NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
किसानों की सुनों : गाय पालना और संभालना बनता जा रहा है एक समस्या
पूर्वी उत्तर प्रदेश में बहराइच, लखीमपुर खीरी से लेकर पश्चिम उत्तर प्रदेश में मथुरा, मेरठ, अलीगढ और बाग़पत और बुंदेलखंड में उरुई, जालौन तक के लोग आवारा गायों से परेशान हैं।
अजय कुमार
02 Jan 2019
COW
Image Courtesy: AajTak

गायों की राजनीति ने देश के सामाजिक तानेबाने के साथ अब अर्थनीति को बिगाड़ना शुरू कर दिया है। जिन गायों या गौवंश को किसान संभाल लेते थे उससे अब पूरा किसान समाज परेशान होने लगा है।

इस पूरी परेशानी को उत्तर प्रदेश के संदर्भ में समझने की कोशिश करते हैं जो आवारा गायों से पैदा हो रही है। अभी हाल की ही घटना है कि अलीगढ शहर से तकरीबन 30 किलोमीटर दूर सायपुर गाँव के गांवावालों ने सरकारी स्कूल में तकरीबन 100 आवारा गायों को लॉक कर दिया। इस गाँव में तकरीबन 600 बीघे की खेतिहर जोत है। गाँववालों को कहना है कि रात भर रखवाली करने के बाद भी आवारा गायों की वजह से आधी से अधिक फसल बर्बाद हो जाती है। इस परेशानी से निजात पाने के लिए हम इस कदम  को उठाने पर मजबूर हुए हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में बहराइच, लखीमपुर खीरी से लेकर पश्चिम उत्तर प्रदेश में मथुरा, मेरठ, अलीगढ और बाग़पत और बुंदेलखंड में उरुई, जालौन तक के लोग आवारा गायों से परेशान हैं। इस परेशानी से निजात पाना मुश्किल होता जा रह है। इसका गुस्सा जाहिर करने के लिए लोग आवारा गायों को सरकारी भवनों जैसे कि स्कूलों, अस्पतालों और पंचायत भवनों में बंद करने लगे हैं।

किसी भी तरह के मवेशी किसानी परितंत्र का हिस्सा होते हैं। यानी इनकी निर्भरता किसानी से जुड़ी होती है। जब इन्हें किसानी से अलग कर दिया जाता है तो इन मवेशियों को संभालना बहुत मुश्किल हो जाता है। अब यही हो रहा है। योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा गौकशी पर लगाये गये कड़े प्रतिबन्ध और कथित गौ-रक्षकों की गुंडागर्दी के चलते आवारा गायों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। साल 2012 की मवेशियों के 19वें सेन्सस के मुताबिक उत्तर प्रदेश में आवारा पशुओं की संख्या तकरीबन 10 लाख 10 हजार थी। गोकशी प्रतिबन्ध की वजह से इस संख्या में भारी इजाफे का अनुमान लगाया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के तहत राज्य में तकरीबन 495 रजिस्टर्ड गौशालाएं हैं। हर गौशाला में इनकी क्षमता से ज्यादा गायों की संख्या बढ़ती जा रही है। अलीगढ़ के टप्पल गाँव की गौशाला में इस साल के मार्च महीने में 400 गायें थी। इस समय यह बढ़कर 2000 हो गयीं है। यह स्थिति हर गौशाला की है। हर गौशाला में क्षमता से अधिक गायों को रखा जा रहा है। तमाम गौशालाओं से देखभाल की कमी से गायों के मरने की भी ख़बरें आती रही हैं।

अब गौशालाओं के अर्थतंत्र को समझते हैं। बिजनेस स्टैण्डर्ड में छपी रिपोर्ट की तहत मेरठ की गोपाल गौशाला में इस समय तकरीबन 800 गायें हैं, जिनमें से 100 गायों से दूध मिलता है। हर दिन इस गौशाला पर तकरीबन 40 हजार खर्च करना पड़ता है। इस तरह से इस गौशाला में हर साल तकरीबन डेढ़ करोड़ खर्च होता है। लेकिन इस गौशाला से सलाना केवल 1.3 करोड़ की कमाई होती है। इससे भी बदतर हालत टप्पल की गौशाला की है। जहां तकरीबन 2000 गायें रहती हैं, जिनमें से केवल 10 गायों से दूध मिलता है। सलाना तकरीबन डेढ़ करोड़ खर्च करना पड़ता है और कमाई के नाम पर एक रुपया भी नहीं मिलता है। गौशाला से पैदा होने वाले अपशिष्ट पदार्थों जैसे की गौमूत्र और गौ-गोबर आदि के जरिये तकरीबन लाख-दो लाख की कमाई हो जाती है। इतनी कम आय पर गौशाला चलना तो पहले से ही मुश्किल होता था। आवारा गायों की संख्या में इजाफा होने से यह और मुश्किल होता जा रहा है।

अलीगढ़ के जिलाधिकारी चन्द्रभूषण सिंह कहते हैं कि हर सुबह मुझे यह शिकायत मिलती है कि किसानों ने गायों को किसी सरकारी स्कूल, अस्पताल या पंचयत भवन में बंद कर दिया है। शाम तक का समय इन्हीं मामलों का निपटारा करने में लग जाता है। कहने का मतलब यह है कि आवारा गायों की परेशानी इतनी भीषण हो चुकी है कि प्रशासन का एक बड़ा तबका केवल गायों को संभालने में लगा हुआ है।

इन सारी परेशानियों को समझने पर यह बात तो साफ़ हो जाती है कि गाय किसानी से तभी तक जुड़ी रह सकती है जब तक वह उत्पादक हो। अगर गाय की उत्पादकता खत्म हो जाए, किसानी से इसे हटा दिया जाए अथवा किसानी बर्बाद हो जाए तो इसे संभालना मुश्किल हो जाता है। खेती से कम होती आय और जीविका की वजह से गाय या किसी भी तरह के मवेशी का इंसानों के साथ सहअस्तित्व के आधार पर बच पाना गाय पर प्रतिबन्ध लगाने के पहले से ही मुश्किल था।

लेकिन अब यह मुश्किल इतनी भयावह हो चुकी है कि प्रशासन का एक पूरा तबका केवल इसे बचाने में लगा हुआ है। साथ में इसे बचाने के लिए सरकार अब पैसे की व्यवस्था भी कर रही है। शराब से कमाए गये पैसे पर कर लगाकर गौशाला बनाना चाह रही है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक का फैसला यह है कि गायों के आश्रय स्थलों के वित्तीय प्रबंधन के लिए आबकारी विभाग शराब पर दो प्रतिशत 'गौ कल्याण उपकर' लगाएगा। सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के मुताबिक, आवारा गौवंश की समस्या के हल के लिए कदम उठाया गया है। हर जिले के ग्रामीण और नगरीय क्षेत्र में न्यूनतम 1000 आवारा गायों के लिए गौशाला बनेंगी। इसके लिए मनरेगा के माध्यम से ग्राम पंचायत, विधायक, सांसद निधि से निर्माण कराया जाएगा। इस काम के लिए सरकार ने स्थानीय निकाय को 100 करोड़ रुपये दिए हैं। 

पहले शराब पीने वाले कहते थे कि उनकी वजह से सरकार को बहुत अधिक कमाई होती है, अब यह भी कहेंगे कि उनकी वजह से हिन्दू धर्म को बचाया जा रहा है।

cows
Cow Vigilante
cow slaughter
cow terrorism
gaushala
आवारा पशु
आवारा गाय
Uttar pradesh
Yogi Adityanath
cow locked in school
Holy Cow
cow welfarre cess

Related Stories

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही मस्जिद ईदगाह प्रकरण में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

जौनपुर: कालेज प्रबंधक पर प्रोफ़ेसर को जूते से पीटने का आरोप, लीपापोती में जुटी पुलिस

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

उपचुनाव:  6 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में 23 जून को मतदान

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश


बाकी खबरें

  • workers
    तारिक अनवर
    यूपी चुनाव: धीमी मौत मर रहा है भगवान कृष्ण को संवारने-सजाने वाला मथुरा-वृंदावन का उद्योग
    07 Feb 2022
    हिंदुत्व की उच्च डेसिबल की राजनीति हिंदू और मुस्लिम समुदायों से आने वाले कारीगरों, व्यापारियों और निर्माताओं की आजीविका को बचाने में विफल रही है।
  • yogi and amit shah
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: भाजपा को चुनावों में भगवान और मुसलमान का ही सहारा
    07 Feb 2022
    ख़बरों की इस भाग दौड़ में ख़बरों का मर्म छूट जाता है। इस हफ़्ते की कुछ ख़ास ख़बरें लेकर आए हैं अनिल जैन, जिसमें राम जी की जाति से लेकर केजरीवाल का मोदी मॉडल तक शामिल है। 
  • Lata Mangeshkar
    नम्रता जोशी
    लता मंगेशकर की उपलब्धियों का भला कभी कोई विदाई गीत बन सकता है?
    07 Feb 2022
    संगीत और फ़िल्म निर्माण में स्वर्ण युग के सबसे बड़े नुमाइंदों में से एक लता मंगेशकर का निधन असल में वक़्त के उस बेरहम और अटूट सिलसिले का एक दुखद संकेत है, जो अपने जीवन काल में ही किंवदंती बन चुके…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में एक महीने बाद कोरोना के एक लाख से कम नए मामले सामने आए  
    07 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 83,876 नए मामले सामने आए हैं। देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 2.62 फ़ीसदी यानी 11 लाख 8 हज़ार 938 हो गयी है।
  • MGNREGA
    डॉ. राजू पाण्डेय
    बजट 2022: गांव और किसान के प्रति सरकार की खटकने वाली अनदेखी
    07 Feb 2022
    कोविड-19 के इस भयानक दौर में यह आशा की जा रही थी कि सरकार न केवल मनरेगा को ज्यादा मजबूती देगी, बल्कि शहरी इलाकों के लिए भी कोई ऐसी ही योजना लाई जाएगी। विगत वित्तीय वर्ष के संशोधित आकलन की तुलना में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License