NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कोबरापोस्ट जाँच : पत्रकारिता की पवित्रता गहरे खतरे में
पेड न्यूज में शामिल होने की आदत से मीडिया प्रबंधन ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को बर्बाद कर दिया है और इसके परिणामस्वरूप अमीर पूंजीपतियों द्वारा उनके अपने एजेंडे के प्रचार करने के लिए पत्रकारिता को एक सेवा के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
रौनक छाबड़ा
28 May 2018
Translated by महेश कुमार
Cobrapost

कोबरापोस्ट, एक खोजी समाचार वेबसाइट ने पहली बार लगभग दो महीने पहले रिपोर्ट किया था कि कैसे कुछ भारतीय मीडिया समूह हिंदुत्व एजेंडा को बढ़ावा देने और 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए मतदाताओं के ध्रुवीकरण को बढाने के लिए अपनी पत्रकारिता की नैतिकता को बेचने के लिए तैयार हैं।

इसी खुलासे का दूसरा भाग कल जारी किया गया – इसका कोड नाम ऑपरेशन 136 दिया गया था – इस खोज में यह पाया गे कि कुल 25 मीडिया समूह कथित तौर पर एक अभियान शुरू करने के लिए सहमत हुए हैं, जो  "नागरिकों के बीच सांप्रदायिक सद्भाव को बर्बाद करने की क्षमता रखता" है

जांच ने भारतीय मीडिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है और मीडिया और राजनेताओं के बीच भ्रामक संबंधों की एक झलक प्रदान की है।

पैसे के पीछे भागने वाला मुख्यधारा का मीडिया

द टाइम्स समूह के मालिक और प्रबंध निदेशक, विनीत जैन निस्संदेह इस खोज में लिप्त पाए गए सबसे बड़े नामों में से एक थे। हिंदुत्व के एजेंडा को बढ़ावा देने और विज्ञापनविदों और घटनाओं के माध्यम से राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को बदनाम करने के बदले में जैन और समूह के कार्यकारी अध्यक्ष संजीव शाह इस काम के लिए  500 करोड़ रुपये की राशि स्वीकार करने पर सहमत हुए।

देश के सबसे बड़े और सबसे विश्वसनीय मीडिया समूह में से एक होने के नाते, द टाइम्स समूह भारत भर में 14 समाचार पत्रों, आठ समाचार मीडिया स्टेशनों, चार रेडियो स्टेशनों के प्रसारण और प्रशासन की देखभाल करता है। मीडिया उद्योग में समूह के असर को इंगित करते हुए, टाइम्स ऑफ इंडिया, ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशंस के अनुसार, दुनिया में सबसे ज्यादा बिकने वाली अंग्रेजी समाचार है।

इस वार्ता के समबन्ध में सार्वजनिक डोमेन में जारी किये गए वीडियोटेप में जैन और शाह को दिखाया है, जो समूह के शीर्ष प्रबंधन का प्रतिनिधित्व करते हैं जो "लेन-देन के रिश्ते" से सहमत दिखते हैं।

"टाइम्स के यूएसपी" के बारे में घमंड से बताते हुए कि, यह हर रोज 65 मिलियन से 70 मिलियन (7 करोड़) लोगों तक पहुंचता है, शाह हिंदुत्व एजेंडा को प्रचारित करने के अंतिम लक्ष्य से सहमत नज़र आते हैं, और इसे राजनीतिक लाभ देते हैं।

एक ओर बात, दोनों "तटस्थ दिखने" की आवश्यकता पर बल देते हैं और दूसरी ओर, टाइम्स ग्रुप द्वारा आयोजित फेमिना मिस इंडिया पेजेंट में हिंदुत्व एजेंडा लाने के विचार को सक्रिय रूप से मानते हैं।

बड़े मीडिया समूहों के प्रबंधन ने समाचार के सार को केवल एक वस्तु में तब्दील कर दिया है, जिसका उपयोग पैसे के बदले अपने विशाल दर्शकों के आस-पास सांप्रदायिक विचारधारा से भरा बुलबुला बनाने में किया जारहा  है।

जांच के द्वारा जिसका खुलासा किया गया उसमें एक अन्य मीडिया हाउस इंडिया टुडे भी था। शुरुआती दिनों में एक पत्रिका के जरिए लोकप्रियता प्राप्त करने के बाद समूह प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक दोनों में विविधता लाने के लिए काम को आगे बढ़ाता हैं। समूह का टीवी टुडे नेटवर्क आज तक, इंडिया टुडे टेलीविजन, तेज़ और दिल्ली आज तक जैसे चेनलों को संचालित करता है।

एजेंडा के साथ अपने व्यक्तिगत संबंध को स्वीकार करते हुए, मुख्य राजस्व अधिकारी राहुल कुमार शॉ अपने समूह को पेश करने वाले हर प्लेटफॉर्म पर अभियान चलाने के लिए सहमत हैं - टीवी और प्रिंट दोनों में, लेकिन इंडिया टुडे ग्रुप के वाइस चेयरमैन कल्ली पुरी की मंजूरी लेने की आवश्यकता का उल्लेख करते हैं।

वायर ने कोबरापोस्ट को दी गयी इंडिया टुडे की प्रतिक्रिया के बारे में बताया: "आपके अंडरवर्कर संवाददाता द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन, उन्होंने एक विज्ञापन अभियान के लिए हमारे समूह के विभिन्न बिक्री कर्मचारियों के साथ बातचीत की थी । वह हमारी संपादकीय टीम से किसी से कोई भी नहीं मिला। "

नेटवर्क 18, एबीपी न्यूज, रेड एफएम, स्टार इंडिया 25 मीडिया हाउसों में से कुछ हैं जो समाचार प्रसार की दुनिया को विकृत करने पर सहमत हुए। अधिकांश मुख्यधारा का मीडिया जो सार्वजनिक स्मृति में अपने प्रकाशन/छापों को जीने का विशेषाधिकार प्राप्त करता है, इन समूहों ने खुद को एक कॉर्पोरेट इकाई के रूप में चुना है जो सिर्फ पैसे के पीछे भागते है।

पत्रकारिता को एक सेवा मात्र में परिवर्तित किया जा रहा है

अंडरकवर रिपोर्टर और विभिन्न मीडिया घरों के वरिष्ठ प्रबंधन का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्तियों के बीच बातचीत के दौरान, यह ध्यान रखना दिलचस्प है कि कैसे ये पेशेवर हिंदुत्व विचारधारा का समर्थन करने को तैयार होते हैं और उससे संबंधित होने का दंभ भी भरते हैं और इसके परिणामस्वरूप, पत्रकारिता की नैतिकता का व्यापार करने में इन्हें शर्म भी नहीं आती हैं।

यह जांच राजनीति और मीडिया के विघटन को प्रकट करती है, जो वरिष्ठ प्रबंधन का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्तियों की व्यक्तिगत विचारधाराओं से प्रेरित होती है।

विश्व स्वतंत्रता सूचकांक के मामले में भारत का रैंक 136 से रैंक 138 तक गिर गया है, लेकिन इन मीडिया प्लेटफार्मों के प्रबंधन की भूमिका पर चर्चा करने के लिए कोबरापोस्ट जांच के बाद यह महत्वपूर्ण हो गया है, जो पत्रकारिता की पवित्रता को कम करता है। पेड न्यूज में शामिल होने के अपने अभ्यासों के साथ प्रबंधन ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को ध्वस्त कर दिया है और इसके परिणामस्वरूप अमीर पूंजीपतियों द्वारा  अपने एजेंडे को प्रचारित करने के लिए पत्रकारिता को सेवा के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

Cobrapost Investigation
journalism
Hindutva Agenda

Related Stories

डिजीपब पत्रकार और फ़ैक्ट चेकर ज़ुबैर के साथ आया, यूपी पुलिस की FIR की निंदा

लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी का हंगामा: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत चंदन का घेराव, धमकी

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

तिरछी नज़र: मुझे गर्व करने से अधिक नफ़रत करना आता है

पत्रकारिता की पढ़ाई के नाम पर महाविद्यालय की अवैध वसूली

‘हेट स्पीच’ के मामले 6 गुना बढ़े, कब कसेगा क़ानून का शिकंजा?

बढ़ती हिंसा व घृणा के ख़िलाफ़ क्यों गायब है विपक्ष की आवाज़?

हिंदुत्व एजेंडे से उत्पन्न चुनौती का मुकाबला करने को तैयार है वाम: येचुरी

गणेश शंकर विद्यार्थी : वह क़लम अब खो गया है… छिन गया, गिरवी पड़ा है

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव परिणाम: हिंदुत्व की लहर या विपक्ष का ढीलापन?


बाकी खबरें

  • एनबीए को आईटी नियमों से राहत, वेदांता ज़िंक प्लांट और अन्य ख़बरें
    न्यूज़क्लिक टीम
    एनबीए को आईटी नियमों से राहत, वेदांता ज़िंक प्लांट और अन्य ख़बरें
    09 Jul 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी केरल हाई कोर्ट ने नए आईटी नियमों से एनबीए को दी राहत, वेदांता ज़िंक प्लांट और अन्य ख़बरों पर।
  • उत्तर प्रदेश: ब्लॉक प्रमुख चुनाव के नामांकन के दौरान 14 जिलों में हिंसक घटनाएं, पुलिस और प्रशासन बने रहे मूक दर्शक
    असद रिज़वी
    उत्तर प्रदेश: ब्लॉक प्रमुख चुनाव के नामांकन के दौरान 14 जिलों में हिंसक घटनाएं, पुलिस और प्रशासन बने रहे मूक दर्शक
    09 Jul 2021
    उत्तर प्रदेश के कई जिलों से प्रस्तावकों के अपहरण और प्रत्याशियों के बीच गोलियां चलने की खबर है। पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताया।
  • वन भूमि पर दावों की समीक्षा पर मोदी सरकार के रवैये से लाखों लोगों के विस्थापित होने का ख़तरा
    अयस्कांत दास
    वन भूमि पर दावों की समीक्षा पर मोदी सरकार के रवैये से लाखों लोगों के विस्थापित होने का ख़तरा
    09 Jul 2021
    विशिष्ट मार्गदर्शिका का अभाव और केंद्रीय निगरानी की मशीनरी न होने के कारण राज्य दर राज्य वन भूमि पर अधिकारों के दावों के मामले अलग-अलग हैं।
  • डाटा संरक्षण विधेयक जब तक कानून का रूप नहीं लेता, नई निजता नीति लागू नहीं करेंगे: वॉट्सऐप
    भाषा
    डाटा संरक्षण विधेयक जब तक कानून का रूप नहीं लेता, नई निजता नीति लागू नहीं करेंगे: वॉट्सऐप
    09 Jul 2021
    वॉट्सऐप ने मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ के समक्ष यह भी साफ किया कि इस बीच वह नई निजता नीति को नहीं अपनाने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए उपयोग के दायरे को सीमित नहीं करेगा।
  • झुग्गियों को उजाड़ने के ख़िलाफ़ एवं उनके पुनर्वास की मांग को लेकर माकपा का नोएडा प्राधिकरण पर प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    झुग्गियों को उजाड़ने के ख़िलाफ़ एवं उनके पुनर्वास की मांग को लेकर माकपा का नोएडा प्राधिकरण पर प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन
    09 Jul 2021
    सीपीआईएम ने मांग की है कि जब तक प्राधिकरण या सरकार द्वारा कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कराई जाती है तब तक इन झुग्गी बस्ती में रह रहे गरीब लोगों को वहीं पर रहने दिया जाए। और यदि किसी कारणवश उन्हें जनहित…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License