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नज़रिया
भारत
कानून से ऊपर कोई नहीं: जज गोगोई के केस में निष्पक्ष जाँच की ज़रूरत
'सत्ता से सवाल' के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले ने इस केस से जुड़े कई प्रश्न उठाये जो भारत की कानून व्यवस्था को कठघरे में लाते हैंI
न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
13 May 2019

19 अप्रैल 2019 को एक हलफनामा सामने आया जिसमें सर्वोच्च न्यायालय की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगायाI पीड़िता के बयान के मुताबिक जब उसने गोगोई के प्रयासों का विरोध किया तो उसका तबादला एक से दूसरे विभाग में किया जाता रहा और अंततः उसे नौकरी से बर्खास्त कर दियाI इस मामले की जाँच करने के लिए बनायी गयी आंतरिक जाँच कमेटी ने 6 मई को ठोस सबूत न होने के कारण गोगोई को क्लीन चिट दे दीI देश भर में वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसकी कड़ी निंदा कीI 'सत्ता से सवाल' के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले ने इस केस से जुड़े कई प्रश्न उठाये जो भारत की कानून व्यवस्था को कठघरे में लाते हैंI

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CJI Ranjan Gogoi
Supreme Court
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CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License