NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
काला धन: पहले पीएम को वापस लाओ
चंचल चौहान
05 Dec 2014

हमारे पड़ोस में एक कालेज की प्राध्यापिका जी रहती हैं जो पता नहीं क्यों हमारे महान देश के महान पीएम से बहुत नाराज़ रहती हैं। उन्होंने नारीविमर्श पर बहुत कुछ पढ़ रखा है, शायद इसीलिए वे हर समय हमारे पीएम में कुछ न कुछ नुख्स ढूंढ़ती रहती हैं। वे कहती हैं कि ‘हमारे पीएम ने सात फेरे ले कर जिस महिला से ब्याह रचाया, अग्निदेवता को साक्षी मान कर जो जो वायदे किये, वे कतई नहीं निभाये। यह कैसी उनकी भारतीय संस्कृति है?’ मुझे लगता है शायद इसीलिए वे हर समय हमारे पीएम पर छींटाकशी करती रहती हैं। एक दिन उन्होंने एक व्यंग्य ही लिख डाला और मुझे थमा गयीं, कि इसे देखो, मैं क्या देखूं, आप लोग देखें, उनके उसी व्यंग्य को ज्यों का त्यों यहां पेश कर रहा हूं :

‘‘हमारे महान देश के महान पीएम इधर न तो लोकसभा में दिखते हैं और न दिल्ली में। उनकी पत्नी से लोग पूछते हैं तो भी कुछ जवाब नहीं मिलता! बतरा जी जो बतरस के धनी अबुद्धिजीवी हैं, उन्होंने बताया कि वे अपनी सखी से कह रही थीं कि ‘काला धन लेने गये, नहिं अजरज की बात / पर चोरी चोरी गये यही बड़ा व्याघात! सखि वे मुझसे कह कर जाते’! बतरा जी ने अपनी एक किताब में इसी उद्धरण को लक्ष्मण की पत्नी के मुंह में रख दिया है। मगर हमारे पी एम जो जीवन भर प्रचारक रहे, कहीं प्रचार में ही मगन होंगे, आप कहां तलाश करेंगे? नेक काम के लिए गये हैं, अभी आने वाले सौ दिनों में काला धन वापस ला कर ही लौटेंगे, आ कर हर भारतीय नागरिक के ‘जनधन योजना’ वाले खाते में 15 लाख रुपये जमा करवायेंगे, यह उनका वादा रहा। उन्होंने आल इंडिया रेडियो पर भी बालदिवस पर एकदम यही वादा दोहराया, एक एक पैसा ला कर आपके खाते में डलवायेंगे। आप उतावले क्यों हो रहे हैं? मन तू काहे न धीर धरे? पहले ‘जनधन योजना’ खाते में एक एकाउंट तो खुलवा लो, अविश्वास से बहुत घाटे में रहोगे, प्रभु जी। पंद्रह लाख कम नहीं होता।

                                                                                                                                       

मगर यार, विदेशी बैंकों के लॉकर करनाल के पंजाब नेशनल बैंक की तरह तो हैं नहीं, जिसे कोई भी चोर उचक्का अपनी जुगाडू टेकनालाजी से आसानी से तोड़ ले और सारा काला धन अपने कब्ज़े में कर ले। वे लॉकर  हिंदुस्तानी एटीएम मशीनों की तरह छप्पर के नीचे तो धरे नहीं हैं जिन्हें बूथ समेत अपने सिर पर उठा कर हमारे पीएम भारत ले आयें। और फटाफट सबके जनधन एकाउंट में पंद्रह पंद्रह लाख जमा करवा दें और रसीद खाताधारी जन को थमा दें जिससे अगली बार चुनाव में उनका वोट पक्का हो जाये। आखिर दस साल की प्लानिंग हैं, कोई हंसी ठट्ठा तो है नहीं। वहां के लॉकर बहुत मजबूत हैं यार, वहां तक पहुंचने में सौ दिन तो आसानी से लग जायेंगे, इसीलिए सौ दिन का वादा किया है, यह नहीं बताया कि सौ दिन किस तारीख से जनता गिनना शुरू करे। पहले तो शपथग्रहण वाले दिन से गिन रहे थे, वे तो कब के खत्म हो गये। अभी शायद जनता यह मान रही है कि बाल दिवस वाले दिन से जोड़ेगे, तभी से वे दिल्ली से गायब हैं।

लगता यह है कि हमारे महान पीएम रिसर्च में व्यस्त हैं, वहां के वे बक्से, और जहां वे बैंक हैं वहां हमारे पी एम आसपास ऐसा खाली मकान टूंढ़ रहे होंगे जहां से सुरंग बना कर उन लॉकरों तक पहुंचा जा सके। गुजरात से वहां तक सुरंग खोदने में तो दस साल से ज्यादा लगेंगे, तब तक जनता का धैर्य चुक जायेगा। हमारे पीएम को पता है कि इसके लिए उन्हें अपने हरियाणा के महान खनन-टैक्नीशियन ले जाने होंगे जिन्होंने पंजाब नेशनल बैंक में जमा कालाधन पड़ोस में खाली मकान के अंदर से सुरंग खोद कर साफ कर लिया। दिल्ली की कांग्रेस सरकार ने दिल्ली मैट्रो के लिए ऐसी सुरंग बनावाने के लिए करोड़ों रुपये साउथ कोरिया या जापान की किसी कंपनी को दे दिये, जबकि अपनी जुगाड़ टेक्नोलोजी देश में ही मौजूद थी, मगर हमारे यहां के टेलेन्ट की पहचान शीला दीक्षित सरकार को तो थी ही नहीं। इसीलिए जनता ने तिबारा उसे वोट नहीं दिया। टेलेन्ट को पहचानते हैं हमारे महान पीएम, अपने मंत्रिमंडल में वे कैसे कैसे नमूने लाये हैं जो रोज़ कोई न कोई असभ्य बयान देते हैं और हमारे पीएम को प्रचारक की भाषा में ईशावास्योपनिषद से शब्द ले कर उपदेश देना पड़ता है कि अपने पर संयम रखो, जनता भड़क गयी तो लेने के दिने पड़ जायेंगे, तो असभ्य मंत्री झट से माफी मांग लेते हैं। जनता बड़े बड़े डिक्टेटरों और झूठे वायदे करने वालों को धूल चटा देती है, इतिहास यही बताता है।

मगर यार इतिहास? यह क्या बला होती है? हमारे यहां जिन लोगों ने दुनियाभर के प्रमाण जुटा कर, सिक्के, शिला लेख और पुरानी पांडुलिपियां और खननविज्ञान से उपलब्ध प्रमाण दे कर इतिहास लिखा, वे हमारे बतरा और सुब्रह्मण्यम स्वामी जैसे पंडितों के आगे क्या हैं, उनकी किताबें तो अब ये महापंडित जलवा देंगे, जलवा नहीं पाये तो छपना तो बंद करा ही देंगे। फिर इतिहास क्या क़द्दू सबक सिखायेगा? प्यारे महानभारतवासियो! आप क्यों ज्ञान विज्ञान के चक्कर में पड़ते हो, तुम्हें ज्ञानमार्ग क्या देगा, भक्तिमार्ग ने हमेशा ही फायदा पहुंचाया है, सो भक्तिमार्ग पर चलो और तैयार हो जाओ अच्छे दिनों के लिए, पंद्रह लाख रुपये आपके खाते में आने वाले हैं और आप ज्ञानमार्गी बनने के चक्कर में है। कबीर थे तो ज्ञानमार्गी जो कहते थे, कि ‘कबिरा खड़ा बजार में लिये लुकाठी हाथ, जो घर जारै आपना चलै हमारे साथ’, घर जलवाना हो तो ज्ञानमार्गियों के साथ हो लो। उधर कबीर से उलट, बाबा तुलसीदास ने भक्तिमार्ग पर चलने की सिफारिश यों ही नहीं की थी, उन्होंने भी यही वायदा किया था जिसे हमारे महान पीएम ने हर गली कूचे पर लाउडस्पीकर के माध्यम से उच्चारा था। याद करो, तुलसी बाबा ने कहा था कि ‘जिमि सरिता सागर मंह जाहीं/ जद्दपि ताहि कामना नाहीं/ तिमि धनसंपति बुनहिं बुलाएं/धरमसील पहं जाहिं सुभाए।‘ जिनको बाबा तुलसीदास की यह अवधी समझ में नहीं आती, उनके लिए मैं इसका उत्तरआधुनिक अनुवाद कर दूं, ‘ जिस तरह सरिता सागर में जाती है, हालांकि उसे जल की कामना नहीं, उसी तरह पंद्रह लाख रुपये आपके एकांउट में आयेगे ही आयेंगे, आप चाहें या न चाहें।’ भक्तिमार्ग पर चलो प्यारे, घूरे के भी अच्छे दिन आते हैं तो आपके क्यों नहीं आयेंगे, भक्तिमार्ग पर चल कर तो देखो, भक्तिमार्ग पर चले अडानी साहब, उनको पैसे की क्या जरूरत थी, वे तो बाबा तुलसीदास के ‘सागर’ की तरह हैं फिर भी हमारे महान पी एम ने जनधन योजना में जमा हुए उसी जनधन से साठ हजार करोड़ अडानी साहब को थमा दिये हैं, उससे वे भक्तिमार्गी अडानी आस्ट्रेलिया जा कर वहां पहले घास खोदेंगे, फिर कोयला तलाशेंगे और कोयला नहीं निकला तो और पैसे लेगें, अगर मिल गया तो खोदंगे, फिर कोयला खोदकर भारत लायेंगे, जनधन से लिया है इसलिए बिना पैसे लिये भारत के कल कारखानों और भट्ठों को फ्री में कोयला सप्लाई करेंगे, उससे फ्री बिजली बनेगी और हर घर को फ्री बिजली देंगे टाटा और अंबानी। मकानों के लिए फ्री ईंट और सीमेंट मिलेगा, उसी से साल भर में तीन सौ स्मार्ट सिटी बनने वाले हैं। मन तू काहे न धीर धरे?

मगर संसद में बार बार अधीर हो कर सांसद कह रहे हैं कि काला धन तो विदेश से आता रहेगा, हो सकता है हमारे महान पीएम जहां तलाश कर रहे हैं वह वहां से कहीं और सरक गया हो, या चुपके से भारत में कहीं पहले ही आगया हो और रियेल्टी मार्केट में या शेयर बाजार में लग चुका हो, इसलिए वहां समय क्यों बरबाद कर रहे हैं। भाई जी,  पहले पीएम को विदेश से वापस लाओ।’’

मुझे लगता है कि हमारी यह पड़ोसन सनक गयी है, मगर यार, उसकी सनक में भी कुछ सार तो है। शेक्सपीयर ने इसी को कहा था, ‘मैथड इन मैडनैस’।

डिस्क्लेमर:- उपर्युक्त लेख मे व्यक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं, और आवश्यक तौर पर न्यूज़क्लिक के विचारो को नहीं दर्शाते ।

 

भाजपा
काला धन
अच्छे दिन
नरेंद्र मोदी
सुप्रीम कोर्

Related Stories

कार्टून क्लिक : नए आम बजट से पहले आम आदमी का बजट ख़राब!

#श्रमिकहड़ताल : शौक नहीं मज़बूरी है..

आपकी चुप्पी बता रहा है कि आपके लिए राष्ट्र का मतलब जमीन का टुकड़ा है

रोज़गार में तेज़ गिरावट जारी है

अविश्वास प्रस्ताव: विपक्षी दलों ने उजागर कीं बीजेपी की असफलताएँ

अबकी बार, मॉबलिंचिग की सरकार; कितनी जाँच की दरकार!

यूपी-बिहार: 2019 की तैयारी, भाजपा और विपक्ष

चुनाव से पहले उद्घाटनों की होड़

अमेरिकी सरकार हर रोज़ 121 बम गिराती हैः रिपोर्ट

नोटबंदी: वायू सेना ने सौंपा 29.41 करोड़ का बिल


बाकी खबरें

  • तिरछी नज़र: सो सॉरी, सेल नहीं, रेंट
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: सो सॉरी, सेल नहीं, रेंट
    29 Aug 2021
    अब देश की संपत्तियां सेल पर हैं, बेची जा रही हैं, सॉरी! मतलब, किराये पर दी जा रही हैं। सरकार जी खुद ही दे रहे हैं। और हम भी उम्मीद से हैं कि कभी ना कभी हमारा भी मौका आएगा और हम भी कुछ खरीद पाएंगे।
  • गुजरात: धर्म-परिवर्तन क़ानून को लेकर हाईकोर्ट और सरकार के बीच क्या विवाद है?
    सोनिया यादव
    गुजरात: धर्म-परिवर्तन क़ानून को लेकर हाईकोर्ट और सरकार के बीच क्या विवाद है?
    29 Aug 2021
    धर्म-परिवर्तन के नए क़ानून पर हाईकोर्ट की सख़्ती से गुजरात सरकार सकते में है। कानून के कई प्रावधानों पर हाईकोर्ट की रोक के ख़िलाफ़ राज्य की विजय रुपाणी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा की है।
  • 200 हल्ला हो: अत्याचार के ख़िलाफ़ दलित महिलाओं का हल्ला बोल
    रचना अग्रवाल
    200 हल्ला हो: अत्याचार के ख़िलाफ़ दलित महिलाओं का हल्ला बोल
    29 Aug 2021
    "जाति के बारे में क्यों ना बोलूं सर जब हर पल हमें हमारी औक़ात याद दिलाई जाती है..."
  • रोटी के लिए जद्दोजहद करते खाना पहुंचाने वाले हाथ
    समृद्धि साकुनिया
    रोटी के लिए जद्दोजहद करते खाना पहुंचाने वाले हाथ
    29 Aug 2021
    नई श्रम सुधार संहिता के दायरे में गिग वर्कर्स को लाए जाने और उन्हें सामाजिक सुरक्षा के लाभ प्रदान करने के बावजूद फुड डिलीवरी कर्मचारियों का शोषण बदस्तूर है, खासकर महामारी के बाद से। समृद्धि साकुनिया…
  • अफ़गानिस्तान: ‘ग्रेट गेम’  खेलने की सनक में अमेरिका ने एक देश को तबाह कर दिया
    जॉन पिलगर
    अफ़गानिस्तान: ‘ग्रेट गेम’  खेलने की सनक में अमेरिका ने एक देश को तबाह कर दिया
    29 Aug 2021
    कुछ दशक पहले अफ़गानिस्तान की अवाम ने अपनी आज़ादी ली थी, लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन और उनके सहयोगी देशों की महत्वाकांक्षाओं ने उसे तबाह कर दिया
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License