हैं, वहीं नरवाल सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज में पीएचडी की छात्रा हैं। वे दोनों 2015 में गठित पिंजरा तोड़ की संस्थापक सदस्य हैं। कालिता और नरवाल ने क्रमशः डीयू के मिरांडा हाउस और हिंदू कॉलेज से ग्रेज्युशन किया है।

पिंजरा तोड़ संगठन की दोनों सदस्यों की गिरफ़्तारी को लेकर जे.एन.यू. शिक्षक संघ ने एक विज्ञप्ति भी जारी की थी। जिसमें उनके ऊपर लगे झूठे आरोपों को खारिज़ कर के उन्हें रिहा करने की मांग की गयी थी।  

सीपीआई (एम) ने भी निंदा की

 पिंजरा तोड़ की कार्यकर्ताओं की गिरफ़तारी पर सवाल उठते हुए सीपीआई (एम) दिल्ली राज्य कमेटी ने इसकी कड़े शब्दों में निंदा की, और कहा कि इससे साफ़ जाहिर होता है कि नागरिकता कानून को लेकर चल रहे विरोध की आवाज़ को फ़र्ज़ी मामला बनाकर बदनाम करने और दबाने का काम किया जा रहा है।  

सीपीआई (एम) की दिल्ली राज्य कमेटी दिल्ली ने  पुलिस को आगाह किया  कि वह अपने कर्तव्य का पालन करने के बजाय केंद्र सरकार के हाथ की राजनीतिक कठपुतली न बने। राज्य कमेटी ने तुरंत गिरफ्तार किए गए सभी निर्दोष छात्र-छात्राओं को रिहा करने और उनपर लगाए गए झूठे मुकदमों को वापस लेने की मांग की है।

जनवादी महिला समिति का प्रदर्शन

नताशा और कलिता की गिरफ्तारी के खिलाफ रोहतक में जनवादी महिला समिति हरियाणा ने भी प्रदर्शन किया। इसके साथ ही सीपीआई (एम) हरियाणा राज्य कमेटी ने गिरफ़्तार छात्राओं के प्रति अपनी एकजुटता प्रकट की और सरकार के रैवये को तानाशाहीपूर्ण बताया। सीपीआई (एम) ने तमाम जनतंत्र प्रिय लोगों, जन संगठनों, राजनीतिक दलों से अपील की है कि छात्र-छात्राओं की गिरफ़्तारी के खिलाफ एकजुट हों।

haryana.jpg

आपको बता दें कि इससे पहले पुलिस ने जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र सफूरा जरगर को जाफराबाद सिंटिग के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। जब उनकी गिरफ़्तारी की गई तब वो गर्भवती थीं, उन्हें कड़े गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ़्तार किया गया है और वे अभी जेल में हैं। इसी तरह से जामिया के कई छात्रों को गिरफ़्तार किया गया। मीरान हैदर को भी गिरफ़्तार किया गया। हैदर छात्र राष्ट्रीय जनता दल से जुड़े हैं, उनका संगठन राष्ट्रीय जनता दल से संबद्ध हैं। उन्होंने सीएए विरोध प्रदर्शनों पर टीवी डिबेट में भी भाग लिया और 15 दिसंबर को विश्वविद्यालय के पुस्तकालय के अंदर छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर लगातार सवाल खड़े किए थे। मूल रूप से बिहार से ताल्लुक रखने वाले मीरन हैदर ओखला के जामिया नगर के अबुल फजल एन्क्लेव में रहते हैं, जिन्हे 31 मार्च को इंस्पेक्टर प्रमोद चौहान ने नोटिस दिया था, जो अपराध शाखा द्वारा दर्ज एक प्राथमिकी के संबंध में पूछताछ के लिए 6 मार्च को पेश हुए थे। दिल्ली पुलिस ने बाद में उन्हें गिरफ़्तार कर लिया था।

Natasha
Devangana
Sapura
north east delhi violence
delhi police
CPIM
CPI
AISA
sio
Umer Khalid
Kanhaiya Kumar
n sai balaji
Jignesh Mevani
AIDWA

Related Stories

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

गुजरात : विधायक जिग्नेश मेवानी की गिरफ़्तारी का पूरे राज्य में विरोध

मुस्लिम विरोधी हिंसा के ख़िलाफ़ अमन का संदेश देने के लिए एकजुट हुए दिल्ली के नागरिक

JNU में खाने की नहीं सांस्कृतिक विविधता बचाने और जीने की आज़ादी की लड़ाई

यूपी: खुलेआम बलात्कार की धमकी देने वाला महंत, आख़िर अब तक गिरफ़्तार क्यों नहीं

कर्नाटक : देवदासियों ने सामाजिक सुरक्षा और आजीविका की मांगों को लेकर दिया धरना

दिल्ली दंगों के दो साल: इंसाफ़ के लिए भटकते पीड़ित, तारीख़ पर मिलती तारीख़


बाकी खबरें

  • stop rape
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः पांच वर्ष की दलित बच्ची के साथ रेप, अस्पताल में भर्ती
    04 Dec 2021
    पूर्व मुखिया शमशेर के बेटे ने इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया है। आरोपी का नाम मो. मेजर बताया गया है। घटना के बाद गंभीर स्थिति में बच्ची को इलाज के लिए फारबिसगंज अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां…
  • sex ratio
    श्रुति एमडी
    तमिलनाडु: चिंताजनक स्थिति पेश कर रहे हैं लैंगिक अनुपात और घरेलू हिंसा पर NFHS के आंकड़े
    04 Dec 2021
    जन्म के दौरान लड़के-लड़कियों के अनुपात में पिछले पांच सालों में बहुत गिरावट आई है. अब 1000 लड़कों पर सिर्फ़ 878 महिलाएं हैं। जबकि 2015-16 में 1000 लड़कों पर 954 लड़कियों की संख्या मौजूद थी।
  • NEET-PG 2021 counseling
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    नीट-पीजी 2021 की काउंसलिंग की मांग को लेकर रेजीडेंट डॉक्टरों ने नियमित सेवाओं का किया बहिष्कार
    04 Dec 2021
    ‘‘ओपीडी सेवाएं निलंबित करने से प्राधिकारियों से कोई ठोस जवाब नहीं मिला तो हमें दुख के साथ यह सूचित करना पड़ रहा है कि हम फोरडा द्वारा बुलाए देशव्यापी प्रदर्शन के समर्थन में तीन दिसंबर से अपनी सभी…
  • Pilibhit
    तारिक अनवर
    भाजपा का हिंदुत्व वाला एजेंडा पीलीभीत में बांग्लादेशी प्रवासी मतदाताओं से तारतम्य बिठा पाने में विफल साबित हो रहा है
    04 Dec 2021
    नागरिकता और वैध राजस्व पट्टे की उम्मीदें टूट जाने के साथ शरणार्थियों को अब पिछले चुनावों में भाजपा का समर्थन करने पर पछतावा हो रहा है।
  • Gambia
    क्रिसपिन एंवाकीदेऊ
    गाम्बिया के निर्णायक चुनाव लोकतंत्र की अहम परीक्षा हैं
    04 Dec 2021
    गाम्बिया में राष्ट्रपति पद का चुनाव हो रहा है। पर्यवेक्षकों का मानना है ये चुनाव गाम्बिया के लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण अग्निपरीक्षा हैं। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License