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भारत
राजनीति
कितने सुरक्षित हैं दिल्ली के आश्रय गृह
देश की राजधानी दिल्ली के एक आश्रय गृह से 9  लड़कियों के गायब होने की घटना ने हमारी सरकारों  व प्रशासन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिये हैंI यह कोई पहली घटना नहीं है जहाँ आश्रय गृह से लड़कियाँ गायब हुई हों
मुकुंद झा
05 Dec 2018
shelter

देश की राजधानी दिल्ली के एक आश्रय गृह से 9  लड़कियों के गायब होने की घटना ने हमारी सरकारों  व प्रशासन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिये हैंI यह कोई पहली घटना नहीं है जहाँ आश्रय गृह से लड़कियाँ गायब हुई होंI इससे पहले देश के कई राज्यों से ऐसी खबरे आयीं हैं; हाल ही में हमने बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के आश्रय घरों को देखा था जहाँ कई लडकियाँ गायब हुईंI ऐसे मामले भी सामने आये जहाँ आश्रय घरों में लकड़ियों को जबरन रसूकदारों के साथ सम्बन्ध बनाने के लिए मजबूर किया जाता था; ऐसा न करने और इसका विरोध करने पर उन्हें पीटा जाता था| ऐसी घटनाओं ने हमारे देश में चल रहे तमाम आश्रय घरों के चलने के तरीके और हमारे सभ्य समाज होने पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं|

राजधानी में 1 दिसंबर और 2 दिसंबर की मध्यरात्रि को दिलशाद गार्डन स्थित संस्कार आश्रम से 9 लड़कियाँ गायब हो गयींI आश्चर्य की बात है कि आश्रय गृह के अधिकारियों को उनके गायब होने की वजह और वो कैसे गायब हुईं, इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं है| उनकी अनुपस्थिति की जानकारी 2 तरीख सुबह मिली| इस मामले में जीटीबी एन्क्लेव पुलिस थाने में 2 दिसंबर को एक एफ़आईआर संख्या 388/18 दर्ज की गयी|

अधिकारियों द्वारा आश्रय गृह में बच्चियों की सुरक्षा में चूक एक बहुत ही गंभीर मामला है और इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप किया जाना चाहिए| गौर करने वाली बात यह है कि इन 9 लड़कियों को बाल कल्याण समिति – VII के आदेश पर 4 मई 2018 को द्वारका के एक आश्रय घर से दिलशाद गार्डन के इस आश्रय घर में स्थानांतरित किया गया था| ये सभी मानव तस्करी और देह व्यापार के मामलों की शिकार थीं|

इस मामले में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने उपमुख्यमंत्री को लिखा और ज़िम्मेदार अफसरों के खिलाफ कड़ी करवाई करने की माँग कीI उन्होंने इस पूरी घटना को लेकर आश्रय गृह के अधिकारियों पर गंभीर सवाल खड़े किये और कहा कि आश्रय गृह के अधिकारियों की सांठगाठ से कोठों के मालिकों द्वारा इनके अपहरण की संभावना की विस्तृत जाँच की जानी चाहिए|

स्वाति मलिवाला ने न्यूज़क्लीक से बात करते हुए कहा कि, “इससे पहले भी आयोग में बाल कल्याण समिति की पूर्व सदस्य ने संस्कार आश्रम फॉर गर्ल्स, दिलशाद गार्डन में व्याप्त अव्यवस्थाओं के बारे में एक शिकायत दर्ज करवाई थी|” उन्होंने एक विशेष घटना के बारे में बताया था जिसमें एक विकलांग लड़की के प्रति आश्रय गृह के अधिकारियों के दुर्व्यवहार के बारे में बताया गया था| इसमें कहा गया कि बच्ची के साथ गलत बर्ताव होता था और आश्रय गृह के अधीक्षक द्वारा उसे मारा-पीटा जाता थाI यह मामला इतना गंभीर था कि बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष और सदस्य को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा था| उन्होंने गृह के अधीक्षक के खिलाफ बच्ची को मारने के मामले में एक लिखित शिकायत की थी| मालीवल ने कहा, “चूंकि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के धारा 75 के अंतर्गत बच्चों पर अत्याचार एक संज्ञेय अपराध है, तो दिल्ली महिला आयोग ने दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग को नोटिस जारी किया और मामले में जुवेनाइल जस्टिस रूल्स, 2016 के नियम 54(2) के तहत ऍफ़आईआर दर्ज न होने के कारण बताने को कहा|” इसके बाद शिकायतकर्ता सदस्य में ही आयोग में एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें आश्रय घर के अधीक्षक पर अन्य दूसरे बच्चों के साथ गलत व्यवहार करने और उनको मारने पीटने के भी आरोप थे| इतने गंभीर मामले में भी इन शिकायतों पर न तो दिल्ली पुलिस और न ही महिला एवं बाल विकास विभाग ने कोई कार्रवाही कीI

अभी इस इस मामले में माननीय उपमुख्यमंत्री ने स्वाती मालीवल के पत्र के बाद इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर और आश्रय घर के अधीक्षक को तुरंत निलंबित करने का आदेश दे दिया है|

दिल्ली महिला आयोग ने इस मामले की जांच के लिए दिल्ली पुलिस को एफआईआर को अपराध शाखा को स्थानांतरित करने के लिए कहा ताकि बच्चियों को ढूँढने के लिए तुरंत कदम उठाये जाएँ|

एक सामाजिक कार्यकर्ता (जो आश्रय घर में आई महिलाओं और लड़कियों के पुनर्वास का कार्य करती हैं) ने अपना नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर बताया कि, “हमारे आश्रय गृह बहुत ही बुरी अवस्था में चलाए जा रहे हैं, इन गृहों में लोगों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है| आश्रय गृह के नाम पर इनके संचालक सरकार से मोटी रकम वसूल लेते हैं, परन्तु इनमें रहेने वालों को किसी प्रकार की सुविधा नहीं दी जाती है| अधिकतर आश्रय घरों में महिलाओं को समझाने के लिए काउंसलर तक नहीं होते है तो आप कैसे उम्मीद कर सकते है कि ये महिलाएँ फिर से मुख्यधार में शमिल हो पाएंगी|”

वो आगे कहती है कि, “आप देखेंगे हमारे देश के अधिकतर आश्रय गृह प्रभावशाली लोगों द्वारा चलाया जाते हैं और स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से ही ऐसे घटानाओं को अंजाम दिया जाता है|”

ऐपवा की राष्ट्रीय सचिव कविता कृष्णन ने न्यूज़क्लीक से बात करते हुए कहा कि, “ऐसे मामलों की जाँच की जानी चाहिए; जाँच के लिए एक विशेष दल बनाए जाने चाहिए, इनमें महिला संगठनों को शामिल किया जाना चाहिए जिससे इस तरह के पूरे मामलों की जाँच हो सके|”

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की दिल्ली राज्य सचिव मैमुना मौल्ला ने कहा कि, “यह घटना बहुत ही दर्दनाक हैI सरकार आनन-फानन में कार्रवाही कर अपना पल्ला नहीं झाड़ सकती है, जबकि इसकी ज़िम्मेदारी सीधे सरकार की होती हैI सरकार को चाहिए कि इन गृहों का समय-समय पर सोशल ओडिट हो, परन्तु ऐसा नहीं होता है|”

 

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