NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कंप्यूटर की निगरानी का नहीं आपकी जासूसी का अधिकार हासिल कर लिया है सरकार ने!
राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में सरकार ने तमाम एजेंसियों को यह इजाज़त दे दी है कि वो व्यक्ति के निजी अधिकारों में हस्तक्षेप करते हुए सीधे तौर पर उसकी जासूसी कर सकें।
अजय कुमार
22 Dec 2018
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy: google

पिछले कुछ सालों से यह बहस चल रही है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरी है या व्यक्ति के निजी आधिकार। इस बहस का जवाब देते हुए अभी हाल में सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला भी दिया कि व्यक्ति के निजी अधिकार मूलाधिकार हैं और हालांकि कुछ मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर हस्तक्षेप भी किया जा सकता है, लेकिन ये हस्तक्षेप कितना होगा, इस पर कभी भी कोई एक राय नहीं बन सकी है जिसका फायदा उठाते हुए सरकारें जिस तरह का आदेश निकालती हैं, उससे ऐसा लगता है कि वह व्यक्ति के निजी अधिकार के अंत की तरफ बढ़ रही हैं।

अभी दो दिन पहले ठीक ऐसा ही आदेश जारी किया गया है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी 20 दिसंबर, 2018 का आदेश यह कहता है कि इनफोर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2002 के सेक्शन 69 के उप-खंड (1) और इनफोर्मेशन टेक्नालॉजी रूल्स 2009 के नियम 4 की शक्तियों का उपयोग करते हुए निम्नलिखित सुरक्षा और खुफिया एजेंसी किसी भी कंप्यूटर में जमा या उसके ज़रिये भेजी गई सामग्री, पैदा की गई सूचना को इंटरसेप्ट कर सकती हैं, निगरानी कर सकती हैं, उनके डेटा को एनक्रिप्ट यानी उसे खोल सकती हैं। इसके लिए दस एजेंसियां अधिकृत की जाती हैं जिनके नाम हैं, इंटेलिजेंस ब्यूरो, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, सेंट्रल बोर्ड एंड डायरेक्ट टैक्सेस (सीबीडीटी), डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई), सीबीआई, नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए), कैबिनेट सचिव (रॉ), डायरेक्टोरेट ऑफ सिग्नल इंटेलिजेंस (डीएसआई) और कमिश्नर ऑफ पुलिस दिल्ली।

अब यह समझना जरूरी हो जाता है कि आखिरकार इनफोर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2002 के सेक्शन 69 के उप-खंड (1) और इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी रूल्स 2009 के नियम 4 क्या हैं? इनफोर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2002 के सेक्शन 69 का उप-खंड (1) कहता है कि केंद्र और राज्य द्वारा निर्धारित कोई भी अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा और अखंडता के मद्देनजर किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डाटा की जांच परख कर सकती हैं। और इनफोर्मेशन टेक्नोलॉजी रूल्स 2009 का नियम 4 कहता है कि इलेक्ट्रॉनिक डाटा की जांच परख का आदेश केंद्र में गृह सचिव और राज्य में राज्य गृह सचिव द्वारा हासिल किया जा सकेगा।

लेकिन अभी आये आदेश से स्थिति बदल चुकी है। पहले गृह मंत्रालय लोगों के फोन कॉल और ईमेल स्कैन कर सकता था। नये आये आदेश से पहली बार डेटा स्कैन करने, कंप्यूटर में जमा या इससे भेजी गयी सूचना को इंटरसेप्ट करने का अधिकार कई सारी एजेंसियों को दिया गया है। यानी  इंटेलिजेंस ब्यूरो, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, सेंट्रल बोर्ड एंड डायरेक्ट टैक्सेस, डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस, सीबीआई, नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी, कैबिनेट सचिव (रॉ), डायरेक्टोरेट ऑफ सिग्नल इंटेलिजेंस और कमिश्नर ऑफ पुलिस दिल्ली विभाग बिना गृह सचिव की अनुमति के ही किसी भी तरह की इलेक्ट्रोनिक सूचना का सर्विलांस कर सकते हैं। सर्विलांस करने के बाद गृह सचिव का काम केवल यह होगा कि वह यह तय करे कि सर्विलांस का मकसद सही था अथवा नहीं। कहने का मतलब यह है कि पहले केवल एक पद था जो सर्विलांस कर सकता था और उसकी जिम्मेदारियां थी। लेकिन अब यह परनाला खोल दिया गया है। अब देश में सरकार के सभी विभाग किसी भी व्यक्ति का सर्विलांस कर सकते हैं। यानी राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में सरकार ने सबको यह इजाज़त दे दी है कि वो व्यक्ति के निजी अधिकारों में हस्तक्षेप करते हुए सीधे तौर पर उसकी जासूसी कर सकें।

गौरतलब है कि 22  दिसंबर 2008 को लोकसभा में बगैर किसी चर्चा के ही इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट से जुड़ा एक संशोधन पास हो गया था। तब कांग्रेस की सरकार थी। लोकसभा ही नहीं जब राज्यसभा में बहस हुई तब एक भी सांसद ने इसके खिलाफ वोट नहीं किया। इसी संशोधन के तहत पहली बार कंप्यूटर में जमा या कंप्यूटर के द्वारा प्रसारित किसी सूचना को ट्रैक करने का अधिकार केंद सरकार को मिला था। यह गंभीर बात तो है लेकिन उस वक्त प्राइवेसी को लेकर वैसी समझ नहीं थी, जैसी आज है।

इसके साथ इस नये आदेश में एक बात यह भी कही गयी है कि सब्सक्राइबर, सर्विस प्रोवाइडर या कोई भी व्यक्ति जिसके अंडर वो कंप्यूटर है, उसे एजेंसियों को सारी जानकारी देनी होगी। नहीं देने पर सात साल तक की जेल हो सकती है. यानी सरकारी तंत्र को यह जरूरत नहीं है कि वह किसी व्यक्ति के कंप्यूटर को हाथ से छूकर उसके डाटा को हासिल करे। सरकारी तंत्र बिना व्यक्ति के जानकारी के रिलायंस,एयरटेल जैसे सर्विस प्रोवाइडर के जरिये किसी भी तरह का डाटा हासिल कर सकती है। अगर सर्विस प्रोवाइडर से जुड़ी कंपनियां डाटा देने में आनाकानी करती है तो उन्हें सज़ा भी दी जा सकती है।

कुल मिलाजुला कर बात यह है कि राज्य के पास राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता का ऐसा तीर है जिसके सहारे वह तकनीक का इस्तेमाल अपने नागरिकों के खिलाफ भी कर सकती है। इस सरकारी आदेश के शब्द अभी हाल में व्यक्ति के निजी अधिकार को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आत्मा का हनन करते हैं। इसलिए यह तय है कि इसका पुरज़ोर विरोध होगा और आने वाले दिनों में इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी जाया जा सकता है।

फिर भी तकनीक के जिस युग में हम पहुंच चुके हैं और हमारी जितनी ज्यादा निर्भरता इंटरनेट की दुनिया पर बढ़ती जा रही है, उसके अपने ख़तरे हैं। अगर सरकार या मजबूत संस्थाएं जनता को बताकर सर्विलांस नहीं करने का फैसला नहीं भी लें तो भी इसका मतलब यह नहीं है कि ये संस्थाएं चुपचाप आपके खिलाफ सर्विलांस नहीं करती होंगी, लेकिन खुले तौर पर सर्विलांस में पहुँच जाने का मतलब यह है कि सरकार हमारी माई-बाप हो जाएगी और राज्य के साथ मनुष्यता के विकास की दिशा पूरी तरह से नियंत्रित होने लगेगी।  

monitoring of computers
computer surveillance
Snoop On Any Computer
no privacy
Right to privacy
Narendra modi
home ministry
Ministry of Home Affairs order
rajnath singh

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

हिमाचल में हाती समूह को आदिवासी समूह घोषित करने की तैयारी, क्या हैं इसके नुक़सान? 


बाकी खबरें

  • सत्यम् तिवारी
    वाद-विवाद; विनोद कुमार शुक्ल : "मुझे अब तक मालूम नहीं हुआ था, कि मैं ठगा जा रहा हूँ"
    16 Mar 2022
    लेखक-प्रकाशक की अनबन, किताबों में प्रूफ़ की ग़लतियाँ, प्रकाशकों की मनमानी; ये बातें हिंदी साहित्य के लिए नई नहीं हैं। मगर पिछले 10 दिनों में जो घटनाएं सामने आई हैं
  • pramod samvant
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेकः प्रमोद सावंत के बयान की पड़ताल,क्या कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार कांग्रेस ने किये?
    16 Mar 2022
    भाजपा के नेता महत्वपूर्ण तथ्यों को इधर-उधर कर दे रहे हैं। इंटरनेट पर इस समय इस बारे में काफी ग़लत प्रचार मौजूद है। एक तथ्य को लेकर काफी विवाद है कि उस समय यानी 1990 केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी।…
  • election result
    नीलू व्यास
    विधानसभा चुनाव परिणाम: लोकतंत्र को गूंगा-बहरा बनाने की प्रक्रिया
    16 Mar 2022
    जब कोई मतदाता सरकार से प्राप्त होने लाभों के लिए खुद को ‘ऋणी’ महसूस करता है और बेरोजगारी, स्वास्थ्य कुप्रबंधन इत्यादि को लेकर जवाबदेही की मांग करने में विफल रहता है, तो इसे कहीं से भी लोकतंत्र के लिए…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    फ़ेसबुक पर 23 अज्ञात विज्ञापनदाताओं ने बीजेपी को प्रोत्साहित करने के लिए जमा किये 5 करोड़ रुपये
    16 Mar 2022
    किसी भी राजनीतिक पार्टी को प्रश्रय ना देने और उससे जुड़ी पोस्ट को खुद से प्रोत्सान न देने के अपने नियम का फ़ेसबुक ने धड़ल्ले से उल्लंघन किया है। फ़ेसबुक ने कुछ अज्ञात और अप्रत्यक्ष ढंग
  • Delimitation
    अनीस ज़रगर
    जम्मू-कश्मीर: परिसीमन आयोग ने प्रस्तावों को तैयार किया, 21 मार्च तक ऐतराज़ दर्ज करने का समय
    16 Mar 2022
    आयोग लोगों के साथ बैठकें करने के लिए ​28​​ और ​29​​ मार्च को केंद्र शासित प्रदेश का दौरा करेगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License