NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
सोशल मीडिया
भारत
राजनीति
कैसे फेसबुक और भाजपा ने एक-दूसरे की मदद की?
भाजपा आईटी प्रकोष्ठ का काम देखने वाले विनीत गोयनका कहते हैं कि पार्टी ने सोशल मीडिया का सबसे अच्छा इस्तेमाल किया।
सिरिल सैम, परंजॉय गुहा ठाकुरता
30 Mar 2019
सांकेतिक तस्वीर

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष रहे नितिन गडकरी के करीबी विनीत गोयनका उस वक्त पार्टी की सोशल मीडिया रणनीति बना रहे थे। भाजपा ने किस तरह से मोदी की छवि मजबूत करने के लिए फेसबुक और व्हाट्सएप का इस्तेमाल किया, इस बारे में उन्होंने बातचीत की।

गोयनका अभी गडकरी के नेतृत्व वाले सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में आईटी कार्यबल के प्रमुख हैं। वे पीयूष गोयल के रेल मंत्रालय के तहत आने वाले सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम के गवर्निग काउंसिल के भी सदस्य हैं।

हमने गोयनका से सीधा सवाल पूछा कि फेसबुक और भाजपा में किसने किसकी अधिक मदद की? इसके जवाब में वे कहते हैं, ‘यह बेहद कठिन सवाल है। हो सकता है कि फेसबुक ने भाजपा की जितनी मदद की उससे अधिक मदद भाजपा ने फेसबुक की, की। आप कह सकते हैं कि हमने एक-दूसरे की मदद की।’

2003 से पार्टी के युवा मोर्चे में गडकरी की मदद से सक्रिय रहे गोयनका को 2008 में महाराष्ट्र भाजपा के आईटी प्रकोष्ठ में पार्टी को आधुनिक बनाने के लिए शामिल किया गया था। उन्होंने अच्छी गुणवत्ता वाली वीडिया कॉन्फ्रेंसिंग के लिए पूरे महाराष्ट्र में सफलतापूर्वक एक तंत्र तैयार किया। ताकि गडकरी जैसे नेता भाजपा कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित कर सकें।

उसके बाद से गोयनका ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2013 में जब चुनाव अभियान जोर पकड़ रहा था तो उन्होंने 78,000 लोगों का एक नेटवर्क तैयार किया जो मोदी और भाजपा को मजबूत करने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ग्रामीण प्रखंडों और शहरी वार्ड तक काम कर रहा था। हर समूह में एक व्यक्ति को फेसबुक, व्हाट्सएप और ट्विटर पर जोर देने के लिए नियुक्त किया गया था।

गोयनका ने भाजपा नेताओं को आईटी उद्योग के बड़े लोगों जैसे सोम मित्तल और राजेंद्र पवार से मिलवाया। वे हर हफ्ते आईटी पेशेवरों और उद्यमियों के साथ नई दिल्ली के 11 अशोक रोड स्थिति मुख्यालय में भाजपा नेताओं से मिलाते थे। 

उन्होंने हमें बताया, ‘2012 में सोशल मीडिया ने उदार मीडिया के वर्चस्व को तोड़ दिया। नेता सीधे मतदाताओं से संवाद करने लगे। 2012 से 2014 के दौरान कांग्रेस के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हो गया था। मीडिया में लोगों का विश्वास कम हो रहा था। हमने मीडिया पर प्रतिक्रिया देना और इंटरनेट पर लिखना शुरू किया। हमने दूसरों के मुकाबले सोशल मीडिया का अच्छा इस्तेमाल किया।’

46 साल के गोयनका आईबीएम में काम करते थे और मुंबई के एक ऐसे परिवार से आते हैं जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का समर्थक रहा है। वे कहते हैं, ‘हमने अमेरिका में अप्रवासी भारतीयों का एक नेटवर्क तैयार किया और उनसे कहा कि वे भारत के अपने संबंधियों को सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं में शामिल होने के लिए कहें।’

हमारे सोशल मीडिया सीरीज़ के अन्य आलेख पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें :-

2014 में मोदी का चुनाव अभियान गढ़ने वाले राजेश जैन आज विरोधी क्यों हो गए हैं?

चार टीमों ने मिलकर गढ़ी नरेंद्र मोदी की बड़ी छवि!

सोशल मीडिया पर मोदी के पक्ष में माहौल बनाने वाले अहम किरदार कौन-कौन हैं?

#सोशल_मीडिया : लोकसभा चुनावों पर फेसबुक का असर?

किसने गढ़ी मोदी की छवि?

क्यों फेसबुक कंपनी को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की मांग उठ रही है?

मुफ्त इंटरनेट के जरिये कब्ज़ा जमाने की फेसबुक की नाकाम कोशिश?

#सोशल_मीडिया : लोकसभा चुनावों पर फेसबुक का असर?

क्या सोशल मीडिया पर सबसे अधिक झूठ भारत से फैलाया जा रहा है?

#सोशल_मीडिया : सत्ताधारियों से पूरी दुनिया में है फेसबुक की नजदीकी

जब मोदी का समर्थन करने वाले सुषमा स्वराज को देने लगे गालियां!

फेसबुक पर फर्जी खबरें देने वालों को फॉलो करते हैं प्रधानमंत्री मोदी!

फर्जी सूचनाओं को रोकने के लिए फेसबुक कुछ नहीं करना चाहता!

#सोशल_मीडिया : क्या सुरक्षा उपायों को लेकर व्हाट्सऐप ने अपना पल्ला झाड़ लिया है?

#सोशल_मीडिया : क्या व्हाट्सऐप राजनीतिक लाभ के लिए अफवाह फैलाने का माध्यम बन रहा है?

#सोशल_मीडिया : क्या फेसबुक सत्ताधारियों के साथ है?

#सोशल_मीडिया : क्या नरेंद्र मोदी की आलोचना से फेसबुक को डर लगता है?

#सोशल_मीडिया : कई देशों की सरकारें फेसबुक से क्यों खफा हैं?

सोशल मीडिया की अफवाह से बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा

#socialmedia
Social Media
Facebook India
Real Face of Facebook in India
Narendra modi
Nitin Gadkari
BJP
General elections2019
2019 Lok Sabha elections

Related Stories

बीजेपी के चुनावी अभियान में नियमों को अनदेखा कर जमकर हुआ फेसबुक का इस्तेमाल

फ़ेसबुक पर 23 अज्ञात विज्ञापनदाताओं ने बीजेपी को प्रोत्साहित करने के लिए जमा किये 5 करोड़ रुपये

चुनाव के रंग: कहीं विधायक ने दी धमकी तो कहीं लगाई उठक-बैठक, कई जगह मतदान का बहिष्कार

पंजाब विधानसभा चुनाव: प्रचार का नया हथियार बना सोशल मीडिया, अख़बार हुए पीछे

अफ़्रीका : तानाशाह सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए कर रहे हैं

‘बुल्ली बाई’: महिलाओं ने ‘ट्रोल’ करने के ख़िलाफ़ खोला मोर्चा

मुख्यमंत्री पर टिप्पणी पड़ी शहीद ब्रिगेडियर की बेटी को भारी, भक्तों ने किया ट्रोल

मृतक को अपमानित करने वालों का गिरोह!

सांप्रदायिक घटनाओं में हालिया उछाल के पीछे कौन?

हेट स्पीच और भ्रामक सूचनाओं पर फेसबुक कार्रवाई क्यों नहीं करता?


बाकी खबरें

  • sever
    रवि शंकर दुबे
    यूपी: सफ़ाईकर्मियों की मौत का ज़िम्मेदार कौन? पिछले तीन साल में 54 मौतें
    06 Apr 2022
    आधुनिकता के इस दौर में, सख़्त क़ानून के बावजूद आज भी सीवर सफ़ाई के लिए एक मज़दूर ही सीवर में उतरता है। कई बार इसका ख़ामियाज़ा उसे अपनी मौत से चुकाना पड़ता है।
  • सोनिया यादव
    इतनी औरतों की जान लेने वाला दहेज, नर्सिंग की किताब में फायदेमंद कैसे हो सकता है?
    06 Apr 2022
    हमारे देश में दहेज लेना या देना कानूनन अपराध है, बावजूद इसके दहेज के लिए हिंसा के मामले हमारे देश में कम नहीं हैं। लालच में अंधे लोग कई बार शोषण-उत्पीड़न से आगे बढ़कर लड़की की जान तक ले लेते हैं।
  • पटनाः डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ ऑटो चालकों की हड़ताल
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पटनाः डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ ऑटो चालकों की हड़ताल
    06 Apr 2022
    डीजल और पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के बाद ऑटो चालकों ने दो दिनों की हड़ताल शुरु कर दी है। वे बिहार सरकार से फिलहाल प्रतिबंध हटाने की मांग कर रहे हैं।
  • medicine
    ऋचा चिंतन
    दवा के दामों में वृद्धि लोगों को बुरी तरह आहत करेगी – दवा मूल्य निर्धारण एवं उत्पादन नीति को पुनर्निर्देशित करने की आवश्यता है
    06 Apr 2022
    आवश्यक दवाओं के अधिकतम मूल्य में 10.8% की वृद्धि आम लोगों पर प्रतिकूल असर डालेगी। कार्यकर्ताओं ने इन बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने और सार्वजनिक क्षेत्र के दवा उद्योग को सुदृढ़ बनाने और एक तर्कसंगत मूल्य…
  • wildfire
    स्टुअर्ट ब्राउन
    आईपीसीसी: 2030 तक दुनिया को उत्सर्जन को कम करना होगा
    06 Apr 2022
    संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम जलवायु रिपोर्ट कहती है कि यदि​ ​हम​​ विनाशकारी ग्लोबल वार्मिंग को टालना चाहते हैं, तो हमें स्थायी रूप से कम कार्बन का उत्सर्जन करने वाले ऊर्जा-विकल्पों की तरफ तेजी से बढ़ना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License