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“कोरोना की बजाय छात्रों से लड़ रही है सरकार” : नताशा, देवांगना, सफूरा, हैदर की गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ एकजुटता
मंगलवार को एक ऑनलाइन संयुक्त प्रेस वार्ता की गई। जिसको सीपीआई नेता और जेएनयूछात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, आइसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एन साई बालाजी, जेएनयू के पूर्व छात्र और राजनीतिक कार्यकर्ता उमर खालिद, दलित नेता और गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवानी के साथ कई अन्य सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओ ने संबोधित किया।
मुकुंद झा
26 May 2020
joint pc

कोरोना महामारी के कारण पूरे देश में  लॉकडाउन  हैं ,लेकिन इस दौरान दिल्ली पुलिस दिल्ली में हुई हिंसा के संबंध में छापे मार रही है और उन लोगों को गिरफ्तार कर रही है जो उत्तर-पूर्वी दिल्ली में विवादास्पद नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) और भारतीय नागरिकों के प्रस्तावित राष्ट्रीय रजिस्टर (NRIC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के अगुआ थे।

इसी कड़ी में पुलिस ने रविवार को जेएनयू की शोध छात्र और पिंजरा तोड़ संगठन की कार्यकर्ता नताशा नरवाल और देवांगना कलीता को गिरफ़्तार कर लिया। अदालत ने जब दोनों को ज़मानत दे दी, तो पुलिस ने तुंरत ही एक अन्य मामला लगाकर इनकी रिमांड हासिल कर ली। यह कोई एक अकेला मामला नहीं है, इस दौरान कई ऐसे मामले हुए जहाँ कार्यकर्ताओ को गिरफ़्तार किया जाता है और जैसे ही उन्हें अदालत से एक मामले में ज़मानत  मिलती है उनके ऊपर दूसरा मुकदमा थोप दिया जाता है, ताकि इन एक्टिविस्टों को ज़मानत न मिल पाए।

ऑनलाइन संयुक्त प्रेस वार्ता

इसको लेकर मंगलवार को एक ऑनलाइन संयुक्त प्रेस वार्ता की गई। जिसको सीपीआई के नेता और जेएनयूछात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, आइसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एन साई बालाजी, जेएनयू के पूर्व छात्र और राजनीतिक कार्यकर्ता उमर खालिद, दलित नेता और गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवानी के साथ कई अन्य सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओ ने संबोधित किया। इस प्रेस वार्ता को एसएफआई की नेता और जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष आइशी घोष को भी संबोधित करना था लेकिन वो नेटवर्क खराब होने के कारण जुड़ नहीं सकीं। मौजूद सभी वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार ने देश में असंतोष को कुचलने के लिए महामारी को एक अवसर में बदल दिया है।  

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 भीमा कोरेगांव मॉडल की पुनरावृत्ति : जिग्नेश

 जिग्नेश मेवानी ने कहा कि छात्रों नेताओ  की गिरफ्तारी की यह नई श्रृंखला प्रतिशोध की राजनीति है और वास्तव में सरकार द्वारा अपने आलोचकों को चुप कराने के लिए एक "साजिश" के तहत की जा रही है। उन्होंने कहा, “यह ख़ालिद सैफी, कफ़ील ख़ान, गौतम नवलखा, आनंद तेलतुम्बडे और अखिल गोगोई जैसे लोगों के लिए एक संयुक्त संघर्ष है। हम जो देख रहे हैं, वह भीमा कोरेगांव मॉडल की पुनरावृत्ति है।”  उन्होंने कहा, '' मैं पेशे से वकील हूं और स्पष्ट रूप से कहता हूं कि आरोप कानूनी रूप से देय नहीं हैं।”

विरोध की आवाज़ को ख़त्म करने की कोशिश : उमर

 उमर खालिद ने कहा कि सरकार ने जिस तरह अवसर की बात की थी, उसी तरह इसका इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, “सरकार ने न केवल कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने के लिए इसका इस्तेमाल किया बल्कि श्रम कानूनों को ध्वस्त कर दिया। सरकार निजीकरण कर रही है और हवाई अड्डों की नीलाम कर रही है।”  

आगे उन्होंने कहा, “कोरोनावायरस के चक्र को तोड़ने के लिए लॉकडाउन की घोषणा की गई थी लेकिन वास्तव में इसका प्रयोग विरोध की आवाज़ को ख़त्म करने के लिए किया जा रहा। यह दिल्ली पुलिस के लिए भी विश्वसनीयता का संकट है जिसने प्रदर्शनकारियों को चुप कराने के लिए सब कुछ किया। एक मामले में जमानत दिए जाने के बाद कार्यकर्ताओं को एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया गया। सबूत पेश करने के बाद भी कपिल मिश्रा जैसे दोषियों पर सवाल उठाने की हिम्मत नहीं है।"

कोरोना की बजाय छात्रों से लड़ रही है सरकार : कन्हैया

 कन्हैया कुमार ने कहा, 'जब हमें कोरोना से एक साथ लड़ना चाहिए था, यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार छात्रों और युवाओं के ख़िलाफ़ लड़ रही है। जब बहुत जघन्य अपराधों के आरोपी लोगों को जमानत दी जा रही है तो छात्रों पर आरोप लगाने और उन्हें सलाखों के पीछे फेंकने की क्या ज़रूरत है? गिरफ्तार किए गए ये छात्र सामान्य छात्र नहीं थे। पढ़ाई के साथ-साथ वे शिक्षा, रोजगार और आजीविका के बारे में भी बहुत महत्वपूर्ण सवाल उठा रहे थे, लेकिन यह सरकार इन सवालों पर लगातार विफल कर रही है और अब छात्रों पर ही हमला कर रही है क्योंकि यह अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए सत्ता में आई थी। सरकार एक पत्थर से दो पक्षियों को मार रही है। एक तरफ यह उन कार्यकर्ताओं को निशाना बनाकर प्रतिशोध की राजनीति करने की कोशिश कर रहा है, जो सीएए के संघर्ष में सबसे आगे थे। दूसरी ओर, अन्य लोगो के लिए एक संदेश भी भेज रही है।

दिल्ली पुलिस एक स्क्रिप्ट का पालन कर रही है : बालाजी

एन साई बालाजी ने कहा,  छात्र कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी में एक अजीबोगरीब प्रवृत्ति का पालन किया जिसमें कुछ संगठनों और मीडिया ने संदिग्ध भूमिका निभाई। उन्होंने आरोप लगाया कि "दिल्ली पुलिस एक स्क्रिप्ट का पालन कर रही है, जिसे आरएसएस से जुड़ी एक कार्यकर्ता जो एबीवीपी से डूसू चुनाव भी लड़ चुकी हैं, की पसंद के आधार पर तैयार किया गया था। वह एक रिपोर्ट के साथ MHA के प्रतिनिधिमंडल से मिलीं, जिसने इन गिरफ्तारियों से पहले भी आइसा, पिंजरा तोड़ और अन्य छात्र-युवा संगठनों को दोषी ठहराया था। दिल्ली पुलिस ने बाद में जिस तरह से काम किया है, उससे पता चलता है कि उन्होंने स्क्रिप्ट उनसे उधार लिया है।"

आपको बता दें कि 23 मई 2020 को शाम पिंजरा तोड़ की दो कार्यकर्ता देवांगना कलिता और नताशा नरवाल को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल द्वारा उनके घर से  गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोप  है कि गिरफ्तार करते समय पुलिस द्वारा घर वालों को कारण भी नहीं बताया गया। इसके पूर्व दायर किए गए FIR में पिंजरा तोड़ के कई कार्यकर्ताओं पर हिंसा भड़काने, दंगा भड़काने, लोगों को सड़क पर इकट्ठा करने आदि के इल्जाम को पुलिस द्वारा आरोपित किया गया था।

कलिता सेंटर ऑफ़ वीमेन स्टडियज़ में एमफिल की छात्रा हैं, वहीं नरवाल सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज में पीएचडी की छात्रा हैं। वे दोनों 2015 में गठित पिंजरा तोड़ की संस्थापक सदस्य हैं। कालिता और नरवाल ने क्रमशः डीयू के मिरांडा हाउस और हिंदू कॉलेज से ग्रेज्युशन किया है।

पिंजरा तोड़ संगठन की दोनों सदस्यों की गिरफ़्तारी को लेकर जे.एन.यू. शिक्षक संघ ने एक विज्ञप्ति भी जारी की थी। जिसमें उनके ऊपर लगे झूठे आरोपों को खारिज़ कर के उन्हें रिहा करने की मांग की गयी थी।  

सीपीआई (एम) ने भी निंदा की

 पिंजरा तोड़ की कार्यकर्ताओं की गिरफ़तारी पर सवाल उठते हुए सीपीआई (एम) दिल्ली राज्य कमेटी ने इसकी कड़े शब्दों में निंदा की, और कहा कि इससे साफ़ जाहिर होता है कि नागरिकता कानून को लेकर चल रहे विरोध की आवाज़ को फ़र्ज़ी मामला बनाकर बदनाम करने और दबाने का काम किया जा रहा है।  

सीपीआई (एम) की दिल्ली राज्य कमेटी दिल्ली ने  पुलिस को आगाह किया  कि वह अपने कर्तव्य का पालन करने के बजाय केंद्र सरकार के हाथ की राजनीतिक कठपुतली न बने। राज्य कमेटी ने तुरंत गिरफ्तार किए गए सभी निर्दोष छात्र-छात्राओं को रिहा करने और उनपर लगाए गए झूठे मुकदमों को वापस लेने की मांग की है।

जनवादी महिला समिति का प्रदर्शन

नताशा और कलिता की गिरफ्तारी के खिलाफ रोहतक में जनवादी महिला समिति हरियाणा ने भी प्रदर्शन किया। इसके साथ ही सीपीआई (एम) हरियाणा राज्य कमेटी ने गिरफ़्तार छात्राओं के प्रति अपनी एकजुटता प्रकट की और सरकार के रैवये को तानाशाहीपूर्ण बताया। सीपीआई (एम) ने तमाम जनतंत्र प्रिय लोगों, जन संगठनों, राजनीतिक दलों से अपील की है कि छात्र-छात्राओं की गिरफ़्तारी के खिलाफ एकजुट हों।

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आपको बता दें कि इससे पहले पुलिस ने जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र सफूरा जरगर को जाफराबाद सिंटिग के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। जब उनकी गिरफ़्तारी की गई तब वो गर्भवती थीं, उन्हें कड़े गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ़्तार किया गया है और वे अभी जेल में हैं। इसी तरह से जामिया के कई छात्रों को गिरफ़्तार किया गया। मीरान हैदर को भी गिरफ़्तार किया गया। हैदर छात्र राष्ट्रीय जनता दल से जुड़े हैं, उनका संगठन राष्ट्रीय जनता दल से संबद्ध हैं। उन्होंने सीएए विरोध प्रदर्शनों पर टीवी डिबेट में भी भाग लिया और 15 दिसंबर को विश्वविद्यालय के पुस्तकालय के अंदर छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर लगातार सवाल खड़े किए थे। मूल रूप से बिहार से ताल्लुक रखने वाले मीरन हैदर ओखला के जामिया नगर के अबुल फजल एन्क्लेव में रहते हैं, जिन्हे 31 मार्च को इंस्पेक्टर प्रमोद चौहान ने नोटिस दिया था, जो अपराध शाखा द्वारा दर्ज एक प्राथमिकी के संबंध में पूछताछ के लिए 6 मार्च को पेश हुए थे। दिल्ली पुलिस ने बाद में उन्हें गिरफ़्तार कर लिया था।

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