NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
भारत
कानून से ऊपर कोई नहीं: जज गोगोई के केस में निष्पक्ष जाँच की ज़रूरत
'सत्ता से सवाल' के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले ने इस केस से जुड़े कई प्रश्न उठाये जो भारत की कानून व्यवस्था को कठघरे में लाते हैंI
न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
13 May 2019

19 अप्रैल 2019 को एक हलफनामा सामने आया जिसमें सर्वोच्च न्यायालय की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगायाI पीड़िता के बयान के मुताबिक जब उसने गोगोई के प्रयासों का विरोध किया तो उसका तबादला एक से दूसरे विभाग में किया जाता रहा और अंततः उसे नौकरी से बर्खास्त कर दियाI इस मामले की जाँच करने के लिए बनायी गयी आंतरिक जाँच कमेटी ने 6 मई को ठोस सबूत न होने के कारण गोगोई को क्लीन चिट दे दीI देश भर में वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसकी कड़ी निंदा कीI 'सत्ता से सवाल' के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले ने इस केस से जुड़े कई प्रश्न उठाये जो भारत की कानून व्यवस्था को कठघरे में लाते हैंI

CJI
CJI Ranjan Gogoi
Supreme Court
vishakha guideline

Related Stories

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

ख़बरों के आगे पीछे: बुद्धदेब बाबू को पद्मभूषण क्यों? पेगासस पर फंस गई सरकार और अन्य

नफ़रत फैलाने वाले भाषण देने का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

जानिए: अस्पताल छोड़कर सड़कों पर क्यों उतर आए भारतीय डॉक्टर्स?

नज़रिया: जस्टिस बोबडे पूरे कार्यकाल के दौरान सरकार के रक्षक-प्रहरी बने रहे

बतकही: अब तुमने सुप्रीम कोर्ट पर भी सवाल उठा दिए!

किसान आंदोलन को खालिस्तानी से जोड़ना क्यों मोदी जी ?

शुक्रिया सुप्रीम कोर्ट...! लेकिन हमें इतनी 'भलाई' नहीं चाहिए

राम के नाम पर देश में फिर नब्बे के दशक जैसा माहौल बनाने की कोशिश!

असंवेदनशील शासन व्यवस्था और झुग्गियों की पीड़ा


बाकी खबरें

  • राजेंद्र शर्मा
    सुंदरता का पता नहीं, लेकिन अच्छे दिन देखने वाले की आंखों में बसते हैं
    13 Mar 2022
    छप्पन इंच जी के प्रताप से, इतनी मिसाइलें जमा हो चुकी हैं कि दीवाली के रॉकेटों वाला हाल है। दो-चार इधर-उधर टहल भी जाएं तो खास फर्क नहीं पड़ता है। पड़ोसी के घर में जा भी पड़ी तो क्या? वोट पड़ चुके होंगे…
  • Aap
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: केजरीवाल मॉडल ऑफ़ गवर्नेंस से लेकर पंजाब के नए राजनीतिक युग तक
    13 Mar 2022
    हर हफ़्ते की महत्वपूर्ण ख़बरों और उनके पीछे की मंशाओं को समझाने के लिए “ख़बरों के आगे पीछे” लेकर आए हैं लेखक अनिल जैन
  • vidhansabha
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव नतीजे: कई सीटों पर 500 वोटों से भी कम रहा जीत-हार का अंतर
    13 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी की अगुवाई वाले गठबंधनों के बीच बेहद कांटे का मुकाबला रहा। 53 सीटें ऐसी रहीं जहां हार-जीत का अंतर 200 से लेकर 5000…
  • डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: चुनाव सेवक का अश्वमेध यज्ञ
    13 Mar 2022
    बीजेपी सरकार चलाने में जितनी मेहनत करती है उससे अधिक मेहनत सरकार बनाने में करती है। सरकार जब एक बार बन जाए तो चल तो रामभरोसे जाती ही है।
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : 'जीते हुए लश्कर के सिपाही, ऐसे कैसे हो जाते हैं?'
    13 Mar 2022
    बमबारी, हमले और जंग के शोर के बीच इतवार की कविता में पढ़िये स्वप्निल तिवारी की लिखी नज़्म 'शेल-शॉक्ड'...
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License