NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
किसानों की ज़िन्दगी - #3
नागराज थिगाला:तुमकुर के सुपारी और नारियल के किसान
जेसिम पाइस
29 Dec 2017
farmers crises

2017 में देश भर में किसान आन्दोलनों की लहर सी उठ गयी I ऐसा क्यों हुआ इसे समझने के लिए न्यूज़क्लिक देश भर के विभिन्न किसानों पर एक सिरीज़ लेकर आया है,जो कि किसानों के इंटरव्यू पर आधारित है और जिसे दिल्ली के छात्रों द्वारा सोसाइटी फॉर सोशल एंड इकोनोमिक रिसर्च की मदद से बनाया गया है I इस श्रंखला की भूमिका यहाँ पढ़ें I

नागराज (31 वर्षीय) कर्णाटक के एक नारियल और सुपारी किसान हैं I वे किसान संसद में हिस्सा लेने दिल्ली आये थे और वहीं उन्होंने हमें बताया कि नोटबंदी के दौरान उन्हें उनके मुनाफ़ा देने वाले सुपारी और नारियल के बाग़ों में काफी नुक्सान उठाना पड़ा I

नागराज अपने माता-पिता, पत्नी और तीन बच्चों के साथ कर्णाटक के तुमकुर ज़िले के बुगुदनाहल्ली गाँव में रहते हैं I उनके पिता उचैया (56 वर्षीय) और उनकी माँ लक्षम्मा (45 वर्षीय) और उनकी पत्नी गायत्री (29 वर्षीय) भी खेती-बाड़ी से ही जुड़े हुए हैं I उनकी बड़ी बेटी सिर्फ 4 साल की है और गाँव के नर्सरी स्कूल में पढ़ने जाती है, उनका बेटा पवन अभी काफी छोटा है इसलिए स्कूल नहीं जाता I इनका परिवार थिगाला नाम की ओबीसी जाति से ताल्लुक रखते हैं I फूलों और सब्ज़ियों की खेती थिगाला जाति का पारम्परिक पेशा है I

बुगुदनाहल्ली एक मध्यम आकार का गाँव है I 2011 की जनगणना के समय यहाँ 533 घर और कुल 2340 जनसँख्या थी I यह गाँव ज़िला हेडक्वाटर (तुमकुर शहर) से 10 किलोमीटर दूर है I अपने खेत पर खेती करने के साथ-साथ नागराज तुमकुर शहर के फूल बाज़ार में आम मज़दूर की तरह काम करता है I

तुमकुर ज़िले की अर्थव्यवस्था मूलतः कृषि आधारित है I यह नारियल की खेती वाले क्षेत्र में आता है और कर्णाटक के नारियल उत्पादन का एक तिहाई यहीं से आता है I 2014-15 में तुमकुर में कुल जितने इलाके में बुआई हुई उसमें 28 प्रतिशत पर नारियल ही उगाया गया और 6 प्रतिशत पर सुपारी I धान, रागी और मक्का तुमकुर की मुख्य फसलें हैं I

नागराज के परिवार के पास दो खेत हैं जिनमें सिंचाई का पानी ट्यूबवेल है I उचैया से मिला एक एकड़ का खेत बुगुदनाहल्ली गाँव में ही है I सुपारी और नारियल की खेती इसी पर हुआ होती आई है I नागराज के परिवार ने अपने गाँव से 20 किलोमीटर दूर कोरटाकेरे नाम के गाँव में 2.5 एकड़ ज़मीन खरीदी जिसपर रागी की खेती होती है I

नागराज के घर की आमदनी का मुख्य स्रोत सुपारी और नारियल की खेती तथा तुमकुर के फूल बाज़ार में मज़दूरी है I सुपारी की खेती हर 3 महीने में होती है I फ़सल काटने के बाद घर पर ही सुपारी से भूसा अलग किया जाता है, उसे काटा, उबाला, रंग डालकर रंगा जाता है और फिर धुप में सुखाया जाता है I सुपारी का भूसा और उसके खेत में से मिलने वाले सूखे पत्तों को सुपारी को उबलते समय ईंधन की तरह इस्तेमाल करते हैं I मौसम के अनुसार सुपारी तैयार करने में 7-10 दिन का समय लगता है I नारियल की फ़सल को खोपरे के रूप में बेचा जाता है I पेड़ से तोड़ने के बाद नारियल को घर पर ही सुखाया जाता है फिर उसे छीलकर उसका खोल उतारकर खोपरा मिलता है I तैयार सुपारी को तुरंत ही तुमकुर के APMC बाज़ार में बेचा जाता है I जबकि सूखे नारियल को खोपरे के रूप में 70 किलोमीटर दूर तिप्तुर के APMC बाज़ार में बेचा जाता है I घरेलू उपयोग से अतिरिक्त रागी को स्थानीय बाज़ार में बेचा जाता है I नारियल के भूसे को इंधन की तरह इस्तेमाल किया जाता है या कभी कभी नारियल की रस्सी के तौर पर बेच दिया जाता है I नारियल के खोल चारकोल बनाने के लिए तुमकुर के पास एक छोटे उद्यम को बेच दिये जाते हैं I  

जब नागराज को तुमकुर के फूल बाज़ार में काम मिलता है तो वो दिन के 300 से 500 रूपये कमा लेता है I इस बाज़ार में मज़दूरी से होने वाली आमदनी इनके परिवार की आय का एक अहम हिस्सा है I

2016 में इस परिवार ने खेती का खर्च निकलने और साहूकार से लिए पुराने कर्ज़े उतारने के लिए कावेरी ग्रामीण बैंक से 2 लाख रूपये का कर्ज़ लिया I हालांकि इनके परिवार ने इस कर्ज़ का पूरा ब्याज़ उतार दिया है फिर भी मूल अब भी बाकि है I जून 2017 में कर्णाटक सरकार ने कर्ज़ माफ़ी का एलान किया जिसके तहत नागराज ने जो 50,000 रूपये का कर्ज़ा व्यवसाय सेवा बैंक से लिया था वो माफ़ हो गयाI लेकिन कावेरी ग्रामीण बैंक से लिया कर्ज़ माफ़ नहीं हुआ I

नोटबंदी से उनकी खेती को बहुत नुक्सान हुआ क्योंकि वे खेत मज़दूरों को उनकी मज़दूरी नहीं दे पाए I शुरू-शुरू में तो मज़दूर देरी से पैसे लेने को तैयार थे I लेकिन कुछ दिनों बाद खेती का काम रोकना पड़ा क्योंकि उनके पास मज़दूरों को देने के लिए रूपये नहीं थे I सुपारी और नारियल की खरीद तीन महीने तक रुकी रही I नारियल को तो फिर भी बाद के लिए बचाया जा सका लेकिन कुछ सुपारी के ख़राब हो जाने की वजह से उन्हें नुक्सान उठाना पड़ा I सुपारी, रागी और रागी के भूसे की औसत कीमत इस साल पिछले साल के मुकाबले कम रहीं I खेती में नुक्सान उठाने के साथ-साथ नोटबंदी की वजह से नागराज को एक महीने तक फूल बाज़ार में काम भी नहीं मिला I

जेसिम पाइस Society for Social and Economic Research के साथ जुड़े हुए हैं I

इस श्रंखला का पहला भाग आप यहाँ पढ़ सकते हैं I

इस श्रंखला का दूसरा भाग आप यहाँ पढ़ सकते हैं I

 

farmers crises
farmers distress
kisan mukti sansad

Related Stories

ब्लैक राइस की खेती से तबाह चंदौली के किसानों के ज़ख़्म पर बार-बार क्यों नमक छिड़क रहे मोदी?

यूपीः धान ख़रीद को लेकर किसानों से घमासान के बाद हड़ताल पर गए क्रय केंद्र प्रभारी

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से वंचित हैं आज भी बड़ी तादाद में किसान

बाढ़ के बाद बेमौसम बरसात ने किसानों की कमर तोड़ दी

खेती- किसानी में व्यापारियों के पक्ष में लिए जा रहे निर्णय 

यूपी: साढ़े चार सालों में मात्र 35 रुपए की बढ़ोत्तरी गन्ना किसानों के साथ 'धोखा' है!

नई MSP घोषणा: गेहूं की बाल में गेहूं का दाना ही नहीं 

किसान-आंदोलन राष्ट्रीय जनान्दोलन बनने की ओर!

किसान आंदोलन के 9 महीने : किसान आंदोलन की ऐतिहासिक जन कार्रवाइयां

प्रधानमंत्री फसल बीमा के नाम पर किसानों से लूट, उतना पैसा दिया नहीं जितना ले लिया


बाकी खबरें

  • मैथिली शिवरामन
    मैथिली शिवरामन
    चिल्ड्रन ऑफ़ डार्कनेस : मैथिली शिवरामन
    31 May 2021
    मैथिली शिवरामन, लिंगों के बीच और समुदायों के भीतर समानता की प्रखर सेनानी, मायूसी के साथ लिखती हैं कि जातिवाद लोगों के जनसमूह को पैदा करता है। इसे ‘हॉन्टेड बाय फ़ायर’ से लिया गया है: जो जाति, वर्ग,…
  • दुनिया बीमारी से ख़त्म नहीं होगी
    अजय सिंह
    दुनिया बीमारी से ख़त्म नहीं होगी
    31 May 2021
    दुनिया ख़त्म होगी प्यार के घटते जलस्तर से। नफ़रत व इस्लामोफ़ोबिया के सैलाब से, जो लगातार उमड़ता चला आ रहा है...
  • कोरोना
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: नए मामलों में कमी लेकिन मरने वालों की संख्या रोज़ाना अभी भी 3 हज़ार से ज़्यादा
    31 May 2021
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 1,52,734 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 7.22 फ़ीसदी यानी 20 लाख 26 हज़ार 92 हो गयी है।
  • wealth redistribution
    रिचर्ड डी. वोल्फ़
    हमें धन के वितरण और उसके लोकतंत्रीकरण की ज़रूरत क्यों है?
    31 May 2021
    अमेरिकी पूंजीवादी मॉडल ख़ुदगर्ज़ी और विद्वेष को पोषित करता है
  • media with spine
    भाषा सिंह
    हिंदी पत्रकारिता दिवस: अपनी बिरादरी के नाम...
    30 May 2021
    आज न तो सियापा करने का दिन है और न ही जश्न मनाने का। आज, अपने काम, लेखनी व बोली की वकत जानने और इसकी ज़रूरत को पहचाने का दिन है। ...वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह का आलेख
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License