NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कम इस्तेमाल होने के बावजूद भी गैस की कीमतों ने छुआ आसमान
मोदी दावा कर रहे हैं कि उनकी उज्ज्वला योजना से महिलाओं को आजादी मिल गयी है, लेकिन सब्सिडी वाली गैस की कीमत में 21 फीसदी की बढ़ोतरी से सबसे गरीब लोग इसकी पहुंच से बाहर भी हो रहे हैं।
सुबोध वर्मा
21 Nov 2018
Translated by महेश कुमार
gas cylender

सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर (14.2 किलोग्राम) की कीमत में 21 फीसदी की वृद्धि हुई है, जबकि पिछले दो सालों में गैर-सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत में लगभग 80 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जो प्रभावी रूप से प्रधानमंत्री द्वारा घोषित उज्ज्वला योजना को तबाह कर रही है (पीएमयूवाई ) साथ ही साथ करोड़ों लोगों के पारिवारिक बजट को भी प्रभावित कर रही है। इस संबंध में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण सेल के पास यह डेटा उपलब्ध है।

उज्ज्वला योजना की मीडिया और बीजेपी नेताओं ने बहुत सराहना की है। आधिकारिक मान्यता प्राप्त 'गरीबी रेखा से नीचे' (बीपीएल) परिवारों से संबंधित 5 करोड़ से अधिक महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन और सिलेंडर प्राप्त करने के लिए 1600 रुपये की एक बार वाली सब्सिडी दिया जाना था। एक बार में पहला सिलेंडर खत्म हो जाने के बाद, परिवारों को सब्सिडी वाली कीमत पर भुगतान कर एक दुसरा भरा सिलेंडर लेना पड़ा। कई गरीब परिवारों के लिए, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, 507.42 रुपये प्रति सिलेंडर की वर्तमान कीमत लागत बहुत महंगी है।

lpg.png

इसने एक अजीब सी स्थिति पैदा कर दी है: परिवार गोबर के उपले, लकड़ी इत्यादि जैसे पारंपरिक खाना पकाने के ईंधन पर वापस जा रहे हैं और गैस का उपयोग कम कर रहे हैं। गैस खपत की आँकड़े कनेक्शन में वृद्धि की तुलना में इस्तेमाल की बहुत धीमी वृद्धि के संकेतों को दर्शाता है, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार जुलाई ये कनेक्शन 2016 में 16.63 करोड़ से बढ़कर 2018 में 23.47 करोड़  हो गए। कुछ रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि "निष्क्रिय" उपभोक्ता (जो तीन महीने के भीतर फिर से सिलेंडर नहीं भरवा पाते हैं) वह कुल  उपभोक्ताओं का 15 प्रतिशत तक हो सकता है। अन्य रिपोर्टों से पता चलता है कि यह संख्या 3.8 करोड़ से  अधिक हो सकती है।

मई 2018 के एक इकोनिमिक एंड पोलिटिकल वीक्ली साप्ताहिक (ईपीडब्लू) के विश्लेषण में बताया गया है कि यह स्थिति 2015-16 में प्रति माह 9.1 किलोग्राम के इस्तेमाल से 2017 में 8 किलोग्राम प्रति माह हो गई है। यह स्थिति एलपीजी इस्तेमाल की प्रति व्यक्ति खपत में गिरावट दिखाती है।

इस बीच, गैर-सब्सिडी वाले एलपीजी उपभोक्ताओं की स्थिति, जो भारतीय उपभोक्ताओं का बड़ा हिस्सा है, भी काफी कठोर हो गईं हैं। मई 2016 में उनके लिए एलपीजी की कीमतें नाटकीय रूप से 527.50 रुपये से बढ़कर नवंबर 2018 में प्रति सिलेंडर में 942.50 रुपये हो गईं। इसकी कीमतों में लगभग 80 प्रतिशत का उछाल है।

 

lpg 2.png

ऐसी भी खबरें हैं कि एलपीजी के सिलेंडर को एक समृद्ध काले बाजार में 1200 रुपये में बेचा जा रहा है। एक गरीब परिवार के लिए, जो बीपीएल नहीं है, इस लागत को सहन करना असंभव है। ध्यान दें कि बीपीएल की वर्तमान परिभाषा प्रति दिन 131 रुपये की आय है, जो कि काफी कम है।

मोदी और उनकी पार्टी पीएमयूवाई को हाल ही में चल रहे विधानसभा चुनावों में वोट इकट्ठा करने के साथ-साथ अगले साल आने वाले आम चुनावों में वोट इकट्ठा करने के लिए प्रमुख उपलब्धियों में से इस एक पर भी निर्भर हैं। बीजेपी रणनीतिकारों का निष्कर्ष है कि यदि वे पीएमयूवाई जैसी योजनाओं के 'लाभार्थियों' को संजोते हैं, तो चुनाव जीतने के लिए यह उनकी एक आसान सवारी होगी।

हालांकि, एलपीजी की बढ़ती कीमतों और उसके इस्तेमाल में गिरावट के चलते, मोदी और बीजेपी को एक सदमा लग सकता हैं।

gas cylender
LPG
Cooking gas
BJP
Narendra modi

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • भाषा
    दिल्ली में लगातार दूसरे दिन महंगी हुई सीएनजी, 2.5 रुपए बढ़ी क़ीमत
    07 Apr 2022
    सीएनजी के दाम में 2.50 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई है, जिसके साथ मार्च से अब तक दाम कुल 12.50 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़े हैं। 
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हिमाचल: प्राइवेट स्कूलों में फ़ीस वृद्धि के विरुद्ध अभिभावकों का ज़ोरदार प्रदर्शन, मिला आश्वासन 
    07 Apr 2022
    संयुक्त निदेशक ने आश्वासन दिया कि निजी स्कूलों में आम सभाएं आयोजित करने, पीटीए के गठन व वर्ष 2022 की फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाने के लिए तुरन्त आदेश जारी कर दिए जाएंगे।
  • मुकुंद झा
    मध्य प्रदेश : बीजेपी विधायक के ख़िलाफ़ ख़बर दिखाई तो पुलिस ने पत्रकारों को थाने में नंगा खड़ा किया
    07 Apr 2022
    मध्य प्रदेश के सीधी ज़िले से आई शर्मनाक तस्वीरों में पुलिस ने पत्रकारों को थाने में नंगा खड़ा कर दिया क्योंकि उन्होंने विधायक के ख़िलाफ़ ख़बर चलाई थी। साथ ही पुलिस ने पत्रकारों को धमकी भी दी है।
  • सतीश भारतीय
    मध्यप्रदेशः बुन्देलखण्ड में मछली की तरह बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है आवाम!
    07 Apr 2022
    सागर जिले के बुन्देलखंड क्षेत्र में नदियां, तालाब और कुएं सूखने से ग्रामीण आवाम के सिर पर भयावह जल संकट मंडरा रहा है। जिससे ग्रामवासी कई किमीं दूर से पानी लाने को विवश है।
  • rohingya
    रवि नायर
    भारत के कर्तव्यों का उल्लंघन है रोहिंग्या शरणार्थियों की हिरासत और उनका निर्वासन
    07 Apr 2022
    भारत में शरणार्थियों से संबंधित कोई विशेष क़ानून नहीं है, ऐसी स्थिति में मनमाफ़िक ढंग से रोहिंग्या शरणार्थियों के साथ व्यवहार किया जा रहा है, दूसरे देशों से आने वाले शरणार्थियों की तुलना में उनके साथ…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License